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निदा के कारनामे complete

09 दादाजान

दादाजान को शिकार का बहुत शौक था और वो मुख़्तलिख मुल्कों में शिकार खेलने जाते थे। फिछले दिनों वो अफ्रिका से शिकार खेलकर वापिस आये थे और कुछ दिन वो आराम करना चाहते थे। इसलिए वो हमारे पास आ गये थे। रहने को तो वो होटेल में भी रह सकते थे पर वो हमारे घर आ गये।

दादाजान के पास रुपये पैसे की कोई कमी नहीं है इसलिए वो दुनियां भर की सैर करते फिरते हैं, दादी जान का इंतकाल हुये 15 साल हो चुके थे, इसलिए ये भी वजह थी दादाजान के घूमने फिरने की। अब्बू की दादाजान से नहीं बनती थी इसलिए मैंने 12 साल बाद दादाजान को देखा था।

खैर अब्बू और दादाजान के बीच क्या बात थी इसकी मुझे कोई परवाह नहीं है। अबकी बार अब्बू दादाजान को देखकर बहुत खुश हुये थे, आखिर कोई अपने बाप से कब तक नाराज रह सकता है। अभी कल ही दादाजान हमारे घर आय थे। मगर अगले दो हफ्ते बाद ही उनको फिर अपने दोस्तों के साथ शिकार पर जाना था।

उनको अभी अपने कुछ दोस्तों का इंतेजार था इसलिए जब तक उनके दोस्त ना आ जाते वो हमारे घर आ गये। दादाजान की उमर कोई 65 या 70 साल होगी पर उनकी सेहत आजकल के नौजवानों से भी अच्छी थी और दिखने में वो अब्बू से भी छोटे लग रहे थे।

अब उनकी सेहत का क्या राज था ये तो बाद में ही पता चलना था, पर सबसे एहम बात वो ये थी के दादाजान को देखते ही मेरी चुदाई की भूख चमक उठी थी। पहले तो मैंने अपने दिल में उठने वाली ख्वाहिश को दबाया की वो मेरे दादा हैं पर फिर मैंने सोचा की जब मुझे सबलोग चोद सकते हैं तो दादाजान क्यों नहीं... बस ये सोचकर मैं दादाजान से चुदवाने की प्लानिंग करने लगी। दूसरे दिन जब अब्बू आफिस चले गये तो मैं किसी काम से दादाजान के कमरे में गई तो वो कमरे में नहीं थे जबकी वाशरूम से पानी गिरने की आवाज आ रही थी। नजाने मेरे दिल में क्या आई की मैंने सोचा क्यों ना दादाजान को नहाते हुये देबूं। मैं दबे कदमों वाशरूम के दरवाजे पर आई और दरवाजे के की-होल से आँख लगा दी।

अंदर झाँका तो मेरी सांस ही रुक गई। मैंने देखा के दादाजान की रानो में उनका लण्ड पूरा अकड़ा हुवा था। उनका लण्ड कोई 12” इंच लंबा और 4 इंच मोटा होगा। दादाजान बड़े प्यार से अपने लंबे तगड़े लण्ड को धीरेधीरे सहलाकर मूठ मार रहे थे और उनका लण्ड किसी पाइप की तरह सीधा खड़ा हुवा था जैसे वो लोहे का बना हुवा हो। अभी तक मैंने 10” इंच या 11" इंच लंबे लण्ड वाले आदमियों से ही चुदवाया था। मगर दादाजान का इतना शानदार लण्ड देखकर मेरे बदन में चींटियां सी रेंगने लगी। और मैं दादाजान के लण्ड को अपनी चूत और गाण्ड में लेने के लिए और बेताब हो गई।
 
दिल तो चाह रहा था की मैं अभी दरवाजा खोलकर अंदर घुस जाऊँ और दादाजान के नीचे अपनी चूत खोलकर लेट जाऊँ। मगर ये डर हुवा की कहीं दादाजान का खून जोश ना मारे और मैं किसी से भी चुदवाने के लिए तरस जाऊँ। दादाजान बहुत गुस्से वाले थे और उनके गुस्से की वजह से मुझे दादाजान से बहुत डर लगता था क्योंकी एक बार बचपन में दादाजान ने मुझे बहुत बुरी तरह से मारा था वो इसलिए के मैंने दुपट्टा नहीं पहना था। दादाजान का ये ही डर था की वो कही मुझे बेशर्म ना समझे इसलिए मैंने अपने दिल पर सबर किया और उनके कमरे से निकलकर अपने कमरे में आ गई और लंबी-लंबी साँसे लेने लगी। अब मैं सोच रही थी की ऐसा क्या । किया जाय की दादाजान खुद ही मुझे चोद दें।

