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चूतो का समुंदर

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वहाँ दूर किसी फार्महाउस पर आज़ाद और उसके दोस्त एक माँ- बेटी को चोदने मे बिज़ी थे...जब उनकी चुदाई ख़त्म हुई तो वो बैठ कर बाते करने लगे...

मदन- दोस्तो...मज़ा आया ना...

अली- हाँ यार..दिल खुश हो गया...क्यो आज़ाद...

आज़ाद- हाँ यार...दिल के साथ लंड भी खुश हो गया...

ऐसे ही हसी-मज़ाक करते हुए रात होने लगी और उसके बाद सब अपने-अपने घर आ गये.....

आकाश के घर सब लोग आकाश के जाने की तैयारी मे लगे हुए थे...

एक तरफ उसकी माँ और दीदी पकवान बनाने मे लगी थी...तो उसकी छोटी बेहन उसके कपड़े और बाकी का समान पॅक करने मे...

आकाश का भाई खुश था कि अब रूम उसका हो जाएगा..जिसको वो आकाश के साथ शेयर करता रहा था....

आज़ाद बेहद खुश था.. वो आकाश को अपने से भी बड़ा आदमी बनाना चाहता था और इसके लिए वो उसे कॉलेज मे पढ़ने भेज रहा था...

आकाश खुश था पर कहीं ना कहीं उसे घर छोड़ने का दुख भी था....

आकाश अब तक गाओं के महॉल मे पला-बढ़ा था...यहीं उसने चुदाई का स्वाद चखा और फिर पूरे गाओं मे लड़कियाँ और औरते पटा कर उन्हे चोदा...उसके फ्रेंड भी सब यही पर थे....

आकाश की बॉडी और उसके पापा के रुतवे की वजह से आकाश को गाओं मे कोई दिक्कत नही हुई और ये भी एक वजह थी जिससे उसे किसी को पटाने मे ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ी...

आकाश इस बात से अंदर ही अंदर परेशान था कि नई जगह पर कैसे रहेगा..कैसे लोग मिलेगे...दोस्त कैसे मिलेगे...और चुदाई का क्या होगा...

इसी सोच मे आकाश एक जगह बैठा हुआ था...आज़ाद ने उसे इस हालत मे देखा तो उसके पास आ गया...

आज़ाद- क्या हुआ मेरे शेर

आकाश- क्क़..कुछ नही पापा..

आज़ाद- मैं तेरा बाप हूँ...मुझसे कुछ नही छिपता..चल बता ..क्यो परेशान है....

आकाश- परेशान नही हूँ पापा ...बस ये सोच रहा था कि नई जगह का महॉल कैसा होगा..कैसे लोग होंगे...

आज़ाद- बस..इतनी सी बात...देखो बेटा किसी भी जगह..इंसान तो एक से ही होते है...बस हमें उन्हे समझने की ज़रूरत होती है....

आकाश- हाँ पापा..पर सहर के लोग...

आज़ाद- सहर के लोग भी हमारी तरह ही है बेटा...बस कुछ अंतर होता है...जैसे बोलने का तरीका...पहनने का तरीका..बस...

आकाश- तो मैं कैसे रह पाउन्गा वहाँ..

आज़ाद- मुझे मेरे बेटे पर भरोसा है...तू कही भी रह सकता है...किसी भी हालात का सामना कर सकता है ...और फिर हम सबका प्यार तो तेरे साथ ही रहेगा ना..

आकाश- पर पापा..मुझे आप सब से दूर रहना है...तो...

आज़ाद- बेटा...हम दूर कहाँ है...और सोच..कभी ऐसा हुआ भी की तुझे हम से दूर रहना पड़ा तो एक बात याद रखना...हम तेरे दिल मे होंगे और तू हमारे...बस तू टूटना मत...

आकाश- ओके पापा...मैं ऐसा ही करूगा...आपको नाज़ होगा मुझ पर...मैं कभी भी अपने आप को टूटने नही दूँगा और आप जैसा मुझे बनाना चाहते है...मैं वैसा बन कर दिखाउन्गा...

आज़ाद- ये हुई ना बात..सबाश मेरे शेर...

और फिर बाते करते हुए सबने खाना खाया और सोने के लिए अपने रूम मे निकल गये.....

रूम मे लेटे हुए आकाश अपने आने वाले दिनो का सोच रहा था....तभी उसे धर्मेश की बातें याद आई...और वो सोचने लगा कि वो भी एक ऐसी औरत को चोदता है..जो उसकी अपनी फॅमिली मेंबर जैसी है..और ये सही नही है...

फिर आकाश ने तय किया कि सहर जाने से पहले उस औरत से मिल कर बात करूगा...

थोड़ी देर बाद आकाश सो गया...

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वहाँ धर्मेश अपनी मौसी को चोद रहा था और तभी उसकी मौसी बोली.....

मौसी- तू खुश है ना..आहह..

धर्मेश- आहह..मज़ा आ गया मौसी...क्या टाइट गान्ड है...

मौसी- ह्म्म..पर ये तो बता की आकाश से मुझे क्यो चुदवाया...

धर्मेश- टाइम आने पर बता दूँगा...अभी बस तुम आकाश को खुश रखो...और इस टाइम तो सिर्फ़ मुझे...यहह...

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सुबह हमेशा की तरह आकाश अपने पापा के साथ कसरत करने निकल गया...

कसरत के बाद घर आकर रेडी हुआ उस औरत से मिलने...जिसकी चुदाई करने की बात उसे कल से परेशान करने लगी थी...

तभी मदन आज़ाद के घर आ गया और उसने बताया कि वो आज किसी काम से सहर जा रहा है ...

आज़ाद भी मदन के साथ सहर जाने के लिए रेडी हो गया...ताकि आकाश के रहने का इंतज़ाम देख सके जो मदन ने पहले ही करवा दिया था...

आज़ाद और मदन सहर निकल गये और आकाश पहुच गया मदन के घर...

आकाश , मदन की बीवी को चोदता था और उसे यही बात परेशान करने लगी थी...जबसे उसने धर्मेश की बात सुनी..कि तू भी तो किसी अपने को चोदता होगा और ऐसा करके तू किसी अपने को धोखा दे रहा हो...

आकाश को लगने लगा कि मदन उसके पापा के दोस्त है और उनकी पीठ पीछे उनकी वाइफ को चोदना सही नही...और आज वो यही बात करने मदन के घर आया था....

मदन के घर आते ही मदन की वाइफ उसके गले लग गई और चूमने-चाटने लगी...

(मदन की वाइफ का नाम सरिता था)

सरिता- उम्म..उऊँ..आहह..कितने दिनो बाद आए हो...उम्म..

आकाश- उम्म..आंटी..रूको...उउंम्म..

सरिता- आज नही...उउंम..सस्ररुउपप...

आकाश उसे रोकना चाह रहा था पर उसकी बॉडी उसके खिलाफ थी...फिर आकाश ने सोचा कि पहले छुदाई कर लूँ फिर इससे बात करूगा...आज के बाद सब ख़त्म....

आकाश भी सरिता के बूब्स मसल कर किस एंजाय करने लगा और ऐसे ही किस करते हुए दोनो बेडरूम मे आ गये...

फिर आकाश और सरिता ने एक दूसरे को नंगा किया और आकाश ने सरिता को बेड पर लिटाया और उसकी चूत चाटने लगा......

आकाश- सस्स्रररुउउप्प्प...उउंम...सस्ररुउउप्प्प...

सरिता- आहह...चतो मेरे राजा...बहुत दिन से ......आआहह...तरस गई

आकाश- उउंम..आहह...सस्ररुउपप...सस्ररुउप्प्प...

सरिता- ओह्ह..जीभ डाल दी..आहह..माँ...ओह्ह्ह..ओह्ह..

आकाश जीभ से सरिता को चोदने लगा और सरिता सिसकने लगी....

थोड़ी देर बाद आकाश ने सरिता को छोड़ा और बेड पर लेट गया....

सरिता समझ गई और आकाश के पैरों के पास बैठ गई और उसका लंड चाटने लगी...

सरिता- अओउंम...आहह..कब से वेट कर रही थी इसका....उउंम..आहह

थोड़ी देर तक सरिता ने लंड चटा और फिर मुँह मे भर कर चूसने लगी....

आकाश- ओह...एस...चूस..आहह...चूस मेरी जान...

सरिता- उम्म..उउंम..उउंम..उउंम..

सरिता ने लंड को चूस- चूस कर तैयार कर दिया....

आकाश ने सरिता को रोका और सरिता ने लंड छोड़ा और आकाश के पेट को किस करते हुए उसके उपेर चढ़ गई....

फिर सरिता ने उसके होंठो को चूसा और दोनो तरफ पैर रख कर अपनी चूत आकाश के लंड पर रगड़ने लगी...

सरिता- उउंम..यस बेटा...अब फाड़ दे जल्दी से...देख कैसी गरम हो गई मेरी चूत...

आकाश- ह्म्म..तो फिर हो जाओ शुरू...

सरिता ने लंड को सेट किया और उस पर बैठते हुए पूरा चूत मे भर लिया...

सरिता- आहह..ठंडक मिली...अब मज़ा आएगा..

और सरिता ने लंड पर उछलना शुरू कर दिया....

सरिता गान्ड हिला कर लंड ले रही थी और साथ मे झुक कर आकाश को किस कर रही थी....

आकाश भी नीचे से धक्के मार रहा था और सरिता के बूब्स मसल रहा था...

सरिता- ओह्ह..येस बेटा...ज़ोर से मार..आहह..आहह..

आकाश- ये लो आंटी...यस..एस्स..

ऐसे ही सरिता चूड़ते हुए झड़ने लगी...

सरिता- बेटा..मैं..आहह...आऐ...ओह्ह..यरसस.. .एस्स...एस्स..

आकाश- इतनी जल्दी...कोई नही...झड जा...ये ले...

सरिता चुदाई मे ज़यादा ही गरम थी इसलिए जल्दी झाड़ गई....

सरिता झड़ने के बाद स्लो हो गई तो आकाश ने खुद को घूमते हुए सरिता को नीचे कर दिया और खुद उपेर आ कर धक्के मारने लगा..

आकाश के धक्को के साथ सरिता का चूत रस आवाज़े बदलने लगा था...

सरिता- ओह्ह..येस्स बेटा..ज़ोर से चोद...आअहह...

आकाश- अभी तो झड़ी और फिर से...यहह..ये ले...

सरिता- आहह...हाँ बेटा...बहुत खुजली है...ज़ोर से मार..आहह..आहह...

आकाश- ये ले फिर...एस्स..एस्स..एस्स..

आकाश जोरों से सरिता को चोदे जा रहा था और रूम मे आवाज़े बढ़ने लगी...

 


आहह..आहह...येस्स...बेटा..मार.. ज़ोर से...आहह..फ्फक्च्छ..फ्फक्च्छ...यीह...ये ले...एस्स..एस्स..एस्स...आहह..आहह ..

सरिता- बेटा अब कुतिया बना के चोदो...

आकाश- तुझे कुतिया की तरह चुदना बड़ा पसंद है. .

सरिता- हाँ बेटा..तेरी कुतिया हूँ ना...अब मार ले कुतिया की..आअहह...

आकाश ने जल्दी से सरिता को कुतिया बनाया और एक ही झटके मे लंड डाल कर चोदने लगा.....

सरिता- उउउइई...माँ...फाड़ दे ..आहह...

आकाश- हाँ मेरी कुतिया...ये ले...यह..यीह...

सरिता- ओह्ह..एस..एस्स...ज़ोर से...हाँ..ओह्ह..

ऐसे ही कुछ देर की दमदार चुदाई से सरिता फिर झड़ने लगी...

सरिता- आहह...बेटा...कुतिया..गाइ..आहह...आहह..

आकाश- कम इन...एस्स..एस्स. एस्स..

सरिता झड़ने लगी और आकाश ने चुदाई चालू रखी...थोड़ी देर बाद आकाश भी झड़ने लगा...

आकाश- मैं भी आया..ओह...येस्स..आहह...यीह..यह..

सरिता- भर दो .. आहह....प्यासी चूत मे...हाँ...अंदर तक...एस्स...एसड..

आकाश- येस...टेक इट...यह....यह...

आकाश ने झाड़ कर पूरा लंड रस सरिता की चूत मे भर दिया और सरिता के उपेर लेट गया और दोनो किस करने लगे...

थोड़ी देर बाद दोनो नॉर्मल हुए और फ्रेश होने चले गये...

दोनो ने नहाते हुए फिर से एक दूसरे को चूस कर पानी निकाला और रेडी हो गये...

फिर दोनो बैठ कर बाते करने लगे कि तभी आकाश को अपनी बात याद आ गई....

आकाश- आंटी...मुझे कुछ बात करनी थी...

