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चूतो का समुंदर



यहाँ फार्महाउस मे

मैं अपने रूम मे बैठ हुआ अपने आदमी के कॉल का वेट कर रहा था....

मुझे थोड़ी टेन्षन भी थी कि कहीं पोलीस मेरा काम खराब ना कर दे...और टेन्षन की वजह से मैं 2 पेग गटक चुका था....

काफ़ी इंतज़ार के बाद मेरे आदमी का कॉल आ गया...

( कॉल पर)

मैं- क्या हुआ...???

स- होना क्या था...इनस्पेक्टर आलोक वहाँ पहुच चुका है...

मैं- ओह्ह...अच्छा ये बताओ कि कामिनी ने क्या बोला पोलीस से ..

स- वो बेचारी तो डरी हुई है...उसने कहा कि उसने दीपा को देखा है...

मैं- अच्छा...तो क्या उसकी बात मानी किसी ने...

स- कह नही सकते...वहाँ सब की आँखो मे सवाल था..डर नही...

मैं- ओके...और ड्राइवर ने कुछ बोला...??

स- वही बोला जो उसे समझ मे आया था...

मैं- ह्म्म...और कुछ हुआ...??

स- हाँ...पोलीस ने एंक्वाइरी की ..पर कुछ नही मिला...हमने सब सॉफ कर लिया था..

मैं- गुड...अब आगे क्या...??

स- अब इनस्पेक्टर आलोक ये केस देखेगा...और कामिनी को एक और झटका मिलने वाला है...

मैं- पर कैसे...और कब...??

स- ह्म्म..बहुत जल्द...और ये झटका दूर से मिलेगा...

मैं- ओह..अच्छा है..मुझे बता देना...

स- ह्म..वेल्ल अभी तो खुश हो जाओ...पहला स्टेप सक्सेसफूल रहा ...

मैं- ह्म्म..आइ एम हॅपी...अब जल्दी से दूसरे स्टेप की खूसखबरी देना..

स- ओके...गुड नाइट...

मैं- गुड नाइट..बाइ...

कॉल रखने के बाद मैने खुश हो कर एक पेग और बनाया...और पेग पीते हुए सोचने लगा कि आज रात खुशी के मौके पर चुदाई तो बनती है...

पर किसकी करूँ...चलो लॅपटॉप मे नज़र दौड़ाते है...फिर डिसाइड करूँगा...नही तो चंदा तो है ही...

यही सोच कर मैने लॅपटॉप ऑन किया और सबके रूम मे देखने लगा...

सबसे पहले मैने ज़िया के रूम मे देखा...

देखु तो सही कि अपने बाप का लंड का कर क्या कर रही है.....

ज़िया आराम से लेटी हुई थी और उसके बाजू मे गुल लेटी हुई ज़िया से बातें कर रही थी...

गुल- दीदी...प्लीज़ कुछ करो ना...

ज़िया- ओह हो गुल..आज नही...आज मैं थक चुकी हूँ..

गुल- आप तो आ गई अपनी आग भुझा कर...अब मैं क्या करूँ..??

ज़िया- ओह मेरी जान...थोड़ा रुक जा तेरी आग भी भुजवा देगे...

गुल- कितना रुकु दीदी...अब बर्दास्त नही होता...

ज़िया- तो रब्बर का लंड ले और सुरू हो जा..पर मुझे सोने दे...

गुल- नही दीदी...रब्बर के लंड से मेरी चूत खोल तो दी..अब क्या उसी से मरवाती रहूं...मुझे असली चाहिए...

ज़िया- वो भी दिलवा दूगी...

गुल- कब दीदी...आपने कहा था कि अंकित भाई से बोलेगी ..पर आप भूल ही गई...

ज़िया- ऐसा नही है मैं उससे बात करूगी ना...

गुल- अभी करो...जबसे उनका लंड देखा है तब से बहुत मन होता है..प्लीज़ दी...

ज़िया- अभी...नही-नही...कल पक्का करूगी...

गुल- नही दी...अभी करो...मुझे अभी चाहिए...ओह्ह अंकित भाई..फक मी ना...

और ये बोलती हुई गुल अपनी चूत को नाइटी के उपेर से ही मसल्ने लगी...

गुल की तड़प देख कर मैं फुल गर्म हो गया...वैसे भी ड्रिंक करने के बाद मैं गरम हो ही चुका था...

मैने सोचा कि क्यो ना आज की रात नये माल को चख कर अपनी खुशी बढ़ाऊ...

और यही सोच कर मैने पेग ख़त्म किया और फ़ोन उठाकर ज़िया को कॉल लगाया....

(कॉल पर)

मैं- ज़िया..मेरे रूम मे आओ...

ज़िया- अभी..सॉरी यार मैं थक गई हूँ...आज नही..

मैं(ज़ोर से)- आती है कि नही...या फिर मैं आउ वहाँ...

ज़िया- अंकित...तुम ऐसा...

मैं(बीच मे)- 2 मिनट मे मेरे रूम मे आजा..वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा...

और मैने कॉल कट कर दी...

 
ज़िया पर गुस्सा तो तभी से था जबसे उसको अपने डॅड के साथ चुदवाते देखा था...

और अब मुझे मना करते ही मेरा गुस्सा भड़क गया था...

थोड़ी देर मे ही मेरे रूम पर नॉक हुई...

मैने जल्दी से लॅपटॉप छिपाया और गेट ओपन कर के ज़िया को अंदर खीच लिया...

ज़िया- आहह..क्या करते हो..

मैं- चुप कर ..

मैने ज़िया के बाल पकड़े और उसके गाल पर चपत लगाते हुए बोला...

मैं- बहुत बोलने लगी..हाँ..भूल गई..मेरी बिच है तू..ह्म

ज़िया- आहह..सॉरी...मैं थक गई थी..नीद आ रही है..

मैं- तो सो जा...मेरे बेड पर..

ज़िया- पर...

मैं(बीच मे)- डोंट वरी..मैं यहाँ से जा रहा हूँ ..तू आराम से सो जा...

ज़िया(आँखे बड़ी कर के)- पर तुम कहाँ जाओगे...

मैं- सिंपल है..तुम मेरी जगह और मैं तुम्हारी जगह...

ज़िया- पर वहाँ तो गुल है..

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..बट मुझे लगता है कि मेरे साथ गुल को अच्छी नीद आयगी...

ज़िया(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...आज उसे सुला ही दो ...ह्म्म..

फिर ज़िया ने मुझे किस किया और जा कर मेरे बेड पर पसर गई..और मैं गुल के पास निकल गया....

