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Guest
हमसे कही दूर कही पर.........
आकाश एक होटेल के रूम मे एंटर हुआ तो सामने वाले को देख कर चौंक गया...
आकाश- आप....आप तो बिल्कुल मेरी....
इससे पहले कि आकाश बात पूरी कर पाता...उसके सिर पर पीछे से हमला हुआ और वो बेहोश हो गया....
आकाश के बेहोश होते ही सामने खड़े आदमी ने एक कॉल लगाया...जो एक औरत ने उठाया....
औरत- हाँ...क्या हुआ जी...
आदमी- काम हो गया...हमारे दोस्त ने जैसा प्लान किया था...वैसा ही हो रहा है...
औरत- वाहह...अब आगे सभाल कर काम करना...ठीक है...
आदमी- हाँ मेरी जान...ये मेरी लाइफ का एकलौता मक़सद है...चिंता ना करो...अब रखता हूँ...जल्दी फ़ोन करूगा...
और आदमी ने कॉल कट कर दी...
औरत(फ़ोन रख कर)- तेरा मक़सद...हहहे...मक़सद तो मेरा है...तू तो मेरे हाथ की कठपुतली है...और तेरे दोस्त भी...लास्ट मे तो वही होगा...जो मैं चाहती हूँ...
आज़ाद मल्होत्रा....अब देखना....तेरे पितरो(पूर्वजों) को पानी देने वाला भी नही बचेगा....हहहे.....
Re: चूतो का समुंदर
संजू के घर.......
आंटी की चुदाई कर के मैं फ्रेश हुआ और सोचने लगा कि आंटी से बात कहाँ से शुरू करू.....
मैं चाहता था कि सब कुछ प्यार से हो जाए...क्योकि कही ना कही मुझे भी आंटी से प्यार था और इसलिए उनको हर्ट करना सही नही समझता था....
थोड़ी देर बाद आंटी भी फ्रेश हो कर आ गई और आते ही मेरे बाजू मे लेट गई...
आंटी- हाँ..तो अब बता...क्या काम था...क्या करना है मुझे....
मैं- आंटी....आपको कुछ करना नही....बल्कि...सिर्फ़ कुछ बताना है....
आंटी- मतलब....क्या बताना है....खैर जो भी हो....तू बोल तो सही....
मैं- हाँ...आंटी आपको मेरे सवाल का सच-सच जवाब देना होगा....ठीक है...
ये बात मैने आंटी को घूरते हुए बोली...जिससे आंटी के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई और वो भी सीरीयस हो गई...
आंटी- जवाब...कैसा जवाब बेटा....
मैं(बेड पर बैठ कर)- आंटी...अंकल की विस्की कहाँ है...
आंटी(रिलॅक्स हो कर)- ओह...तो ये बात थी...तुझे पीना है...अभी देती हूँ...
और फिर आंटी ने विस्की उठाई और एक पेग बना दिया...
आंटी- बेटा...ज़्यादा मत पिया कर....और ये बता कि इतनी सी बात के लिए संजू की कसम...क्यो बेटा....
मैं- आप ग़लत समझी आंटी...ये वो सवाल नही था...ये तो बस यू ही...मन हो गया....
आंटी- आख़िर ऐसी क्या बात है जो तू ड्रिंक का सहारा ले रहा है....बता तो सही...क्या सवाल है तेरा...पूछ बेटा ...
आंटी ने ये बात मेरे सिर को सहलाते हुए बड़े प्यार से बोली....
मैने एक पेग ख़त्म किया और दूसरा पेग बना कर खड़ा हो गया....
मैं- आंटी...आपसे कुछ पूछने के पहले मैं आपको कुछ बताना चाहता हूँ...ताकि बाद मे कोई प्राब्लम हो...सब क्लियर रहे....
आंटी(सीरीयस हो कर)- क्या...ऐसी क्या बात है बेटा...तू मुझे टेन्षन देना छोड़ और जल्दी से बता....बोल भी दे बेटा...
मैं- रिचा, कामिनी, दामिनी, दीपा, विनोद और....और रजनी....
और मैं ये नाम बोलकर पेग के घूट मारने लगा....
आंटी- हाँ....तो....मतलब..मैं कुछ समझी नही...
मैने एक सीप और मारी और पलट कर आंटी की आँखो मे देख कर बोला....
मैं- इन सब मे एक बात कॉमन है...बता सकती हो कि वो क्या है...ह्म्म्म्....
