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राजेश (गुस्से से) - साफ-साफ कहें जो भी कहना है ,
कहना क्या चाहती हैं आप ?
मिसेज मल्होत्रा - तुम्हें याद है ना , मैंने दिल्ली में एक बंगला देखा था रिया के लिए ?
राजेश अच्छी तरह से याद है ।
मिसेज मल्होत्रा - और तुम्हें यह भी याद होगा कि तुमने उस बंगले की जुड़ी सारी जानकारी मांगी थी ?
राजेश - हां , यह भी याद है पर इस बात से क्या साबित होता है ?
मिसेज मल्होत्रा - रिया बेटा, तुमने सुना ना ? ये इंसान जानता था कि वह बंगला मै तुम्हारे लिए खरीदना चाहती हूं। , इसने मुझ से जानकारी मांगी पर मैंने नहीं दी क्योंकि मुझे तो शुरू से ही इस पर भरोसा नहीं है । तुम जानती हो इसने क्या किया?
रिया - क्या किया?
मिसेज मल्होत्रा - मैं वह बंगला खरीद लू, उससे पहले ही इसने उसे खरीद लिया अपने लिए। क्यों ? क्या पूरी दिल्ली में एक वही बंगला था और वो भी तब,जब यह अच्छे से जानता था कि वह बंगला में तुम्हारे लिए लेना चाहती हूं ।
राजेश (हैरानी से )- क्या बकवास है यह? मैंने कब बंगला खरीदा? रिया यह झूठ बोल रही हैं। मैं भला ऐसा क्यों करूंगा ? तुम अच्छे से जानती हो , मुझे ऐसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है और अगर खरीदना भी होता तो वह क्यों खरीदूंगा जो तुम्हारे लिए लिया जाना है ।
रिया - भाई मैं जानती हूं कि आप ...
मिसेज मल्होत्रा( हंसते हुए) - देखा रिया , इसके मन में खोट है । अगर बंगला लिया है तो लिया है । इसमें छुपाने की क्या जरूरत है ? सच तो यह है कि इसने ऐसे ही न जाने कितनी प्रॉपर्टी हमसे छुपा कर खरीद रखी है और कहां-कहां कितना , कुछ जमा कर रखा होगा इसने ।
विशाल - आपके पास क्या सबूत है ? ऐसे आप राजेश पर इल्जाम नहीं लगा सकती । सच क्या है , यह सब जानते हैं।
मिसेज मल्होत्रा - हां मैं जानती हूं , तुम लोगों ने मेरी बेटी की आगे मुझे ही बुरा बना रखा है इसलिए आज सबूत भी लायी हूं ।
रिया ( खीझते हुए ) -मां बंद कीजिए तमाशा । अगर भाई ने खरीद भी लिया तो क्या हुआ?
मिसेज मल्होत्रा - बात खरीदने की नहीं धोखे की है । अगर इसके दिल में चोर नहीं है तो इसनें यह बात छुपाई क्यों और वही बंगला क्यों लिया जो तुम्हारे लिए लिया जाना था। यह जलता है तुमसे रिया ।
रिया अब राजेश को देखने लगी, राजेश ने अब रिया की ओर पूरे आत्मविश्वास से देखा और कहा - मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है , मैं नहीं जानता कि मिसेज मल्होत्रा किस सबूत की बात कर रही हैं और रही बात जलने की तो सबको पता है कि कौन किससे जलता है - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की तरफ गुस्से से देखा।
,
पूरा स्टाफ दरवाजे के बाहर खड़ा होकर तमाशा देखने लगा।
मिसेज मल्होत्रा - आओ , सब देखो अपने बॉस का असली चेहरा । कल तो तुम लोगों को सजा से बचाने के लिए भगवान बन रहा था पर सच तो यह है कि यह किसी का सगा नहीं है ।
साहिल यह सुन मुस्कुराने लगा , नैना अब आगे बढ़ने को हुई कि साहिल ने उसका हाथ पकड लिया- अगर तुम कुछ भी बोली तो मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा और राजेश यह नहीं चाहता । नैना मजबूर सी खड़ी रह गई।
मिसेज मल्होत्रा ने अब वो पेपर्स निकाल उस पर राजेश के साइन रिया को दिखाएं - यह देखो , तुम्हारे भाई के ही साइन है ना इस पर?