सरिता- हाँ मेरे राजा ...बोलो ना...

आकाश- आंटी...हमें ये सब ख़त्म करना होगा....

सरिता- क्या...मतलब क्यो...क्या हुआ...

आकाश- देखो आंटी ..मैं सहर जाने वाला हूँ...

सरिता(बीच मे)- अरे इतनी सी बात...चिंता मत करो...मैं भी सहर मे रहूगी...अपने बच्चो के साथ...वो मेरी माँ के साथ रहते है वही पर..और मैने भी तुम्हारे अंकल से वहाँ रहने का बोल दिया है...अब तो बस दिन रात तुमसे चुदवाउन्गी...

आकाश- नही आंटी...मैं अब आपके साथ ये सब नही करूगा...

सरिता(सीरीयस हो कर)- ये क्या बोल रहे हो...मुझसे मन भर गया...

आकाश- ऐसी बात नही है...पर अब मुझे आपके साथ ये सब....अच्छा नही लगता...

सरिता- अच्छा...पिछले 1 साल से मुझे अपनी रखेल की तरह चोद रहा था.. तब अच्छा लगता था और अब...

आकाश- आंटी प्लीज़...मैं बहक गया था..लेकिन अब समझ चुका हूँ कि आपके साथ ये करना ग़लत है...

सरिता- बकवास बंद करो...तुम मुझे ऐसे नही छोड़ सकते...समझे...

आकाश- सॉरी...पर आज के बाद मैं कुछ नही करूगा...

सरिता(पूरे गुस्से मे)- चुप कर...मुझे कुछ नही सुनना...तू मुझे ऐसे नही छोड़ सकता बस...

आकाश- आप चुप कीजिए...मैने कहा ना कि नही...मतलब नही...

सरिता- मैं भी देखती हूँ की कैसे छोड़ता है मुझे...

आकाश- छोड़ सकता नही...छोड़ दिया...अब मैं चलता हूँ..बाइ...

सरिता- सोच ले...मुझे छोड़ा तो तुझे और तेरे बाप को बदनाम कर दूगी..

अपने पिता का नाम सुनकर आकाश गुस्सा हो गया और झपट के सरिता का गला पकड़ लिया...

आकाश(गुस्से मे)- साली रंडी...मेरे पापा को बदनाम करेगी...उसके पहले ही मैं तुझे मिटा दूँगा..और हाँ..क्या कहेगी दुनिया से कि तू मेरी रखेल है...

सरिता- वो तो तुम्हे पता चल जाएगा....

आकाश- तो जा...जो करना है कर...पर इतना याद रखना कि मरेगी तू ही...कोई भी मेरी फॅमिली के खिलाफ कुछ नही सुन सकता इस गाओं मे...जानती है ना...

और आकाश ने सरिता को धक्का दे दिया और जाने लगा...

सरिता(पीछे से)- तुमने अभी सिर्फ़ मेरे जिस्म की गर्मी देखी है...अब ये भी देखना कि एक औरत जब किसी को बर्बाद करने का सोच लेती है तो क्या-क्या कर सकती है....अब तू गया...हाहाहा .....

आकाश सरिता की बात सुने बिना ही निकल गया था...उसने तय कर लिया था कि वो आज के बाद इसे नही च्छुएगा...

यहाँ सरिता अपनी ही आग मे जल रही थी...उसे लग रहा था कि आकाश का उससे मन भर गया इसलिए उसने उसे छोड़ दिया....

सरिता , आकाश की बात नही समझ रही थी बस इसे अपना अपमान समझ रही थी...

सरिता नंगी पड़ी रोती रही और जब रोना बंद किया तो गुस्से मे उसने ने तय कर लिया कि वो अपने अपमान का बदता ले कर रहेगी...आकाश को छोड़ेगी नही.....

आकाश ने आगे से सरिता की चुदाई ना करने का फ़ैसला किया ..क्योकि उसे लग रहा था कि सरिता उसकी फॅमिली के सदस्य की तरह है...क्योकि सरिता के पति को आकाश के पापा भाई मानते थे...

पर सरिता ने उसकी बात को नही समझा ...उल्टा वो इसे अपना अपमान समझने लगी और अपमान की आग मे जलने लगी...

सरिता, आकाश से इस बात का बदला लेना चाहती थी...वो कुछ ऐसा करने की सोचने लगी जिससे आकाश टूट जाए...

सरिता जानती थी कि इस गाओं मे क्या वो इस इलाक़े मे भी कोई आकाश और उसके परिवार के खिलाफ कुछ नही कर सकता....इसलिए वो किसी की हेल्प नही ले सकती थी....

सरिता ने तय कर लिया कि वो खुद ही सब करेगी और आकाश की कमज़ोरी ढूँढ कर उस पर बार करेगी....

वाहा दूसरी तरफ आकाश का खास दोस्त धर्मेश भी कुछ प्लान कर रहा था...

इसी प्लान के चलते धर्मेश ने आकाश से अपनी मौसी को चुदवाया था...

पर आकाश अभी धर्मेश और सरिता के प्लान से अंजान...अपने सहर जाने की तैयारी मे बिज़ी था...

आकाश अपनी आने वाली लाइफ के बारे मे सपने देख रहा था...कि अब वो कॉलेज मे जाएगा...नये दोस्त बनायगा...वहाँ के लोगो की तरह रहना सीखेगा..एट्सेटरा..

फिर भी कही ना कही वो गाओं को छोड़ कर जाने से दुखी भी था...पर वो अपना दुख छिपाए हुए था..जिससे उसके परिवार वाले भी उसे देख कर खुश रहे....

आकाश के घर पर सभी उसके जाने की तैयारी मे लगे हुए थे...धर्मेश के मन मे कुछ भी हो पर वो भी आकाश के साथ काम मे लगा हुआ था...

आख़िर कार आकाश के जाने का दिन आ गया...

आज़ाद ने आकाश के साथ अपने खास नौकर मोहन को भी भेजने का फैशला किया और मोहन की छोटी बहेन को भी घर को संभालने के लिए भेज रहा था...

कार मे समान लग चुका था...मोहन और उसकी बेहन भी रेडी थे....बस अब सब चलने को रेडी थे...

आकाश ने पहले अपनी माँ के पैर छु कर आशीर्वाद लिया...

रुक्मणी ने आशीर्वाद देने के बाद आकाश को उठा कर गले से लगा लिया और फुटक-फुटक के रोने लगी...

एक माँ वैसे तो अपने सभी बच्चो को जान से ज़्यादा चाहती है पर रुक्मणी का आकाश से खास लगाव था...

आकाश अपनी माँ को रोता देख कर भाबुक होने लगा ..पर उसे अपने पापा की बात याद आई कि मजबूत बनो..तभी आगे बढ़ पाओगे ...

आकाश ने अपनी माँ के आशु पोछे और उसे चुप करा लिया...

 


फिर आकाश अपनी दीदी और भाई से मिला...आकाश ने अपने भाई को उसके जाने के बाद घर का ख्याल रखने की बात बोली....

आकाश को उसके भाई को हिदायत देते देख कर आज़ाद को अपने बेटे पर गर्व हुआ की वो अपनी फॅमिली के बारे मे कितना सोचता है...

आकाश फिर अपनी छोटी बेहन को देखने लगा...जो कहीं दिख नही रही थी...

आकाश- माँ, छुटकी कहाँ है...

रुक्मणी- हूँ..क्या..वो यहीं होगी...छुटकी...छुटकी...

सब लोग आरती को आवाज़ देते हुए ढूढ़ने लगे..पर आकाश को पता था कि उसकी लाडली बेहन कहाँ होगी...

आकाश ने सबको शांत होने का बोला और अपनी हवेली के पीछे बने गार्डन मे चला गया...

जहाँ एक झूला था...जिस पर आरती बैठी हुई वेट कर रही थी...शायद उसे पता था कि उसका भाई ज़रूर आएगा . ..

जैसे ही आकाश ने आरती को झूले पर बैठा हुआ देखा तो उसने एक स्माइल कर दी....

आरती अपने सिर को नीचे किए बैठी थी और आकाश ने जाकर उसेके चेहरे को उपेर उठाया...

आकाश- ओह...ये क्या...मेरी छुटकी को क्या हुआ...

आरती- (चुप रही)

आकाश- अरे..अरे..मेरी गुड़िया की आँखो मे आँसू...बताओ किसकी वजह से है...मैं अभी उसे सज़ा दूँगा...

आरती(आँखे दिखा कर)- आपकी वजह से...

आकाश- ओह्ह..तो मैं अपने आप को सज़ा देता हूँ...

ते कह कर आकाश कान पकड़ कर उठक-बैठक करने लगा...

थोड़ी देर तक आरती आकाश को देखती रही और फिर उसके चेहरे पर मुस्कान आने लगी..

आरती- अब बस भी कीजिए भैया...

आकाश- जब तक तेरे आसू दिखेगे तब तक नही..

आरती(अपनी आँखे सॉफ कर के)- अच्छा..अब ठीक है..अब रुक जाइए...

आकाश रुक गया और आरती के बाजू मे झूले पर बैठ गया....

(आकाश और आरती के बीच ये खेल हमेशा से चलता है...जब भी आरती रोती थी या उदास होती थी तो आकाश उठक-बैठक करने लगता ..जिससे आरती जल्दी से मान जाती थी...क्योकि वो भी अपने भैया को तकलीफ़ मे नही देख सकती थी...)

आकाश- ह्म्म...अब बता...क्या बात है...??

आरती- कुछ नही भैया...बस आपके जाने का बुरा लग रहा था...

आकाश- इसमे बुरा कैसा...मैं तुझे छोड़ के थोड़े ही ना जा रहा हूँ..बस पढ़ने जा रहा हूँ ....

आरती- जानती हूँ..पर बुरा तो लगता है ना...

आकाश- ह्म्म..तो एक काम करता हूँ..मैं जाता ही नही...

आरती- नही भैया..ऐसा सोचना भी मत...आपको मेरी कसम...

आकाश- अब कसम दे दी तो जाना ही होगा...पर एक शर्त पर...

आरती- वो क्या...??

आकाश- ह्म्म...तुम जानती हो कि मुझे क्या चाहिए....

आरती ने आकाश की आँखो मे देखा और वो समझ गई की आकाश क्या कहना चाहता है और उसने एक स्माइल कर की और उठ गई...

आरती- अभी आई भैया...

आरती अंदर आई और थोड़ी देर मे एक कटोरी लेकर वापिस आ गई...

आरती- मुझे पता था कि आप इसके बिना नही जायगे...इसलिए मैने तेल गरम करके रखा था..

फिर आरती ने आकाश के सिर की मालिश शुरू कर दी...मालिश के दौरान आकाश, आरती से पूछता रहा कि उसे सहर से क्या चाहिए....और आरती भी अपने भाई को अपनी पसंद बताती रही...

आकाश- आहह..मज़ा आ गया..तेरे हाथो मे जादू है...माइंड फ्रेश हो गया ..

आरती- पर वहाँ आपकी मालिश कौन करेगा...

आकाश- ह्म्मान..एक काम कर..तू तेल भी रख दे ..मैं खुद से कर लुगा...

आरती- उसमे मेरे हाथो का जादू नही होगा...

आकाश- तो फिर मैं यही आ जाया करूगा...

आरती- ठीक है भैया...

फिर आकाश ने अपनी बेहन के माथे को चूमा और गले लगा लिया और दोनो बाहर आ गये...

रुक्मणी- कहाँ रह गया था बेटा..

आकाश- बस माँ...छुटकी को मना रहा था...

रुक्मणी- ह्म्म..देख छुटकी...अपने भैया को हंस कर विदा कर...ताकि वो मन लगाकर पढ़ाई करे और बड़ा आदमी बन जाए...

आरती- हाँ माँ..मेरे भैया बहुत बड़े आदमी बनेगे...पक्का..

आज़ाद- बेटा अब निकलने का टाइम हो गया..

आकाश ने अपने पापा से आशीर्वाद लिया और सबको बाइ बोलकर निकल गया...

आकाश के जाने से उसकी फॅमिली मे सब उदास थे...पर खुश भी थे क्योकि आकाश के लिए सबने बहुत सपने देख रखे थे.....

सहर मे आकाश भी उदास था पर जब उसने कॉलेज जाना शुरू किया तो उसकी उदासी कम होती गई...

कुछ दिन बाद सब नॉर्मल हो गया...

आकाश कॉलेज मे पढ़ाई करने लगा और उसका भाई गाओं के स्कूल मे पढ़ने मे बिज़ी हो गये...

लेकिन आरती ने स्कूल जाना शुरू नही किया...वो बचपन से ही अपने आकाश भैया के साथ ही स्कूल जाती थी...

