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उलझन मोहब्बत की

नैना और बाकी का स्टाफ राजेश को ऐसे गुस्से में देख हैरान रह गया ।

सारा (डरते हुए) - कहीं तुम्हारा सच तो ...

नैना- पता नहीं पर मैं इतनी गुस्से में राजेश को अकेले नहीं , छोड़ सकती - कहते हुए वह भी उसके पीछे बढ़ चली।

राजेश अब जैसे ही ऑफिस से बाहर निकला तो सामने से रिया आती दिखाई दी ।

राजेश (गुस्से में ) - इधर आओ।

रिया समझ गई कि उसकी मां ने भाई को कुछ उल्टा सीधा बोला है, वह अब उसके पास आकर खड़ी हो गई ।

राजेश - किसने कहा तुमसे कि मिसेज मल्होत्रा ने पैसे मांगे हैं?

रिया -भाई मैंने सुन ली थी आपकी बात ।

राजेश (झुँझलाते हुए) - सुन ही ली थी तो चुप नहीं लगा सकती थी ? क्या जरूरत थी उनसे लड़ने की? तुम जानती हो कि तुम्हारी वजह से क्या कुछ सुनने को मिला है मुझे ?

रिया की आंखों में आंसू आने लगे - सॉरी भाई पर वह गलत कर रही थी ।

, राजेश - सही और गलत का फैसला तुम हम बड़ों पर छोड़ दो। आइंदा मेरे मामलों में टांग मत अड़ाना वरना ...

तभी नैना रिया और राजेश के बीच में खड़ी हो गई -तो क्या? तुम ऐसे रिया से बात नहीं कर सकते हो ।वह तुमसे बहुत प्यार करती है , अगर उसकी मां तुम्हारे साथ गलत करती है तो उसे बुरा लगता है और इसलिए वह उनसे लडी सिर्फ तुम्हारे लिए ।

राजेश - तुम हटो मेरे सामने से ।मैं अपनी बहन से बात कर रहा हूँ।

नैना - नहीं हटूंगी । देखो जरा उसे, कितना डर गई है वह तुम्हारे ऐसे व्यवहार से । नैना ने डरी हुई रिया की ओर इशारा किया और उसे खुद के पीछे छुपा लिया।

राजेश (नैना को अनसुना कर ) - रिया सामने आओ , जवाब दो? मुझे क्यों परेशान हो रही हो ।

रिया ( रोते हुए) - भाई मैं बस गलत बात सहन नहीं कर पाई।

राजेश- सहन नहीं कर पाई और अभी मै जो सहन करके आ , रहा हूं

नैना - राजेश प्लीज तुम अभी बहुत गुस्से में हो, बाद में बात करना इस मामले में ।

राजेश - क्या बात करूँ? तुम लोगों से बात करने का कोई फायदा ही नहीं है - कह कर बाहर निकल गया।

नैना ने रिया को समझा-बुझाकर चुप कराया और जल्दी से बिल्डिंग से बाहर आई तो राजेश जा चुका था ।

नैना वापस लौट कर आई और रिया से बोली - राजेश की बातों को दिल पर ना लेना।

रिया - मैं क्या करूँ? माँ भाई के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार करती है तो मुझे बहुत बुरा लगता है । मैं नहीं चाहती कि वो भाई से हर वक्त पैसे मांगती रहे ।

नैना -कोई बात नहीं , वह बस अभी नाराज है ।जब शांत हो जाएगा तो सब समझ जाएगा । तुम शांत रहो और घर जाओ। राजेश के घर पहुंचने पर मुझे फोन कर देना प्लीज ।

रिया हां में सर हिला कर घर के लिए चली गई ।

,

नैना अच्छे से जानती थी कि मिसेज मल्होत्रा की बातें सीधे राजेश के दिल में चुभती थी, वह हर वक्त उससे ऐसे ही बातें करती थी ।राजेश भी कई बार उन्हें पलट कर जवाब दे देता , कई बार रिया की सोच कर चुप लगा जाता ।

रात हो चली थी , सभी ऑफिस से घर जा चुके थे । नैना भी घर के लिए साहिल के साथ निकल ही रही थी कि रिया का फोन आया - भाई अभी तक घर नहीं आए हैं , ऑफिस में है क्या?

नैना - नहीं , यहां नहीं है ।

रिया -उनका फोन भी बंद आ रहा है ।

नैना - उसने ऑफिस में ही फोन फेंक दिया था । तुमने विशाल या रिचा से बात की ?