फिर सोचते-सोचते मेरे हरामी जेहन में एक आइडिया आ ही गया और मैंने उसपर अमल करने का फैसला कर लिया। मैंने सोचा की पहले दादाजान के अंदर इतनी आग लगा दें की वो खुद ही मुझे चोदने को तरसे। सबसे । पहले मैंने कुछ सेक्सी कहानियां और सेक्सी मैगजीन अखबार के नीचे रख दिए, उसके बाद मैंने सीडी प्लेयर में एक सेक्सी फिल्म डाल दी की जब भी दादा टीवी खोलें तो फिल्म शुरू हो जाय।

उसके अलावा मैंने थोड़े खुले गले की कमीज पहन ली जिसमें से मेरे बड़े-बड़े मम्मे छलकने के लिए बेताब हो रहे थे। फिर मैंने दादाजान पर नजर रखनी शुरू कर दी। दादाजान नहाने के बाद जब अखबार पढ़ने के लिए बैठे तो नीचे सेक्सी मगजीन और सेक्सी कहानियां देखकर चौंक गये। पहले उन्होंने मैगजीन देखा तो उनकी धोती में। उनका लण्ड खड़ा होने लगा। मैगजीन देखकर उन्होंने एक सेक्सी कहानी उठाई और उसे अखबार में रखकर पढ़ने लगे। मैंने जानबूझ कर ऐसी कहानियां रखी थी जिसमें सगे रिश्तों के बीच चुदाई के किस्से थे। कहानी पढ़ते पढ़ते दादाजान का चेहरा पूरा लाल हो गया और उनका लण्ड पूरा अकड़ गया। उन्होंने धोती अपने लण्ड पर से हटा दी और बुरी तरह से अपने लण्ड को मसलते हुये कहानी को पढ़ने लगे।

मैं छुप कर दादाजान को देख रही थी और अपनी कामयाबी पर खुश हो रही थी।

कहानियां पढ़ने के बाद वो अपने कमरे में चले गये। दोपहर को जब मैंने दादाजान को झुक कर खाना दिया तो वो मेरी कमीज के गले से उबलने वाले मम्मों को देखने लगे। मैं ऐसी बन गई जैसे मुझे कुछ पता ही ना हो। खाना खाने के बाद मैंने कहा- “दादाजान मुझे दोपहर में सोने की आदत है मैं सोने जा रही हूँ...”

ये कहकर मैं अपने कमरे में आ गई। आधे घंटे बाद मैं टीवी रूम में चुपके से गई तो दादाजान सेक्सी फिल्म देख रहे थे, उनका लण्ड पूरा अकड़ा हुवा था और वो बुरी तरह से बेचैन हो रहे थे। अब मैंने दादाजान पर आखिरी हमला करना था, जिसके बाद दादाजान मुझे चोदने के लिए बेताब हो जाते। मैं अपने मंसूबे के मुताबिक शाम को नहाने जाने लगी तो दादाजान को बता दिया की मैं नहाने जा रही हूँ, कोई फोन आये तो अटेंड कर लीजिएगा।

मैंने अपने कमरे में आकर अपने तमाम कपड़े उतारकर कमरे में छोड़े और वाशरूम में नहाने के लिए घुस गई

और दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दिया। मुझे पूरा यकीन था कू दादाजान मुझे नहाते हुये जरूर देखेंगे। इसीलिये मैंने झॉक करके कमरे में देखना शुरू कर दिया। थोड़ी देर के बाद धीरे से दरवाजा खुला और दादाजान दबे कदमों मेरे कमरे में आ गये। मैं मुश्कुराई और नहाने लगी। थोड़ी देर बाद मुझे वाशरूम के दरवाजे पर आहत महसूस हुई मगर मैं अपने आप में मगन नहाती रही। नहाने के दौरान ही मैंने वाशरूम का दरवाजा खोल दिया।

 
दादाजान जो अपना मस्त अकड़ा हुवा लण्ड सहलाते हुये मुझे नहाते हुये देख रहे थे एकदम से घबरा गये।

मैंने डर के मारे चीख मारी और बोली- “दादाजान आप यहां क्या कर रहे हैं?”