इसलिए उसे अपने भैया के बिना स्कूल जाने का मन नही था...

आज़ाद और रुक्मणी भी उसकी भावना समझ रहे थे और यही सोच कर चुप थे कि कुछ दिन मे सब ठीक हो जाएगा...

आज़ाद भी अपने काम-काज मे बिज़ी हो चला था....

 


एक दिन आज़ाद का दोस्त अली अपने बेटे के साथ आज़ाद के घर आया...

बातों ही बातों मे आज़ाद ने अली को आरती के बारे मे बताया कि क्यो वो स्कूल नही जाती...

अली- यार इसी लिए तो मैं आया हूँ...

आज़ाद- मतलब...तुझे कैसे पता..??

अली- यार तू भूल गया...मेरा छोटा बेटा भी तेरी बेटी की क्लास मे पढ़ता है...उसी ने बताया..

आज़ाद- ह्म्म..तो अब बता.. उसे कैसे समझाऊ...

अली- यार जो काम हम बड़े नही कर सकते वो बच्चे कर लेते है...

आज़ाद- मतलब...??

अली- मतलब ये कि मेरा बेटा उसे स्कूल जाने को मना लेगा...

आज़ाद- वो कैसे..??

अली- तू खुद देख लेना..

फिर अली अपने बेटे को आरती के पास उसे मनाने भेज देता है...

(अली ख़ान का लड़का भी आरती के साथ पढ़ता था..उसका नाम था आमिर...)

अली के कहने पर आमिर , आरती के रूम मे चला जाता है...वाहा आरती अपने बेड पर आकाश की फोटो लिए आसू बहा रही थी...

आमिर(तालियाँ बजा कर)- वाह..क्या बात है...रोती रहो...और ज़ोर से रो ना..

आमिर की आवाज़ सुनते ही आरती सकपका गई और जल्दी से फोटो साइड मे की और आसू पोन्छ कर गुस्से से बोली..

आरती- बदतमीज़...किसी लड़की के रूम मे ऐसे आते है...

आमिर- अच्छा..मैं बदतमीज़...वैसे मेडम...मैं किसी लड़की के रूम मे नही...अपनी फ्रेंड के रूम मे आया हूँ...

आरती- जो भी हो..है तो लड़की का रूम ना...

आमिर- अच्छा बाबा..सॉरी...ये ले कान पकड़ता हूँ...

आरती(इतराती हुई)- ह्म्म..ठीक है -ठीक है...माफ़ किया..

आमिर- सुक्रिया मेडम...

आरती- ह्म्म..अब जल्दी काम बोलो...यहा क्यो आए..हमारे पास टाइम नही...

आमिर- टाइम की बच्ची...अभी बताता हूँ..

आमिर फिर आरती को पकड़ने उसके बेड पर गया और आरती दूसरी साइड से उतर कर भागने को रेडी हो गई...

थोड़ी देर दोनो ही रूम मे यहाँ वहाँ भागते रहे और अंत मे थक कर रुक गये...

आरती- बस कर यार..अब रुक जा..

आमिर- थक गई बस...अब बैठ और मेरी बात सुन...

( आपको ये बता दूं कि आरती और आमिर बहुत अच्छे फ्रेंड है और उनके बीच हसी-मज़ाक चलता रहता है...)

दोनो बेड पर बैठ गये और नॉर्मल हो कर बाते शुरू की...

आमिर- अब बता...ये आँसू क्यो बहा रही थी...

आरती- (चुप रही)

आमिर- बोल ना...

आरती- कुछ नही..तू सुना...कैसे आया...

आमिर- देख..मेरी बात मत ताल..मैं जानता हूँ तू आकाश भैया को याद करके रो रही थी...है ना...

आरती-(चुप रही पर आकाश का नाम सुनते ही उसकी आँख से आँसू छलक आए..)

आमिर- ह्म्म..मैने सही कहा ना...

आरती(रोते हुए)- जब पता है तो क्यो पूछ रहा है...

आमिर- तू रो मत प्ल्ज़...(और आमिर ने आरती के आसू पोंछ दिए)

आरती- तो क्या करूँ...मुझे भैया की याद आती है...

आमिर- तो तू क्या समझती है...तेरे भैया को तेरी याद नही आती या फिर तेरे घर मे किसी को उनकी याद नही आती...

आरती- क्यो नही आती...आती है..

आमिर- तो क्या सब रोते रहते है...अपना काम छोड़ दिया सबने...तेरी तरह...

आरती- (चुप रही)

आमिर- तू क्या समझती है कि तेरे स्कूल ना जाने की बात सुनकर तेरे भैया खुश होंगे...उन्हे अच्छा लगेगा..

आरती(सिर हिला कर ना बोला)

आमिर- तो फिर..क्यो ऐसा काम कर रही है कि तेरे भैया को बुरा लगे...

आरती- तो क्या करूँ यार...भैया के बिना..किसी काम को करने का मन नही होता...

आमिर- माना...पर ऐसे बैठे रहने से क्या होगा...क्या तेरे भैया लौट आएगे ....

आरती- नही..पर....

आमिर- बस..अगर तुम अपने भैया को ज़रा सा भी प्यार करती हो तो कल स्कूल मे मिलोगि...अब मैं चला...

आरती- पर तू मेरी बात तो सुन..

आमिर गेट तक आ गया और बोला...

आमिर- अब मुझे ना कुछ सुनना है और ना कुछ कहना है...मुझे जो कहना था कह दिया...अब सब तेरी मर्ज़ी...

और आमिर बाहर निकल गया और आरती चुप-चाप उसकी बात सुनकर सोच मे पड़ गई....

आमिर ने नीचे आकर सबको बोल दिया कि आरती मान गई है....

आमिर को भरोशा था कि आरती कल स्कूल आयगी ....

उसके बाद कुछ देर बातें होती रही और अली अपने बेटे के साथ घर निकल गया...

आज़ाद भी अब खुश हो गया कि आरती मान गई और उसने रुक्मणी और बाकी सब को भी ये बता दिया...

आज़ाद का पूरा परिवार खुश था पर उनसे दूर कोई उनकी खुशियो को नज़र लगाने की तैयारी कर रहा था......

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वहाँ सरिता ने आकाश से बदला लेने के लिए काफ़ी सोच- समझ कर एक कॉल किया...

सरिता- हेलो..

सामने- हाँ जी कौन..

सरिता- वो बाद मैं...पहले काम की बात करे..

सामने- काम की बात...किस काम की बात कर रही है...

सरिता- मैं उस औरत को तुम्हारी बाहों मे पहुचा सकती हूँ..जिस पर तुम्हारी नज़र बहुत दिनो से है....

सामने- किस की बात कर रही हो..

सरिता- ये अड्रेस नोट करो....अड्रेस है...*************....कल यहाँ आ जाना...सब पता चल जाएगा...

सामने- ऐसे कैसे...पहले ये तो बताओ कि किस औरत की बात कर रही हो....

सरिता- सब बाते वहाँ आने के बाद...आमने-सामने...

सामने- पर मुझे नाम तो बता दो उस औरत का...पता तो चले कि तुम सही हो या ग़लत....बस फिर मैं मिलने भी आ जाउन्गा...

सरिता- तुम आओगे...मैं जानती हूँ...क्योकि उस औरत का नाम है सरिता...

इससे पहले की कुछ और बात हो पाती...सरिता ने कॉल कट कर दी और उस इंसान से मिलने का वेट करने लगी....

सरिता(अपने आप से)- अब आएगा मज़ा...हाहाहा......

दूसरे दिन सुबह.....

स्कूल के टाइम पर आरती अपनी यूनिफॉर्म पहन कर नाश्ता करने आई...उसे देखते ही रुक्मणी और आज़ाद खुश हो गये...

आज़ाद- साबाश मेरी बच्ची...मुझे खुशी हुई कि तूने स्कूल जाना शुरू कर दिया...

रुक्मणी - हाँ बेटा...आजा..जल्दी से नाश्ता कर ले..और अपने छोटे भाई के साथ स्कूल जा..

अरविंद- नही पापा...मैं मेरे फ्रेंड्स के साथ जाउन्गा...

आरती- हाँ पापा..मैं भी मेरी सहेली के साथ जा रही हूँ.....

रुक्मणी- ठीक है...तुम अपने-अपने फ्रेंड्स के साथ जाना...पहले नाश्ता तो कर लो...

फिर आरती भी नाश्ता करने बैठ गई और सब नाश्ता करने लगे....

आज़ाद- वैसे आरती बेटा...ये तुम्हारी सहेली कौन है...

आरती- पापा ..वो रिचा...जिसके पापा मास्टर है...वो...

आज़ाद- क्या..??..वो चंद्रभान की बेटी..रिचा...

आरती- हाँ पापा ..आप जानते हो क्या रिचा को..??

आज़ाद- न..नही तो...उसके माँ-बाप को जानता हूँ...

आरती- वो आ रही है...तब मिल लेना..

आज़ाद- ह्म्म...

नाश्ता करने के बाद अरविंद अपने फ्रेंड के साथ निकल गया और थोड़ी देर मे ही रिचा भी आ गई...

रिचा की आगे तो आकाश के बराबर थी पर उसने पढ़ाई देर से शुरू की थी..जिस वजह से वो आरती की क्लास मे थी....

रिचा की बॉडी पूरी भरी हुई थी...भरे हुए बूब्स...कसी हुई गान्ड..और खूबसूरत चेहरा भी....

उसे देख कर तो कई घायल थे..पर रिचा अपनी जवानी के मज़े सिर्फ़ एक को देती थी...

रिचा- नमस्ते अंकल..नमस्ते आंटी...

रुक्मणी- नमस्ते बेटा...आओ-आओ..बैठो...

रिचा- नही आंटी...अभी देर हो रही है...फिर कभी...

रुक्मणी- ओके बेटा...तो अभी तुम लोग स्कूल जाओ...

रिचा और आरती स्कूल जाने लगी...तभी रिचा रुकी और आज़ाद से बोली...

रिचा- वैसे अंकल...अगर आपको टाइम हो तो थोड़ा घर हो आयगे....माँ ने बोला था उन्हे कुछ काम है आपसे...

आज़ाज़(खाँसते हुए)-हू...हू..क्यो नही...मिल आउगा...

और रिचा मुस्कुराते हुए आरती के साथ स्कूल निकल गई...

(यहाँ मैं आपको बता दूं...कि रिचा की मां... आश्रम चलाती है...जहाँ ग़रीबों के और अनाथ बच्चो को रहने-खाने का इंतज़ाम है......

ये आश्रम आज़ाद ने खोला था और फिर रिचा की माँ को उसे संभालने को रख दिया था...रिचा के पापा मास्टर है और आज़ाद को बहुत मानते है...इसी लिए आज़ाद ने रिचा की माँ को ये आश्रम चलाने को दे रखा था...)

रिचा और आरती के स्कूल जाने के बाद आज़ाद ने तय किया कि वो दोपहर को रिचा की माँ से मिलेगा...और फिर वो अपनी फॅक्टरी की तरफ निकल गया.......

स्कूल मे आरती को देख कर आमिर की खुशी का ठिकाना नही रहा...पर अभी वो क्लास मे थी इसलिए चुप रहा....आरती ने आमिर को देखा और स्माइल करके अपनी फ्रेंड्स के साथ बैठ गई ...

लंच टाइम मे आमिर , आरती के पास आ गया..

आमिर- हँ..हूँ...कोई बड़ा खुश दिख रहा है....

आरती- अच्छा जी...और कोई तो और भी ज़्यादा खुश दिख रहा है...

फिर दोनो ने एक- दूसरे की आँखो मे देखा और साथ मे हँसने लगे....

आमिर- सच मे...तुम्हे वापिस ऐसे देख कर ख़ुसी हुई...

आरती- ह्म्म..थॅंक यू

आमिर- थॅंक्स ..किस लिए...

आरती- तुम जानते हो...आज मैं यहाँ हूँ तो सिर्फ़ तुम्हारी वजह से....

आमिर- थॅंक्स मत बोलो यार...मुझे तो कभी मत बोलना...

आरती- अच्छा .. वो क्यो...??

आमिर- वो...वो ..इसलिए कि तू मेरी फ्रेंड है और तेरी खुशी ही मेरे लिए सबकुछ है ..

आरती(आमिर के गाल खीच कर)- ओह हो..मेरा प्यारा दोस्त..चल अब क्लास मे आ जा..

आरती चली गई और आमिर अपने गाल को प्यार से सहलाने लगा....और थोड़ी देर बाद क्लास मे आ गया.....

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वहाँ दूसरी तरफ गाओं के आउटर मे एक फार्महाउस पर सरिता किसी का वेट कर रही थी....

काफ़ी देर बाद वहाँ एक बाइक रुकी और एक लड़का फार्म हाउस के अंदर आ गया...