रिया - हां लेकिन उन्हें भी नहीं पता भाई के बारे में।

नैना - मै देखती हूँ कुछ।

, साहिल गाड़ी निकालने पार्किंग एरिया में गया था , नैना अब उदास सी बिल्डिंग के बाहर खड़ी थी कि पता नहीं राजेश कहां चला गया । तभी उसकी नजर सिक्योरिटी गार्ड पर गई जो कि बिल्डिंग को दोबारा से खोल रहा था ।

नैना (हैरानी से ) - भैया यह दोबारा क्यों खोल रहे हो?

सिक्योरिटी गार्ड - राजेश सर का फोन आया है ,अभी थोड़ी देर में ऑफिस आ रहे हैं इसीलिए ऑफिस खोल रहा हूं - यह सुनकर नैना की जान में जान आई ।

नैना ने साहिल को जबरदस्ती घर भेज दिया और रिया को फोन कर बता दिया कि राजेश वापस ऑफिस लौटने वाला है ।

नैना वापस आकर ऑफिस में ही बैठ गई और राजेश का इंतजार करने लगी । थोड़ी देर में राजेश के कदमों की आवाज सुन नैना अब उठ कर बाहर की ओर चली । राजेश के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था । नैना को इग्नोर कर वह अपने केबिन में गया और फोन को उठाने लगा।

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नैना - तुम ठीक तो हो राजेश ?

राजेश -क्यों तुम्हें ठीक नहीं दिख रहा हूं मैं ?

नैना - नहीं, तुम अभी तक नाराज हो मिसेज मल्होत्रा से ?

तभी राजेश गुस्से में बोला - नाम मत लो उनका । नफरत है मुझे उनसे और उनके नाम से भी और तुम होती कौन हो मेरी पर्सनल लाइफ में दखल देने वाली ? तुम्हें तुम्हारा नया प्यार मिल गया है तो जाओ , उसके साथ घूमो फिरो और वक्त बिताओ । यहां कोई फायदा नहीं है समय खराब करने में ।

नैना - यह क्या बार-बार साहिल साहिल लगा रखा है ? अगर साहिल आज हमारे बीच में है तो वह सिर्फ तुम्हारी वजह से। तुमसे मैंने पूछा था कि क्या तुम मुझे अपनी जिंदगी में वापस लाओगे पर तुमनें मना कर दिया । अब मैं साहिल के साथ आगे बढ़ रही हूं तो भी तुम्हें परेशानी है और अगर तुम्हारा इंतजार करूं तो भी परेशानी है । तुम ही बताओ मैं करूं तो क्या करूं?

राजेश - जैसे मेरी कही सारी बात मानती हो तुम ? कहने को तो मैंने यह भी कहा था कि वह लड़का सही नहीं है

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नैना ( हैरानी से) - आखिर क्या परेशानी है ? तुम्हें साहिल क्यों पसंद नहीं है ।

राजेश - नैना देखो, मेरा दिमाग पहले से ही बहुत खराब है । मैं इस वक्त तुम से बहस के मूड में नहीं हूं - कहते हुए राजेश जैसे ही आगे बढ़ा कि नैना ने उसका रास्ता रोक लिया - तुम्हें रिया से इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी।

राजेश (गुस्से में ) - तुम होती कौन हो मुझे बताने वाली कि मुझे किससे कैसी बात करनी है ? वह मेरी बहन है, मैं जैसे चाहे उससे बात करूंगा । मेरी जिंदगी में टांग अड़ाना बंद कर दो । थक गया हूं इस रोज-रोज के झंझट से ।

मिसेज मल्होत्रा ने बचपन से मेरी जिंदगी का सुकून छीना हुआ है , रिया की परेशानी यह है कि वह मुझे हद से ज्यादा प्यार करती है जिससे मिसेज मल्होत्रा मुझे कसूरवार ठहराती हैं । मैं रिया से सगी बहन से भी ज्यादा प्यार करता हूं लेकिन यह जो सौतेला शब्द है कि मेरा पीछा नहीं छोड़ता । क्या करूं ? कैसे साबित करूं कि मैं उसका बुरा नहीं चाहता।