मेरी बात सुनकर दादाजान और घबरा गये और उनसे कोई जवाब नहीं बन पड़ा।

मैं फिर बोली- “दादाजान मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी..."

इतनी देर में दादाजान संभाल चुके थे और फिर वो अपनी कमीज उतारकर बाथरूम में आ गये और उन्होंने मुझे पकड़कर दीवार से लगा दिया और मुझे किस करते हुये बोले- “साली रंडी की बच्ची... नाटक करती है, तू पूरा दिन मुझे गरम करती रही, खुला गला पहनकर मुझे अपने मम्मे दिखाती रही और अखबार के नीचे सेक्सी मैगजीन और सीडी प्लेयर में तूने सेक्सी फिल्म क्यों लगाई थी हरामजादी?” ये कहकर दादाजान ने मेरे बड़े-बड़े खूबसूरत मम्मों को पकड़कर दबा दिया।

तो मेरी सिसकारी निकल गई और मैं बोली- “मुझे नहीं पता दादाजान... हो सकता है वो सब अब्बू का हो...”

दादाजान मेरी बात पर गुस्से से बोले- “अपने शरीफ बाप को बदनाम कर रही है साली छिनाल ये सब तू ही कर सकती है तेरा बाप नहीं...” फिर उन्होंने मेरे मम्मोम को कसकर दबाया तो मेरी सिसकारी निकल गई। तो वो बोले- “और ये तेरे बड़े-बड़े मम्मे क्या किसी मर्द का हाथ लगे बगैर ही इतने बड़े हो गये हैं?”

मैंने फिर नाटक किया- “दादाजान आप मुझे गलत समझ रहे हैं, मैं कोई ऐसी वैसी लड़की नहीं हूँ...”

दादाजान फिर गुस्से से बोले- “साली हरामजादी मुझे पता है रंडी की बेटी भी रंडी होती है...”

दादाजान की बात पर मैं चौंकी और बोली- “क्या मतलब दादाजान?”

अब दादाजान ने मुझे छोड़ दिया और बोले- “क्योंकी तेरी माँ भी बहुत बड़ी रंडी थी, इसलिए ये कैसे हो सकता है। की तु रंडी ना हो। अपनी माँ की फितरत तेरे अंदर भी होगी..."

दादाजान मजीद बोले- "तेरी माँ चदाई की बहत भूखी थी और उसने अपनी शादी के दूसरे दिन से ही मुझपर डोरे डालने शुरू कर दिए थे। कुछ मैं भी तेरी माँ पर फिदा था क्योंकी वो बहुत खूबसूरत थी। इसलिए शादी के तीसरे दिन ही वो मेरे बिस्तर पर आ गई थी। तेरी माँ को तेरे बाप से ज्यादा मैंने चोदा है क्योंकी उसे तेरा बाप पूरा नहीं पड़ता था। इसलिए उसके मेरे अलावा भी बहुत से यार थे और फिर मैं तेरी माँ का राजदार बन गया था। और फिर मेरी नजरों में ही तेरी माँ के यार तेरी माँ को चोदकर जाते थे। उसके अलावा तेरी माँ ने तेरे ताया से भी खूब चुदवाया था उसपर तेरी माँ ने घर के नौकरों को भी खूब ऐश करवाये थे। तेरा बाप शरीफ आदमी है इसलिए उसने अपनी बीवी पर कभी शक नहीं किया और उसे प्यार करता रहा और फिर तू पैदा हुई और पता नहीं की तू किसकी औलाद है, तेरे बाप की, मेरी, तेरे ताया की, घर के नौकरों में से किसी की या फिर उसके यारों में से किसी की...”

 
दादाजान से अपनी माँ की चुदाइयों की डीटेल सुनकर मैं चुप हो गई।

जबकी दादाजान बोले- “बोल अब क्यों खामोश हो गई है हरामजादी.."