अंदर आते ही वो सरिता को सामने देख कर चौंक गया...

सरिता- चौंको मत...अंदर आओ धर्मेश....

धर्मेश- आप...आपने मुझे कॉल किया था...??

सरिता- हाँ...मैने ही बुलाया है तुम्हे...

धर्मेश- पर क्यो...??

सरिता- क्यो...ये तुम नही जानते क्या...भूल गये मैने क्या कहा था फ़ोन पर...

धर्मेश- हाँ..पर...क्यो..??

सरिता- क्योकि मैं जानती हूँ कि तुम बहुत टाइम से मुझे चाहते हो...

धर्मेश- वो..ऐसा...कुछ नही है...

सरिता- अब ड्रामा बंद करो...मैं सब जानती हूँ...तुम्हारे मन की बात..

धर्मेश- मेरे मन की बात..क्या..??

सरिता(धर्मेश के पास जाकर)- यही कि तुम मुझे चोदने की इक्षा रखते हो...

धर्मेश- ये आप क्या कह रही है...ये मैने कब कहा...

सरिता- ह्म्म..तुमने कहा तो नही..पर तुम्हारी आँखे बहुत कुछ कहती है....

सरिता, धर्मेश की आँखो मे देख रही थी...धर्मेश तो सरिता को कब्से चोदना चाहता था...पर सरिता के मुँह से सुनकर डर गया था...

धर्मेश- मैं..मैं चलता हूँ...

धर्मेश जाने के लिए मुड़ा कि सरिता ने फिर से कहा...

सरिता- सोच लो...ऐसा मौका फिर नही मिलेगा...

धर्मेश कुछ देर खड़ा हुआ सोचता रहा और फिर पलट कर बोला....

धर्मेश- क्या चाहती हो आप...

सरिता- अपने आपको तुम्हारे हवाले करना...चाहे तो मुझे अपनी रखेल बना लो...

धर्मेश- ह्म्म..पर क्यो...क्या वजह है...जो इतनी मेहरवाँ हो मुझ पर...???

सरिता- वजह ये है कि मुझे तुम्हारी ज़रूरत है...

धर्मेश- वो मैं समझ गया...पर किस लिए ज़रूरत है...

सरिता- बताती हूँ...पर याद रखना..कि एक बार मुझे हाँ कहा तो पीछे नही हट पाओगे...वरना..

धर्मेश(बीच मे)- पहले काम बताओ..फिर मैं बोलुगा..

सरिता- काम तो होता रहेगा...पहले आग तो बुझा ले...

और सरिता ने अपना पल्लू गिरा दिया...सरिता के स्लीबलेस ब्लाउस मे कसे बूब्स धर्मेश के सामने आ गये और धर्मेश का लंड फड़कने लगा....

सरिता जानती थी कि धर्मेश को मनाने के लिए पहले उसे अपना बनाना होगा..इसलिए वो पहले चुदाई करवा कर धर्मेश को अपना बनाना चाहती थी...ताकि आगे का काम करवाने मे आसानी हो...

सरिता के बूब्स को देख कर धर्मेश उसके पास आया और उसके बूब्स को मसल दिया...

धर्मेश- सही कहा...पहले आग तो भुझा ही ले..

सरिता- ह्म्म..आओ अंदर चलके एक-दूसरे को ठंडा करते है...

फिर सरिता, धर्मेश के साथ अंदर के रूम मे चली गई....

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वहाँ आज़ाद ने फॅक्टरी पहुच कर अपने आदमियों से फॅक्टरी के कामो का जायज़ा लिया और सबको इंटरेक्चर दे दिया कि फॅक्टरी को जल्दी से जल्दी बढ़ाना है...और इसके लिए सामने और मशीनो का ऑर्डर भिजवा दो....

फिर आज़ाद अपने कॅबिन मे बैठा हुआ कुछ हिसाब-किताब देख रहा था कि तभी उससे मिलने के लिए दामोदर नाम का आदमी आ गया.....

दामोदर- नमस्ते मल्होत्रा सर..

आज़ाद(अपनी फाइल से आँखे उठा कर)- आइए दामु भाई..आइए...

दामोदर- ह्म्म..और बताइए कैसे है आप...(दामोदर ने चेयर पर बैठते हुए कहा...)

आज़ाद- हम तो ठीक है...आप बताए कैसा चल रहा है आपका बिज़्नेस...

आज़ाद की बात सुन कर दामोदर के माथे पर परेशानी की लकीरे आ गई और वो अपने हाथ को आपस मे मसल्ते हुए नीचे देखने लगे....

आज़ाद- क्या हुआ दामु भाई...सब ठीक है ना...आप परेसान क्यो दिख रहे है...

दामोदर- क्या बताऊ ..मल्होत्रा जी...किस्मत ने ऐसा खेल खेला है कि सब चौपट हो गया....

दामोदर अपनी बात बोलकर फिर ने सिर हिलाते हुए नीचे देखने लगा....

आज़ाद- क्या...इसका मतलब...आपका बिज़्नेस...???

दामोदर- जी मल्होत्रा जी...सब मिट गया...पूरा बिज़्नेस...पूरा पैसा...सब डूब गया...

आज़ाद- इसका मतलब...आप मेरा पैसा नही दे पायगे...

दामोदर- यही बताने मैं आया था मल्होत्रा जी...मुझे कुछ और टाइम चाहिए....

आज़ाद- देखिए दामु भाई...मुझे आपसे हम दर्दि है...पर मैं भी कुछ नही कर सकता....आपने पिछले 2 सालो से मुझे 1 पैसा वापिस नही दिया...और यहाँ तक की ब्याज भी नही दिया....

दामोदर- आप तो जानते है कि पिछले 2 साल मे मैने 3 बार नया बिज़्नेस स्टार्ट किया और सब मे मुझे लॉस ही हुआ है तो...

आज़ाद(बीच मे थोड़ा कड़क हो कर बोला)- देखो दामु...अब मैं कुछ नही कर सकता....मैने कहा था ना कि ये लास्ट चान्स है...और अब तुम्हारी सारी प्रॉपर्टी मेरी है...जैसा कि कांट्रॅक्ट मे लिखा हुआ है...समझे...

दामोदर- मैं जानता हूँ कि कांट्रॅक्ट मे क्या लिखा है पर प्लीज़ मुझे कुछ टाइम दे दीजिए...बस आख़िरी बार...

आज़ाद- देखो दामु...मेरा भी बिज़्नेस है...और मुझे भी आगे पैसा देना है...तो अब मैं कुछ नही कर सकता...तुम्हारी प्रॉपर्टी मेरी...सिर्फ़ 1 हफ़्ता देता हूँ...सब छोड़ने के लिए....

दामोदर(हाथ जोड़ कर)- प्लीज़ मल्होत्रा जी...ऐसा मत कीजिए...थोड़ा टाइम दे दीजिए...प्ल्ज़्ज़..

आज़ाद- हाथ मैं जोड़ता हूँ दामु...अब बस...1 हफ्ते मे अपना घर और बाकी प्रॉपर्टी छोड़ दो...और अब जा सकते हो...बाइ...

दामोदर चेयर से उठा और एक बार फिर से आज़ाद को देखा..पर आज़ाद ने जाने के लिए बोल दिया....

दामोदर अपना मुँह लटका कर कॅबिन से बाहर निकल गया......

दामोदर के जाने के बाद आज़ाद दुखी भी था और खुश भी...दुख इस बात का था कि वो दामोदर के लिए कुछ नही कर सकता था...क्योकि उसको भी आगे पैसे देने थे...

और खुशी इस बात की थी कि अब दामोदर की फॅक्टरी के साथ-साथ उसका घर और सारी प्रॉपर्टी अब उसकी हो गई थी....

आज़ाद फिर से फाइल्स मे बिज़ी हो गया.....

थोड़ी देर बाद एक औरत आज़ाद से मिलने आई...

औरत- मैं अंदर आ सकती हूँ सर...

आज़ाद(बिना देखे)- यस..आ जाइए...

औरत- नमस्ते मल्होत्रा जी...मेरा नाम कमला है...

आज़ाद(औरत को देख कर)- ह्म्म...कमला ..

आज़ाद आगे कुछ बोलता उससे पहले ही वो कमला को देख कर खो गया...

कमला की गदराई बॉडी को देख कर ही आज़ाद की नियत फिसलने लगी थी...

अओरत- मल्होत्रा जी....

आज़ाद- हाँ ..सॉरी....हाँ जी कहिए...मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए...??

अओरत- मैं दामोदर की पत्नी हूँ...और..

आज़ाद(बीच मे)- अरे..आप...आइए बैठिए तो सही...सॉरी मैने पहचाना नही...

फिर कमला चेयर पर बैठ गई...

आज़ाद - हाँ तो कहिए..क्या लेगी आप..चाइ या ठंडा...

कमला- जी कुछ नही...मुझे आपसे कुछ बात करनी है...

आज़ाद- देखिए भाभी जी...मैने दामु को पहले ही बोल दिया था कि अब मैं उसकी हेल्प नही कर सकता...फिर भी...

कमला- आप मेरी बात तो सुन लीजिए...शायद आप समझ जाए...इसमे फ़ायदा आपका ही है...

आज़ाद(अपने चश्मे को निकाल कर)-हम्म...तो बोलिए...जब तक मैं चाइ मगवाता हूँ...

फिर आज़ाद ने चाइ का ऑर्डर किया और कमला से बात करने लगा...थोड़ी देर बाद चाइ आई और चाइ पीने के बाद कमला जाने लगी...

कमला- तो फिर बताइए...

आज़ाद- ह्म्म..जल्दी बताउन्गा...

कमला(स्माइल कर के) - मैं इंतज़ार करूगी...बाइ..

आज़ाद- बाइ...

और आज़ाद फिर से अपने काम मे लग गया...

थोड़ी देर बाद काम निपटा कर आज़ाद आश्रम मे आ गया जो था तो आज़ाद का पर उसे संभालने के लिए उसने रिचा की माँ को रखा हुआ था....

(यहा रिचा की माँ के बारे मे बता दूं...

रिचा की माँ का नाम राखी था...वो एक कसे हुए बदन की मालकिन थी...दिखने मे तो कमाल थी पर इन्हे पैसे की भूख थी...

रखी सहर मे पली-बड़ी थी पर उसकी शादी गाओं मे हो गई....इसलिए वो हमेशा सहर की लाइफ स्टाइल को मिस करती थी और वैसे ही जीना चाहती थी...पर इसके लिए उसके पास पैसे नही थे...

इनके पति टीचर थे..पर इन्हे और पैसे चाहिए थे..इसी लिए इन्होने गाओं के रहीस इंसान मतलब आज़ाद को फसाया और आश्रम की ज़िम्मेदारी ले ली...

लेकिन आज़ाद से मिलने के बाद इन्हे आज़ाद के लंड की आदत पड़ गई थी..और डेली ही ये आज़ाद का बिस्तेर गरम करने लगी...बदले मे इन्हे पैसा भी मिला और नाम भी...

और हाँ...गाओं मे साड़ी पहनने वाली औरतों से हट कर राखी सहर की औरतों की तरह वेस्टर्न ड्रेस भी पहनती है.....)

आश्रम पहुच कर आज़ाद राखी के कॅबिन मे चला गया...राखी इस समय अपने असिस्टेंट के साथ कुछ डिस्कस कर रही थी...

आज़ाद को देख कर ही राखी के चेहरे पर स्माइल आ गई और उसने अपने असिस्टेंट को बाद मे आने को बोला...

जैसे ही असिस्टेंट कॅबिन से बाहर गया तो राखी ने उठ कर गेट लॉक कर दिया और बोली...

रखी- अरे आप यहाँ ..मुझे बुला लिया होता...अपने खास रूम मे...

रखी , आज़ाद के पास जाकर उसका हाथ सहलाने लगी...

आज़ाद- क्या करूँ...आज किसी को देख कर मेरा लंड ज़्यादा ही फुदक रहा है...इसलिए शांत करने आ गया...

रखी- कौन है वो...आप हुकुम तो करो...उसे आपके नीचे डलवा दुगी...

आकाश- वो मैं देख लूँगा...अभी तू इसे ठंडा कर...

आज़ाद ने अपने लंड की तरफ इशारा किया और राखी तो जैसे इंतज़ार मे ही थी...उसने लंड को पेंट के उपेर से ही हाथ मे ले कर मसलना शुरू कर दिया....

आज़ाद तो पहले से ही दामोदर की बीवी को देख कर गरम हो गया था...

आज़ाद ने जल्दी से राखी के होंठो को अपने होंठो मे कस लिया और अपने हाथ राखी की कमर मे डाल दिए...

