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Guest
मैं आवाज़ सुनकर हड़बड़ा गया था...सर्दी के मौसम मे भी मेरे माथे पर पसीना आने लगा था.....
मैं जैसा खड़ा था वैसा ही रह गया....एक मूरत की तरह....
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि अब क्या करूँ...क्या जवाब दूं....
जवाब तो बाद की बात है....पहले मैं उसका सामना कैसे करूँ....
सच मे बहुत बुरा हाल था मेरा....और मुझसे कहीं ज़्यादा बुरा हाल रूही का था....
रूही इस टाइम मेरे सामने आधी नंगी बैठी हुई थी....
रूही की जीन्स और पैंटी उसके घुटनो पर फसि हुई थी और उसके बूस नंगे ही बाहर उछल रहे थे......
रूही के मुँह मे मेरा लंड पड़ा हुआ अपने रस की अंतिम बूंदे छोड़ रहा था....
रूही का मुँह तो घबड़ाहट मे अटक गया था...ना तो बंद था और ना खुला...बस लंड दबाए हुए था....
रूही की आँखे घबड़ाहट मे फटी की फटी रह गई..और वो बिल्कुल सन्न रह गई थी...जैसे कोई सदमा लग गया हो...
कुल मिलाकर मैं और रूही पूरी तरह से घबडा गये थे और दोनो के दिमाग़ सुन्न पड़े थे....
तभी पीछे से फिर से आवाज़ आई...
"अरे बोल ना...क्या कर रहा है वहाँ खड़े-खड़े"
ये आवाज़ और किसी की नही बल्कि अकरम की थी....
अकरम हमारे पीछे साइड थोड़ी दूरी पर खड़ा हुआ मुझे आवाज़ दे रहा था....
जब अकरम ने फिर से आवाज़ दी तो मैने सोचा कि अब खड़े रहने से काम नही चलेगा....
यही ठीक होगा कि मैं अकरम से बात करूँ और उसे समझाऊ...
यही सोच कर मैने अपना मुँह पीछे साइड घुमाया तो मेरा दिल खुश हो गया....
पीछे देखने पर मुझे पता चला कि पीछे तो मेरे कंधे तक घनी झाड़ियाँ है....
और अकरम थोड़ी दूर खड़ा हुआ था....
इसका मतलब, अकरम हमे नही देख सकता ...
अकरम ने सिर्फ़ मेरे सिर देखा और रूही को तो देखा ही नही...
साला घबड़ाहट मे ये भी भूल गया था कि मैं झाड़िया देख कर ही यहाँ आया था रूही के साथ मज़े करने....
अब मेरे दिल का डर दूर हो गया था मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई ...तभी अकरम बोला...
अकरम- साले मुस्कुरा क्या रहा है...जवाब दे...
मैं- हाँ...क्या बोल रहा था...
अकरम- कर क्या रहा था तू...
मैं- ओह ..अरे यार थोड़ा धार मार रहा हूँ...अभी आया...
मेरी और अकरम की बातें सुन कर रूही भी थोड़ा रिलॅक्स हो गई....
रूही ने अपने मुँह से मेरा लंड निकाल लिया और अपने बूब्स को कपड़ो के अंदर करने लगी....
अकरम- जल्दी कर...और हाँ...रूही भी तो थी तेरे साथ...वो कहाँ है...???
मैं(मन मे)- अब क्या बोलूं...तेरी रूही तो मेरा लंड चूस कर नंगी बैठी है...अब क्या बताऊ...
अकरम- बता ना...कहाँ है रूही...
मैं- वो ...वो थोड़ा अंदर गई है जंगल के...
अकरम- जंगल के अंदर...पर क्यो...और अकेली क्यो गई...
मैं- यार...समझा कर ना...लड़की जंगल मे अकेली किस लिए जाती है...
अकरम- मुझे क्या पता...तुझे बता के गई होगी ना...
मैं- नही रे...वो बस बोल के गई कि आती हूँ....
अकरम- और तूने जाने दिया...अकेले...क्यो..??
मैं- अबे समझा कर ना...वो प्राइवेट काम से गई है...
अकरम- ओह्ह...समझ गया...अब तू क्या कर रहा है...
मैं(थोड़ा गुस्से से)-अरे मैं भी वही प्राइवेट काम कर रहा हूँ...आता हूँ...और हां...रूही भी आती होगी....
फिर मैने रूही की आँखो मे देखा ...वो मुस्कुरा रही थी...और मैने आँखो से उसे बता दिया कि उसे क्या करना है....
रूही ने अपना मुँह सॉफ किया और मुझे भी मेरे होंठ सॉफ करने का इशारा कर दिया....थोड़ी लिपस्टिक लगी हुई थी.....
फिर मैने लंड अंदर किया और अपने रुमाल से अपने होंठ सॉफ करते हुए झाड़ियों से निकल कर अकरम के पास आ गया....
अकरम- क्यो बे साले...इतना टाइम लगता है कोई...
मैं - सॉरी यार...वो थोड़ा गॅस बन गई थी....
अकरम- ह्म्म..अब ये रूही कहाँ रह गई...
मैं- आती होगी...डोंट वरी....
थोड़ी देर बाद पीछे से रूही भी आ गई....
अकरम को देख कर उसने चोन्कने का नाटक किया..और हमारे पास आ गई...