मैं कुछ देर दादाजान को देखती रही फिर मैं खुद उनसे लिपट गई और मैंने अपने होंठ दादाजान के होंठों से मिला दिए और उन्हें बेतहाशा किस करने लगी। दादाजान ने भी मुझे लिपटा लिया और वो भी मुझे किस करने लगे। दादाजान का लोहे जैसा लण्ड मुझे अपनी चूत में घुसता हुवा महसूस हो रहा था। और फिर मैं बोल पड़ी- “दादाजान आपका लण्ड तो लोहे की तरह हाई है क्या खाते हैं आप... ये तो मेरी चूत में घुसा चला जा रहा है...”

मेरी बात पर दादाजान हँसे और बोले- “मेरी जान मैं काफी अरसा अफ्रिका में रहा हूँ। वहां मेरा एक दोस्त है। उसने मुझे कोई दवा बनाकर दी थी जो मैंने कई सालों तक इश्तेमाल करी थी और ये उस दवा का ही असर है। की मेरा लण्ड लोहे की तरह हाई और घोड़े के लण्ड की तरह बड़ा हो गया है.”

दादाजान की बात पर मैंने बड़े प्यार से उन्हें चूमा और बोली- “तो फिर चोद डालिए अपनी इस रंडी पोती को, मैं अपने दादा का लण्ड लेने के लिए बेकरार हूँ..”

दादाजान हँसे और बोले- “डार्लिंग तुम्हें बहुत दर्द होगा और तुम मेरा लण्ड बर्दाश्त नहीं कर पाओगी...”

मैं एक सिसकारी लेकर बोली- “उफफ्फ़... दादाजान ये तो बहुत अच्छी बात है, मुझे तो दर्द देने वाली चुदाइयां बहुत पसंद हैं, अब जल्दी से मुझे चोद डालिए। मैं भी तो देखें मेरे चोदू दादा मेरा क्या हाल करते हैं...”

मेरी बात पर दादाजान ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और मुझे बेडरूम में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया। मैं तो पहले से ही नंगी थी इसलिए उन्हें मुझे नंगा करने की जरूरत नहीं थी। दादाजान अपनी कमीज पहले ही उतार चुके थे इसलिए उन्होंने अपनी धोती भी उतारकर फेंक दी और वो बेड पर आकर मेरे ऊपर लेट गये। दादाजान ने अपने जलते हुये होंठ मेरे प्यासे होंठों पर रखकर मेरा एक तवील बोसा लिया। फिर वो मुझे बेतहाशा चूमने लगे। मैं दादाजान के वजन से दबी जा रही थी और दादाजान पागलों की तरह मुझे चूम रहे थे। शायद वो बहुत प्यासे थे इसलिए उनमें एक वहशीपन था। काफी देर मेरे होंठों को चूमने के बाद दादाजान ने मेरे दोनों मम्मों को चूसना शुरू कर दिया। दादाजान मेरे मम्मों को चूसते हुये जब भी मेरे निपल पर काटते तो मैं लज़्ज़त से तड़प-तड़प जाती।

 
दादाजान ने मेरे मम्मों को इतना चूसा की वो उनके थूक से खराब हो गये। मेरे मम्मों को चूसने के बाद दादाजान ने मेरी चिकनी चिकनी सेक्सी चूत पर हमला कर दिया और बड़ी बेदर्दी से मेरी चूत को चूमने और काटने लगे। दादाजान ने मेरी चूत में आग लगा दी थी।

और मैं बुरी तरह से मचलने और सिसकने लगी- “आह्ह्ह... उफफ्फ़... दादाजान बस करें उफफ्फ़... मैं मार जाऊँगी प्लीज मेरे हाल पर रहम करें आह्ह्ह... अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा है प्लीज़ अब मुझे और ना तड़पायें अह्ह... अब अपना मस्त मोटा लण्ड मेरी चूत में डाल दें आहहह... उफफ्फ़... फाड़ डालें मेरी चूत को... उफफ्फ़... प्लीज जल्दी डालें वरना मैं मर जाऊँगी आह्ह्ह..."

दादाजान मुश्कुराते हुये मुझ पर से उतरे और बोले- “तुम पहले मेरा लण्ड चूसकर तैयार तो करो..”