दोनो एक- दूसरे के होंठ चूस्ते हुए गरम होने लगे...और होंठ चूस्ते हुए आज़ाद राखी को ले कर चेयर पर बैठ गया और फिर उसके बूब्स को दवाने लगा...

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने राखी के होंठ छोड़े और उसे सामने खड़ा कर दिया...

फिर उसने राखी के बूब्स को बाहर निकाला और बारी-बारी निप्पल को होंठो मे दवाकर चूसने लगा...

राखी- आहह...स्शहीए...आहह..

आज़ाद निप्पल को बार-बात होंठो मे दबाता और खीच कर छोड़ देता और फिर से चूसने लगता...फिर दूसरे निप्पल के साथ भी ऐसा ही करता...

राखी आज़ाद की हरकतों का मज़ा लेती हुई सिसक रही थी....

आज़ाद ने फिर जल्दी से राखी के बूब्स को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया....

वो कभी बूब्स को चूस्ता...कभी मसलता और बीच-बीच मे काट भी लेता था...

रखी- उउंम..हाँ...ऐसे ही .ओह्ह..आहब...आहह..नही...कतो मत...ओह्ह..माँ...

ऐसी ही सिसकारियों से रूम का महॉल गरम हो रहा था...

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने बूब्स से खेलना बंद किया और खड़े होकर अपने लंड की तरफ इशारा किया...

राखी तुरंत ही घुटनो पर बैठ गई और लंड को बाहर निकाल के चाटने लगी...

थोड़ी देर चाटने के बाद राखी ने सुपाडा मुँह मे भर लिया....

आज़ाद- ओह्ह..हाअ..अब चूस डाल...ज्ज़ोर से...

राखी ने पहले लंड के सुपाडे को चूसा और फिर आधा लंड मुँह मे भर कर मुँह आगे पीछे करने लगी..

आज़ाद- ओह्ह..यह...और तेजज..हाँ..और तेज...

राखी- सस्ररूउगग़गग...सस्स्ररूउग़गग...उउंम..उउंम..

आज़ाद- हा ऐसे ही...अंदर ले...और तेजज्ज़..आहह...

राखी- सस्ररुउपप...सस्रररुउपप..उउंम..उउंम..उउंम..

राखी ने पूरी मस्ती मे लंड को चूस कर खड़ा कर दिया और फिर अपने कपड़े निकालने लगी...

राखी की ब्रा तो पहले ही उसके बूब्स के नीचे फसि थी...तो रखी ने ब्रा छोड़ कर बाकी के कपड़े निकाले और खड़ी हो गई...

आज़ाद ने जल्दी से राखी को टेबल पर बिठाया और उसकी टांगे खोल दी...

टांगे खुलते ही राखी की चूत भी खुल के सामने आ गई...और जिसे देख कर आज़ाद गरम हो गया...और उसने अपने होंठ राखी की खुली चूत पर रख दिए....

राखी- आअहह...ठंडक मिल गई...उउंम..

आज़ाद- सस्स्ररुउउप्प्प...सस्स्र्र्ररुउउप्प...आआहह...सस्स्स्रर्र्ररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...

राखी- ओह...ओह...आआी...उउंम..आअहह ....

आज़ाद पूरी जीभ फिराते हुए राखी की चूत चाटने लगा....

कभी चूत का दाना होंठो मे फसा लेता तो कभी जीभ को नुकीला करके चूत में डाल देता...

राखी- उम्म्म...जान ले ली...आअहह...आहह...आओउककच्छ..ओह .ओह..

आज़ाद ने चूत को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया...

आज़ाद- उम्म..उउंम..उम्म्म्ममम...उउम्म्म्मम...

राखी- ओह्ह..माँ..आ...आहह...ऊहह...आआईयइ...ऊहह...ऊहह....

ऐसे ही सिसकते हुए राखी अपनी गान्ड को उछालने लगी....आज़ाद समझ गया कि अब चूत लंड माग रही है...और आज़ाद ने राखी को खड़ा किया और टेबल पर झुका कर उसकी चूत पर लंड सेट किया...

आज़ाद ने एक धक्के मे आधे से ज़्यादा लंड चूत मे डाल दिया....

रखी- आओउक्च्छ...आअहह...पूरा डाल दो...ओह..

आज़ाद ने दूसरा धक्का मारा और लंड चूत की गहराई मे घुस गया...

फिर आज़ाद ने राखी की कमर को पकड़ा और धक्के मारना शुरू कर दिया.....

राखी- ओह..ओह..आअहह..ज़ोर से...उफ़फ्फ़...ज़ोर से...

आज़ाद- यहह...यहह..ये ले साली...और ले...

राखी- आअहह...डाल दो...ज़ोर से...आअहह...आअहह..

आज़ाद- एस्स...ये ले...यह..यह..यह..

राखी- श..एस..आहह..आहह..आहह..

आज़ाद पूरे जोश मे तेज़ी से राखी को चोदने लगा और तेज धक्के खा कर थोड़ी देर बाद राखी झड़ने लगी....

रखी- एस्स..एस्स..आहह..ऊहह..ओह्ह..मैं..गैइइ..आहह..म्मा..एस..एस्स. एस्स..

रखी के झड़ने के साथ ही चुदाई की आवाज़े बढ़ने लगी...

आहह..आहह..उफ्फ..एस्स..येस्स.एेशह..फ्फूक्छ..फ्फकक्च्छ..ऊओह...म्मा...एस्स..जज़ूर से...एस्स..तेजज...यह..यीह..आअहह..

ऐसी ही आवाज़ो के साथ राखी झाड़ गई और टेबल पर झुक गई...आज़ाद थोड़ी देर तक राखी को चोदता रहा और फिर उसने लंड बाहर निकाल लिया...

फिर आज़ाद ने राखी को उठाया और सोफे पर ले आया और खुद टिक कर बैठ गया...

राखी समझ गई और तुरंत लंड को चूत मे ले कर आज़ाद के उपर बैठ गई और उछलना शुरू कर दिया...

आज़ाद- एस्स...ज़ोर से उछल साली...ज़ोर से...

राखी- ह्म्म्मड..ओह्ह..एस्स..एस्स..एस्स..ओह्ह्ह..एस्स..

आज़ाद- पूरा ले...अंदर तक...जंप...तेजज..तेजज....और्र..तेजज..

रखी- ओह..ओह्ह.ओह..येस्स्स्स...आहह..एस्स..एस्स...एसस्स...

रखी पूरी स्पीड मे उछल-उछल कर लंड ले रही थी और उसकी मोटी गान्ड आज़ाद की जाघो पर थप दे रही थी...

आआहह...आहह..एसज़..एस्स...ओहब..ठगाप..ताप...यह...जंप...एस्स..ज़ोर..से...तेज..यीह..एसस्स..ईीस्स...ताप्प..ताप...ऊहब..म्मा.. .एस्स..आहह..आहह

ऐसी ही आवाज़ो के साथ राखी 10 मिनट चुदाई करवाती रही और फिर से झड़ने लगी...

राखी- ओह्ह म्माआ...आऐईइ...ऊहह..श..एस्स..आअहह....

राखी के झाड़ते ही वो लंड चूत मे लिए बैठ गई...

आज़ाद ने राखी को नीचे बैठा दिया और खुद खड़ा हो गया...

राखी ने तुरंत ही आज़ाद के लंड को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया..

राखी लंड को हिला-हिला का चूस रही थी...

रखी- उउंम..उउंम..उउंम..उउंम..

आज़ाद- ईीस्स...मैं आने वाला हूँ.. .ज़ोर से...एसस्स..

थोड़ी देर की लंड चुसाइ के बाद आज़ाद झड़ने लगा...

आज़ाद- ओह्ह..मैं आया...पी जा..एस्स..ऊहह..ऊहह...

राखी ने आधा लंड रस पी लिया और बाकी का उसके सीने पर बह गया...और आज़ाद शांत हो गया....

थोड़ी देर बाद जब दोनो नॉर्मल हुए तो फ्रेश हो आए और कपड़े पहन कर बैठ गये...

राखी ने दोनो के लिए चाइ ऑर्डर कर दी और फिर बाते शुरू हो गई....

आज़ाद- तुम आज भी उतनी ही गरम हो जैसे पहली बार मे थी...

राखी- आपको मैं हमेशा ऐसी ही मिलूगी...जब भी मुझे अपनी बाहों मे लेगे...

आज़ाद- ह्म्म..चलो अच्छा है...वैसे तुम्हारे मास्टर जी(राखी के पति) कहाँ है...

राखी- और कहाँ..वही स्कूल और फिर घर..उन्हे दुनिया से कोई मतलब ही नही और ना मुझसे....

आज़ाद- अरे तुम्हारे लिए हम है ना...

रखी- ह्म्म..इसलिए तो मैं अब सिर्फ़ आपकी हूँ...

आज़ाद- और तुम्हारी बेटी..??

राखी- वो तो खुश है...

आज़ाद- ह्म्म..चलो अब मैं चलता हूँ...

राखी- ह्म्म..वैसे क्या मैं जान सकती हूँ कि आपको गरम करने वाली कौन मिल गई थी...

आज़ाद(मुस्कुरा कर)- बाद मे बताउन्गा ..चलता हूँ...

इसके बाद आज़ाद आश्रम से निकल गया....

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आरती भी स्कूल ख़त्म होने के बाद रिचा और आमिर के साथ घर की तरफ निकल आई...

आमिर- अब कैसा लग रहा है आरती...आज स्कूल मे मज़ा आया ना...

आरती- ह्म्म..बहुत मज़ा आया...थॅंक यू...

आमिर- फिर से...

आरती- ओह..सॉरी-सॉरी...

आमिर- सॉरी भी नही...

आरती- ओक..तो कुछ नही..अब खुश..

आमिर- ह्म्म..तुम खुश तो मैं भी खुश...

रिचा- क्या बात है..आरती की खुशी मे तुम खुश होने लगे...

आमिर(सकपका कर)- न्नहि..ऐसा कुछ नही है..समझी...

रिचा- ओह...हो...

आरती(बीच मे)- तू अब उसे परेसान करना छोड़ेगी...बेचारा देखो...डर गया ....

रिचा- सच मे ..हहहे...

आरती-हाँ ..देखो तो इसे...हहहे...

आरती और रिचा को हँसता हुआ देख कर आमिर चुप-चाप आगे बढ़ गया...

आमिर को जाता देख आरती को अपनी भूल का अहसास हुआ और भाग कर आमिर का हाथ पकड़ लिया...

आरती- रूको तो..मुझे छोड़ कर जा रहे हो...

आमिर(सिर हिला कर ना बोल दिया, पर पलटा नही)

आरती- गुस्सा हो मुझसे ..

आमिर ने फिर से सिर हिला कर ना बोला...

आरती- तो मेरी तरफ देखो...

आमिर पलटा और आरती की आँखो मे देखने लगा...

आरती- बुरा लगा...

आयेमिर- नही तो...

आरती- तो छोड़ कर क्यो जा रहे थे...

आमिर- मैं तुम्हे छोड़ कर जा ही नही सकता...जिस दिन तुम्हे ऐसा लगे तो समझ लेना कि मैं मर गया...

आरती ने तुरंत आमिर के मुँह पर हाथ रख दिया...

आरती(गुस्से मे)- मरे तुम्हारे दुश्मन...तुम मरने की बात मत करना...समझे...

आरती की बात आमिर के दिल को च्छू गई और वो आरती की आँखो मे देखता रहा...

थोड़ी देर तक आरती आमिर के मुँह पर हाथ रखे खड़ी रही...तब आमिर ने इशारे से उसे हाथ हटाने को कहा...

तब आरती को याद आया कि वो इस समय रास्ते मे खड़ी है...और जैसे ही उसे अहसास हुआ तो वो शर्म से पानी-पानी हो गई...उसने तुरंत हाथ हटा लिया और सिर झुका कर खड़ी हो गई...

आमिर- कोई बात नही...तुम्हारा सिर झुका हुआ अच्छा नही लगता...

आरती ने फिर से आमिर को देखा...तभी रिचा भी दोनो के पास आ गई...और रिचा ने आमिर को सॉरी बोला...

फिर तीनो साथ मे घर चले आए...

आगे जाकर रिचा और आरती अपने घर की तरफ निकल गई और आमिर अपने घर...

रिचा- यार आरती..एक बात पुछू...??

आरती- हाँ ..पूछ..

रिचा- तू आमिर को पसंद करती है...??

आरती- हाँ..वो मेरा दोस्त है..क्यो...

रिचा- दोस्त नही...मेरा मतलब..क्या तू उसे वैसे पसंद करती है...???

आरती- वैसे मतलब...??

रिचा- वैसे मतलब....मतलब तू उसे प्यार करती है...??

आरती- प्यार ....मतलब...नही-नही...वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है बस...

