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दूसरे की पत्नी के प्रति मेरा आकर्षण

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Antarvasna, hindi sex kahani: महिमा मुझे कहने लगी कि अविनाश मुझे घर आने में लेट हो जाएगी मैंने महिमा को कहा महिमा लेकिन तुम कब तक घर लौटोगी तो महिमा कहने लगी कि मैं शाम तक ही घर लौट पाऊंगी। मैंने महिमा को कहां क्या तुम्हें आज ऑफिस में कोई जरूरी काम है तो महिमा कहने लगी कि हां मुझे आज ऑफिस में जरूरी काम है इसलिए मुझे घर आने में थोड़ा देर हो जाएगी। मैंने महिमा को कहा चलो कोई बात नहीं तुम घर जब भी लौटोंगी तो मुझे फोन कर देना महिमा कहने लगी कि ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। हम दोनों ही अपनी जॉब के चलते एक दूसरे को बिल्कुल भी समय नहीं दिया करते थे हम लोगों की सिर्फ फोन पर ही बातें हुआ करती थी महिमा भी अक्सर अपने ऑफिस के टूर के चलते बाहर ही रहती थी और मैं महिमा के साथ बहुत कम समय बिताया करता था। जब भी मैं अकेले होता तो मैं हमेशा यह सोचता कि क्या हम दोनों कभी एक दूसरे को समय भी दे पाएंगे जब हम दोनों पहले एक दूसरे को मिले थे तो उस वक्त हम दोनों एक दूसरे के साथ कितना खुश थे लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे ही हम लोगों के पास समय बिल्कुल भी नहीं है।

मुझे तो हमेशा से यही लगता है कि मैंने महिमा से शादी कर के बहुत बड़ी गलती की क्योंकि महिमा और मैं अपने सपनों को सच करने के चलते एक दूसरे को बिल्कुल भी समय नहीं दे पा रहे हैं। मुझे कई बार लगता है कि मुझे महिमा से इस बारे में बात करनी चाहिए लेकिन मैं महिमा से कभी इस बारे में बात कर ही नहीं पाया जब भी मैं इस बारे में महिमा से कुछ बात करने के बारे में सोचता तो महिमा मुझे कहती कि अविनाश हम लोग इस बारे में कभी और बात करेंगे इसलिए मैं महिमा से इस बारे में बात कर ही नहीं पाया। अब मुझे एहसास होने लगा था कि मुझे महिमा से इस बारे में बात करनी चाहिए और मैंने महिमा से इस बारे में बात करने का फैसला किया मैं चाहता था कि हम दोनों एक दूसरे को समय दें। महिमा शाम को जब अपने ऑफिस से घर लौटी तो महिमा बहुत थकी हुई थी और वह मुझे कहने लगी कि अविनाश मैं तो बहुत ज्यादा थकी हुई हूं।