गुल का गेट खुला हुआ था...शायद ज़िया के जाने के बाद उसने बंद ही नही किया...

गुल अपनी आँखे बंद किए हुए अपनी पैंटी के उपर से अपनी चूत सहला रही थी...

गुल को देख कर मैं मुस्कुरा दिया और आराम से गेट बंद कर के बेड के पास चला आया....

मैने जाते ही गुल के हाथ पर अपना हाथ रख दिया जो उसने अपनी चूत पर रखा हुआ था...

मेरा हाथ लगते ही गुल की आँखे खुल गई जो अभी तक मस्ती मे बंद थी....

गुल ने मूह से तो कुछ नही कहा लेकिन उसकी आँखो मे डर और खुशी सॉफ-सॉफ दिख रहे थे...

डर इस बात का कि मैने उसे रंगे हाथो पकड़ लिया था और खुशी इस बात की...कि जिसको याद कर के वो अपनी चूत रगड़ रही थी...वही उसकी चूत पर हाथ रखे सामने खड़ा हुआ है...

मैने थोड़ी देर तक उसको देखा और फिर देखते हुए ही अपना हाथ उसकी चूत पर फिराने लगा...

अब हम दोनो के हाथ मिल कर उसकी चूत को रगड़ रहे थे...और हमारी आखे एक-दूसरे को देख रही थी....

थोड़ी देर के बाद चूत की रगडाइ से गुल मस्त हो गई और आँखे बंद कर के मज़ा लेनी लगी....

मैं भी मस्ती मे आ चुका था...और मैं गुल की चूत रगड़ते हुए उसके उपेर झुकने लगा...

गुल पूरी तरह से गरम हो चुकी थी...वो अपनी आँखे बंद किए हुए हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रही थी...

मैने झुक कर अपना मूह उसके बूब पर रख दिया और कपड़ो के उपेर से ही बूब को मूह मे भर लिया..

गुल ने एक पल के लिए अपनी आँखे खोली और मुझे देख कर वापिस आँख बंद कर के सिसकने लगी...

 


अगले कुछ मिनिट मैं गुल की चूत मसल्ते हुए उसके बूब्स को बारी-बारी चूस्ता रहा...और गुल को पूरा गरम कर दिया...

गुल मस्त होकर अपनी गान्ड को झटके दे कर चूत मसलवा रही थी...

फिर मैने बूब्स चूसना छोड़ा और चूत से भी हाथ उठा लिया...

मेरे रुकते ही गुल ने अपनी आँखे खोल कर मुझे देखा...जैसे पूछ रही हो कि क्यो रुक गये...

पर मैं बिना बोले उसके पैरो के सामने आया और झुक कर उसकी पैंटी को दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे खीचने लगा...

गुल ने भी बिना कुछ बोले अपनी गान्ड उठा कर पैंटी को नीचे जाने दिया और देखते ही देखते गुल की पैंटी उसके बदन से अलग हो गई...

पैंटी निकलते ही गुल की रसभरी चूत मेरे सामने आ गई...जो पानी बहा रही थी...

फिर मैं हाथो के बल चूत के उपेर झुक गया और गुल को देखा तो उसने बिना कुछ बोले अपनी टांगे खोल कर छूट को खोल दिया..

मैने गुल को एक स्माइल दी और झुक कर उसकी चूत पर जीभ फिरा दी....और गुल की सिसकी निकल गई...

गुल- आअहह....

मैने फिर चूत के दाने को होंठो मे फसा कर मसलना चालू कर दिया....जिससे गुल की सिसकियाँ बाद गई...

गुल- आअहह...आआहह...उूुउउंम्म...उूउउंम्म...ऊओह....

मैं- उूुुउउम्म्म्मम....उूुउउम्म्म्म...उूउउंम...

गुल- ओह्ह्ह...ऊहह...उउउंम्म....उउउफ़फ्फ़..आअहह.....

थोड़ी देर तक चूत के दाने को होंठो से मसल्ने के बाद मैने चूत पर जीभ फिराई और चूत चाटना सुरू कर दिया...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प...

गुल- आहह...आहह...उउउंम्म...उउंम...

मैं- सस्रररुउउप्प...उउंम्म..सस्स्रररुउउप्प्प..आहह..

गुल- ऊहह...एस...एस्स..उउफ़फ्फ़....आअहह....उउंम्म..

थोड़ी देर बाद मैने चूत मे जीभ घुसा दी और जीभ से उसे चोदने लगा...

मैं- उउंम..उउंम..उउंम..उउंम्म...

लेडी- ओह...ओह...यस...येस्स...सक इट...यस...एस्स...

मैं- उउंम..उउंम..उउंम..उऊँ..उउंम..

गुल- अंदर तक...यस...डीपर...सक..इट..एस्स..

और गुल की चूत मेरी जीभ के हमलो से झड़ने लगी....

गुल- ऊहह...एस्स...कोँमिंग..ओह्ह..ऊह...ओह्ह..आआहह....आआओउउउंम्म....

मैने चूत को मूह मे भर लिया और चूत रस पीने लगा...

मैं- उउंम..उउंम..सस्ररूउगग...सस्ररूउगग...

गुल- येस...सक ..सक..सक..ओह्ह..ऊहह..येस्स..

चूत रस पीने के बाद मैं खड़ा हो गया....

खड़े होकर मैने गुल को देखा तो वो शरमा गई...पर बोली कुछ नही...

मैने भी बिना बोले अपने कपड़े निकाल दिए और अपने खड़े लंड को हाथ से पकड़ कर गुल की तरफ देखा....

गुल बिना बोले बेड पर बैठ गई..और मैने उसे अपने पास खीच लिया...

मेरे पास आते ही मैने गुल की नाइटी निकाल दी...अब वो पूरी नंगी थी..

मैने फिर से अपना लंड दिखाया तो गुल घुटनो पर झुक गई और मेरे लंड को पकड़ कर देखने लगी...

थोड़ी देर बाद गुल ने अपनी जीभ को लंड पर फिराना चालू कर दिया....

गुल- सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प.....सस्स्स्रररुउप्प्प...सस्र्र्ररुउउप्प्प्प....

मैं- आअहह.....मूह मे लो....

गुल ने बिना कुछ बोले आधा लंड मूह मे भर लिया और चूसना सुरू कर दिया....

गुल मस्ती मे लंड चूसने लगी और मैं हाथ बढ़ा कर मैं उसकी गान्ड सहलाने लगा.....