आंटी- हाँ...कामन...यही की सब आपस मे...मतलब तू सबको जानता है....
मैं- ह्म्म...पर एक बात और भी है...इनका टारगेट....जिसे ये सब मिटाना चाहते है...
ये बात सुनकर तो आंटी के चेहरे का रंग बदलने लगा...शायद उन्हे मेरी बात का मतलब समझ आ रहा था...
आंटी- टीटी..टारगेट...कैसा टारगेट....मैं कुछ नही समझी...
मैं(आगे झुक कर आंटी को आँखे दिखा कर)- बकवास बंद करो....आप सब जानती हो....वो टारगेट मैं हूँ...मैं और मेरे डॅड...अब याद आया...कि अब भी नही समझी...
अब तो आंटी को सब समझ आ चुका था और मारे डर के उनके होंठ थथराने लगे थे....
आंटी- बब्ब..बेटा ...वो...ये तू...क्या कह रहा....
मुझे भी अब विस्की की वजह से जल्दी गुस्सा आ गया था....
मैं(बीच मे)- अब बस भी कर....कितना नाटक करेगी....
आंटी- न...नही बेटा...म्म्म...मैं तो...
मैं- बस आंटी...चुप रहो....मैं सब कुछ जान चुका हूँ....तुम सब मेरे और मेरे डॅड को मारना चाहते हो...है ना...और झूठ मत बोलना...क्योकि ये बात तुम्हारे ही साथी ने बोली है मुझसे....
अब आंटी के पास बोलने के लिए कुछ नही था...वो समझ चुकी थी कि वो पकड़ी गई है...
अब उनके चेहरे पर डर के भाव थे और आँखे भी नम हो चुकी थी....उन्होने अपना चेहरा झुका लिया था....और आँसू बहाने वाली थी....
मैने आंटी का मुँह पकड़ कर उपेर उठाया और बोला...
मैं- अब बोल...सही कहा ना मैने...हाँ...
और मैने आंटी का चेहरा झटक दिया...
आंटी- बब्ब..बेटा...वो...मैं...
और इससे ज़्यादा आंटी कुछ नही बोल पाई बस आँसू बहाने लगी....
मैं पूरे गुस्से मे आ चुका था....मैने अपना पेग ख़त्म किया और आंटी के कंधे पकड़ के उन्हे झकझोर दिया
मैं- बोल ना....सही कहा ना मैने...तू मुझे मारने वाली थी ना....हाअ....
आंटी ने कोई जवाब नही दिया बस आँसू बहाते हुए सिसकने लगी...
मैं(खड़ा हो कर ताली बजाते हुए)- वाह...क्या ड्रामेबाज औरत है ...मान गये....वाह....
अरे ऐसी आक्टिंग तो बॉलीवुड वाले भी नही कर सकते....हाहाहा....क्या आक्टिंग है...मज़ा आ गया....
आंटी मेरे ताने सुन कर भी कुछ नही बोली...बस रोती रही...
मैं- कैसी औरत है...एक तरफ मुझे अपना बेटा बोलती है...और मेरी जान के पीछे...थ्हूओ...
अरे कमाल तो ये है की अपने मंसूबे पूरे करने के लिए मेरे लंड के नीचे तक आ गई....वाह...कमाल की रंडी भी है....
मैं आंटी को भड़का रहा था कि आंटी कुछ बोले...बट अभी भी उनका रोना जारी था....
आँसू तो मेरे भी निकलने लगे थे...मुझे भी दुख हो रहा था....
मैं- कहती थी मेरी माँ है...माँ...इस शब्द का मतलब भी पता है तुझे...
वैसे माँ बनने का नाटक भी मस्त किया हाँ....मेरे मन का खाना खिलाना...मेरी चिंता करना....मुझे चोट लगी तो आसू बहाना....वाह...
अरे तू तो ममता की मूरत बनी थी मेरे लिए....
पर अब किसी को मत बोलना कि तू मुझे बेटा मानती है...
वरना लोग क्या कहेगे....माँ बनकर बेटे को ही ठिकाने लगाने चली थी...
अरे तेरी कहानी सुन कर लोगो का माँ की ममता पर से भरोसा उठा जायगा.....
लोग माँ को पूजना छोड़ देगे....समझी...
अरे तेरे जैसी माँ मिलने से अच्छा तो मैं बिन माँ के ही मर जाता तो....
त्त्ताअद्दददाअक्ककक........
