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कुंडी मत खडकाओ जीजाजी अंदर आ जाओ

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Antarvasna, hindi sex stories: मैं जैसे ही अपने घर अपनी पत्नी को लेकर पहुंचा तो मां ने ना जाने कितने प्रकार के व्यंजन मेरे लिए बना रखे थे पिताजी को देखते ही मैं खुशी से झूम उठा। उन्होंने मुझे गले लगा लिया इतने वर्ष बाद पिताजी से गले मिलकर अपनेपन का एहसास हुआ काफी वर्षों से मैं घर वालो से नहीं मिल पाया था। मुझे लगता जैसे मैं अपने जीवन में कितना परेशान हूं लेकिन पिताजी के गले लगते ही सारी परेशानी जैसे झट से दूर हो गई थी। मेरी पत्नी लता ने भी मां के पैर छुए और मां ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा लता बेटा तुम्हें अमित खुश तो रखता है ना। लता ने भी मां से कहा मम्मी जी अमित मेरा बहुत ध्यान रखते हैं मैंने भी मां को गले लगाया तो मां भी खुशी से कहने लगी बेटा कितना अच्छा लग रहा है, तुम दोनों को देखकर मुझे बड़ी खुशी हो रही है। मां कहने लगी चलो दोनों के दोनों जल्दी से अपने कपड़े बदलो और डाइनिंग टेबल पर आ जाओ मैंने तुम्हारे लिए इतनी मेहनत से खाना बनाया है।

पिताजी बैठक में ही बैठे हुए थे मैं और लता अपने कमरे में गए और हम दोनों ने अपने कपड़े चेंज किए उसके बाद हम लोग डाइनिंग टेबल पर आ गए। जब हम लोग डायनिंग टेबल पर बैठे हुए थे तो मां के चेहरे पर बड़ी खुशी थी और मां ने तो आधे टेबल को व्यंजनों से भर दिया था। मां के हाथों का खाने का कोई जवाब नहीं है वह खाना बहुत ही बढ़िया बनाती हैं मैं तो मां के हाथ के बने खाने के लिए इतने समय से तड़प रहा था और आखिरकार मां के बने हाथ के व्यंजन मुझे नसीब हो ही गए। मैं भी बहुत खुश था और पिताजी के चेहरे पर भी एक अलग ही मुस्कान थी मां और पिताजी कहने लगे बेटा कितने दिनों के लिए छुट्टी लेकर आए हो। मैंने कहा एक महीने तक तो हम लोग यहीं रहेंगे और सोच रहा था कि अब मैं यही अपने लिए कोई नौकरी देख लूं पिता जी कहने लगे बेटा तुम देख लो जैसा तुम्हें अच्छा लगता है। पिताजी भी कॉलेज से रिटायरमेंट के बाद घर पर रहते थे पिताजी कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं मेरी भी पढ़ाई के बाद मैं अमेरिका जॉब करने के लिए चला गया था और शादी के बाद मेरे साथ लता भी आ गई थी। हम लोगों की शादी को अभी दो वर्ष हुए है मां और बेटे के प्यार से पिताजी को थोड़ा जलन हो रही थी लेकिन पिताजी समझ सकते थे कि मैं मां से कितना प्यार करता हूँ।

