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ट्यूशन टीचर के संग मेरी रासलीला

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जैसा मैंने ब्लू फिल्मों में देखा था वैसे ही मैं भी उसे मुँह में लेकर चूसना चाहती थी पर मुझे शर्म आ रही थी. तो उसने ज़बरदस्ती अपना लन्ड मेरे हाथ में दे दिया. वह एक दम गर्म और राड की तरह था. मैं धीरे – धीरे उसे सहलाने लगी. उसने कहा – एक किस तो कर दो इसे अब. मैं उसे किस करने लगी, तो उसने थोड़ा सा लन्ड मेरे मुँह में डाल दिया. मुझे अच्छा लगा तो मैं सब कुछ भूलकर ज़ोर – ज़ोर से चूसने लगी…

हेलो दोस्तों, मेरा नाम निकिता (काल्पनिक) है. मेरे नाम के अलावा इस कहानी की एक – एक बात पूरी तरह सच है. मेरी उम्र 21 वर्ष है. मेरा रंग गोरा है और मैं अंबाला के पास एक गाँव से हूं. मेरा साइज़ 32-28-34 है. अब आप ही हिसाब लगा लो कि मैं कितनी सेक्सी हूं. जहां से भी मैं निकलती हूं सब की पैंट टाइट हो जाती है, मतलब सबका लंड मेरे शरीर को देख कर सल्यूट करने लगता है.

दोस्तों, मैंने बहुत कम उम्र में ही लंड का स्वाद चख लिया था. बात उस समय की है जब मैं 18 वर्ष की हुई थी और मैं 12वीं क्लास में थी. मैं साइन्स साइड से 12वीं कर रही थी. सो घर वालों ने मेरे ट्यूशन के लिए एक टीचर से बात की. उस टीचर का नाम राजेश था. मैं अंबाला स्कूल से थी और मेरा ट्यूशन टीचर भी अंबाला से ही था. उसकी उम्र 35 साल के करीब थी.

घर वालों ने सोचा कि उम्र के हिसाब से ये टीचर ठीक रहेगा. वो अपनी फैमिली के साथ रहता था और अपने घर पर पार्ट टाइम ट्यूशन देता था. उसकी फैमिली में उसकी बीबी और एक 2 साल का लड़का था. उस टीचर की नीयत पर मुझे पहले दिन ही शक हो गया था.

जब मैं पहले दिन ट्यूशन गयी तो वो मेरे वक्षों को घूर रहा था. मैंने उस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया और केवल अपनी पढ़ाई से ही मतलब रखा. एक दिन वो मुझे पढ़ाई करा रहा था. वो मुझे समझ में नहीं आ रहा था. तो वो खड़ा हो कर मेरे पीछे आ गया और अपने दोनों हाथ मेरे कंधों पर रख कर समझाने लगा.

मैंने एकदम पीछे मुड़ कर देखा तो वो मेरे वक्ष देखने की कोशिश कर रहा था. उसकी चोरी पकड़ी गई तो वह एकदम से पीछे हट गया. मैं जैसे ही वहां से निकली दिमाग सन्न रह गया कि ये क्या हो रहा है? एक बार सोचा कि घर में बता देना चाहिए, पर फिर सोचा रहने देती हूं. फिर तो ये सिलसिला चलता रहा और अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था और मैं अपने आप को शीशे के सामने देख कर खुश होने लगी कि मेरा शरीर कितना अच्छा है.

अब उस टीचर को भी पता लग गया की मैं इसका मजा ले रही हूं. एक दिन वो टीचर मेरे से बोला कल सुबह स्कूल से पहले मेरे घर आ जाना क्योंकि उसके अगले दिन मेरा टेस्ट था. सो मैं सुबह जल्दी चली गई. उस दिन उसकी बीबी अपने मायके गई हुई थी. मेरे जाते ही टीचर ने मुझे चाय दी और वो भी चाय लेकर मेरे सामने बैठ गया.

उसने सिर्फ बरमूडा पहना था और उसमें से मुझे उसके लंड का उभार दिखाई दे रहा था. मेरा दिल बहकने लगा पर मैंने अपने आप पर कंट्रोल रखा. चाय खत्म करने के बाद वो सीधा बाथरूम में चला गया. मेरा दिल करने लगा कि बाथरूम में झांक कर देखूं कि टीचर क्या कर रहा है, तो मैंने दरवाजे के छेद से झांका तो देखा कि वो धीरे – धीरे अपने लंड को सहला रहे थे.