एक थप्पड़ की आवाज़ के साथ पूरे रूम मे सन्नाटा छा गया....
मेरी बात पूरी होती उससे पहले ही आंटी ने उठ कर मुझे एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया....
मैं थप्पड़ खा कर हक्का-. रह गया और गाल पकड़ के चुप-चाप खड़ा रह गया...
और आंटी रोती हुई मुझे गुस्से से देखने लगी....
आंटी- क्या कहा तूने....नाटक....हाँ..किया मैने नाटक...पर तेरे साथ नही...बल्कि उनके साथ जो तेरी जान के पीछे पड़े है....
मैं मानती हूँ कि मैने तेरे दुश्मनो का साथ दिया...पर संजू की कसम ...मैने कभी तेरा बुरा नही चाहा....
मैं ये भी मानती हूँ कि मैं आकाश को मारना चाहती हूँ...पर तुझे मारना....ये तो मैं सपने मे भी नही सोच सकती ...
आंटी बोलते-2 फिर सिसकने लगी...और मैं अभी भी चुप चाप गाल पर हाथ रखे उन्हे देखता रहा....
आंटी(सम्भल कर)- तूने क्या बोला था...मेरी ममता के बारे मे....तो सुन...तुझे मैने संजू से अलग नही समझा ...कभी भी...
तुझे खरॉच भी आती है ना ..तो जख्म मेरे सीने पर होता है...और तू...
और क्या बोला था....हाँ...मेरी कहानी सुन कर लोग माँ पर भरोशा करना बंद कर देगे....हाँ..
अरे बेटा...तुझे क्या पता...कि कितना दर्द सहा है मैने....एक तरफ तू मुझे जान से प्यारा है...और दूसरी तरफ तेरे डॅड...जिसे मैं जान से मारना चाहती हूँ....
तुझे क्या लगता है...कि मैं तेरे डॅड को मार नही पाई...
अरे उसे तो मैं तभी मार देती जब तू छोटा था....पर उसकी मौत से तुझे दुख होता....यही सोच कर उसे नही मारा....समझा....
और तू मेरी ममता पर शक करता है....
माना कि जिंदगी मे मैने कई ग़लतियाँ की...और इसमे से एक ये भी कि मैं सेक्स की आदि हो गई....
पर यकीन मान बेटा...मैं तेरे पास सिर्फ़ हवस मिटाने नही आई थी...वो तो मैने मजबूरी मे किया था...
और उसके बाद जो खुशी मुझे तुमसे मिली....उसी वजह से मैं तेरी हो गई...और बार-2 तेरे साथ आई...
मैं मानती हूँ कि मैं ग़लत हूँ...पर ये मत बोल कि मेरी ममता झूठी है...बेटा...जा और पूछ अपनी आया सविता से....तुझे इसी सीने से दूध पिलाया है मैने.....
आंटी की बातों मे एक अलग ही आग दिख रही थी....उनकी आँखो मे आँसू भरे हुए थे और आँखे उनके दिल के दर्द को आँसुओ के साथ बाहर निकाल रही थी....
मैं अभी भी चुपचाप आंटी की बातों को सुने जा रहा था....
आंटी- बेटा...मैं तेरी माँ ना सही...पर मैने तुझे अपना सगा बेटा ही माना है...भले ही तू मुझसे नफ़रत करे...पर मेरे दिल मे तू मेरा बेटा बनकर ही रहेगा....
और आंटी ज़ोर से रोते हुए बेड पर बैठ गई....
आंटी- अलका....काश तुम जिंदा होती....
और इतना बोल कर आंटी पूरी तरह टूट कर रोने लगी....
आंटी का ऐसा रूप देख कर मैं शॉक्ड हो गया था...मेरे मुँह से कोई सब्द भी नही निकल रहे थे.....
आज आंटी की कही हर एक बात ने मेरे दिल को चीर कर रख दिया था....
आंटी ने थप्पड़ तो मेरे गाल पर मारा था...पर उसकी चोट मेरी आत्मा पर लगी थी....
पता नही क्यो...पर अब मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था. ...मैं यही सोच रहा था कि मैने ऐसा क्यो किया....
माना कि आंटी ग़लत थी...पर मुझे उनसे डाइरेक्ट बात करनी चाहिए थी...उनसे वो वजह पूछनी चाहिए थी, जिस वजह से वो मेरे खिलाफ खड़ी थी...
पर ये मैने क्या किया...मैने आंटी की ममता को गाली दी...उनके प्यार को नाटक बोल दिया....
