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Guest
मैने देखा कि स्मिता ने मेरा हाथ पकड़ लिया है ऑर वो हँस रही थी
मैं(शॉक्ड)-अब..क्या..???
स्मिता-अरे हीरो…तुम तो डर गये…मैं तो सोचती थी कि तुम स्ट्रॉंग निकलोगे पर तुम तो…
मैं-सॉरी मेडम…मैं डरपॉके नही पर लड़की के मामले मे बच के ही रहो..तो अच्छा..
स्मिता-अच्छा…तो फिर चुदाई क्यो करते हो…लड़कियो की…या ये बोलू की औरतों की…तब डर नही लगता…
मैं(शॉक्ड हो कर)-आपका….मतलब क्या है..???
स्मिता- अरे हीरो..अब ये नाटक छोड़ो मैने खुद देखा है….
मैने सोचा कि कही ये फ़ोन वाली तो नही…हो भी सकती है…पर आवाज़ अलग लग रही है…पूछ ही लेता हूँ…
मैं-आपको..कैसे ..आइ मीन कहाँ देखा…???
स्मिता-वो गार्डेन मे उस छोटे से घर मे…
मैं-(मन मे)-वहाँ तो मैने पायल को चोदा था..पर गेट तो लॉक था..इसने कहाँ से देख लिया..
मैं-आपने कहाँ से देखा…बताना ज़रा….
स्मिता-ह्म्म.....चलो एक-एक पेग लगाते है फिर बताती हूँ…
मैं-ओके
अब मेरे दिल से डर निकल गया था..ऑर उम्मीद भी बढ़ गई थी कि इसकी चूत मुझे मिल सकती है…पर मैं जल्दबाज़ी नही करना चाहता था….
यही सोचते हुए हम ने स्कॉच का 1-1 पेग लिया ऑर भीड़ से हट कर साइड मे खड़े हो गये ऑर पेग पीते हुए बाते करने लगे…
मैं-हाँ..अब बताइए…क्या देखा आपने
स्मिता-मैने देखा कि एक तगड़ा लंड एक शादीशुदा औरत की चूत ऑर गंद कैसे फाड़ता है…हहेहेहहे
मैं-अच्छा….पर देखा कैसे..
स्मिता-चलो शुरू से बताती हूँ....पर बैठ कर
मैं-ओके
हम ने एक नौकर से 2 चेयर्स को साइड मे लगवाया ऑर बैठ गये..
स्मिता-तो मेरा नाम तो पता ही है….मैं लड़के वालो की तरफ से हूँ…ऑर यहाँ कुछ रसमें शादी से पहले पूरी करनी थी तो मैं कल ही अपने पति के साथ आ गई थी….
मैं-ह्म्म्मे
स्मिता-यहाँ आ कर पता चला कि पूल पार्टी है…पर मैं पति की मर्ज़ी के खिलाफ नही जा सकती हूँ..ऑर वो पूल पार्टी को माने नही…तो मैं अपसेट हो कर गार्डेन मे टहलने आ गई….
जब मैं गार्डेन मे आई तो ये छोटा घर दिखा…मैने सोचा चलो यही देखते है तो मैं घर के पास आ गई…
पर घर अंदर से लॉक था तो मैने पीछे साइड से जगह देखनी चालू की..ऑर वहाँ मुझे गेट तो नही मिला पर एक खिड़की मिल गई…जहाँ से अंदर का नज़ारा दिख गया….….
मैं-ह्म्म..तो ये बात है…आपने सब कुछ देख लिया…
स्मिता-ह्म्म.....सब कुछ…हहेहहे
मैं-तो अब क्या आप मुझे ब्लॅकमेल करना चाहती है….
स्मिता-अरे यार तुम्हे मेरी आँखो मे ऐसा दिखा क्या….???
मैं-नही आँखो मे तो …
स्मिता-क्या..????
मैं-जाने दो..
स्मिता-अरे बोलो भी…
मैं-आँखो मे तो ऐसा दिखा कि आप पट गई मुझसे…
स्मिता-अच्छा...सच मे
मैं-ह्म्म्म..तभी तो आपको बुलाया …कि कुछ बात आगे बढ़े…
स्मिता-अरे पट तो तभी गई थी जब तुम्हारा हथियार देखा था….पर तुम फिर दिखे ही नही…मैं तो तभी से ढूढ़ रही हूँ….
मैं-अच्छा…किस लिए…???
स्मिता(नज़रे झुका कर)-वो…तुम्हारे साथ…
मैं-क्या…???
स्मिता-अरे यार सब समझते हो फिर भी…
मैं-बोलो..मेरे साथ..क्या…???
स्मिता-वो मुझे तुम्हारे साथ चुदाई…..ऑर शर्मा के अपना मुँह छुपा लेती है हाथो से…
मैं(हँसते हुए)-अच्छा…पर तुम अपने पति को बहुत प्यार करती हो…धोखा दोगि…??
स्मिता-प्यार तो करती हूँ..ऑर धोखा भी नही दूगी..पर
मैं-पर क्या…??
स्मिता- सच बोलती हूँ…मेरे पति सेक्स का मज़ा तो देते है पर वैसा नही जैसा मैं चाहती हू…मुझे दमदार चुदाई पसंद है …जैसी तुम कर रहे थे उस दिन..
मैं-फिर तुम्हारे पति…धोखा ही होगा ना..
स्मिता-धोखा तब होगा जब मैं उन्हे छोड़ दूं..पर कुछ देर मज़े करने मे कोई बुराई तो नही ना……इतना तो चलता है…शायद वो भी करते हो…
मैं-तुम्हे ठीक लगता है तो ठीक है…कर लेगे..
स्मिता-अभी..
मैं-अभी..????..क्यो…कहाँ..???