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टूशन दीदी की पिलपिली चूत

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Administrator
Staff member
आज मैं आपको अपनी टूशन दीदी की कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो मुझे कॉलेज के तीसरे सत्र के लिए टूशन पढ़ाया करती थीं | दोस्तों वो दिखने में बड़ी ही गज़ब माल दीखते थी और हमारी कॉलोनी के सभी लड़के दीदी पर लाईन मारा करते थे | मुझे नहीं पता था की दीदी के मन में इतनी चुदाई की आकांशा छुपी हो सकती हैं जब तक मैंने खुद ही चूत में ऊँगलीबाज़ी करते हुए नहीं देख लिया | मैं एक दिन जब टूशन गया तो दीदी घर पे अकेली थीं | मैं अंदर कमरे में गया तो दीदी बिस्तर पर टांगें फैलाए बैठी हुई थीं और मुंह दूसरी और मुदा कर रखा हुआ था ताकि मैं देख न पाऊं | दीदी ने खा की वो आज टूशन नहीं पढायेंगी और तभी मुझे दीदी की सिसकियों की आवाज़ सुनाई दे पड़ी और सामने से देखा की वो अपनी चूत में ऊँगली करने में डूब चुकी थी और अपनी चरण सीमा पर पहुँच चुकी थी |

मैं तो वैसे भी रोज हस्तमैथुन किया करता था और अब चुदाई की आकांशा दिल में ऐसी बैठ पड़ी की मैं दीदी से आगे बढ़कर चिपट गया | तभी दीदी ने मेरे लंड को थाम लिया और ज़ोरों से मुठी मारते हुए मेरी छाती को चाटते हुए मेरा लंड मसलने लड़ी | मैं दीदी के चुचों को बारी - बारी दोनों चुचों को भींचता हुआ चुसे रहा तह और वो मग्न होकर सिस्कारियां भर रही थी | दीदी ने मुझसे पूछा, तुम्हे गांड चाटना आता है ?? मैंने खा ज़रा कुतिया तो बनके दिखाना !! तभी दीदी वहीँ कुतिया बन गयी और मैं पीछे से उनकी गांड को चाटने लगा | मैं दीदी की चुदाई के लिए अब बिलकुल तैयार और उन्हें वहीँ बिस्तर पर लिटाया और उनकी टांगों खोल डाला | मैंने अब अपने लंड के सुपाडे को उसकी चूत धन्साते हुए चोदना चालू कर दिया |

दीदी पुरे जोश में अपनी गांड हिलाती हुई अपनी चुदाई को हांफती मज़े लुट रही थी | उनकी चूत पहले से ही फंटी हुई थी और मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर घुसे जा रहा थे | मैं दीदी के होंठ को चूसता हुआ नीचे से लंड के धक्के मारते हुए रहा था ताहि दीदी के चूत ने पूरी मलाई छोड़ डाली | मैंने फट से दीदी की चूत में अपना मुंह लगा लिया और दीदी के मीठे मीठे कामरस को पीकर तृप्त हो गया | अब मैं दीदी के उप्पर चढ़कर कभी उनकी गुदा में अपने लदं को नचाता तो कभी लंड को चूत में अचनाक्से धक्के मार देता है | इस तरह हमने कार्यक्रम आधे घंटे तक चलाया और जिसके बाद मैं भी दीदी के मुख में पूरा झड गया | अब दीदी टूशन के बाद हमेशा मुझे अकेले में रोक लेती और गुप्त तरीके से बिस्तर पर चुदाई की अनंत रासिलिला मचाने में जुट जाते | दीदी की चूत का मज़ा अब मेरे लंड पर चढ चूका था और अब तो रोज पढाई के बहाने की दीदी की पिलपिली चूत को चोदना मेरा पेशा बन चूका था |
 
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