गुल-सस्ररुउउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प्प…ऊओंम्म्मममह…सस्स्रररुउउप्प्प...

मैं-आअहह…ज़ोर से..पूरा लो....

गुल-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्रररुउउप्प्प्प…उउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम.....

मैं- येस्स्स...ऐसे ही...उूउउम्म्म्मम....

गुल- उउउंम...उउउंम्म....उउउंम..सस्स्रररूउउग़गग...सस्स्रररुउउउगग़गग....उूुुउउम्म्म्मम...

मैं- आआहह...कम ऑन...ओह्ह्ह..येस्स..ईससस्स....

अब मेरा लंड पूरा तैयार हो चुका था...इसलिए मैने गुल को रोक दिया...

 
गुल को रोकते ही मैं बेड पर चढ़ गया और गुल को लिटाते हुए उसके उपेर लेट गया...

मैने गुल की आँखो मे देखा तो उनमे सॉफ-सॉफ दिख रहा था कि वो चुदाई के लिए तड़प रही है...

मैं भी पूरा तैयार था और मैने गुल की चूत पर लंड सेट कर के एक धक्का मारा और सुपाडा अंदर चला गया ...

गुल- आआअहह...

मैं- बस ...थोड़ा सा...

और फिर धीरे -धीरे दो धक्को मे मैने पूरा लंड गुल की चूत मे डाल दिया....

गुल- आआईयईईई....उउउम्म्म्मम...आअहह...

गुल की आँखो मे आसू आ गये पर उसकी आवाज़ मे खुशी थी...

मैने धीरे -2 चुदाई सुरू कर दी और झुक कर गुल को किस करने लगा...

गुल ने भी अपने पैर मेरी कमर मे फसा कर अपनक गान्ड उछालते हुए चुदाइ का मज़ा लेने लगी...

मैं- उउंम्म..सस्स्रररुउउप्प्प...उउउंम्म..

गुल- उउउंम्म...उूउउम्म्म्म..आअहह...उूउउंम्म..सस्स्ररुउप्प्प

थोड़ी देर बाद मैने गुल को किस करना छोड़ा और तेज़ी से चुदाई सुरू कर दी...

गुल- आह..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह...

मैं-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए..

गुल-ऊहह….म्म्माहआ…आआहह….अहहाा..उउंम्म...

मैं- ओह्ह्ह...ईसस्स....उउउंम...

थोड़ी देर बाद मैने चुदाई रोकी और उठ कर गुल को पलटा दिया और कमर पकड़ के उपेर उठाने लगा...

गुल मेरा मतलब समझ गई और अपने आप डॉगी स्टाइल मे आ गई ...

मैने देर ना करते हुए उसकी चूत मे लंड डाल दिया और चुदाई सुरू कर दी...

गुल- आहह...आअहह...आअहह...आअहह...

मैं- येस्स...यीहह...ईएह...ईएसस्स....

गुल- उउउंम...आहह...आअहह...आआहह...

मैं- एस्स...कम ऑन...ऊओ.. ..येस्स...येस्स..येस्स...

मैं पूरी स्पीड से गुल को चोद रहा था और गुल भी गान्ड पीछे कर के मस्त चुदवा रही थी...पर अभी तक बोली कुछ नही...

हमारी सिसकियाँ और गुल की गान्ड पर मेरी जाघो की थाप रूम मे गूँज रही थी..और चुदाई का रंग चरम पर था...

करीब 15 मिनिट की चुदाई मे गुल फिर से झड़ने लगी...

गुल- आअहह...आआहह....माऐईन्न...आआईयइ...उूउउंम ...आअहह....

गुल झड़ने के साथ ही ढीली पड़ गई...

और मैने थोड़ी देर चुदाई कर के लंड बाहर निकाल लिया और गुल को पलटा कर उसे किस करने लगा...

थोड़ी देर बार गुल फिर से गरम होने लगी और उसने मुझे लिटा कर खुद उपेर आ कर चूत मे लंड भर लिया और मेरे उपेर झुक कर चुदवाने लगी....

गुल- आअहह...येस्स....फक..आअहह...

मैं- गुड...जंप बेबी...ईीस्स..ईीस्स..

गुल- आअहह...आअहह...ऊहह..एस्स...फक..फक...फक...आअहह...

गुल पूरी स्पीड से उछल कर अपनी चूत मरवाने का मज़ा ले रही थी...

गुल- आअहह..आहह..आहह..आअहह...

मैं- ओह्ह..एस्स...ईसस्स...ईसस्स....

गुल पूरी स्पीड से अगले 10-15 मिनिट उछलती रही और एक बार फिर से झड़ने लगी...

गुल- आअहह ...आअहह...आअहह...माइन...ग्गाऐइ...आअहह...

मैं भी गुल के साथ ही झड़ने लगा...

मैं- आइ एम कँम्मिंग बेबी...ईएह....ईएह...

हम दोनो के झाड़ते ही चुदाई का तूफान ख़त्म हो गया...

 
थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद हम अलग हुए और गुल मुझे देख कर शरमा गई और उठ कर बाथरूम मे चली गई...

थोड़ी देर बाद हम दोनो फ्रेश हो कर एक दूसरे की बाहों मे समा गये और पता नही कब हम नीद के आगोश मे चले गये...

आज की रात तो मेरे लिए बहुत ही अच्छी थी...शुरुआत भी और अंत भी....

रात सुरू होते ही कामिनी के खिलाफ मेरे प्लान कामयाब रहा...

और फिर रात मे एक नई जवानी को जी भर कर चखने का मौका मिला....जिसे चखने के बात रात का अंत हुआ....

पर यहाँ से कही दूर इस रात ने सुरू होते ही एक नये ख़तरे की दस्तक दे दी थी....

दूर कही सुनसान सड़क पर रात के सन्नाटे को चीरते हुए एक कार आगे बढ़ी जा रही थी...

देखते ही देखते उस कार ने मेन रोड से उतर कर एक कच्चे रास्ते पर चलना सुरू कर दिया...

और रास्ते की धूल उड़ती हुई एक गाओं मे दाखिल हो गई....

गाँव मे चारो तरफ़ अंधेरा छाया हुआ था...शायद बिजली गुल थी...

उपेर से गाओं के लोग जल्दी ही सो जाते है...जिस वजह से चारो तरफ सन्नाटा छाया हुआ था...

बस कुछ लोग गाओं के चौपाल के पास आग जला कर बैठे हुए गप्पे मार रहे थे....

तभी वो कार आकर वहाँ रुकी और कार से एक औरत उतर कर चौपाल के पास बैठे लोगो के पास पहुचि....