आकाश एक होटेल के रूम मे एंटर हुआ तो सामने वाले को देख कर चौंक गया...
आकाश- आप....आप तो बिल्कुल मेरी....
इससे पहले कि आकाश बात पूरी कर पाता...उसके सिर पर पीछे से हमला हुआ और वो बेहोश हो गया....
आकाश के बेहोश होते ही सामने खड़े आदमी ने एक कॉल लगाया...जो एक औरत ने उठाया....
औरत- हाँ...क्या हुआ जी...
आदमी- काम हो गया...हमारे दोस्त ने जैसा प्लान किया था...वैसा ही हो रहा है...
औरत- वाहह...अब आगे सभाल कर काम करना...ठीक है...
आदमी- हाँ मेरी जान...ये मेरी लाइफ का एकलौता मक़सद है...चिंता ना करो...अब रखता हूँ...जल्दी फ़ोन करूगा...
और आदमी ने कॉल कट कर दी...
औरत(फ़ोन रख कर)- तेरा मक़सद...हहहे...मक़सद तो मेरा है...तू तो मेरे हाथ की कठपुतली है...और तेरे दोस्त भी...लास्ट मे तो वही होगा...जो मैं चाहती हूँ...
आज़ाद मल्होत्रा....अब देखना....तेरे पितरो(पूर्वजों) को पानी देने वाला भी नही बचेगा....हहहे.....
Re: चूतो का समुंदर
संजू के घर.......
आंटी की चुदाई कर के मैं फ्रेश हुआ और सोचने लगा कि आंटी से बात कहाँ से शुरू करू.....
मैं चाहता था कि सब कुछ प्यार से हो जाए...क्योकि कही ना कही मुझे भी आंटी से प्यार था और इसलिए उनको हर्ट करना सही नही समझता था....
थोड़ी देर बाद आंटी भी फ्रेश हो कर आ गई और आते ही मेरे बाजू मे लेट गई...
आंटी- हाँ..तो अब बता...क्या काम था...क्या करना है मुझे....
मैं- आंटी....आपको कुछ करना नही....बल्कि...सिर्फ़ कुछ बताना है....
आंटी- मतलब....क्या बताना है....खैर जो भी हो....तू बोल तो सही....
मैं- हाँ...आंटी आपको मेरे सवाल का सच-सच जवाब देना होगा....ठीक है...
ये बात मैने आंटी को घूरते हुए बोली...जिससे आंटी के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई और वो भी सीरीयस हो गई...
आंटी- जवाब...कैसा जवाब बेटा....
मैं(बेड पर बैठ कर)- आंटी...अंकल की विस्की कहाँ है...
आंटी(रिलॅक्स हो कर)- ओह...तो ये बात थी...तुझे पीना है...अभी देती हूँ...
और फिर आंटी ने विस्की उठाई और एक पेग बना दिया...
आंटी- बेटा...ज़्यादा मत पिया कर....और ये बता कि इतनी सी बात के लिए संजू की कसम...क्यो बेटा....
मैं- आप ग़लत समझी आंटी...ये वो सवाल नही था...ये तो बस यू ही...मन हो गया....
आंटी- आख़िर ऐसी क्या बात है जो तू ड्रिंक का सहारा ले रहा है....बता तो सही...क्या सवाल है तेरा...पूछ बेटा ...
आंटी ने ये बात मेरे सिर को सहलाते हुए बड़े प्यार से बोली....
मैने एक पेग ख़त्म किया और दूसरा पेग बना कर खड़ा हो गया....
मैं- आंटी...आपसे कुछ पूछने के पहले मैं आपको कुछ बताना चाहता हूँ...ताकि बाद मे कोई प्राब्लम हो...सब क्लियर रहे....
आंटी(सीरीयस हो कर)- क्या...ऐसी क्या बात है बेटा...तू मुझे टेन्षन देना छोड़ और जल्दी से बता....बोल भी दे बेटा...
मैं- रिचा, कामिनी, दामिनी, दीपा, विनोद और....और रजनी....
और मैं ये नाम बोलकर पेग के घूट मारने लगा....
आंटी- हाँ....तो....मतलब..मैं कुछ समझी नही...
मैने एक सीप और मारी और पलट कर आंटी की आँखो मे देख कर बोला....
मैं- इन सब मे एक बात कॉमन है...बता सकती हो कि वो क्या है...ह्म्म्म्....