रिचा- ओके..तो तू प्यार किसे करती है फिर...

आरती- किसी को नही...

रिचा- अच्छा...प्यार नही करती तो शादी किससे करेगी...

आरती- जिसे मेरे आकाश भैया पसंद करेंगे..उससे...

रिचा- और मान ले कि तुझे प्यार हो गया तो..फिर किससे करेगी...

आरती- बोला ना...आकाश भैया जो कहेगे..मैं वही करूगी...

रिचा- अभी कह रही है...जब प्यार होगा ना तो तू आकाश भैया की सुनेगी भी नही...

आरती- ऐसा कभी नही होगा...

रिचा- चाहती तो मैं भी नही...पर ऐसा हो गया तो देख लेना...तू अपने प्यार का साथ देगी...

आरती- ऐसा नही हो सकता ..समझी..

रिचा- गुस्सा मत कर...चल तेरा घर आ गया...कल मिलते है बाइ...

रिचा चली गई और आरती की माइंड मे एक सवाल छोड़ गई...

आरती अपने माइंड मे सवाल लिए घर मे चली गई....

वहाँ आमिर अपने घर के बाहर खड़ा हुआ आरती के साथ हुई दिन भर की बातों को याद कर रहा था....

सब कुछ याद करने के बाद आमिर सोचने लगा की....ये प्यार है या सिर्फ़.....?????

और आमिर भी अपने माइंड मे सवाल लिए घर मे चला गया.....

जिस समय आकाश अपने कॉलेज मे था, आरती अपने स्कूल मे थी और आज़ाद अपनी एक रखेल यानी कि राखी को चोद रहा था....उसी समय सरिता, धर्मेश को आज़ाद की फॅमिली के खिलाफ उसे करने का प्लान शुरू कर चुकी थी...

और सरिता की शुरुआत ये थी कि वो धर्मेश को अपने हुश्न के जाल मे फसा कर अपना काम निकलवाए...

सरिता और धर्मेश एक फार्महाउस के अंदर शानदार रूम मे एक-दूसरे को किस कर रहे थे...

धर्मेश की नज़र तो सरिता पर बहुत डिनो से थी...और आज वो उसकी बाहों मे खुद चल कर आई तो धर्मेश पागल सा हो गया और सरिता को बेतहासा चूमने लगा...

सरिता को भी अपने प्लान के लिए धर्मेश की ज़रूरत थी..उपेर से उसे अपनी भूख मिटाने के लिए एक मर्द भी चाहिए था...इसी लिए सरिता भी गरम होकर धर्मेश को चूमे जा रही थी....

थोड़ी देर बाद दोनो अलग हो गये और साँसे लेने लगे....

सरिता- अब क्या किस कर के ही भूख मिटाओगे....??

धर्मेश- ह्म्म..पहले दिखाओ तो तुम्हारे पास क्या है और कैसा है...

सरिता- ह्म्म..अभी दिखाती हूँ...

ये कह कर सरिता नंगी हो गई और झुक कर धर्मेश के सामने अपनी गान्ड दिखा दी...

धर्मेश- वाउ...मस्त है...इसे तो फाड़ के रख दूँगा...

फिर सरिता पलट गई और अपने बूब्स अपने ही हाथो से दबाते हुए धमेश को ललचाने लगी....

सरिता- उउंम..कैसे लगे....

धर्मेश- मस्त..इन्हे निचोड़ने मे मज़ा आएगा...

फिर सरिता सोफे पर बैठ गई और अपने हाथो से अपनी चूत खोल कर दिखाने लगी..

सरिता- आहह...ये कैसी है...

 


धर्मेश सरिता की गुलाबी चूत देख कर होश खो बैठा ...

वो कब्से सरिता को पटक-पटक कर चोदना चाहता था...और आज उसकी इक्षा पूरी होने वाली थी...

सरिता- बोलो ना..कैसी लगी...

धमेश- अभी बताता हूँ...

और धर्मेश, सरिता के पास गया और उसकी चूत को मुँह मे भर लिया...और होंठो से चवाने लगा...

सरिता- आओउक्च्छ...जानवर हो क्या...आहह..

धर्मेश- आज तुझे जानवर ही मिलेगा...उउउंम..उउंम

और फिर धर्मेश ने अपनी जीभ से सरिता की चूत पर हमला कर दिया...

सरिता- ओह्ह..अओुच्च..आहह..आराम...आहह. ऊहह..

धर्मेश- सस्ररुउपप..सस्ररुउपप...सस्ररुउपप...उउंम..

सरिता- आहह...ज़ूर से...ओह्ह..आ..आहह..

धर्मेश- सस्ररुउपप...म्मूउहह...उउंम..सस्ररुउपप..आहह..

धर्मेश किसी कुत्ते की तरह सरिता की चूत को चाट रहा था और सरिता भी पूरी मस्ती मे चूत चुसाइ का आनंद ले रही थी....

थोड़ी देर तक चूत चाटने के बाद धमेश खड़ा हुआ और कपड़े निकाल के बैठ गया...

सरिता ने जैसे ही धर्मेश का लंड देखा तो उसकी चूत की भूख जाग गई और उसने पलक झपकते ही खड़े होकर धर्मेश का लंड मुँह मे भर लिया...और चूसना शुरू कर दिया....

सरिता- उम्मह...आ..उउंम..उउंम..उउंम..

धर्मेश- ओह..यस...ज़ूर से..आहह..कब्से तडपा रही है...अब खा मेरा लौडा...आहह..

सरिता- उउंम..सस्ररुउपप..सस्ररूउग़गग..उउम्म्म्म...

धर्मेश- ओह एस..ज़ोर से...ज़ोर से...यह...लगी रह....

सरिता ने धमेश का लंड चूस-चूस कर तैयार कर दिया और फिर उसे बेड के पास ले आई...

धर्मेश से कंट्रोल नही हुआ और उसने सरिता को बेड पर झुका कर एक झटके मे आधा लंड उसकी चूत मे डाल दिया...

सरिता- आर्रामम..से...ओह्ह..

धर्मेश- चुप कर...आज तू जानवर देखेगी....ये ले...

सरिता- ओह्ह..सशीईए...दिखा दे जानवर...आहह...

और धर्मेश ने सरिता का हाथ पकड़ा और उसे तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया...

सरिता- ओह्ह...श..ऊहह..आहह..ऊहह...आअहह...

धर्मेश- और चिल्ला...ये ले साली..यीहह...

सरिता- ओह...हाँ ....मार..ओह्ह..तेजज..और..तेजज..

सरिता पूरी मस्ती मे चिल्ला-चिल्ला के चुदाई करवाने लगी...और धर्मेश भी पूरी स्पीड से उसे चोदे जा रहा था...

सरिता- उफ्फ..माँ...मैं गई...ओह्ह्ह..एस्स..एस्स..एस्स...

धर्मेश- देखा जानवर को...ये ले....एस्स...

सरिता थोड़ी देर बाद ही झड गई और बेड पर झुक गई पर धर्मेश पूरी स्पीड से उसे चोदता रहा....

धर्मेश- यीह..ये ले साली...उठ...और ले..एस्स..एसस्स....

सरिता- उम्म..उउंम..मार ले...आहह...आहह...

थोड़ी देर बाद धर्मेश ने चुदाई रोक दी और बेड पर लेट गया...

धर्मेश- आ तेरा चूत रस तो चखा...

और धर्मेश ने सरिता को अपने मुँह पर आने को कहा...सरिता चूत खोल कर उसके मुँह पर बैठ गई और धर्मेश ने चूत चाटना शुरू कर दी...

सरिता- उम्म...पी ले...आअहह...एस्स...अंदर तक चाट...ओह्ह..

धर्मेश- उम्म...उउंम..उउंम..उउंम..आहह..

धर्मेश ने चूत रस पी लिया और फिर से चूत को चूस कर चुदाई के लिए रेडी कर दिया....

सरिता- उउंम..अब मैं सवारी करती हूँ..

और सरिता ने अपनी चूत मे लंड लिया और उछलना शुरू कर दिया....

सरिता की पीठ धर्मेश के मुँह की तरफ थी....धर्मेश ने सरिता को खींच कर अपने उपेर झुका लिया और उसके बूब्स मसलने लगा...

और सरिता भी बूब्स मसलवाते हुए अपनी गान्ड उछाल-उछाल कर चुदने लगी....

सरिता- आहह..आहह..आहह..आहह..उउंम..एस्स..एस्स..एसस्ड...आहह..

धर्मेश- यह..क्या बूब्स...है..उम्म..और ये चूत तो...आह...ज़ोर से उछाल...

सरिता- उउंम..आहह..आराम से मसल...ऊहह..एस्स...एस्स...ओह्ह..ओह्ह..आअहह ..

धर्मेश- तुझे तो अब डेली चोदुन्गा मेरी रंडी...उउंम..जज़ूर से...ईएहह...

सरिता- तो बना ले अपनी रखेल...फाड़ दे...आअहह....

और फिर धर्मेश ने सरिता की कमर पकड़ के तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया...

सरिता- ओह्ह..ओह्ह..ओह्ह...ईसस्स..आहह...एयेए...

धमेश- ये ले साली...मेरी रखेल है तू...ये...ले...

सरिता- आहह..हाँ...मार...ज़ोर से मार....और तेज...उउंम..

अगले 10 मिनट की दमदार चुदाई के बाद दोनो झड़ने लगे....

सरिता- माइिईन्न..आऐ...ओह्ह..ऑश..म्माऔ....एस...उउंम..आहह....

सरिता के झाड़ते ही धर्मेश भी झड़ने लगा....

धर्मेश- मैं भी आया...ये ले ...ईएहह..ईएह...यईएहह....

सरिता- मुझे भी चखा दे...चूत ने तो चख लिया...आहह..

धर्मेश ने सरिता को साइड किया और खड़ा हो कर उसके सामने लंड कर दिया....

सरिता भी घुटनो पर आई..और लंड रस को पीने लगी..

थोड़ी देर बाद जब धर्मेश पूरा झड गया तो सरिता ने उसका लंड चाट कर सॉफ कर दिया और दोनो बेड पर लेट गये....

थोड़ी देर बाद दोनो फ्रेश हुए और बाते शुरू की.....

धर्मेश- मज़ा आ गया...क्या माल है तू ...

सरिता- ये माल अब तुम्हारा हुआ...जिंदगी भर के लिए...

धर्मेश- सच मे...

सरिता- सच मे...पर मेरा एक काम करना होगा....

धर्मेश- अरे तेरे लिए एक क्या दो काम कर दूँगा...बोलो...

सरिता- ह्म्म..पर काम थोड़ा रिस्की है ...

धर्मेश- तो होने दो..मैं देख लूँगा...

सरिता- ह्म्म..पर सोच लो...अब पीछे नही हट पाओगे और...ख़तरा भी बहुत है...

धर्मेश- तू टेन्षन ना ले....मैं देख लुगा...वैसे भी आकाश के होते हुए मुझे कोई ख़तरा नही हो सकता...

सरिता- लेकिन मेरे काम मे तो...ख़तरा आकाश ही है...

धर्मेश, आकाश का नाम सुनकर सन्न रह गया...

धर्मेश- मतलब...कहना क्या चाहती हो...??

सरिता- मेरा काम ये है कि तुम्हे मेरी हेल्प करनी होगी...आकाश की फॅमिली को बर्बाद करने मे...और आकाश को भी...

धर्मेश(खड़ा हो कर)- चुप...तेरी हिम्मत कैसे हुई ऐसा सोचने की भी...वो मेरी फॅमिली से बढ़ कर है..और आकाश मेरे भाई से बढ़ कर...

सरिता- जानती हूँ...तभी तो तुम्हे चुना...तुम ये काम आसानी से कर सकते हो...किसी को शक भी नही होगा...

धर्मेश उठा और सरिता का गला पकड़ लिया....

धर्मेश- बस..अब एक शब्द नही...तूने आकाश की फॅमिली पर नज़र भी डाली तो मैं तुझे कही का नही छोड़ूँगा ...

सरिता- उउंम..छोड़ो मुझे...

धर्मेश ने सरिता को छोड़ दिया और कपड़े पहनने लगा...

सरिता- सोच लो...मैं तुम्हारी रखेल बनने को तैयार हूँ और फिर पैसा भी दूगी...

धर्मेश- चुप कर...अगर तू मदन अंकल की बीवी ना होती तो अब तक तुझे मार चुका होता...रख अपने पैसे अपने पास ...

धर्मेश कपड़े पहन के बाहर जाने लगा और जाते हुए पलट कर बोला...

धर्मेश- और सुन...आकाश के लिए तो मैं तेरे जैसी हज़ार कुर्बान कर दूं...साली रंडी...

धर्मेश बाइक ले कर निकल गया और पीछे रह गई सरिता...