औरत- सुनो...

आदमी 1- हाँ मेम्साब...कहिए...

औरत- क्या कोई बता सकता है कि आज़ाद मल्होत्रा कहाँ रहते है....??

औरत की बात सुनकर वहाँ बैठे लोग चौंक कर एक-दूसरे को देखने लगे...

औरत- क्या हुआ...बताइए...??

आदमी 1- आज़ाद मल्होत्रा...वो कौन है...???

आदमी 2- हाँ मेम्साब...कौन है वो...और आप कौन है...??

औरत(गुस्से मे)- तू होता कौन है मुझसे बोलने वाला...सीधे से मेरी बात का जवाब दे....

औरत की बात सुनकर वहाँ बैठे लोग ताव मे आ गये और खड़े हो गये...

आदमी1- क्या कहाँ...??

आदमी 2- ज़्यादा गर्मी दिखा रही है...

आदमी 3- नही बताते ...बोल क्या करेगी...

औरत भी समझ गई कि अगर गुस्सा दिखाया तो प्राब्लम उसे ही होगी...इसलिए मौके की नज़ाकत समझते हुए बोली...

औरत- देखो..मेरी बात का ग़लत मतलब मत निकालो...वो क्या है ना कि मेरे बाबूजी बहुत बीमार है...बस कुछ दिनो के मेहमान है वो...और इस समय वो अपने दोस्त यानी कि आज़ाद से मिलना चाहते है..आख़िरी बार...

और इतना बोलकर औरत आँसू बहाने लगी....

औरत को रोता देख कर लोगो का गुस्सा कम हो गया...

आदमी- तो ऐसा बोलती ना मेडम...माफ़ कीजिए हमे पता नही थी आपकी परेसानि..

आदमी 2- हाँ मेम्साब...हम माफी चाहते है. .

औरत- कोई बात नही...आपकी कोई ग़लती नही है...अब तो आप बताएँगे कि आज़ाद मल्होत्रा कहाँ रहते है...

आदमी- देखिए मेडम..उस नाम का कोई इंसान इस गाओं मे नही रहता...

औरत- पर मेरे बाबूजी ने तो यही पता बताया था ...

आदमी- माफ़ करना मेडम...पर शायद आपको ग़लत पता मिला है...यहाँ कोई आज़ाद नही रहता...

औरत- ग़लत मैं नही...ग़लत तुम लोग हो...

आदमी- क्या...क्या बोला...हम झूठे है क्या..??

 


एक बार फिर से लोग गरम होने लगे...औरत इस बात को समझ गई और माफी माग कर वापिस कार के पास आ गई...

उसने सोचा क़ि किसी और से पूछती हूँ...इनसे बहस करने दे मुझे ही दिक्कत होगी...

जब औरत अपनी कार के पास खड़ी हुई आगे के बारे मे सोच रही थी...तभी उसके सामने एक आदमी आ गया...

जिसे देख कर औरत शॉक्ड हो गई....

औरत- त्त्त...तुम कौन हो..??

आदमी- देखिए मेडम...घबडाओ मत...मैं आपकी मदद करने आया हूँ...

औरत- मतलब..??

आदमी- मेडम...मैं तबसे खड़ा हुआ आपकी बाते सुन रहा था...आप आज़ाद मल्होत्रा को ढूँढ रही है ना...??

औरत- हाँ...और तुम मेरी मदद...कैसे...??

आदमी- यहाँ कोई भी आपको आज़ाद के बारे मे कुछ नही बातायगा...

औरत- तो तुम कैसे मदद करोगे...??

आदमी- मैं आपको उस इंसान से मिला सकता हूँ...जो आपको आज़ाद के बारे मे बता सकता है...

औरत- ह्म्म..पर तुम मेरी मदद क्यो करना चाहते हो...??

आदमी- पैसो के लिए....और क्या...

अओरत- ह्म्म..कितने पैसे चाहिए...??

आदमी- 10000 बस...

औरत- 10000...नही...इतना नही दुगी...500 चाहिए तो बोलो...

आदमी- तो जाओ फिर...आपको कभी पता नही चलेगा आज़ाद के बारे मे...

आदमी जाने लगा तो औरत सोच मे पड़ गई और उसे रोक लिया...

औरत- ओके..ओके...दूगी...पर पहले उस आदमी से मिलावाओ तब...

आदमी- ह्म्म..पर अभी नही...अभी आप मेरे घर पर चलिए...हम उससे सुबह मिलने जायगे...

औरत- सुबह क्यो...

आदमी- क्योकि वो रात को अयाशी मे बिज़ी होगा..और इस समय उसे डिस्टर्ब किया तो उल्टा हमारी जान ले लेगा...बहुत ख़तरनाक है वो...

औरत- ओके...तो सुबह ही चलेगे...अभी यहाँ से चलो..

आदमी उस औरत को अपने साथ अपने घर ले गया......रात निकालने के लिए...

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यहाँ किसी गाओं मे ....

सोनू(सुषमा का बेटा) आख़िरकार उस जगह पहुच गया था...जिस जगह का अड्रेस उसे रश्मि ने दिया था......

यहाँ इसे किसी के कहने पर एक जान लेनी थी....

जब सोनू यहाँ पहुचा तो उसे रुकने की जगह बताने के लिए एक इंसान पहले से रेडी था...

उसने सोनू के रहने -खाने की पूरी ब्यबस्था कर दी थी....

सोनू इस समय बेड पर लेटा हुआ अपने पापा की तस्वीर को देखते हुए आँसू बहा रहा था...

और आने वाले वक़्त के बारे मे सोचते हुए अंदर ही अंदर डर रहा था....

तभी सोनू का मोबाइल बजने लगा...ये उसी इंसान का कॉल था जिसने सोनू को इस काम के लिए भेजा था...

अननोन- हाँ मेरे शेर...पहुच गया ठिकाने पर ..

सोनू-ह्म्म्म ...

अननोन- ह्म्म...मज़ा आ रहा है ना...

सोनू- मज़ा...कैसा मज़ा...मैं सिर्फ़ मजबूरी मे यहाँ हूँ..समझे...

अननोन- हाहाहा ....मजबूरी...ह्म्म...तब भी...मज़ा तो आ रहा है ना...

सोनू(गुस्से मे)- चुप करो...और काम की बात करो...

अननोन- ह्म्म..तो सुन...ये काम 2 दिन बाद करना है....तब तक प्रॅक्टीस कर ले...

सोनू- प्रॅक्टीस...मैं कोई खेल नही खेलने आया...समझे...