महिमा ने फ्रिज से पानी की बोतल निकाली और वह पानी पीने लगी पानी पीने के बाद वह मुझे कहने लगी कि मैं बहुत ज्यादा थक गई हूं मैंने महिमा को कहा महिमा मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। महिमा मुझे कहने लगी कि अविनाश कहो ना तुम्हें क्या बात करनी है मैंने महिमा को कहा महिमा पहले तुम थोड़ी देर आराम कर लो मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। महिमा मुझे कहने लगी कि तुम्हें मुझसे क्या जरूरी बात करनी है तुम मुझसे बात कर सकते हो मैंने महिमा को कहा कि महिमा तुम्हें वह दिन याद है जब हम लोग पहली बार मिले थे और हम लोग कितने खुश थे एक दूसरे की खुशियों में हम दोनों शामिल हुआ करते थे लेकिन जब से हम दोनों ने शादी की है उसके बाद हम दोनों पूरी तरीके से बदल चुके हैं हम दोनों को इस बारे में सोचना चाहिए। महिमा मुझे कहने लगी कि अविनाश मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझी कि तुम क्या कहना चाहते हो मैंने महिमा को कहा देखो महिमा मैं चाहता हूं कि हम लोगों को कुछ दिनों के लिए साथ में समय बिताना चाहिए और कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए हम दोनों को काफी समय हो गया है जब से हमने साथ में अच्छा समय भी नहीं बिताया है। महिमा को भी लगा कि शायद मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं इसलिए महिमा ने मुझे कहा कि अविनाश तुम ठीक कह रहे हो मुझे भी लगने लगा है कि हम दोनों एक दूसरे को समझ ही नहीं पाते हैं। मैंने महिमा को कहा महिमा मुझे कई बार लगता है कि हम दोनों ने एक दूसरे को कभी समय दिया ही नहीं है और मुझे तो ऐसा लगता है कि जब से हमारी शादी हुई है तब से हम दोनों पूरी तरीके से बदल चुके हैं और मुझे नहीं लगता कि हम दोनों अब एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं। महिमा मुझे कहने लगी कि अविनाश मुझे मालूम है लेकिन तुम ही बताओ कि हम लोगों को कहां जाना चाहिए। मैंने महिमा को कहा क्यों ना हम लोग घूमने के लिए शिमला जाए तुम्हें याद है ना कॉलेज का टूर, शिमला के टूर की यादें आज तक मुझे याद है। महिमा कहने लगी कि तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो क्यों ना हम लोग शिमला ही चले हम दोनों ने शिमला जाने का फैसला कर लिया था और हम दोनों ही इस बात से बहुत खुश थे।

हम दोनों ने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी और मुझे भी इस बात की बड़ी खुशी थी कि कम से कम मैं महिमा के साथ कुछ अच्छा समय तो बिता पाऊंगा। मैं महिमा के साथ अच्छा समय बिताना चाहता था और मैं चाहता था कि मैं महिमा के साथ थोड़ा समय बिता पाऊं इसलिए तो मैंने प्लान बनाया था और जब हम लोग शिमला पहुंचे तो शिमला के जिस होटल में हम लोग रुके थे उस होटल के मैनेजर ने हमे रूम दिखाया। हालांकि हम लोगों ने रूम पहले ही बुक कर लिया था लेकिन मैं चाहता था कि यदि रूम में कोई दिक्कत हो तो हम लोग कम से कम रूम तो बदली कर पाए। जब मैनेजर ने मुझे रूम दिखाया तो वह कहने लगे कि सर यहां कोई भी परेशानी नहीं होगी महिमा ने भी कहा कि हां रूम तो ठीक है। हम दोनों ने अपना सामान रखा और कुछ देर हम लोग बिस्तर पर लेट गए मैं और महिमा अपने कॉलेज के दिनों की बातें करने लगे मैंने महिमा से कहा महिमा तुम्हें याद है जब मैंने पहली बार तुम्हें शिमला में ही अपने दिल की बात कही थी।