और तुम, तुमसे तो क्या कहूं मैं ? जब तुम्हें पाया था तो सोचा था कि तुम्हारे प्यार के सहारे अपनी जिंदगी खुशी-खुशी काट , लूंगा , हर गम सहन कर लूंगा पर तुम भी धोखेबाज निकली, बार-बार धोखे दिए तुमने । तुमसे तो अच्छी मिसेज मल्होत्रा है जिन्होंने मुझे कभी धोखा नहीं दिया । वह मुझे पसंद नहीं करती , यह मुझे साफ-साफ बता चुकी थी इसलिए मुझे उनसे कोई उम्मीद नहीं थी पर तुम? तुमने बार-बार मेरे विश्वास को तोड़ा और अब मुझे समझा रही हो ? थक गया हूं मैं रोज-रोज के झगड़ों से , ना चैन से जी सकता हूं और ना मर सकता हूं - कहते हुए वह वहीं पास में रखी कुर्सी पर बैठ गया ।
 
नैना - हो गया, चलो अब घर। रिया परेशान हो रही है - कहते हुए नैना ने आगे बढ जैसे ही राजेश का हाथ पकडा तो घबरा गई - तुम्हें तो बुखार है बहुत तेज..

राजेश अब शांत होकर बोला - नैना, साहिल सही नहीं है और नैना को बताया कि इनवेंटरी मे जो उसने साहिल की बात सुनी थी।

नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी.....,

मैने उसे कहते हुए सुना था । वह मुझसे बदला लेना चाहता है लेकिन क्यों, यह मैं भी नहीं जानता?

नैना ( गंभीर होकर ) - क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है ?

राजेश हैरानी से नैना को देखने लगा - तुम्हें मेरी बात पर भरोसा नहीं है ?

नैना कुछ देर चुप रही फिर बोली - आज मेरा हाल भी कुछ तुम्हारे हाल जैसा है । दिल कहता है कि तुम्हारा यकीन करूं पर दिमाग कहता है कि तुम झूठ बोल रहे हो मुझे और साहिल को अलग करने के लिए।

राजेश हैरान सा नैना को देखता रह गया - तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं ? यह सोचती हो तुम मेरे बारे में?

नैना (गंभीरता से ) - मैं तुम्हारी हर बात पर आंख मूंदकर विश्वास कर सकती हूं पर साहिल वाली बात पर नहीं । मेरा मन कहता है कि वो एक अच्छा लड़का है ।

राजेश - और मैं ? मेरा क्या ?

नैना - तुम्हारा तो तुमने खुद ही डिसाइड कर लिया था कि कुछ नहीं हो सकता हमारे बीच । अच्छा यह सब छोड़ो , यह , बताओ कि तुम्हारी शादी की तैयारियां कैसी चल रही है और कब जा रहे हो दिल्ली अपनी दुल्हन के साथ ?

राजेश एक गहरी सांस लेकर कुर्सी से उठ खड़ा हुआ - तुमसे तो बात करना ही बेकार है ।मैं क्या बात कर रहा हूं और तुम कहां जा रही हो ? अगर तुम चाहो तो विशाल से पूछ लो , मैंने उसे भी यह बात बताई थी ।

नैना यह सुनकर हंसने लगी ।

राजेश (गुस्से में ) - तुम्हें हंसी आ रही है ?

नैना - और नहीं तो क्या जो विशाल तुम्हारे कहने पर मुझे प्रपोज तक कर सकता है, वह क्या तुम्हारे लिए इतना भी झूठ नहीं बोल सकता ? ना जाने और क्या क्या झूठ बोले हैं तुमने मुझे तकलीफ पहुंचाने के लिए और अभी साहिल वाला झूठ।

मैं तुम्हारी किसी चाल में नहीं आऊंगी - कहते हुए नैना मुस्कुराने लगी ।

राजेश (गुस्से में ) - अच्छा है फिर । मेरे पास मत आना कभी रोते हुए , वैसे भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हारे साथ क्या होगा और अगर तुम्हें साहिल पर भरोसा है तो ठीक है।

एक काम करो , तुम जाओ यहां से । मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है ,तुम सब स्वार्थी हो । सब अपनी अपनी सोचते , हो लेकिन कोई मेरा नहीं सोचता । क्या मैं इतना गिरा हूँ कि जिस लड़की को मैंने बेइंतहा मोहब्बत की थी , वह आज मेरी कहीं बात पर शक कर रही है।

नैना - राजेश तुम मेरी बात......