 


सरिता रूम मे नंगी बैठी सोचने लगी...कि ये क्या हो गया...धर्मेश ने तो मना कर दिया...

अब क्या होगा...और अगर धर्मेश ने किसी को ये सब बता दिया तो मेरा क्या होगा....

इस बदले के लिए मैं रंडी की तरह धर्मेश से चुद गई और हाथ मे कुछ भी नही....

मुझे धर्मेश को मनाना होगा...कम से कम इस बात के लिए की वो किसी को कुछ ना कहे...

मैं भी आकाश को भूल जाउन्गी...हाँ, यही करना होगा...मुझे जल्द से जल्द धर्मेश से मिलना ही होगा...वरना...नही-नही...

सरिता अपनी सोच से बाहर आई और उसने धर्मेश को कॉल किए पर कोई रेस्पोन्स नही मिला....

फाइनली, सरिता कुछ और प्लान करके फार्म हाउस से निकल गई......

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आज की रात कई लोग अपनी-अपनी परेशानी मे उलझे हुए थे...

सरिता डर रही थी कि उसका प्लान तो फैल हुआ साथ ही साथ अब ये डर भी था कि कही धर्मेश आकाश को सब ना बता दे...

धर्मेश इस सोच मे डूबा था कि आख़िर क्यो सरिता , आकाश की फॅमिली का बुरा करना चाहती है..क्या वजह हो सकती है...

आज़ाद, रुक्मणी और आरती आकाश की यादो मे खोए हुए थे और सोच रहे थे कि आकाश कैसा होगा...

आमिर इसी कस्मकश मे था कि आरती की तरफ उसका बढ़ता लगाब कही प्यार तो नही है....

वहाँ सहर मे आकाश भी सोच मे डूबा हुआ था...एक तो वो अपनो से दूर था और साथ ही साथ उसने चुदाई से दूरी बना ली थी...

आकाश यही सोच रहा था कि उसने सही किया या ग़लत....???

सभी लोग अपनी सोच मे डूबे हुए सो गये..और रात का सन्नाटा छा गया...हर तरफ शांति छा गई...

पर ये शांति...कही किसी तूफान के आने के पहले की शांति तो नही.....?????????

रात के अंधेरे को सूरज की किरण चीर कर उजाला कर चुकी थी और पन्छियो के शोर ने रात की शांति ख़त्म कर दी थी......

सब लोग अपने- अपने काम पर लग गये...

आरती, रिचा के साथ स्कूल निकल गई....

रुक्मणी घर के कामो मे लग गई...और आज़ाद अपनी फॅक्टरी का काम देखने निकल गया...

( वैसे तो आज़ाद के पास बहुत प्रॉपर्टी थी और साथ मे उसने कई समाज कल्याण के काम भी किए थे...जैसे गाओं मे हॉस्पिटल, पूरे इलाक़े मे पानी की ब्यवस्था एट्सेटरा...

पर इस समय वो अपनी फॅक्टरी को आगे बढ़ाने मे लगा था...ताकि ज़्यादा लोगो का भला हो सके..)

इन सब के अलावा..सरिता भी जाग चुकी थी पर वो अभी भी कल की घटना के बारे मे सोच रही थी....

कि कैसे कल धर्मेश ने उसे रंडी की तरह चोदा और फिर उसका साथ देने की बात पर सॉफ मना कर के निकल गया...

और तो और ..वो धमकी भी दे गया कि अगर सरिता ने आकाश की फॅमिली के खिलाफ कुछ किया तो वो उसे सबके सामने नंगा कर देगा...

सरिता ने काफ़ी सोच समझ कर तय किया था कि आज वो धर्मेश से माफी माँगेगी और ऐसा दिखाएगी कि उससे भूल हुई...तो सयद धर्मेश उसे माफ़ कर दे...और ये बात यही ख़त्म हो जाए....

सरिता ने आज का प्रोग्राम तय किया और बेड से उठकर बाथरूम मे घुस गई...और रेडी हो कर धर्मेश के घर निकल गई....

वहाँ धर्मेश के घर धर्मेश और उसकी मौसी अभी भी अकेले थे....

सुबह उठ कर दोनो फ्रेश हुए और धर्मेश नीचे आ गया और मौसी नहाने चली गई...

धर्मेश किसी काम की वजह से मौसी के रूम मे गया और वहाँ उसकी मौसी टॉवेल मे उसके सामने आ गई...

फिर क्या था..धर्मेश ने टवल निकाल के फेका और खुद नंगा होकर मौसी को बेड पर पटक दिया और चुदाई स्टार्ट हो गई....

थोड़ी देर बाद...

धर्मेश अपनी मौसी की गान्ड मारे जा रहा था....

मौसी- आहह...साले...कितना चोदता है...रंडी बना देगा क्या...ओह्ह...

धर्मेश- क्या करू मौसी..तू चीज़ ही ऐसी है कि देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है...

मौसी- ह्म्म..ये बता ..आहह...कि आकाश का क्या हुआ..

धर्मेश- बस उसे आने दो...और जब तक आप मोम को पटा लो....फिर मेरा काम हो गया समझो...यह..

मौसी- तेरी माँ तो मान जाएगी पर तेरी दीदी का क्या...आहह...

धर्मेश- वो भी रेडी है..बस आकाश मान जाए...

मौसी- ओह्ह..मैं आई..ईईइ..आहह..ज़ोर से मार..आहह..

धर्मेश- ये ले...मेरा भी हो गया...यह..यह..

दोनो झड गये और वैसे ही बेड पर लेटे रहे...धर्मेश का लंड अभी भी उसकी मौसी की गान्ड मे था...

मौसी- तू कितना कमीना है...अपनी मौसी को अपने दोस्त से चुदवा दिया और अब अपनी माँ और दीदी को भी चुदवाने वाला है...

धर्मेश- क्या करूँ मौसी.. दीदी ने सॉफ बोला है कि मैं उन्हे आकाश दूं तभी वो मुझसे चुदेगि...और वो माँ को भी पहले आकाश से चुदते हुए देखना चाहती है...फिर मेरा नंबर.....

मौसी- तो अब क्या प्लान है...आकाश तो गया...

धर्मेश- वोही तो...कुछ समझ नही आ रहा....कैसे मॉम और दीदी को आकाश से चुदवाऊ.....

तभी पीछे से.......

सरिता(तालियाँ बजा कर)- वाह..वाह...क्या बेटा है..क्या भाई है...वाहह..

सरिता की आवाज़ सुनकर धर्मेश और उसकी मौसी की सिट्टी-पिटी गुम हो गई...

धर्मेश का लंड उसकी मौसी की गान्ड से फुस्स हो कर बाहर निकल गया..और उसकी मौसी की बिना लंड के गान्ड फट गई...

धर्मेश ने तुरंत टवल उठाई और लपेट ली...और मौसी ने अपने आपको बेड शीट से ढक लिया....

( सरिता जब धर्मेश को समझाने उसके घर आई तो मैन गेट खुला हुआ था और हॉल खाली था...

सरिता आवाज़ देती...उसके पहले उसे रूम मे से आवाज़े सुनाई दी और वो रूम के गेट पर आ गई...

सरिता ने देखा की धर्मेश अपनी मौसी की गान्ड मार रहा है और उसने उन दोनो की बाते भी सुन ली....)

सरिता- अब छिपाने से क्या होगा...मैं सब देख चुकी हूँ...और सुन भी चुकी हूँ...

धर्मेश(हड़बड़ाहट मे)- त्त्त..तुम यहाँ...कैसे ..क्यो..आई..??

सरिता- मैं क्यो आई ये छोड़ो...ये बताओ कि तुम क्या कर रहे थे...ओह हाँ..अपनी मौसी की गान्ड मारते हुए अपनी माँ और दीदी को चुदवाने का प्लान बना रहे थे...है ना...हहहे...

धर्मेश- चुप रहो...और बताओ..तुम क्यो आई यहाँ...और अंदर कैसे...

सरिता- गेट खुला था समझे...और मैं तो बस मिलने आ गई...सोचा , शायद आज तुम्हारा मूड ठीक हो गया हो और तुम मेरी बात...

धर्मेश(बीच मे)- बस...मैने कहा था ना कि आकाश के खिलाफ कुछ मत सोचना...वरना मैं तुम्हे बर्बाद कर दूँगा...

सरिता- बर्बाद तो अब मैं तुम्हे करूगी...देखते जाओ...

धर्मेश - क्या कर लोगि...हाँ..

सरिता- तुम्हारे पापा को बताउन्गी की कैसे उनका बेटा स्कूल टाइम मे स्कूल ना जा कर अपनी मौसी को चोदता है और कैसे अपनी मौसी के साथ मिल कर अपनी सग़ी माँ और दीदी को अपने खास दोस्त से चुदवाने का प्लान बनता है...

धर्मेश- ओह..अच्छा...जा...जा कर बोल दे...चल जा...

धर्मेश की बात सुनकर सरिता को झटका लगा कि उसकी धमकी से धर्मेश ज़रा भी नही डरा...आख़िर क्यो..??

सरिता- तुझे डर नही...??

धर्मेश- कैसा डर ...देख...स्कूल तो मैं सिर्फ़ एग्ज़ॅम देने जाउन्गा..क्योकि मैं फैल हो गया था..तो क्लास मे मन नही लगता...ये बात मेरे पापा को पता है...समझी...

सरिता- मैं स्कूल की बात नही कर रही...

धर्मेश- ओह..तो तुम चुदाई की बात कर रही हो...है ना...

सरिता- हाँ...तेरे पापा को बताउन्गी कि तू अपनी माँ- दीदी के बारे मे क्या सोचता है...

धर्मेश- हाहहहाहा...जा..बोल देना...हाहाहा...

सरिता- इसमे हँसने वाली क्या बात है...

धर्मेश- बताता हूँ...देख..मेरी दीदी खुद चाहती है कि आकाश उन्हे चोदे..और वो माँ को भी आकाश से चुदवाना चाहती है...तो अब तू ही बता...मुझे डरना चाहिए कि नही...

सरिता- क्या...पर क्यो...??

धर्मेश- इससे तुझे क्या...और सुन ..बात रही मेरी मौसी की तो उसे तो तेरे सामने ही चोद देता हूँ...आ जाओ मौसी...मेरा लंड चूसो...इस रंडी से डरने की ज़रूरत नही...

धर्मेश के कहने पर उसकी मौसी भी रिलॅक्स हो गई और उठ कर धर्मेश का लंड मुँह मे भर लिया...

धर्मेश- आहह...अब बोल रंडी...और क्या कहना चाहती है...

धर्मेश की बाते सुनकर और सामने का नज़ारा देख कर सरिता समझ गई कि धरमर्श को डराना बेकार है..इसलिए उसने कुछ और सोच लिया और बोली...

सरिता- मैं यहाँ तुम्हे डराने नही बल्कि माफी मागने आई थी...

धर्मेश- किस लिए...

सरिता- देखो...आकाश से मेरी कोई दुश्मनी नही...मैं बस उसे पाना चाहती हूँ...

धर्मेश- क्या...कल तो तू कुछ और ही बोल रही थी...

सरिता- हाँ बोला था..और उसकी वजह भी है...

धर्मेश- तो बताओ फिर...

सरिता- तुम कुछ देर के लिए अपना प्रोग्राम रोको तो सब बताती हूँ...

धर्मेश ने मौसी को रोक दिया और फिर से टॉवल लपेट ली...

 
धर्मेश- ह्म्म..तो बैठो और बताओ...

सरिता- मैं सिर्फ़ आकाश को पाना चाहती थी...इसके लिए मैने कई बार उसे उकसाया भी पर बात नही बनी...फिर एक दिन मैने उसे अकेले मे पकड़ लिया पर उसने मुझे सॉफ मना कर दिया...

वो बोला कि मेरे लिए उसके मन मे कुछ नही...वो मुझे पसंद नही करता...और मुझे गालियाँ देकर निकल गया...

बस वही बात मुझे चुभ गई और मैं उससे और उसके परिवार से नफ़रत करने लगी...

और मैं चाहती थी कि तुम उसकी दीदी को पटा कर चोद दो तो मेरा बदला पूरा हो जाएगा...(झूठी कहानी)

धर्मेश- क्या...इतनी घटिया सोच...

सरिता- क्या करूँ...उसने मुझे रंडी, बाजारू और ना जाने क्या- क्या कहा...इसलिए मैं चाहती थी कि कोई उसके घर की लड़की को चोद दे...और फिर मैं उसे बताऊ..कि देख चूत की आग क्या होती है...

धर्मेश- तूने आकाश को पाने के लिए उसकी दीदी के बारे मे...थ्हु..तू जा यहाँ से...वरना...