कुछ देर बाद पिताजी ने कह ही दिया कि तुम्हारा लगाओ हमेशा से ही अपनी मां की तरफ रहा है मैं तो जैसे तुम्हारे लिए कुछ हूं ही नहीं। मैंने पिता जी से कहा आप भी बच्चे जैसी बात करते हैं तो मेरी मां कहने लगी तुम्हारे पिताजी तो हमेशा ऐसे ही बात करते रहते हैं तुम उनकी बातों पर ध्यान ना दिया करो। वह दोनों मुझे कहने लगे कि बेटा हमें तुम्हारी बहुत याद आती है और हम तो यही कहेंगे कि तुम अपने लिए यहीं कोई नौकरी ढूंढलो। मुझे भी कोई आपत्ति नहीं थी और ना ही लता को कोई दिक्कत थी लता भी मुझसे कहने लगी हां मम्मी पापा बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आपको यहीं कोई काम देख लेना चाहिए। मुझे भी यही लगा कि मुझे मुंबई में ही अपने लिए कोई काम देख लेना चाहिए इतने वर्षों से बाहर ही तो रहा था लेकिन अपने माता पिता के प्यार के लिए तो हमेशा ही तरसता रहा। अब मुझे एहसास हो चुका था कि मैं अपने माता पिता से दूर नहीं जा पाऊंगा इसलिए मैंने मुंबई में ही अपनी जॉब देखनी शुरू कर दिया था। मुम्बई में मुझे उतने पैसे तो नहीं मिल पा रहे थे लेकिन फिर भी अच्छी खासी नौकरी मुझे मिल चुकी थी जिसमें की मैं अपने घर का भरण पोषण अच्छे से कर पाता। इस बात से पिताजी भी बहुत खुश थे और उन्हें इस बात की खुशी थी कि चलो मैं अब उनके साथ तो रहूंगा। लता मुझे कहने लगी आपने बहुत अच्छा किया जो यहीं पर नौकरी देख ली हम लोग अपने माता पिता के साथ ही मुंबई में रहने लगे थे। एक दिन मै ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था तो मेरी घड़ी नहीं मिल रही थी मैंने लता को कहा क्या तुमने मेरी घड़ी देखी है। लता कहने लगी रुको अभी देखती हूं लता अलमारी को टटोलने लगी वह मुझसे कहने लगी मैंने तुम्हारी घड़ी देखी तो थी लेकिन मुझे भी ध्यान नहीं आ रहा कि मैंने तुम्हारी घड़ी कहां देखी है। कुछ देर में मेरी घड़ी मिल ही गई और जब उसे घड़ी मिली तो वह मुझे कहने लगी लो मुझे तुम्हारी घड़ी मिल चुकी है।

मैंने वह गाड़ी पहनी और मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गया क्योंकि वह घड़ी मेरे पिताजी ने मुझे दी थी और मैं नहीं चाहता था कि वह घड़ी कहीं खो जाए। मैं अपने ऑफिस पहुंचकर सबसे पहले लता को फोन किया करता था लता भी बहुत खुश थी कि हम दोनों के बीच अभी भी वही प्यार है जो शादी से पहले हम दोनों एक दूसरे से किया करते थे। हम दोनों जब पहली बार एक दूसरे से मिले तो हमें बहुत ही अच्छा लगा मुझे तो लता का साथ इतना अच्छा लगा कि मैंने उसी वक्त लता के पिताजी से उसका हाथ मांग लिया था। लता भी बहुत खुश थी क्योंकि लता के परिवार को मेरा परिवार पहले से ही जानता था इसलिए शादी में कोई भी दिक्कत नहीं हुई। लता मुझसे कहने लगी अमित हमें मुंबई आये हुए कितना समय हो चुका है और हम लोग अभी तक पापा मम्मी से भी मिलने नहीं गए। लता कहने लगी मुझे अपने पापा मम्मी की बहुत याद आ रही है क्या हम लोग उनसे मिलने के लिए जा सकते हैं। मैंने लता से कहा क्यों नहीं लेकिन तुम्हें उसके लिए 3 दिन रुकना पड़ेगा 3 दिन बाद मेरी छुट्टी होगी तो हम लोग तुम्हारे पापा मम्मी से मिलने के लिए जा सकते हैं। भला लता को भी क्या दिक्कत होती वह भी मान गई और कहने लगी ठीक है हम लोग 3 दिन बाद चल लेंगे।