उसका लंड देख कर मेरा मन बहक गया. और मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पर चला गया और मैं अपनी चूत सहलाने लगी. तभी अचानक बाथरूम का दरवाजा खुला तो मैं एक दम से भाग कर कमरे में आ गई. पर शायद मेरी चोरी पकड़ी गई थी. जैसे ही टीचर मुझे पढ़ाने लगा तो उस समय मैं उससे आंखें नहीं मिला पा रही थी, तो वो समझ गया और उसने मेज के नीचे से मेरे पैर को सहलाना शुरू कर दिया. उसका ऐसे सहलाना मुझे अच्छा लग रहा था पर मैंने पैर पीछे खींच लिया.

तभी वो बोला – आज आप स्कूल मत जाओ, मैं थोड़ी देर में मार्केट जा कर आता हूं. मैं आज सारा दिन आपकी तैयारी करवा दूँगा. इससे मेरा भी टाइम पास हो जाएगा. नहीं तो सारा दिन अकेला बैठे – बैठे बोर हो जाऊंगा.

उसकी यह बात सुन कर पता नहीं मैंने कैसे बिना सोचे हां कर दी. राजेश मार्केट चला गया. उसके जाते ही मैं जल्दी से जाकर दरवाजा बंद किया और अपनी चूत को सहलाने लगी. तभी डोर बेल बजी तो मैंने एक दम से दरवाजा खोल दिया. जनवरी के ठंडे महीने में भी मेरे माथे पर पसीना था.

जिसे देख उसने मेरा हाथ पकड़ा और पूछा – निकिता तबीयत तो ठीक है न आपकी?

तभी उसे मेरे हाथ पर गीलापन महसूस हुआ तो वो मेरे हाथ को सूंघने लगा. तभी उसके चहरे पर स्माइल आ गई और वो मुझसे बोला – अगर इतनी आग लगी है तो मुझे बोल देती.

तो मैंने कहा – ऐसा कुछ नहीं है सर, आप गलत समझ रहे हैं.

वो हसने लगा और बोला – मैं बच्चा नहीं हूं.

इतना बोल कर उसने एक दम से मेरे होंठों पर अपने गर्म होंठ रख दिए और ज़ोर – ज़ोर से चूसने लगा. मैं उससे छूटने की नाकाम सी कोशिश कर रही थी. फिर वो मुझे छोड़ कर बोला – मैं पहले दिन से ही आपका दीवाना हूं निकिता.

मैंने कहा – ये गलत है सर.

वो बोला – इसमें कुछ भी गलत नहीं है. ये तो शरीर की जरूरत है निकिता. अब आप भी मजा लो ओर मुझे भी लेने दो, ये कहकर उसने दोबारा मेरे होंठों से अपना होंठ चिपका दिया. मेरा दिल भी कर रहा था कि आज खुल कर मजा ले लूं, पर एक डर सा था दिल में कि कुछ गलत न हो जाए.

मेरे दिल के आगे मेरी वासना भारी पड़ गई और मैं भी खुल के उसकी किस का जवाब देने लगी. थोड़ी देर बाद हम अलग हुए तो वो मुझे उठा कर बेडरूम में ले गया और मेरे चूचे दबाने लगा. मुझ पर वासना छा रही थी. मेरे चूचे दबाते हुए उसका एक हाथ मेरे शरीर पर चलने लगा. फिर उसने मेरी शर्ट के बटन को खोल दिया और मेरी ब्रा के अंदर हाथ डालने लगा.

मैंने उसे रोकना चाहा पर वो आगे आगे बढ़ता गया और उसने मेरी शर्ट उतारते – उतारते मेरी ब्रा भी खोल के निकाल दी. मैंने शरमाकर अपने चूचों को हाथों से ढक लिया. तभी उसने मेरी पैंट की हुक खोल दी. जिस कारण मैं शर्म से अपना चेहरा छुपाने लगी. उसने एक ही झटके में पैंट की चैन खोलते ही मेरी पैंट उतार दी और बड़े गौर से मुझे देखने लगा.

फिर उसने मुझे बेड पर लिटाया और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा. मैं तो हवा में उड़ने लगी थी. फिर उसने धीरे – धीरे मेरी पैंटी भी निकाल दी. अब मैं उसके सामने बिल्कुल नंगी थी और वो मेरी चूत चाट रहा था. तभी अचानक उसने एक उंगली मेरी चूत में डाल दी. मुझे हल्का सा दर्द हुआ, क्योंकि मैं पहले कई बार चूत में उंगली डाल चुकी थी.