रिया ( साइन देख) - हां भाई के है पर..
मिसेज मल्होत्रा विशाल की ओर बढ़ी - तुम बताओ , तुम्हारे दोस्त के साइन है या नहीं इन पर ?
विशाल ने हां में सिर हिला दिया ।
,
राजेश हैरान सा मिसेज मल्होत्रा को देख रहा था , मिसेज मल्होत्रा ने अब फाइल राजेश की हाथों में थमा दी, तुम बताओ कि यह किसके साइन है ? राजेश ने साइन देखे तो सच में ही उसके साइन थे - हां , यह मेरे ही साइन है पर मैंने ऐसा कुछ भी पेपर साइन नहीं किया ।
मिसेज मल्होत्रा ( हँसते हुए) - तो क्या यह साइन अपने आप ही चलकर यहां आ गया?
राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि उसने कब साइन किए ये पेपर्स? क्या उससे धोखे से साइन लिए गए? पर कब? राजेश ने अब फटाफट से फाइल को पढ़ना शुरू किया, फाइल पढ़ते ही राजेश अब हैरानी से मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा ।
मिसेज मल्होत्रा ने वह फाइल राजेश के हाथ से ली और रिया को थमा दी - लो , तुम भी पढ़ लो इस फाइल में क्या लिख रहा है ? जो मैं कह रही हूं , वह सच है या नहीं?
रिया ने वह फाइल पड़ी तो हैरान रह गई।
अब मिसेज मल्होत्रा और साहिल तैयार थे दोनों भाई बहन में , पहली दरार देखने को ।
राजेश और रिया अब एक दूसरे को खामोशी से देख रहे थे...,
कहना क्या चाहती हैं आप ?
मिसेज मल्होत्रा - तुम्हें याद है ना , मैंने दिल्ली में एक बंगला देखा था रिया के लिए ?
राजेश अच्छी तरह से याद है ।
मिसेज मल्होत्रा - और तुम्हें यह भी याद होगा कि तुमने उस बंगले की जुड़ी सारी जानकारी मांगी थी ?
राजेश - हां , यह भी याद है पर इस बात से क्या साबित होता है ?
मिसेज मल्होत्रा - रिया बेटा, तुमने सुना ना ? ये इंसान जानता था कि वह बंगला मै तुम्हारे लिए खरीदना चाहती हूं। , इसने मुझ से जानकारी मांगी पर मैंने नहीं दी क्योंकि मुझे तो शुरू से ही इस पर भरोसा नहीं है । तुम जानती हो इसने क्या किया?
रिया - क्या किया?
मिसेज मल्होत्रा - मैं वह बंगला खरीद लू, उससे पहले ही इसने उसे खरीद लिया अपने लिए। क्यों ? क्या पूरी दिल्ली में एक वही बंगला था और वो भी तब,जब यह अच्छे से जानता था कि वह बंगला में तुम्हारे लिए लेना चाहती हूं ।
राजेश (हैरानी से )- क्या बकवास है यह? मैंने कब बंगला खरीदा? रिया यह झूठ बोल रही हैं। मैं भला ऐसा क्यों करूंगा ? तुम अच्छे से जानती हो , मुझे ऐसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है और अगर खरीदना भी होता तो वह क्यों खरीदूंगा जो तुम्हारे लिए लिया जाना है ।
रिया - भाई मैं जानती हूं कि आप ...
