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झील के पास सुहागरात मनाई

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Administrator
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हाई दोस्तों,

मेरा नाम कुमार हे और मैं अभी कॉलेज में पड़ता हूँ | मेरे क्लास में एक राधा नाम कर के एक लड़की थी | हम दोनों एक दूसरे के साथ करीब पाँच साल से पड़ते आ रहे हे और हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे | हम दोनों इतने खुल के बात करते थे की हमारे बिच कभी कभी सेक्स की बात भी हो जाती थी, और वो भी मस्त में मुझसे इन सब बातो पे बात कर लेती थी | धीरे धीरे हम दोनों बहुत खुल चुके थे और कभी मुड बन जाता तो किस भी कर लिया करते थे और बहुत कम मोका मिला मुझे उसके चेंडू दबाने के लिए | पर मैं हर दिन मोका खोजता था उसे अच्छे से रगड़ने के लिए और एक दिन वो आ ही गया जिस दिन मेने उसकी चुत गर्म कर ही दी |

एक दिन में बहार गया और कॉलेज नही गया जानबुज के, वो फोन की और पूछी तो मेने कहा में आज घूमने के लिए जा रहा हू अकेला हूँ आना हे तो आ सकती हे तू | वो बोली ठीक हे और फिर वो भी आ गयी कॉलेज से बंक मार के | हम दोनों एक पार्क में गए जिसके पीछे बहुत बड़ी बड़ी झाडिय हे और उसको पार करने से एक झील जैसी आती थी | मैं उसके साथ वही पे जाने की सोचा और वो भी मान गयी | जाते हुए मैं उससे चिपक चिपक के जा रहा था ताकि उसका भी मुड बन जाये | मेने उसे रोका और रस्ते में एक किस के लिए बोला तो वो मान गयी और हम किस करने लग गए | किस करते करते मैं उसके चुच्चो पे हाथ फेरने लग गया तो उसने मना किया पर फिर भी में कर रहा था तो वो फिर मना नही की और दबवाने लग गयी |

मैं करीब दस मिनट चुच्चे दबाए और वो हल्की फुलकी सिसकिय छोड़ने लग चुकी थी और उसका जिस्म पूरा गर्म हो चूका था | मैं उसे और आगे ले गया और साफ़ सूत्रा जगह देखे के वही उसे बिठा दिया और फिरसे किस करने लग गया और फिर उसके मम्मे दबाने लग गया | वो मेरे सर पे हाथ फेरते हुए मुझे अपने चेंडू से दबाने लग गयी और मुझे चूमने लगी और में दबाता रहा | मेने उसके टॉप को उपर कर दिया जिसके लिए उसने कुछ विरोध नही किया और में उसके ब्रा को निकाल के उसके निप्पल चूसने लगा | उसके मुह से अब कस कस के सिसकिय निकल रही थी और वो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी | मैं करीब बीस मिनट तक उसके निप्पल चुस्त और मसलता रहा इतने में वो एक बार झड चुकी थी |

अब मेने उसे जींस उतारने को कहा तो उसके लिए भी वो तैयार हो गयी, उसने जींस उतारी और मेने उसकी पनटी | उसकी गीली चिकनी चुत देख के तो में उसका दीवाना हो गया और उसके चुत को चाटने लगा | जीभ रखते ही वो कसमसा उठी और मेरे सर को अपनी चुत में दबाने लग गयी | मैं उसकी चुत को इतना कस कस के चूसा की वो झड गयी और फिर मेने उसकी चुत में ऊँगली दाल दी तो जोर से चीख उठी पर जल्दी ही शांत हो गयी और मैं उसकी चुत में ऊँगली अंदर बहार करने लगा और वो दस मिनट में फिर से कराहते हुए झड गयी |

मैं उठ के फिरसे उसके निप्पल चूसने लगा और फिर जब वो फिरसे गर्म होने लगी तब मेने उसके चुत पे लंड सटा दिया और कस के धक्का दे मारा तो वो बहुत जोर से चीख उठी और उसके आँखों से आंसू भी निकल आये | पर मैं कुछ देर रुका और फिर लंड को आगे पीछे करता रहा और उसका दर्द अब मस्ती में बदल गया | अब वो अपने पेरो को मेरे कमर पे बंद के मुझे अपनी तरफ खीचते हुए मुझसे चुदवा रही थी और में लगा हुआ था उसे कस कस के पेलने में | वो जोर जोर से कराहते रही और में शोट पे शोट देता गया और बीस मिनट के बाद हम दोनों एक साथ झड गए | वो मुझे चूमने लगी और फिर पाँच मिनट बाद हम वह से उठ के चले गए | उस दिन से अब तक हम एक दूसरे को एसी तरह प्यार किया करते हे |
 
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