सरिता- पर...पर कल मुझे समझ आ गया कि मैं ग़लत थी...जब तुमने मुझे रंडी कहा तो मुझे अहसास हुआ कि सच मे , जिस्म की भूख ने मुझे क्या बना दिया और इसलिए मैं माफी माँगने आई थी...पर...

धर्मेश- पर क्या..??

सरिता- पर अब सोच रही हूँ कि तुम्हारे ज़रिए मैं भी आकाश को हासिल कर लूँ...जैसे तुम अपनी माँ- बेहेन उससे चुदवाना चाहते हो...वैसे ही मैं उससे चुदना चाहती हूँ...

धर्मेश- अच्छा ..पर मैं कैसे मान लूँ कि तुम सही बोल रही हो...हो सकता है कि तुम कहानी बना रही हो...

सरिता- मैं झूठ क्यो बोलूँगी...तुम ही बताओ...क्या कमी है मेरे पास...पैसा , पॉवेर ..सब तो है...और फिर मेरे पति आकाश के पापा के खास दोस्त है...तो दुश्मनी कैसी...

धर्मेश- तुम्हारी बात मे दम तो है...वजह तो कोई नही दिखती...

सरिता- मैं सच बोल रही हूँ...मैं सिर्फ़ एक बार आकाश से रगड़ कर चुदवाना चाहती हूँ...बस...

धर्मेश- ह्म्म...तो अब क्या सोचा है...

सरिता- तुम मुझे आकाश दो...और मैं उसे तुम्हारी माँ- बेहन के लिए राज़ी करने मे हेल्प करूगी...

धर्मेश- ह्म्म..आइडिया तो अच्छा है...पर मेरा प्लान अलग है...पर..मैं तुम्हे आकाश की बाहों मे डाल सकता हूँ...

सरिता- प्लान कोई भी हो...मैं तैयार हूँ...

धर्मेश- ओके...पर वेट करना होगा...

सरिता- मैं पूरी जिंदगी वेट कर सकती हूँ उस पल के लिए...लेकिन...

धर्मेश - लेकिन क्या..??

सरिता- तुम उसे मेरी पहचान बताए बिना मेरे पास लाओगे...

धर्मेश- क्यो...??

सरिता- क्योकि मेरा नाम सुनते ही वो मना कर देगा...चाहे तो आज़मा लेना...वो मेरे पति की इज़्ज़त जो करता है..

धर्मेश- ओके...हो जाएगा...पर बदले मे मुझे क्या मिलेगा...

सरिता- जो तुम कहो...

धर्मेश- तो आओ फिर...अपने प्लान की शुरुआत तुम्हारी चूत मारकर करते है...

सरिता- ह्म्म..पर गेट बंद कर लो...वरना लाइन लग सकती है...हहहे...

फिर धर्मेश ने मेन गेट बंद किया और सरिता और अपनी मौसी के साथ चुदाई मे बिज़ी हो गया....

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वहाँ स्कूल के लंच टाइम मे आमिर ग्राउंड पर आरती का वेट कर रहा था...उसे पता था कि आरती लंच करने आयगी...

थोड़ी देर बाद आरती रिचा के साथ आती हुई दिखी....

आरती को अपनी तरफ आता देख कर आमिर की दिल की धड़कने तेज होने लगी...

आमिर को खुद समझ नही आ रहा था कि उसे क्या हो रहा है...

उसकी आँखे सिर्फ़ आरती को ढूँढती रहती है और जैसे ही वो सामने आती है तो वो उससे नज़रे भी नही मिला पाता...

आरती और रिचा खिलखिलाते हुए आमिर के पास आ गई...

आरती- तू यहाँ खड़ा है...बता नही सकता था...

आमिर- वो..क्यो...क्या हुआ...??

आरती- पहले बैठ तो सही...

तभी रिचा की एक सहेली ने उसे बुला लिया और आरती , आमिर के साथ बैठ गई और आरती ने टिफिन ओपन किया...

आमिर- बता तो सही क्या हुआ...

आरती(टिफिन दिखा कर)-ये हुआ...देख ...तेरे लिए लाई हूँ...अब समझा..

आमिर(खुश होकर)- गाजर का हलवा...वाहह...मज़ा आ गया...उम्म्म..

आमिर ने जल्दी से एक चम्मच हलवा खा लिया और आँखे बंद करके हलवे का टेस्ट लेने लगा...

आमिर- वाह...स्वादिष्ट...हमेशा की तरह...

आरती- कितने बेकार हो...

आमिर - क्यो..उम्म्म..(खाते हुए)

आरती- थॅंक्स भी नही बोला और अकेले-अकेले खाने लगे...

आमिर- थॅंक्स तो आंटी को बोल दूँगा..घर जा कर...और रही बात खाने की तो ले...तू भी खा ले...

आमिर ने एक चम्मच आरती की तरफ कर दी और आरती भी मुँह खोल दिया..

पर आमिर ने चम्मच घुमा कर अपने मुँह मे डाल दी...

आमिर- उम्म..वाह..

आरती(गुस्से से)- तू ना...अभी बताती हूँ...

और आरती ने टिफिन छीन लिया...पर आमिर ने आरती के हाथ पकड़ लिए और टिफिन मे मुँह डाल कर हलवा खा लिया..

आरती- अरे..जानवर...रुक जा...हहहे...

आमिर- क्या हुआ...

आरती- कुछ नही...ये तेरे मुँह पर...

आमिर ने मुँह सॉफ किया पर पूरा नही हुआ..तब आरती ने अपने हाथ से आमिर का मुँह सॉफ किया...

आरती का हाथ लगते ही आमिर के दिल मे गुदगुदी होने लगी...और वो आरती के हाथ के प्यारे अहसास मे खो गया और उसकी आँखे बंद हो गई...

आरती- अब सोयगा क्या...उठ जा बेटा...हलवा खा ले ..हहहे..

आमिर- हूँ..हाँ..ये ले...तुम भी खाओ...

आरती- अरे ये तेरे लिए है...खा लो..

आमिर- मैने खाया या तुमने ..क्या फ़र्क पड़ता है...

आरती- मतलब..

आमिर- वो..मतलब..वो...दोस्ती मे चलता है...है ना...

आरती- ह्म्म..चल फिर..अपने हाथो से खिला..

आरती की बात सुनकर आमिर खुशी से फूल गया...जैसे उसकी मन की मुराद पूरी हो गई हो...

आमिर बड़े प्यार से आरती को खिलाने लगा और खुद भी खाने लगा...

दोनो ये भूल गये कि वो खुले ग्राउंड पर बैठे है और कोई उन्हे देख रहा होगा...

जब हलवा ख़त्म हो गया तो आरती उठने लगी...

आमिर- रुक..तेरे होंठ के पास..वो...हलवा...

आरती- तो सॉफ कर दे ना...

आमिर- मैं..?

आरती- और नही तो क्या...मैने कैसे तेरा मुँह सॉफ किया था...अब तू भी कर दे....

आमिर- वो..मैं..हाँ..करता हूँ..

आमिर ने अपना हाथ बढ़ाया और आरती के होंठ के पास रख दिया...

इस समय आमिर के दिल मे घंटियाँ बज रही थी...

उसके हाथ आरती के गाल से होते हुए उसके होंठो पर पहुचे तो आमिर की धड़कन फिर से बढ़ गई ......

और आमिर ने आरती का मुँह सॉफ करके हाथ अलग कर लिया...

आरती- हो गया ...??

आमिर- ह्म..

आरती- अब मैं जाती हूँ...तू भी आ जा...

आमिर- ह्म्म..

आरती उठ कर चली गई और आमिर उसे जाता देख कर अपने ख़यालो मे खो गया...

आमिर ने अपने हाथ की उंगली को अपने होंठो से लगाया और किस कर लिया...ये वही उंगली थी जो आरती के होंठो पर घूम कर आई थी.....

 
वहाँ सहर मे जिस घर मे आकाश किराए से रह रहा था..वो घर एक बड़े बिज़्नेसमॅन मिस्टर.जॉन का था...जिनके साथ आज़ाद के अच्छे संबंध थे....

उस घर मे उस बिज़्नेसमॅन की बीवी डेना और बेटी रोज़ी रहती थी...जॉन अक्सर बाहर ही रहते थे....बिज़्नेस के सिलसिले मे...

घर मे ही आकाश को जिम मिल गया था...जिससे उसे अपनी हेल्थ बनाने मे कोई दिक्कत नही होती थी...

आकाश सुबह-सुबह कसरत करता था और फिर कॉलेज जाता था...

सहर आ कर भी आकाश अपनी हेल्थ का पूरा ध्यान रखता था....

आज उसे कॉलेज नही जाना था...इसी लिए उसने दिल लगा कर कसरत की और फिर नहाने के लिए बाथरूम मे आ गया...

आकाश पूरा नंगा हुआ और नहाने लगा...(यहाँ उसे किसी का डर नही था इसलिए नंगा ही नहाता था...)

आकाश ने सहर आने के बाद चुदाई नही की थी इसलिए उसका लंड बार-बार खड़ा हो जाता था....

नहाते हुए भी उसका लंड खड़ा हो गया...

आकाश( मन मे)- ये फिर खड़ा हो गया...चलो आज तो कॉलेज जाना नही...तो मूठ ही मार लुगा...चूडया तो करने से रहा...

और यही सोच कर आकाश बॉडी पर साबुन लगाने लगा....

( आकाश की मकान मालकिन का नाम डेना है...

उन्हे मार्केट से कुछ समान मगवाना था...उनका नौकर किसी काम से गया हुआ था तो उन्होने मोहन से मार्केट जाने को कहा...

मोहब- ठीक है मेडम...हम आकाश सर को टॉवल और कपड़े दे आए..फिर चले जायगे...

डेना- एक काम करो...तुम जाओ...कपड़े मैं दे देती हू...

मोहन- आप..पर....

डेना- हाँ मैं...अब ये कपड़े दो और जाओ जल्दी...

मोहन- जैसा आप कहे...

मोहन ने कपड़े डेना को दिए और उसका समान लेने चला गया...

डेना भी कपड़े ले कर बाथरूम की तरफ चल दी...)

जब डेना बाथरूम के अंदर आई तो उन्हे आकाश की आवाज़े सुनाई देने लगी...जो शवर के सेक्षन मे खड़ा हुआ था....

आकाश- उम्म..एस्स..आहह...कितने दिन हो गये...

आकाश अपनी मस्ती मे लंड को हाथ मे लिए बड़बड़ा रहा था...

आकाश- उउंम..कितने माल है यहाँ...और मैं बिना चुदाई के...ओह्ह..

दिल तो करता है कि पकड़ के फाड़ दूं...पर...आहह...

आकाश मूठ मारने मे इतना बिज़ी था जी उसे पता ही नही चला कि कब उसकी मकान मालकिन बाथरूम मे आ गई...

डेना एक खुले बिचारों वाली औरत थी और उसे भी रहीसो वाले शौक थे(मॉस्टाली रहीसो को जो शौक होते है...समझ गये ना)

आकाश की आवाज़े सुन कर डेना का मन मचलने लगा....आख़िर वो थी ही एक चुड़दकड़ औरत...

आकाश अपनी मूठ मारने मे बिज़ी था और डेना कुछ सोच कर उसके पीछे पहुच गई...

आकाश किसी आंटी के नाम की मूठ मार रहा था....

डेना को लगा कि आकाश उसके नाम की मूठ मार रहा है...क्योकि आकाश डेना को भी आंटी ही कहता था...

यही सोच कर डेना गरम होने लगी...और उसने चुपके से आकाश का लंड देखने को सिर आगे किया...

डेना(मन मे)- ओह माइ गॉड...ये तो मस्त है...अब तो मज़ा आएगा...

आकाश- ओह..आंटी..और तेजज..गले मे भर के चूसो...ओह्ह..एस्स...आंटी..एस...तेजज और तेजज...आअहह..

डेना, आकाश की आवाज़े सुनकर गरम हो ही गई थी और जैसे ही उसने आकाश का तना हुआ लंड देखा तो वो इतनी गरम हो गई कि उसने अपना स्कर्ट उपेर करके अपने हाथ से अपनी चूत रगड़ना शुरू कर दी.......

आकाश- ओह..यस..आंटी...टांगे खोलो...आहह..ये गया...पूरा गया...आंटी...अब देखो..ये लो..और लो..अशह..

थोड़ी देर तक डेना अपनी चूत रगड़ती रही और फिर धीरे- धीरे अपने कपड़े निकालने लगी...

पहले उसने स्कर्ट निकाला फिर टॉप और ब्रा- पैंटी मे आ गई....

डेना- बस ...रुक जाओ...

डेना की आवाज़ सुनकर आकाश पलट गया और भोचक्का रह गया...

आकाश के सामने उसकी मकान मालकिन ब्रा पैंटी मे थी...

 
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