अननोन- ह्म्म..खेल तो हम खेल रहे है...इसलिए प्रॅक्टीस करवा रहे है...हाहाहा...

सोनू(गुस्से मे)- बस करो...सॉफ-सॉफ बोलो....

अननोन- ओके..उस ब्रीफकेस को ओपन करो..जो रश्मि ने दिया था..

सोनू- पर उसका कोड ..

अननोन(बीच मे)- 3589 ...ओपन करो..

सोनू ने ब्रीफकेस खोला तो वो चौंक गया...

अननोन- खुल गया...??

सोनू- हाँ..पर इसमे तो...स्निपर..

अननोन- ह्म्म...स्निपर..

सोनू- पर मैं तो राइफ़ल ...

अननोन- तभी तो बोला था कि 2 दिन प्रॅक्टीस करो...ओके..

सोनू- पर..यहाँ - कहाँ...??

अननोन- वो मेरा आदमी बता देगा...अब रेस्ट करो...

इससे पहले की सोनू कुछ कहता...कॉल कट चुका था....

सोनू ने स्निपर को देखा और थोड़ी देर बाद ब्रीफ़केस बंद कर के फिर से गमो के सागर मे डूब गया और अपने पापा की तस्वीर देखते हुए रोने लगा......

 


यहाँ सहर मे ..मेरे सीक्रेट हाउस मे...

मेरा आदमी स बाकी सब को काम समझ रहा था...

तभी उसके 2 लोग एक नये बंदे को लेकर वहाँ आ गये...

आदमी 1- सर...ये है वो...

स- ओह..तो ये है...क्या नाम है तुम्हारा...

रॉनी- मेरा नाम रॉनी है सर...

स- तो रॉनी...मैने सुना है...तुम टेक्निकली बहुत एक्सपर्ट बंदे हो..ह्म्म..

रॉनी- सर..अपनी तारीफ़ तो नही करता...पर हाँ...मैं कंप्यूटर्स न्ड फ़ोन रिलेटेड सभी काम चुटकियों मे कर सकता हूँ....

स- ह्म्म..तो तुम हमारे लिए काम करोगे...??

रॉनी- सर..अब आपको कौन मना कर सकता है..पर मुझे कोई प्राब्लम तो नही होगी ना...

स- मैं हूँ ना...डोंट वरी...

रॉनी- तो ठीक है सर...मैं तैयार हूँ...

स- गुड...तो फिर अपना सेटप लगाओ...और जो भी चाहिए हो वो माँग लेना...

फिर स ने एक आदमी को रॉनी की हेल्प के लिए बोला और अंदर के रूम मे आ गया...

स ने अंदर बैठे सक्श को देख कर बोला...

स- सब रेडी हो रहा है...बस तुम रेडी रहना..ओके...

और फिर स अपने काम पर लग गया...

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कामिनी के घर

कामिनी का पैर तो पहले से ही फ्रॅक्चर था...उपेर से आज उसके साथ ये हादसा हो गया...

जिस वजह से कामिनी को देर रात तक नीद नही आई थी...

वो जब भी सोने की कोशिस करती तो उसके सामने दीपा का चेहरा आ जाता और वो डर जाती...

जैसे-तैसे बेचारी को बहुत देर बस्ड़ नीद आई...

पर कामिनी 1-2 घंटे ही सो पाई थी कि उसके बेड के बाजू मे रखा लॅंडलाइन फ़ोन बजने लगा....

त्ररििनननज्ज्ग....त्त्त्र्र्रिईनननगज्गग...

काफ़ी देर बाद एक झटके के साथ कामिनी की आँख खुली...वो अभी भी डरी हुई थी...

थोड़ी देर मे उसे समझ आया कि फ़ोन बज रहा है तो उसने कॉल लिया...

(कॉल पर)

कामिनी- हेलो...

सामने से कोई नही बोला..बस तेज़ हवा के चलने की आवाज़ आई...

कामिनी- हेलो...कौन...

सामने- हेलो कम्मो...

ये आवाज़ सुन कर कामिनी के चेहरे पर पसीना आ गया और उसकी आवाज़ लड़खड़ाने लगी....

कामिनी- हेलो..कौन है...कौन है...

सामने- काम निकलते ही भूल गई कम्मो...

कामिनी- द्द्द...दीपा...तततुउउउंम्म..

सामने- हाँ...मैं...तेरी दीपा....हहहे....

कामिनी- नही...तू तो मर गई है...

सामने- हाँ..तेरी वजह से...और अब मैं तुझे मारने आई हु...अभी...हहहे.....

कामिनी- क्या...नही...हेलो...हेलो...हेलो...

और फ़ोन कट हो गया....

कामिनी की तो हालत पतली हो गई...उसके चेहरे पर हवाइयों उड़ने लगी...और रूम मे खामोशी छा गई...

थोड़ी देर बाद रूम मे कुछ गिरने की आवाज़ आई और साथ मे ज़ोर से एक और आवाज़ निकली.....

न्न्ी दननणन्नाआआआहझहहिईीईईईईईईईई......

फार्महाउस पर....

रात की चुदाई के बाद मैं और गुल आपस मे लिपटे हुए सो रहे थे....

सुबह जब मेरी आँख खुली तो गुल मेरे साथ नही थी....

मैं उसको ढूँढने की कोशिस करता इससे पहले ही बाथरूम का गेट खुला और गुल मेरे सामने आ गई...

गुल ने अपने जिस्म पर टवल लपेट रखी थी..और उसके बालों से पानी की बूंदे उसके सीने पर लूड़क रही थी...

गुल बिल्कुल फ्रेश दिख रही थी...पर मैं उसके सामने पूरा नंगा बैठा हुआ था....

गुल मुझे देख कर शरमाने लगी और अपनी नज़रे झुका ली...

मैने अपने आप को देखा तो गुल के नज़रे चुराने की वजह समझ गया...

पर गुल को सामने देख कर मेरा लंड फिर से फूलना सुरू हो गया...

मैं बेड से उठा और गुल के पास आ गया...

मुझे करीब देखते ही गुल की साँसे तेज होने लगी और शर्म से उसके गाल भी गुलाबी होने लगे...

गुल की सांसो के साथ उसके बूब्स उपेर नीचे हो कर मेरे लंड पर बिजलियाँ गिराने लगे...

मैने अपने दोनो हाथो से गुल के कंधो को पकड़ा तो गुल की सिसकी निकल गई ....और चेहरा मेरे सामने आ गया..

गुल ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरी हरकत का इंतज़ार करने लगी...

