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Guest
अगली सुबह फिर से मेरी आँख अनु के जगाने से खुली....अनु ने मुझे जगाया और प्यारा सा किस करके निकल गई....
मैं भी रेडी हो कर नीचे आ गया....
आज सब नाश्ता कर चुके थे क्योकि मैं लेट जगा था...
नाश्ता करने के बाद मैं आंटी को बोलकर पारूल के साथ अपने घर निकल गया....
हम जैसे ही घर मे आए तो सविता अपने बेटे के साथ कहीं जा रही थी...साथ मे रश्मि भी जा रही थी....
मैं- कहाँ जाने की तैयारी है...???
सविता- वो...वो बेटा ..एक पहचान वाले के घर कथा है..वही जा रहे है...
मैं- तो इसमे इतना हड़बड़ाने की क्या बात है ..जाइए ...और रश्मि तुम भी जा रही हो ...???
रश्मि- जी सर...
मैं- ओके...रेखा कहाँ है...?
सविता- वो यही है...आप अचानक कैसे...कोई काम है क्या...??
मैं- क्यो..अब मैं अपने घर मे काम से ही आउगा क्या...
ये बात मैने गुस्से से बोल दी...और सब सहम गये....तभी अंदर से रेखा आ गई...
रेखा- अरे नही सर...आपका घर है...कुछ भी कर सकते है आप...
सविता- हाँ बेटा ..मेरा मतलब वो नही था...मैं तो ये कह रही थी कि आपके आने का पता होता तो हम जाना केन्सिल कर देते...
मैं- कोई नही..आप जाओ...रेखा है ना यहाँ..और पारूल भी है मेरे साथ....
सविता- ओके...हम जल्दी आते है...
और सविता, रश्मि और अपने बेटे के साथ निकल गई...हरी भी उनके साथ गया....
रेखा- सर...कॉफी पिएगे या कुछ और प्लान है...और मुस्कुरा दी...
मैं- ह्म्म्मम...अभी कॉफी पिलाओ...और एक पार्सल आया था...वो लाओ...
रेखा- हाँ..वो उस रूम मे है...लाती हूँ..
मैं- रूको....पारूल तुम जाओ उस रूम मे और उसमे रखी हुई ड्रेस ट्राइ कर लो...कोई प्रॉब्लम हो तो बताना....रेखा तुम कॉफी बनाओ....
पारूल ड्रेस ट्राइ करने रूम मे गई और रेखा खिचन मे...और मैं कॉफी का वेट करने लगा....
थोड़ी देर बाद कॉफी आई और ख़त्म कर के मैने रेखा को बोल दिया कि तुम पारूल के साथ रहना...खाना बनाओ...और मुझे कोई डिस्टर्ब नही करेगा....
मैं रेखा को समझाकर अपने रूम मे आ गया और मैने रूम लॉक करके डाइयरी ली और बेड पर आ गया....
जैसे ही मैं डायरी ओपन करने वाला था तो मेरा फ़ोन रिंग होने लगा....
मैने देखा कि ये तो अननोन नंबर. है...फिर मैने कॉल पिक की...
(कॉल पर )
मैं- हेलो....कौन...???
अननोन- हाई...हाउ आर यू ???
ये आवाज़ एक लड़की की थी पर कौन हो सकती है ???
मैं- आइ एम फाइन...बॅट सॉरी मैने आपको पहचाना नही...
अननोन- अरे...तो पहचानो....अब तो काफ़ी टाइम हो गया...???
मैं- टाइम हो गया...कैसा टाइम...सॉफ- सॉफ बोलो...
अननोन- ह्म्म..तो मैं कह रही थी कि लास्ट टाइम भी आपने मुझे नही पहचाना था...और आज भी नही....
मैं- तो बताइए ना कि कौन हो आप..??
अननोन- नही...आप जब तक पहचान नही पाते तब तक मैं नही बताउन्गी...
मैं- ओके..तो रखो...दिमाग़ मत खाओ...
(मुझे डाइयरी पढ़ के अपनी फॅमिली के बारे मे जानना था और ये बता नही रही थी कि कौन है...तो मुझे गुस्सा आ गया)
अननोन- गुस्सा मत करो...याद करो...आप हम से मिले हो...बात भी की...और हम ने कुछ कुछ भी किया था...जिसका अन्सर भी माँगा था...
मैं- ओके..याद करूगा...याद आएगा तो बता दूँगा...
अननोन- ओके...पर इस बार आपके पास सिर्फ़ 4 दिन है...वरना उसके बाद मैं आपसे कभी बात नही करूगी...और ना आपको मिलुगी...बब्यए
मैं- ओके बाइ...
मेरे बाइ बोलने के पहले ही उसने गुस्से से फ़ोन कट कर दिया....
और अब एक न्यू टेन्षन दे दी....कि कौन हो सकती है ये..??
उसकी बात सोच कर मुझे याद आया कि एक बार पहले भी इस का कॉल आया था...और तब भी मैं इसे पहचान नही पाया था ...
पर ऐसा कौन है जिससे मैने बात की...कोई कुछ पूछा ..और आन्स भी माँगा....आख़िर कौन है...
इस कॉल के बाद मैं डाइयरी को भूल कर उस अंजान लड़की के बारे मे सोचने लगा...कि ये कहाँ से आ गई....
थोड़ी देर सोचने के बाद भी मुझे कुछ याद नही आया और मैने गुस्से से हाथ झटका....