3 दिन बाद हम लोग लता के माता-पिता से मिलने के लिए गए तो वहां पर उसकी छोटी बहन भी आई हुई थी उसकी छोटी बहन की शादी अभी एक साल पहले ही हुई थी उसकी छोटी बहन का नाम मालती है। मालती मुझे देखते हुए कहने लगी जीजा जी आपने बहुत अच्छा किया जो यहां पर आए कम से कम इस बहाने हम लोगों की दीदी से तो मुलाकात हो गई। मैंने मालती से कहा वह तो आना ही था लेकिन मुझे समय नहीं मिल पा रहा था आज मेरे पास समय था तो सोचा आप लोगों से मिल आते हैं। मालती की शादी को अभी कुछ ही समय हुआ है लेकिन जब उसने अपने पति और अपने बारे में बताया तो वह बड़ी दुखी थी उसके पति और उसके बीच में शायद अब पहले जैसा कुछ ठीक नहीं चल रहा था। मालती ने लव मैरिज की थी लेकिन उन दोनों की शादी कुछ ठीक नहीं चल रही थी और शायद इस झगड़े की वजह से मालती के पति के जीवन में कोई और महिला आ गई थी। यह बात मालती को भी मालूम थी लेकिन मुझे भी यह बात मालूम चल चूकी थी। मालती इन सब को दरकिनार करते हुए मुझसे बड़े ही अच्छे से बात कर रही थी। उसके चेहरे पर झूठी मुस्कान थी जिसे की मैं समझ चुका था कि वह खुश नहीं है और अपने जीवन में बहुत दुखी है लेकिन उसके पास और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। मैंने जब मालती से कहा तुम परेशान हो तो मालती कहने लगी जीजा जी मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी हूं। मैंने मालती की जांघों पर हाथ रखा और उसे कहा तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है तुम बेवजह ही परेशान हो रही हो। वह थोड़ा खुश हो चुकी थी मैंने उसकी जांघ पर बड़ी तेजी से हाथ मारा तो वह मुस्कुराने लगी तब तक लता भी आ चुकी थी। लता कहने लगी जीजा और साली के बीच में क्या बात हो रही है?

मैंने लता से कहा कुछ भी तो नहीं बस ऐसे ही हम लोग बैठे हुए थे और बात कर रहे थे लेकिन मेरे अंदर तो मालती को चोदने की हवस पैदा हो चुकी थी और मैं अपनी हवस को मालती को चोदकर ही पूरा करना चाहता था और आखिरकार मैंने ऐसा ही किया। मालती जब बाथरूम में नहा रही थी तो मैंने दरवाजे को खटखटाया। मालती कहने लगी कौन है तो मैंने मालती को आवाज देते हुए कहा तुम्हारा जीजा हूं। मालती कहने लगी जीजाजी आप यह क्या कर रहे हैं। मैंने उसे कहा मैं अंदर आ जाऊं मालती ने दरवाजा खोला तो मैं बाथरूम में चला गया। मैंने मालती के बदन को देखा तो मैंने उसके गिले बदन को बाहों में ले लिया और उसके साथ ही मैं शावर में नहाने लगा। मैं उसके स्तनों को दबा रहा था तो मुझे और भी मजा आता मैंने काफी देर तक उसके स्तनों को दबाया। मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसता तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता मलती कहती जीजा जी अब बिल्कुल भी रह नहीं पा रही हूं। मैंने मालती की योनि के अंदर अपनी उंगली को डाला तो मेरी उंगली अंदर चली गई और मालती ने भी मेरे लंड को बाहर निकालते हुए उसे अपने मुंह के अंदर समा लिया।

उसने मेरा लंड को अपने गले के अंदर तक ले लिया था वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी उसे बड़ा मजा आता और मुझे भी आनंद आ रहा था। जैसे ही मैंने मालती की योनि में लंड को सटाया तो वह मचलने लगी। उसकी योनि के अंदर मेरा लंड बड़ी ही आसानी से चला गया मालती की गीली हो चुकी चूत के अंदर लंड प्रवेश हो चुका था। उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकल रही थी और उसी चीख के साथ में उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। उसके बदन को मैं अपना बनाने लगा वह बहुत खुश थी मैंने उसे घोड़ी बनाया हुआ था और उसकी चूत के अंदर बहर लंड को करता। उसकी चूत से फच फच की आवाज आने लगी थी और मेरे अंदर का जोश दोगुना हो जाता। अब मैं भी ज्यादा देर तक मालती की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपने वीर्य को मालती की चूत के अंदर ही गिरा दिया। मालती की योनि में मेरा वीर्य गिर चुका था और मुझे बढ़ा ही मजा आया मालती भी खुशी से झूम उठी थी और वह फूली नहीं समा रही थी।
 
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