मैने अपने होंठो को गुल के चेहरे के करीब किया तो उसकी गर्म साँसे मेरे होंठो को छु कर मेरे अरमानो को हवा देने लगी...

मेरा लंड भी आधा तन चुका था और गुल की जाघो के करीब पहुच रहा था...

मैने गुल की हालत देखी तो मेरे चेहरे पर स्माइल आ गई...

मैने धीरे से अपने होंठो को आगे बढ़ाया और गुल के माथे पर एक किस कर दिया...

मेरे किस करते ही गुल की आँखे खुल गई...और मैने उसको देख कर एक स्माइल दी और उसे साइड करके बाथरूम मे चला गया....

जब मैं फ्रेश हो कर वापिस आया तो गुल रेडी हो कर मेरा ही वेट कर रही थी...

उसकी आँखे सॉफ बता रही थी कि वो क्या सोच रही है...

वो यही सोच रही थी कि मैने उसे ऐसे ही क्यो छोड़ दिया...कुछ किया क्यो नही...जबकि मैं पूरा नंगा था और गुल भी नाम के लिए ही कपड़े से धकि थी...

पर मेरा इरादा कुछ और था ..इसलिए मैं रेडी हुआ और अपने रूम पर आ गया...

मेरे रूम मे ज़िया घोड़े बेच कर सो रही थी....

उसके दोनो पैर फैले हुए थे और नाइटी उपेर चढ़ि हुई थी...

उसकी पैंटी मे क़ैद चूत ने फिर से मेरे लंड को झटकने पर मजबूर कर दिया...

पर ये टाइम सही नही था...

मैने झुक कर ज़िया की चूत को पैंटी के साथ पकड़ कर ज़ोर से दबा दिया...

और एक चीख के साथ ज़िया जाग गई...

ज़िया- आअहह....तुम...आहह...

मैं- ह्म्म..मैं..अब उठो और निकलो..

ज़िया- आहह...अपना काम निकल गया तो निकलो...ह्म्म

मैं- उठती हो या कुछ और खातिर करूँ...

ज़िया- तो करो ना...अब मैं रेडी हूँ...

मैं- पर मैं नही...इससे पहले की कोई आ जाए...जाओ यहाँ से...

ज़िया मेरी बात समझ गई और उठ कर जाने लगी...

गेट तक पहुच कर वो पलटी और बोली..

ज़िया- अरे...ये तो बताओ कि रात कैसी कटी..???

मैं- मस्त...अच्छी नीद आई...

ज़िया- ओह हो...और गुल को..??

मैं- ह्म्म..वो उसी से पूछ लेना...

ज़िया- तुमने नही पूछा...???

मैं- मैने तो कुछ बात नही की और ना उसने...

ज़िया- मतलब..??

मैं- जाओ..उसी से पूछना...

ज़िया ने मुझे स्माइल दी और ओक कह कर निकल गई...

 


ज़िया के जाते ही मैने गेट लगाया और अपने आदमी को कॉल किया....

(कॉल पर)

स- ह्म्म...गुड मॉर्निंग अंकित

मैं- क्या बात है...अभी तक सो रहे है...

स- हाँ यार...काफ़ी लेट सोया था ना....

मैं- ह्म्म...अच्छा , काम हो गया...??

स- हाँ...हो रहा है...कल रात को छोटा सा झटका दे दिया है...अब आगे का खेल सुरू करना है...

मैं- ह्म्म...तो उसके लिए क्या प्लान है...

स- कुछ सोचा है...साम तक बताता हूँ...

मैं- अरे आप प्लान कीजिए....बस ...इस हद तक मजबूर करना है कि वो मरे भी ना और काम भी हो जाए...

स- ह्म्म...तुम कब आ रहे हो वैसे...??

मैं- जल्दी आउगा...वैसे एक बात और है...

स- क्या...??

मैं- मुझे पता चला कि मेरी जान को ख़तरा है...रजनी ने बताया...पर उसे ये नही पता कि किससे है...

स- अच्छा...तो सबसे पहले ये पता करता हूँ..की ख़तरा किससे है...ओके

मैं- ह्म्म..पता तो करो..कि किसकी शामत आ गई....

स- ह्म्म्म्..

मैं- ओके..बाइ...

बात ख़त्म करके मैं नीचे आ गया ..

फिर रोज की तरह नाश्ता करने के बाद घूमने का प्लान बनने लगा...

वसीम ने सबको बताया कि यहाँ आगे एक बहुत पुराना महल है...वहाँ घूमने चलेगे...

हम सब भी महल का नाम सुन कर एक्शिटेड थे...और कुछ देर बाद ही हम सब निकल गये....

करीब 3 घंटे के सफ़र के बाद हम सब एक बुराने से महल के सामने खड़े थे....

जिसका कुछ हिस्सा तो अच्छा था ..पर कुछ -कुछ जर्जर भी हो चला था...

उस महल के आगे एक बोर्ड पर लिखा था कि ये प्रॉपर्टी सम्राट सिंग की है...

तभी मोहिनी बोली...

मोहिनी- सम्राट सिंग...ये नाम कुछ सुना सा है ..

वसीम- क्या...कहा सुना...??

मोहिनी - अभी याद नही आ रहा...याद आयगा तो बताउन्गी...

फिर हम सब महल के अंदर जाने लगे....

तभी वहाँ का एक बुड्ढ़ा चौकीदार सामने आया और हमारा वेलकम किया...

पर मुझे देखते ही उसके माथे पर शिकन आ गई और वो मन ही मन कुछ बुदबुदा कर वहाँ से हड़बड़ाहट मे निकल गया ...

उसके इस तरह के बर्ताब से मैं शॉक्ड था...इसलिए मैने दूसरे चौकीदार से पूछा...

मैं- क्यो भाई..इन्हे क्या हुआ...??

चौकीदार- कुछ नही साब...बुजुर्ग है...कभी-2 होता है बुढ़ापे मे...आप आइए...

हम सब महल घूमने लगे तो अचानक से रूही मेरे पास आई और मुझे एक कोने मे खीच ले गई...जहाँ हमे कोई ना देख सके...

मैं(गुस्से से)- क्या है ये ..??

रूही- तुम नही जानते क्या..??

मैं- दिमाग़ मत खाओ...जल्दी बोलो..

रूही- बोलना क्या है...मुझे वही चाहिए जो एक लड़की एक लड़के से चाहती है...

मैं- ओह..तो अब तक भूत नही उतरा..मुझे लगा था कि अकरम का प्यार तुम्हे बदल देगा...