महिमा कहने लगी कि हां मुझे याद है तुम कितना शरमा रहे थे लेकिन तुम ने आखिरकार अपने दिल की बात मुझसे कह ही दी और मुझे भी बहुत अच्छा लगा कि कम से कम तुमने अपने दिल की बात तो मुझे बता दी क्योंकि मैं भी तो तुम्हें पसंद किया करती थी। मैंने महिमा से कहा महिमा हम दोनों कितने बिजी हो चुके हैं और एक दूसरे के लिए हमारे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं है महिमा कहने लगी मुझे भी कई बार लगता है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ समय नहीं बिता पाते हैं लेकिन फिर मैं सोचती हूं कि क्यों ना हम लोग अपने जीवन में पहले कुछ अच्छा कर ले। मैंने महिमा को कहा महिमा यह सब तो ठीक है हम दोनों अपने जीवन को सरल बनाने के लिए मेहनत जरूर कर रहे हैं लेकिन एक दूसरे के साथ हम लोग समय नहीं बिता पा रहे हैं। महिमा मुझसे कहने लगी कि हां तुम ठीक कह रहे हो महिमा ने कहा कि चलो हम लोग लॉन में चलते हैं और हम लोग लॉन में चले गए हम लोग वहां पर चाय पी रहे थे। हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तभी मैंने देखा सामने से सतीश गुजर रहा था मैंने सतीश को देखते ही आवाज लगाई सतीश ने मेरी तरफ पलट कर देखा। मैंने सतीश को कहा तुम यहां कैसे? सतीश कहने लगा मैं अपनी पत्नी के साथ यहां आया हूं कुछ दिनों के लिए हम लोग यहां छुट्टी मनाने आए हैं सतीश मेरे साथ पहले ऑफिस में जॉब किया करता था जिस ऑफिस में में जॉब करता था। मैंने सतीश को अपनी पत्नी से मिलवाया सतीश महिमा से मिलकर खुश हुआ उसने भी अपनी पत्नी दिव्या को बुला लिया। दिव्या जब बाहर आई तो सतीश ने मुझे दिव्या से मिलवाया दिव्या से मिलकर मुझे अच्छा लगा लेकिन उसकी कमसिन जवानी मेरे सर चढ़कर बोल रही थी मुझे तो ऐसा लग रहा था कि वह मुझसे चूत मरवाना चाहती है। मुझे नहीं पता था कि जो मैं अपने दिल में सोच रहा हूं वह सच होने वाला है दिव्या ने मेरे नंबर पर मैसेज कर के मुझे रूम में बुलाया। उस वक्त सतीश कहीं बाहर गया हुआ था मैं भी दिव्या के रूम मैं चला गया दिव्या ने मुझे बैठने के लिए कहा वह मेरे पास आकर बैठी और मुझसे चिपकने लगी। मैंने उसे कहा दिव्या यह सब ठीक नहीं है वह मुझे कहने लगी कोई बात नहीं इस बारे में किसी को भी कुछ पता नहीं चलेगा हम दोनों के बीच यह बात रहेगी।

मेरे अंदर का जोश जागने लगा था मैंने दिव्या के होठों को चूम लिया मैं उसके होठों को चूम रहा था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था। दिव्या के होठों को चूम कर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं सिर्फ उसके होंठों का रसपान करता रहा हूं काफी देर तक मैंने उसके होठों का रसपान किया। मै अपने अंदर की गर्मी को बिल्कुल रोक नहीं पा रहा था मैंने दिव्या के कपड़े उतारे दिव्या पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी मैंने जब उसकी ब्रा को खोलते हुए उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मैंने उसके स्तनों का रसपान बहुत देर तक किया जब मै उसके स्तनों का रसपान कर रहा था तो मुझे भी मज़ा आ रहा था। मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया मैंने अपने लंड को बाहर निकाला दिव्या ने उसे अपने होंठो में लगाते हुए अंदर की तरफ ले लिया। मेरे लंड को वह अपने मुंह में लेकर चूस रही थी मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी बड़ा आनंद आता काफी देर तक वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसती रही उसे बड़ा ही मजा आया।

उसने मुझे कहा मैं तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती हू मैंने भी एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत के अंदर डाल दिए मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी। वह मुझे कहने लगी अब तो मुझे मजा आ रहा है मैंने उसे कहा मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा है वह अपने पैरों को खोलने लगी। मैं उसे तेजी से धक्के मार रहा था जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उससे वह खुश हो गई और कहने लगी कसम से आज तो मजा ही आ गया। मैंने उसे कहा मुझे भी बड़ा मजा आ रहा है उसने मुझे अपने दोनों पैरो के बीच मे जकडा मैंने उसे कहा क्या तुम्हारा हो चुका है? वह कहने लगी अब मै तुम्हारा साथ नहीं दे पाऊंगी जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत मे गिराया तो उसने मुझे कहा मुझे लगता है सतीश वापस आने वाले हैं। मैंने उसे कहा जल्दी से तुम कपडे पहन लो उसने जल्दी से कपड़े पहने मैंने भी कपड़े पहने और हम दोनों ही वहां से बाहर आए। मैंने देखा सतीश सामने से ही आ रहा था लेकिन किसी प्रकार से मैंने सतीश को अपनी बातों में उलझा लिया और उसके बाद तो जैसे दिव्या और मेरे बीच नाजायज संबंध बनने लगे थे।
 
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