आंटी- हाँ...कामन...यही की सब आपस मे...मतलब तू सबको जानता है....
मैं- ह्म्म...पर एक बात और भी है...इनका टारगेट....जिसे ये सब मिटाना चाहते है...
ये बात सुनकर तो आंटी के चेहरे का रंग बदलने लगा...शायद उन्हे मेरी बात का मतलब समझ आ रहा था...
आंटी- टीटी..टारगेट...कैसा टारगेट....मैं कुछ नही समझी...
मैं(आगे झुक कर आंटी को आँखे दिखा कर)- बकवास बंद करो....आप सब जानती हो....वो टारगेट मैं हूँ...मैं और मेरे डॅड...अब याद आया...कि अब भी नही समझी...
अब तो आंटी को सब समझ आ चुका था और मारे डर के उनके होंठ थथराने लगे थे....
आंटी- बब्ब..बेटा ...वो...ये तू...क्या कह रहा....
मुझे भी अब विस्की की वजह से जल्दी गुस्सा आ गया था....
मैं(बीच मे)- अब बस भी कर....कितना नाटक करेगी....
आंटी- न...नही बेटा...म्म्म...मैं तो...
मैं- बस आंटी...चुप रहो....मैं सब कुछ जान चुका हूँ....तुम सब मेरे और मेरे डॅड को मारना चाहते हो...है ना...और झूठ मत बोलना...क्योकि ये बात तुम्हारे ही साथी ने बोली है मुझसे....
अब आंटी के पास बोलने के लिए कुछ नही था...वो समझ चुकी थी कि वो पकड़ी गई है...
अब उनके चेहरे पर डर के भाव थे और आँखे भी नम हो चुकी थी....उन्होने अपना चेहरा झुका लिया था....और आँसू बहाने वाली थी....
मैने आंटी का मुँह पकड़ कर उपेर उठाया और बोला...
मैं- अब बोल...सही कहा ना मैने...हाँ...
और मैने आंटी का चेहरा झटक दिया...
आंटी- बब्ब..बेटा...वो...मैं...
और इससे ज़्यादा आंटी कुछ नही बोल पाई बस आँसू बहाने लगी....
मैं पूरे गुस्से मे आ चुका था....मैने अपना पेग ख़त्म किया और आंटी के कंधे पकड़ के उन्हे झकझोर दिया
मैं- बोल ना....सही कहा ना मैने...तू मुझे मारने वाली थी ना....हाअ....
आंटी ने कोई जवाब नही दिया बस आँसू बहाते हुए सिसकने लगी...
मैं(खड़ा हो कर ताली बजाते हुए)- वाह...क्या ड्रामेबाज औरत है ...मान गये....वाह....
अरे ऐसी आक्टिंग तो बॉलीवुड वाले भी नही कर सकते....हाहाहा....क्या आक्टिंग है...मज़ा आ गया....
आंटी मेरे ताने सुन कर भी कुछ नही बोली...बस रोती रही...
मैं- कैसी औरत है...एक तरफ मुझे अपना बेटा बोलती है...और मेरी जान के पीछे...थ्हूओ...
अरे कमाल तो ये है की अपने मंसूबे पूरे करने के लिए मेरे लंड के नीचे तक आ गई....वाह...कमाल की रंडी भी है....
मैं आंटी को भड़का रहा था कि आंटी कुछ बोले...बट अभी भी उनका रोना जारी था....
आँसू तो मेरे भी निकलने लगे थे...मुझे भी दुख हो रहा था....
मैं- कहती थी मेरी माँ है...माँ...इस शब्द का मतलब भी पता है तुझे...
वैसे माँ बनने का नाटक भी मस्त किया हाँ....मेरे मन का खाना खिलाना...मेरी चिंता करना....मुझे चोट लगी तो आसू बहाना....वाह...
अरे तू तो ममता की मूरत बनी थी मेरे लिए....
पर अब किसी को मत बोलना कि तू मुझे बेटा मानती है...
वरना लोग क्या कहेगे....माँ बनकर बेटे को ही ठिकाने लगाने चली थी...
अरे तेरी कहानी सुन कर लोगो का माँ की ममता पर से भरोसा उठा जायगा.....
लोग माँ को पूजना छोड़ देगे....समझी...
अरे तेरे जैसी माँ मिलने से अच्छा तो मैं बिन माँ के ही मर जाता तो....
त्त्ताअद्दददाअक्ककक........
एक थप्पड़ की आवाज़ के साथ पूरे रूम मे सन्नाटा छा गया....
