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धीरे धीरे लंड को बढ़ाना है हद से गुजर जाना है

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Administrator
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तब मैं २० साल का था और मेरा लंड बढ के 6 इन्च से ज्यादा हो गया था। मैं लंड के बारे में कुछ भी जानता नहीं था लेकिन फ़िर भी गांव का लड़का होने के चलते मुझे हर बात में लंड लंड कहने की आदत थी। मेरा फ़ेवरेट गाना था, धीरे धीरे प्यार को बढाना है, हद से गुजर जाना है। उस दिन मैं अपनी मामी के यहां गया हुआ था। मामी गांव में सब मुझे भांजा होने के चलते बहुत प्यार करते थे और पकड़ के मुझसे खूब बातें करते थे। मेरे मामा के पड़ोस में एक नयी नयी दुल्हन आयी हुई थी सुधाकर बो भाभी। उनकी चिकनी जवानी के सब लड़के दीवाने थे और उन्हीं की बातें किया करते थे। मैं उनके घर घूमते घूमते चला गया। भाभी ने मुझे पकड़ लिया और चाय बना लायीं। मैं बदन से भले ही बड़ा हो गया था, लेकिन बुद्धि से अभी कच्चा ही था। भाभी ने अपना पल्लू गिरा दिया और उनके ब्लाउज का बटन खुला हुआ था। आधी से ज्यादा चूंची बाहर दिखने लगी। गोरे गोरे चूंचे के काले काले निप्पल जैसे अभी मैं उनका दूध पी लूं ऐसा मन किया। मैंने चाय पी और चलने लगा तो भाभी ने फ़िर पकड़ कर बिठा दिया और कहा देवर जी जरा कोई गाना वाना तो सुना दो। अब मुझे एक ही गाना याद था, धीरे धीरे प्यार को बढ़ाना है तो मैंने गाना शुरु कर दिया। चिल्ला कर और एक लाईन के बाद गाना खत्म, मेरा टेप रिकार्डर भी बंद्।

भाभी ने पूछा आगे तो गाओ और मैंने देखा भाभी का हाथ मेरे लंड पर टच हो रहा था। मैंने गाना शुरु कर दिया धीरे धीरे लंड को बढाना है, हद से गुजर जाना है और भाभी खिलखिला कर हंस पड़ीं उनका पल्लू नीचे गिर गया और जब पल्लू नीचे गिरा तो दोनों चूंचे सीधे लटक के बाहर आ गये। मैं एक टक देखता रहा तो उन्होंने कहा देवर जी जरा मेरे बटन का हुक तो पीछे से लगा दो। उनका ब्लाउज हसबैंड ब्लाउज था जिसमें पीछे से दूसरा कोई ही हुक लगा सकता है। मैंने तुरत उनके हुक पकड़ने की कोशिश की लेकिन भारी चूंचे लटक के हुक को दूर कर देते। वो ह्सने लगीं बोलीं ऐसे थोड़े ही लगाते हैं हुक्। इसके लिए मेरे चूंचे को पकड़ के थामना पड़ेगा। मैंने एक हाथ से उनके दोनो चूंचों को संभालने की कोशिश की और मुह में एक हुक पकड़कर दूसरे हाथ से दूसरे वाले हुक को खीचने लगा। मेरे इरादे तो नेक थे लेकिन भाभी ने मेरे हाथ को चूंचों के उपर जोर से पकड़ लिया था और फ़िर मुझे पिछ्वाड़े से धक्का मारकर सोफ़े पर गिरा दिया और खुद मेरे गोद में गिर गयीं। फ़िर ना जाने क्या हुआ और मेरे नसों में खून का उबाल इतना तेज हुआ कि मेरा लंड फ़नफ़ना के खड़ा हो गया और फ़ुफ़कारने लगा।

मेरा पैंट उसे संभाल नही पा रहा था और भाभी ने अपनी चूत मेरे खड़े लंड को बाहर निकाल कर अपनी चूत के मुहाने पर रगड़ना शुरु कर दिया। मेरे उपर पागल पन सवार हो गया और मैंने तुरत भाभी को पटक के जमीन पर उनके उपर चढ गया। उन्होंने खुद ही मेरा लंड अपनी चूत में समा लिया और मैंने धक्के मारने शुरु कर दिये। उनके चूत से सटा सट की आवाज आ रही थी और वह सि सिया रही थी। थोड़ी देर मे ही मैं झड़ गया और भाभी ने दुबारा मेरा लंड चूसना शुरु कर दिया। फ़िर पांच मिनट के बाद मेरी पिचकारी तैयार हो गयी और मैंने इस बार भाभी को उल्टा लिटा के उनकी गांड में अपना लंड लगा दिया। उनके गांड का छेद काफ़ी छोटा था और मैंने भाभी के मुह से थूक लेकर अपने लँड और उनके गांड पर मला फ़िर धक्का दिया, तो वह किकुरने लगी मतलब सिकुडने लगी। उसे दरद हो रहा था। वो बोली फ़ाड़ दो अपनी भाभी की गांड देवर राजा, बना लो अपना लौडा और बड़ा। धकियाते हुए मैने अपना लंड अंदर धंसाना शुरु किया और वह हलाल होते बकरे की तरह डकारने लगी। उसके लिये मुझ २० साल के लड़के के लिये यह सरप्राइज चुदाई थी। गांड में मूसला धार घमासान चुदाई के बाद मैंने उसके चूंचों पर लंड को रगड़ते हुए उसके मुह में पिला दिया। मेरा गाना मुझे आज भी मेरे जुबान पर है और मैं जब भी गाता हूं धीरे धीरे लंड को बढाना है ....उस भाभी की यादें ताजा हो जाती हैं
 
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