मैं सिसकी और कहने लगी- “नहीं दादा जान.. अहह... अभी आप मुझे ऐसे ही चोदें, मैं आपका लण्ड बाद में चूसूंगी, अभी आप जल्दी से मुझे चोदें, मैं बहुत दिनों से प्यासी हूँ, मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, प्लीज आप मेरे हाल पर रहम करें और चोद डालिए मुझे...”

दादाजान मुश्कुराये और बोले- “अगर ऐसी बात है तो ये लो...” दादाजान ने घुटनों के बल बैठकर मेरी टांगें उठाकर अपने कंधों पर रखी और अपने लण्ड की टोपी को मेरी चूत के सुराख पर रखकर बोले- “निदा मेरा लण्ड बहुत सख़्त और मोटा है तुम्हें बहुत दर्द होगा...”

मैं सिसकारी लेकर बोली- “आह्ह्ह... दादाजान आप मेरी फिकर ना करें, मैं हर दर्द बर्दाश्त करने को तैयार हूँ, अब आप मेरी परवाह ना करें और अपनी पूरी ताकत लगाकर एक ही झटके में अपना मस्त लंबा मोटा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में डाल दें... फाड़ दें मेरी चूत को, जल्दी करें..”

मेरी बात सुनकर दादाजान हँसे और बोले- “तो फिर संभालो मेरी जान...” ये कहकर दादाजान ने एक शदीद झटका मारा।

और उनका मस्त मोटा लण्ड मेरी छोटी सी चूत को बुरी से फाड़ता हुवा जड़ तक अंदर घुस गया। दादाजान का ये झटका इतना जोरदार था की मैं बुरी तरह से तड़प गई और मेरे हलाक से एक तेज भयानक चीख निकली“आह्ह... मैं मर गईई...”

दादाजान हँसे और बोले- “क्यों एक ही झटके में सारे कस बल निकल गये..” ये कहकर उन्होंने एक और झटका पहले से ज्यादा जोरदार मारा।

मेरे हलक से फिर चीख निकली और मेरी नन्ही सी चूत दादाजान का इतना जोरदार झटका बर्दाश्त नहीं कर सकी और मैं झड़ गई।

मेरे झरने पर दादाजान हँसने लगे और बोले- “अरे निदा तुम्हारे अंदर बस इतना ही दम था की तुम मेरा दूसरा ही झटका बर्दाश्त नहीं कर पाई...”

दादाजान की बात सुनकर मैं शर्म से पानी-पानी हो गई। मैं अपनी शर्मिंदगी मिटाने के लिए बोली- “वो दादाजान आपका लण्ड बहुत मोटा लंबा और बहुत ज्यादा सख़्त है, मेरी चूत बिल्कुल नाजुक सी है, ये आपका इतना शानदार लण्ड बर्दाश्त नहीं कर पाई है और वैसे भी आपने झटका ही इतना जोरदार मारा है की यहां मेरी जगह कोई भी प्रोफेशनल रंडी होती तो वो भी झड़ जाती...”

 
दादाजान हँसे और बोले- “साली छिनाल तू किसी रंडी से कम थोड़ी है, जितना तू ने इतनी सी उमर में चुदवा लिया है इतना तो कोई प्रोफेशनल रंडी भी नहीं चुदवा पाती..” ये कहकर दादाजान ने फिर एक बहुत जोरदार झटका मारा तो मेरी एकदम से तेज चीख निकल गई।

मैं सिसक कर बोली- “तो दादाजान, आपको तो मुझ पर फरव्र करना चाहिए की मैंने अभी से इतना चुदवा लिया

दादाजान ने फिर से एक झटका मारा और बोले- “अरे रांड़.. मैं फरव्र किस बात पर करूं, तू तो मेरे झटकों पर किसी कुतिया की तरह चीख रही है। रंडियां तो इस तरह नहीं चीखती, साली मादरचोद सिर्फ़ किसी का लण्ड चूत में लेना ही चुदवाना नहीं होता, मर्द के झटके बर्दाश्त करना ही असली चुदवाना होता है। तू मेरे झटके बर्दाश्त करे तो मैं तुझपर फख्र करूं...” ये कहकर दादाजान ने एक और जोरदार झटका मारा तो मैं ना चाहते हुये भी दादाजान का झटका बर्दाश्त ना कर पाकर बुरी तरह चीख पड़ी।