मेरी बात पूरी होती उससे पहले ही आंटी ने उठ कर मुझे एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया....
मैं थप्पड़ खा कर हक्का-. रह गया और गाल पकड़ के चुप-चाप खड़ा रह गया...
और आंटी रोती हुई मुझे गुस्से से देखने लगी....
आंटी- क्या कहा तूने....नाटक....हाँ..किया मैने नाटक...पर तेरे साथ नही...बल्कि उनके साथ जो तेरी जान के पीछे पड़े है....
मैं मानती हूँ कि मैने तेरे दुश्मनो का साथ दिया...पर संजू की कसम ...मैने कभी तेरा बुरा नही चाहा....
मैं ये भी मानती हूँ कि मैं आकाश को मारना चाहती हूँ...पर तुझे मारना....ये तो मैं सपने मे भी नही सोच सकती ...
आंटी बोलते-2 फिर सिसकने लगी...और मैं अभी भी चुप चाप गाल पर हाथ रखे उन्हे देखता रहा....
आंटी(सम्भल कर)- तूने क्या बोला था...मेरी ममता के बारे मे....तो सुन...तुझे मैने संजू से अलग नही समझा ...कभी भी...
तुझे खरॉच भी आती है ना ..तो जख्म मेरे सीने पर होता है...और तू...
और क्या बोला था....हाँ...मेरी कहानी सुन कर लोग माँ पर भरोशा करना बंद कर देगे....हाँ..
अरे बेटा...तुझे क्या पता...कि कितना दर्द सहा है मैने....एक तरफ तू मुझे जान से प्यारा है...और दूसरी तरफ तेरे डॅड...जिसे मैं जान से मारना चाहती हूँ....
तुझे क्या लगता है...कि मैं तेरे डॅड को मार नही पाई...
अरे उसे तो मैं तभी मार देती जब तू छोटा था....पर उसकी मौत से तुझे दुख होता....यही सोच कर उसे नही मारा....समझा....
और तू मेरी ममता पर शक करता है....
माना कि जिंदगी मे मैने कई ग़लतियाँ की...और इसमे से एक ये भी कि मैं सेक्स की आदि हो गई....
पर यकीन मान बेटा...मैं तेरे पास सिर्फ़ हवस मिटाने नही आई थी...वो तो मैने मजबूरी मे किया था...
और उसके बाद जो खुशी मुझे तुमसे मिली....उसी वजह से मैं तेरी हो गई...और बार-2 तेरे साथ आई...
मैं मानती हूँ कि मैं ग़लत हूँ...पर ये मत बोल कि मेरी ममता झूठी है...बेटा...जा और पूछ अपनी आया सविता से....तुझे इसी सीने से दूध पिलाया है मैने.....
आंटी की बातों मे एक अलग ही आग दिख रही थी....उनकी आँखो मे आँसू भरे हुए थे और आँखे उनके दिल के दर्द को आँसुओ के साथ बाहर निकाल रही थी....
मैं अभी भी चुपचाप आंटी की बातों को सुने जा रहा था....
आंटी- बेटा...मैं तेरी माँ ना सही...पर मैने तुझे अपना सगा बेटा ही माना है...भले ही तू मुझसे नफ़रत करे...पर मेरे दिल मे तू मेरा बेटा बनकर ही रहेगा....
और आंटी ज़ोर से रोते हुए बेड पर बैठ गई....
आंटी- अलका....काश तुम जिंदा होती....
और इतना बोल कर आंटी पूरी तरह टूट कर रोने लगी....
आंटी का ऐसा रूप देख कर मैं शॉक्ड हो गया था...मेरे मुँह से कोई सब्द भी नही निकल रहे थे.....
आज आंटी की कही हर एक बात ने मेरे दिल को चीर कर रख दिया था....
आंटी ने थप्पड़ तो मेरे गाल पर मारा था...पर उसकी चोट मेरी आत्मा पर लगी थी....
पता नही क्यो...पर अब मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था. ...मैं यही सोच रहा था कि मैने ऐसा क्यो किया....
माना कि आंटी ग़लत थी...पर मुझे उनसे डाइरेक्ट बात करनी चाहिए थी...उनसे वो वजह पूछनी चाहिए थी, जिस वजह से वो मेरे खिलाफ खड़ी थी...
पर ये मैने क्या किया...मैने आंटी की ममता को गाली दी...उनके प्यार को नाटक बोल दिया....