रूही- उसका प्यार तो मेरी जान है..पर मुझे तुम्हारा जिस्म चाहिए...

मैं- तुम बेशरम हो गई हो...

रूही- हाँ..हो गई...तुम्हे दिखाऊ अपनी बेशर्मी...

मैं- ऐसा क्या...तो आज बेशर्मी देख ली लेता हूँ...

रूही- मतलब..??

मैं- मतलब ये कि मैं कॉल करूँगा...और जहाँ भी कहुगा वहाँ तुम आ जाना...हम वही सेक्स करेगे...

रूही- पर कहाँ...??

मैं- तुम्हे क्या टेन्षन है..तुम तो बेशरम हो...कहीं भी हो..क्या फ़र्क पड़ता है...

रूही मेरी बात सुनकर थोड़ी सी घबराई पर तुरंत संभाल कर बोली...

रूही- ह्म्म..ठीक है...मैं आ जाउन्गी...पक्का ..

और अपनी बात बोल कर रूही निकल गई....

मैं भी आगे निकल कर महल देखने लगा...

महल मे गजब की नक्काशी की गई थी...चारो तरफ कई पिक्चर्स लगी हुई थी...

चलते-चलते एक दीवाल के सामने मेरे पैर थम गये...

दीवाल पर एक पेड़ बनाया गया था...जिसकी टहनियों पर एक-एक चेहरा बना हुआ था...

लेकिन मेरा ध्यान उस टहनी पर रुक गया ..जहाँ पर एक चेहरा जला हुआ था...

फिर मैने गौर किया तो पाया कि पूरी पिक्चर मे 3 जगह जलने का निशान था..

शायद उस जगह के चेहरे जला दिए गये होंगे....

तभी महल को देखने वाला एक आदमी मेरे पास आ कर बोला...

आदमी- साहब जी...ये इस महल के मालिक का परिवारिक चित्र बनाया गया है...एक पेड़ के आकार मे...

देखिए...सबसे पहले वो मुखिया( पेड़ की जड़ की पिक दिखा कर) और उसके बाद पीडी दर पीढ़ी को पेड़ की टहनियों की तरह बताया गया है...

मैं- ह्म्म..सुपर्ब...लेकिन ये बताओ..ये जली हुई पिक्स का क्या मतलब...??

आदमी- साहब जी..ये तो हमे नही पता..शायद जल गई होगी..धोखे से...

मैं- ओहक...

वो आदमी आगे चला गया ..पर मैने देखा कि मुझसे दूर खड़ा हुआ वो बुड्ढ़ा चौकीदार मुझे ही घूर रहा है...

जब मैने उसे देखा तो वो सकपका कर वहाँ से निकल गया...

उसकी नज़रे मेरे दिमाग़ मे सवाल पैदा कर रही थी...पर मैने उसे इग्नोर किया और आगे निकल गया...

आगे एक बड़ा सा आगन मिला...जहा पर अकरम मेरा ही वेट कर रहा था...

अकरम- अरे अंकित..चल मेरे साथ...

मैं- हाँ...पर कहाँ...??

अकरम- यार इस महल मे एक अंडरकवर तालाब है....हमे वहाँ जाने की पर्मिशन मिल गई है...तो चल

मैं- ह्म्म..पर कहाँ है वो..

अकरम- काफ़ी नीचे है...30 मिनट तो जाने मे लगेगे....

मैं(मन मे)- ह्म्म...यही मौका है रूही को निपटाने का....

अकरम- अब चल ना...

मैं- तू चल..मैं कुछ कॉल कर के आता हूँ...

अकरम- ह्म्म..ओक...वो आदमी खड़ा है ना..उसके साथ आ जाना..पर जल्दी..(अकरम ने एक आदमी की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा)

मैं- ओके..तू चल ..मैं आता हूँ...

अकरम के जाते ही मैने रूही को मेसेज कर दिया...

मैने रूही को दूसरी तरफ जा रही सीडीयों पर बुलाया था...जो एक गार्डन तक जाती है...

मैं जान गया था कि सबको तालाब तक जाने मे 30 मिनट लगेगे और आने मे भी...

और फिर वहाँ मस्ती करेगे तो टाइम लगेगा ना...और इतना टाइम काफ़ी था रूही का बॅंड बजाने के लिए....

मैं रूही को मेसेज कर के गार्डन के साइड निकल गया...

और नीचे आकर वही सीडीयो पर बैठ कर रूही का वेट करने लगा...

हम सबके जाते ही बूढ़े चौकीदार ने किसी को कॉल किया...

(कॉल पर)

बुड्ढ़ा- हेलो...

सामने- हाँ बोलो..

बुड्ढ़ा- प्रणाम मालिक..

सामने- ह्म्म..बोलो..क्या हुआ...

बुड्ढ़ा- मालिक..एक खास खबर है...

सामने- क्या...??

बुड्ढ़ा- मालिक..आज आकाश महल मे आया है...

सामने- क्या...आकाश ...वहाँ आया...??

बुड्ढ़ा- हाँ मालिक...उसके साथ और लोग भी है...

सामने- साथ मे कोई भी हो...तुझे यकीन है कि वो आकाश है...

बुड्ढ़ा- हाँ मालिक...

सामने- हाहाहा....साला आज खुद ही मौत के मूह मे आ गया...अब नही छोड़ुगा साले को...

बुड्ढ़ा- तो अब क्या करना है मालिक...

सामने- तू कुछ मत कर...मैं अपना आदमी भेजता हूँ...वो सब कर देगा...

बुड्ढ़ा- जी मालिक...

सामने- आज तूने बहुत अच्छी खबर दी मुझे....उसी के इंतज़ार मे जिंदा था मैं....

बुड्ढ़ा- मालिक...कुछ इनाम...

सामने(बीच मे)- काम हो जाने दे...फिर तुझे नोटो से तौल दूँगा...तू बस इतना याद रखना कि मेरे आदमी के आने से पहले वो जाय ना...

बुड्ढ़ा- ऐसा ही होगा मालिक..

सामने- ह्म्म..मैं भेजता हूँ अपने आदमी को...इंतज़ार कर....

फिर कॉल कट हो जाती है....

----------------

 


यहाँ रूही मेरा मेसेज मिलते ही कुछ बहाना कर के मेरी तरफ चली आ रही थी.....

रूही- अंकित ..अंकित...कहाँ हो यार...ओह..तुम यहाँ...ऊओह....

थोड़ी देर के इंतज़ार के बाद रूही मेरे पास आई और मुझे देखते ही शॉक्ड हो गई...और उसका मूह खुला का खुला रह गया....