मिसेज मल्होत्रा( हंसते हुए) - देखा रिया , इसके मन में खोट है । अगर बंगला लिया है तो लिया है । इसमें छुपाने की क्या जरूरत है ? सच तो यह है कि इसने ऐसे ही न जाने कितनी प्रॉपर्टी हमसे छुपा कर खरीद रखी है और कहां-कहां कितना , कुछ जमा कर रखा होगा इसने ।
विशाल - आपके पास क्या सबूत है ? ऐसे आप राजेश पर इल्जाम नहीं लगा सकती । सच क्या है , यह सब जानते हैं।
मिसेज मल्होत्रा - हां मैं जानती हूं , तुम लोगों ने मेरी बेटी की आगे मुझे ही बुरा बना रखा है इसलिए आज सबूत भी लायी हूं ।
रिया ( खीझते हुए ) -मां बंद कीजिए तमाशा । अगर भाई ने खरीद भी लिया तो क्या हुआ?
मिसेज मल्होत्रा - बात खरीदने की नहीं धोखे की है । अगर इसके दिल में चोर नहीं है तो इसनें यह बात छुपाई क्यों और वही बंगला क्यों लिया जो तुम्हारे लिए लिया जाना था। यह जलता है तुमसे रिया ।
रिया अब राजेश को देखने लगी, राजेश ने अब रिया की ओर पूरे आत्मविश्वास से देखा और कहा - मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया है , मैं नहीं जानता कि मिसेज मल्होत्रा किस सबूत की बात कर रही हैं और रही बात जलने की तो सबको पता है कि कौन किससे जलता है - कहते हुए उसने मिसेज मल्होत्रा की तरफ गुस्से से देखा।
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पूरा स्टाफ दरवाजे के बाहर खड़ा होकर तमाशा देखने लगा।
मिसेज मल्होत्रा - आओ , सब देखो अपने बॉस का असली चेहरा । कल तो तुम लोगों को सजा से बचाने के लिए भगवान बन रहा था पर सच तो यह है कि यह किसी का सगा नहीं है ।
साहिल यह सुन मुस्कुराने लगा , नैना अब आगे बढ़ने को हुई कि साहिल ने उसका हाथ पकड लिया- अगर तुम कुछ भी बोली तो मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा और राजेश यह नहीं चाहता । नैना मजबूर सी खड़ी रह गई।
मिसेज मल्होत्रा ने अब वो पेपर्स निकाल उस पर राजेश के साइन रिया को दिखाएं - यह देखो , तुम्हारे भाई के ही साइन है ना इस पर?
रिया ( साइन देख) - हां भाई के है पर..
मिसेज मल्होत्रा विशाल की ओर बढ़ी - तुम बताओ , तुम्हारे दोस्त के साइन है या नहीं इन पर ?
विशाल ने हां में सिर हिला दिया ।
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राजेश हैरान सा मिसेज मल्होत्रा को देख रहा था , मिसेज मल्होत्रा ने अब फाइल राजेश की हाथों में थमा दी, तुम बताओ कि यह किसके साइन है ? राजेश ने साइन देखे तो सच में ही उसके साइन थे - हां , यह मेरे ही साइन है पर मैंने ऐसा कुछ भी पेपर साइन नहीं किया ।
मिसेज मल्होत्रा ( हँसते हुए) - तो क्या यह साइन अपने आप ही चलकर यहां आ गया?
राजेश को समझ नहीं आ रहा था कि उसने कब साइन किए ये पेपर्स? क्या उससे धोखे से साइन लिए गए? पर कब? राजेश ने अब फटाफट से फाइल को पढ़ना शुरू किया, फाइल पढ़ते ही राजेश अब हैरानी से मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा ।
मिसेज मल्होत्रा ने वह फाइल राजेश के हाथ से ली और रिया को थमा दी - लो , तुम भी पढ़ लो इस फाइल में क्या लिख रहा है ? जो मैं कह रही हूं , वह सच है या नहीं?
रिया ने वह फाइल पड़ी तो हैरान रह गई।
अब मिसेज मल्होत्रा और साहिल तैयार थे दोनों भाई बहन में , पहली दरार देखने को ।
राजेश और रिया अब एक दूसरे को खामोशी से देख रहे थे...,