मैं दर्द के मारे बमुश्किल बोली- “उफफ्फ़... दादाजान किसी रंडी को आप जैसा मर्द नहीं मिला होगा, वरना वो भी मुझसे ज्यादा चीखती आपसे चुदवाते समय। अब आप दुबारा से झटके मारें अब मैं नहीं चीखूँगी

मेरी बात पर दादाजान ने अपना लण्ड मेरी चूत से टोपी तक बाहर निकाला और एक शदीद झटका मारा।। दादाजान का लण्ड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह से चीरता हुवा मेरी चूत के आखिरी सिरे से टकराया। मेरी चूत बुरी तरह से झनझना गई और मेरी चूत में शदीद दर्द उठा जो मैंने बड़ी मुश्किल से बर्दाश्त किया। मेरे मुँह से चीख ना निकलने पर दादाजान मुश्कुराये और उन्होंने एक और झटका पहले से ज्यादा जोरदार मारा,

मैंने वो झटका भी बड़ी मुश्किल से बर्दाश्त किया। फिर दादाजान झटके मारने की मशीन बन गये। दादाजान तूफानी झटके मार रहे थे। दादाजान पहले जो झटका मारते, दूसरा झटका उससे ज्यादा जोरदार मारते। मेरी नन्ही सी चूत में शदीद दर्द हो रहा था और दर्द को बर्दाश्त करते हुये मेरा चेहरा बुरी तरह से लाल हो गया था।

दादाजान ने मेरा चेहरा देखा तो बोले- “निदा क्या बहुत दर्द हो रहा है...”

मैंने हाँ में सर हिलाया।

दादाजान बोले- “तुम कहो तो मैं अपने झटके धीरे कर देता हूँ..”

 
मैं कहने लगी- “नहीं दादाजान आप अपने झटकों को धीरे या कम ना करें। आपका जिस तरह दिल चाहें मुझे चोदें, औरत का तो काम ही चुदवाना है और जो औरत किसी मर्द को खुश ना कर सके तो उस औरत के लिए ये डूब मरने का मकाम है। मैं भी अपना काम पूरा करना चाहती हूँ, मैं आपको पूरा मजा देना चाहती हूँ, मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से आप चुदाई का पूरा मजा ना ले सकें। आप मेरे दर्द की परवाह ना करें और जिस तरह आपका दिल चाह रहा है मुझे चोदें। अगर मैं आज आपको खुश ना कर पाई तो मैं सारी ज़िंदगी अपने आपसे शर्मिंदा राहूंगी की मैं अपने दादाजान को चुदाई का पूरा मजा ना दे सकी...”

मेरी बात सुनकर दादाजान बहुत मुतासीर हुये और कहने लगे- “जीती रहो बेटी, जीती रहो तुम्हारे खयालात बहुत अच्छे हैं और अब मुझे तुम पर बहुत फख्र है की मेरी पोती इतने अच्छे खयालात रखती है...”

दादाजान की शाबाशी पाकर मैं खुश हो गई और बोली- “दादाजान, ये ही वजह है की मैंने आज तक किसी को चोदने से मना नहीं किया, बलकी मैं तो खुद मर्दो को मोका देती हूँ की वो मुझे चोदकर थोड़ी तासकीन हासिल कर सके। और आजकल के जमाने में लोगों के साथ इतनी परेशानियां हैं, मैं लोगों की परेशानियां खतम तो नहीं कर सकती मगर उनसे खुद को चुदवाकर उनको परेशानियों से कुछ समय के लिए दूर ले जाती हूँ..” दादाजान मेरी बातें सुनकर मुझे से बहुत मुटासीर हो गये थे।

वो बोले- “निदा आज मुझे तुम पर बहुत फख्र है की तुम मेरी पोती हो। मैं कभी समझ ही नहीं सकता था की इस तरह भी कोई किसी के काम आ सकता है। तुम लोगों से चुदवाकर बहुत अच्छा काम रही हो। मैं तो ये ही चाहूंगा की तुम इसी तरह लोगों के काम आओ और लोगों से खूब-खूब चुदवाओ...”