मैं सीडीयों पर पहले से ही अपनी टी-शर्ट निकाल कर और पेंट नीचे किए हुए अपना लंड हिला रहा था....

रूही- तुम...यहाँ...ऐसे ....क्यो...??

मैं- गुड क्वाश्चन. ...मैने सोचा क्यो ना बेशर्मो के साथ थोड़ा बेशरम बन जाउ...

रूही- अच्छा...तो अब मैं इतनी गिरी हुई हो गई...हाँ..

मैं- नही...मैने ऐसा तो नही कहा...

रूही- कहा नही...पर हरकत तो ऐसी ही है...

मैं- ओके...तुम्हे बुरा लगा हो तो मैं चलता हूँ...

रूही- नही...मैने ऐसा तो नही कहा...

और रूही मेरे बाजू मे बैठ कर मेरे लंड को सहलाने लगी...

मैं- ह्म्म..अब क्या हुआ...बेशर्मी पसंद आ गई...

रूही(मुस्कुरा कर)- ह्म...अब बेशर्मी हो ही जाए....तुम भी क्या याद रखोगे...

मैं- अच्छा...दिखाओ तो ज़रा...

रूही- आज तो पूरी बेशर्मी दिखाउन्गी....

रूही ने मेरा लंड सहलाना चालू रखा....

मैं(मन मे)- लगता है आज ये चुद कर ही मानेगी...सॉरी अकरम....अब मैं नही रुक सकता...

मैं दिल से अकरम के बारे मे सोच रहा था बट दिमाग़ यही बोल रहा था कि मैं ग़लत नही...

और मेरी इस कस्मकस को रूही ने जल्दी से दूर कर दिया ..जब उसने झुक कर मेरे लंड को अपने मूह मे ले लिया....और चुसाइ सुरू कर दी...

रूही-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प्प…ऊओंम्म्मममह…सस्स्रररुउउप्प्प...

मैं-आअहह…..पूरा ले ले....

रूही-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्रररुउउप्प्प्प…उउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम.....

मैं- एसस्स...ऐसे ही...उूउउम्म्म्मम....

थोड़ी देर बाद रूही पूरी गरम हो गई और ज़ोर-ज़ोर से लंड चूसने लगी....

रूही-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प...उूुुउउम्म्म्मम...

मैं- अब क्या चूस के ही झडा दोगि....आअहह...

रूही ने मेरे बोलते ही लंड मूह से निकाल लिया...और अपना टॉप निकालते हुए बोली....

रूही- नही ..आज तो अंदर डलवा के ही रहूगी....

मैं- ह्म्म...चल आजा फिर...

रूही ने अपना टॉप और जींस निकाल कर साइड मे रखा और फिर मुझे भी नंगा कर दिया...

फिर रूही मेरी गोद मे बैठी और पैंटी को साइड कर के लंड पर चूत सेट कर ली...

मैने भी रूही की ब्रा को निकाल फेका और उसे पकड़ कर लंड पर दबा दिया...

मेरे दबाते ही रूही की चूत मे आधा लंड चला गया और उसकी चीख निकल गई...

रूही- आाऐययईईईईई......ऐसा क्यो किया...आआहह....

मैं- क्या..ऐसा क्या...

और मैने फिर से रूही को ज़ोर से नीचे दावाया और पूरा लंड उसकी चूत मे चला गया....

रूही- आआअहह....कमीने कही के....ऊओह...आअम्म्म्मि...

मैं- अब चुप कर और मज़े ले...समझी ना...

रूही- आअहह....फाड़ दी...

मैं- पहले से फटी है साली...ये ले...

और मैने रूही को लंड पर उछालना सुरू कर दिया....

थोड़ी देर बाद रूही नॉर्मल हुई और उछल-उछल कर चुदाई करवाने लगी...

रूही-अया..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह....

मैं-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए....

रूही-ऊओ….आमम्मि…आआहह….अहहाा....

मैं- ईएहह...येस्स...एस्स...एसस्सस्स...

मैने दोनो हाथो से रूही के बूब्स को मसल्ते हुए करीब 10 मिनिट तक उसकी चुदाई की...जिससे रूही झड़ने लगी...

रूही- आअहह...आअहह...म्म्माायन..गई...ऊहह..अम्मी...आहह...येस्स...एस्स....आअहह

रूही झाड़ते हुए उछल-उछल कर फुकछ-फ्फूक्छ की आवाज़ के साथ पस्त पड़ने लगी...

थोड़ी देर बाद मैने रूही को उठाया और सीडीयों के नीचे पेड़ के पास ले गया और उसे झुका कर पीछे से चुदाई सुरू कर दी....

रूही-आहह….उउउफफफ्फ़..म्माआ….

मैं- मज़ा आ रहा है ना...…

रूही-आहह…हाँ..…तुम बस..चूत मारो…ऐसे ही..आहह

मैने भी जूही के कहते ही उनकी गान्ड को पकड़ा ओर तेज़ी से धक्के मारते हुए उसे चोदने लगा…...

रूही-आअहह….आआहह..ऊहह..आमम्मि......

मैं-अब मज़ा आया...

रूही-आअहह…बहुत….मारो ना....अहहह....

रूही बोल ही रही थी कि मैने लंड बाहर तक निकाल कर एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा लंड चूत मे डाल दिया....

रूही-आआहह…..म्म्म्मा आररररर द्दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल्लाआ. ...

मैं-यीहह…ओर तेज मारु,….हाँ..

रूही-अया..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह

मैं-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए…ओर तेज..हाँ..

रूही-ऊओ….म्म्माजआ…आआहह….अहहाा.....

थोड़ी देर ऐसे ही खड़े-खड़े चुदाई कर के हम दोनो थकने लगे...

मैने चुदाई रोकी और रूही को नीचे घास पर लिटा दिया...

और उसकी एक टाँग उठा कर फिर से लंड को चूत मे उतार दिया....

रूही-आअहह….म्म्म्मलममाआअ...थोड़ा आराम से....आअहह

मैं- चिल्लाअ मत….मैं तो ऐसे ही फाड़ुँगा...

ओर मैने एक थप्पड़ रूही की गान्ड पर मारा...

रूही-आआहह…..आआअहह…आह….मारूव..आहह..तेज...ऊहह....

मैं- अरी....चिल्ला मत...कोई आ जायगा....ये ले...

रूही-आआहह….हहाा…ज्ज्जूऊर्र…सससे…मारो…आहह..अह्ह्ह्ह...

 
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