फिर वो धीरे – धीरे उंगली अंदर बाहर करने लगा. मैं बता नहीं सकती मुझे कितना मजा आ रहा था. तभी मुझे लगा कि मैं झड़ने वाली हूं, जिससे मैंने उसका मुँह अपनी चूत से हटाना चाहा तो वो समझ गया और बोला आने दो, मुझे कुँवारी बुर के रस का टेस्ट करना है. फिर मैं ऐसे झड़ी जैसे मुझे मूत आ रहा हो, लेकिन राजेश ने एक बूँद भी वेस्ट नहीं होने दी और सारा पी गया. अब मैं बड़ा रिलैक्स फील कर रही थी.

तभी टीचर ने अपने सारे कपड़े उतार दिए. मैंने पहली बार लंड को इतना करीब से देखा. तभी वो बोला – देख क्या रही हो? इससे प्यार करो.

जैसा मैंने ब्लू फिल्मों में देखा था वैसे ही मैं भी उसे मुँह में लेकर चूसना चाहती थी पर मुझे शर्म आ रही थी. तो उसने जबरदस्ती अपना लन्ड मेरे हाथ में दे दिया. वह एक दम गर्म और राड की तरह था. मैं धीरे – धीरे उसे सहलाने लगी. उसने कहा – एक किस तो कर दो इसे अब. मैं उसे किस करने लगी, तो उसने थोड़ा सा लन्ड मेरे मुँह में डाल दिया. मुझे अच्छा लगा तो मैं सब कुछ भूलकर जोर – जोर से चूसने लगी.

तभी उसने मुझे 69 की पोजिशन में लिया और मेरी चूत को चूसने लगा. साथ ही वो मेरी गांड से भी खेलने लगा और एक उंगली मेरे पीछे डाल दी. तभी मैं बोली – प्लीज़ सर, अब सहन नहीं होता, बस इस आग को ठंडा करो जो आपने मेरे जिस्म में लगाई है. फिर उसने मुझे सीधा किया ओर बोला एक बार दर्द होगा सहन कर लेना फिर मज़े ही मज़े.

फिर उसने मेरी चूत पर लंड रखा और धीरे से अंदर डालने लगा पर वो नाकाम रहा. तभी मैंने उससे कहा – जल्दी कर, और फिर मैंने उसका लंड पकड़ा और चूत पर रख के बोली – अब मार धक्का. उसने जबरदस्त शॉट मारा और उसका आधा लंड मेरे अंदर चला गया. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी हो. मेरी आँखों से पानी निकल रहा था और मैं जोर से चिल्लाई – बाहर निकाल इसे, मार दिया बेरहम ने.

उसने तभी मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और मेरे चूचे सहलाने लगा. थोड़ी देर बाद जब मैं नॉर्मल हुई तो वो धीरे – धीरे लंड को हिलाने लगा. फिर पूरा लन्ड बाहर निकाल कर एक दम से पूरा एक ही धक्के में अंदर डाल दिया. अबकी बार दर्द कम हुआ था तो मैं सहन कर गई. फिर शुरू हुई असली चुदाई.

मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं बड़बड़ाने लगी – और तेज टीचर, और तेज.

तो वो बोला – ऐसे नहीं, बोलो राजेश मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.

उसके यह कहने पर मैं बोली – राजेश, मेरी जान आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे. मैं और मेरी चूत आज से तेरी गुलाम रहेगी.

फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से एक दम पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा. फिर धीरे से एक उंगली मेरे पीछे डाल दी. अब मुझे बहुत मजा आ रहा था.

तभी राजेश बोला – तेरी गांड ने मुझे पागल किया है, आज मुझे पीछे भी करना है.

मैं बोली – राजेश, प्लीज पहले चूत को ठंडी कर दे. उसके बाद जो करना है कर लेना.

फिर वो करीब 10 मिनट तक धकापेल मेरी चुदाई करता रहा. इस दौरान 2 बार झड़ गई. अब राजेश का निकलने को हुआ, तो मैं बोली मुझे टेस्ट करना है. तो उसने चूत से लंड निकाल कर मेरे मुँह में डाल दिया और मैं मज़े से चूसने लगी. थोड़ी देर बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और मैं उसका सारा माल पी गई. वो एक अजीब सा स्वाद था.

फिर मैं उठी तो देखा कि नीचे चादर खून से लाल हो गई थी, मैं डर गई. राजेश बोला – कुछ नहीं होता, पहली बार ऐसा होता है. तब जाके मेरी जान में जान आई. मुझे चलने में दिक्कत हो रही थी. राजेश ने मुझे सहारा देकर बाथरूम ले गया. उसके बाद क्या हुआ जब भी दोबारा समय मिलेगा ज़रूर लिखूँगी.
 
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