मैं हँसी और बोली- “दादाजान आपने बातों में मुझे चोदना बंद कर दिया है। प्लीज मुझे खूब कस-कसकर चोदें ताकी मैं अपना फर्ज़ अच्छी तरह से पूरा करूं...”

दादाजान मेरी बात पर हँसे और बोले- “और वो जो तुम्हें दर्द होगा.”

मैं हँसी और बोली- “दादाजान अब आपसे चुदवाने में मेरी जान भी चली गई तो मुझे कोई दुख ना होगा। प्लीज आप मुझे और जोर से चोदें...”

दादाजान मुश्कुराये और खूब जोर-ओ-शोर से मेरी चुदाई करने लगे। दादाजान खूब कस कसकर झटके मार रहे। थे। पहले तो मैं खूब चीखने लगी।

दादाजान हँसे और बोले- “रंडी की बच्ची... जितना तू चीखेगी उतनी ही जोर से झटके मारकर तुझे चोदूंगा...”

 
Thanks to all

 
दादाजान मुश्कुराये और खूब जोर-ओ-शोर से मेरी चुदाई करने लगे। दादाजान खूब कस कसकर झटके मार रहे। थे। पहले तो मैं खूब चीखने लगी।

दादाजान हँसे और बोले- “रंडी की बच्ची... जितना तू चीखेगी उतनी ही जोर से झटके मारकर तुझे चोदूंगा...”

दादाजान का लण्ड बहुत सख़्त था जैसे लोहे का बना हुवा हो इसलिए मेरी चूत दादाजान का लण्ड बर्दाश्त नहीं कर और रही थी और मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मेरे चीखने पर दादाजान और जोर से झटके मार रहे थे। दादाजान को मुझे कुत्ते की तरह चोदते हुये 35 मिनट हो गये थे और मैं 5 बार झड़ चुकी थी। फिर धीरे-धीरे मेरी चूत दादाजान के लण्ड की आदी हो गई और कम होते होते मेरा दर्द बिल्कुल खतम हो गया। अब मुझे। दादाजान से चुदवाने में बहुत ही मजा आ रहा था और अब मैं भी अपने चूतर उछाल-उछाल कर दादाजान का साथ देने लगी।

दादाजान ने जो मुझे मजे में देखा तो खुश होकर और जोर से झटके मारकर मुझे चोदने लगे और कहने लगेछिनाल अब आई है तू मजे में, चल अब मैं तुझे पूरी स्पीड से चोदूंगा।। मैं मजे में बुरी तरह से मचलने और सिसकने लगी- “उफफ्फ़... आह्ह्ह... ऊऊऊईई... माँ मैं मर गई उफफ्फ़.. आहहह... दादा जाननन् आह्ह्ह... मुझे बहुत मजा आ रहा है उफफ्फ़... मेरे प्यारे दादाजान और जोर से चोदें अपनी इस चोदक्कड़ पोती कोओ आह्ह्ह... हाँ... हाँ.. और जोर से झटके मारें आहह्ह.. उफफ्फ़... आहह्ह.. उफफ्फ़..."

दादाजान ने कोई 45 मिनट तक मुझे चोदा फिर जब उनके लण्ड ने झटका खाया तो मैं मचलकर बोली“उफफ्फ़... दादाजान अपने लण्ड की मनी मेरे मुँह में निकालिएगा, मुझे मनी पीना बहुत पसंद है...”

मेरी बात सुनकर दादाजान ने फौरन ही अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला तो मैंने अपना मुँह खोल दिया। दादाजान ने अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया। मुँह में लण्ड डालते ही उनके लण्ड से मनी की पिचकारी निकलकर मेरे हलाक से टकराई और मेरा पूरा मुँह मनी से भर गया। मैं मजे से मनी पीने लगी। सारी मनी मैं

पी गई, एक कतरा भी नीचे गिरने नहीं दिया। फिर मैंने खूब अच्छी तरह चाटकर दादाजान का लण्ड साफ किया और दादाजान से लिपटकर लेट गई।

और कहने लगी- “उफफ्फ़... मेरे चोदू दादा आज आपने मुझे जन्नत की सैर करा दी है...”

 
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