राजेश ( गुस्से में ) - कुछ नहीं सुनना मुझे । जाओ यहां से अभी इसी वक्त ।

नैना (परेशान होकर ) - प्लीज , तुम थोड़ा आराम करो। तुम्हें बहुत तेज बुखार है , मैं डॉक्टर को...?

राजेश - तुम जाती हो या नहीं ? अगर 1 मिनट के अंदर तुम यहां से नहीं गई तो मैं धक्के मार कर तुम्हें निकाल दूंगा।

नैना की आंखें भर आई - ठीक है , अगर तुम्हारा गुस्सा मुझे धक्के मार कर बाहर निकालने से शांत होगा तो वह भी मंजूर है पर तुम्हें अकेले छोड़कर नहीं जाऊंगी ।

राजेश- तो ठीक है फिर यही सही - कहते हुए वह नैना को हाथ से पकड उसे लगभग खींचते हुए बाहर ले जाने लगा -निकलो यहां से , तुम लोगों ने जीना हराम कर रखा है मेरा। , कभी कुछ तो कभी कुछ । और सहन नहीं करूंगा मैं अपनी जिंदगी से ।

नैना चुपचाप चली जा रही थी , राजेश गुस्से से बडबडाए जा रहा था - जिसे देखो, उसे मुझसे परेशानी है । मेरे पीछे पड़े हैं सब, कभी-कभी तो लगता है कि तुम सब मिले हुए और मुझे पागल करना चाहते हो । जाओ , सब चले जाओ यहां से ।कुछ पल सुकून से रह लूँ, इतना एहसान कर दो मुझ पर ।

अब वह बिल्डिंग के बाहर आ गया और नैना को बाहर सड़क पर छोड़ दिया - जाओ यहां से और दोबारा लौट कर मत आना यहां । नैना चुपचाप सड़क पर खड़ी रह गई ।

राजेश सिक्योरिटी गार्ड से बोला - चाबी मुझे दो और घर जाओ , मैं जब यहां से निकलूंगा तो खुद इसे लाँक कर दूंगा।

सिक्योरिटी गार्ड हिचकिचाते हुए - सर आप ....

राजेश (गुस्से में ) -जितना कहा है उतना करो

सिक्योरिटी गार्ड उसे चाबी देकर वहां से चला गया।

राजेश ने अब गुस्से में नैना को देखा - तुम्हें अलग से कहना , पड़ेगा ?

वह बात सुन नैना चुपचाप वहां से चली गई तो राजेश का गुस्सा और भी बढ़ गया - कैसी लड़की है यह, कहने को तो इसका प्यार था और आज मुझे जब सबसे ज्यादा इसकी जरूरत है ताे इस कदर छोड़ कर जा रही है । मैंने गुस्से में जाने को कहा तो चली जाएगी ? वह बिल्डिंग के अंदर आया और दरवाजे को लॉक पर अपने आफिस पहुंच गया ।

राजेश अब खुद से कहने लगा - सब बेकार लोग है , मेरी किस्मत ही खराब है । उसे अब तेज बुखार आ रहा था और शरीर भी बुरी तरह दुखने लगा था । वह अपने केबिन में आया और वहां सोफे पर अपना कोट उतारकर एक कोने में रख उसी पर लेट गया ।

वह अब सोने की कोशिश करने लगा, थका हुआ होने की वजह से थोड़ी देर में उसे नींद आ गई । अभी कुछ देर ही हुई होगी कि उसे महसूस हुआ कि कोई उसके सर पर कुछ गीला कपड़ा बार-बार रख रहा है । राजेश ने आँखें खोली तो उसके पास नैना बैठी हुई थी, वह बार-बार उसके सर पर गीला कपड़ा रख रही थी। राजेश उठने को हुआ कि नैना नेे उसे वापस लेटा दिया ।

राजेश (हैरानी से ) - तुम यहां कैसे आईं, मैंने तो दरवाजा लॉक किया .... या कोई खिड़की खुली रह गई थी?

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नैना (मुस्कुराते हुए ) - दरअसल मैंने सिक्योरिटी गार्ड से मास्टर की ले ली थी ।

राजेश (गुस्से में) - पर तुम यहां क्यों आई हो? तुम तो चली गई थी ना जाओ यहां से या फिर से तुम्हें मै खुद....

नैना उदास होकर खड़ी हो गई - इसकी तुम्हें कोई जरूरत नहीं पड़ेगी , तुम्हें बुखार है और मैं तुम्हें बार-बार तकलीफ नहीं दूंगी । अगर तुम ठीक होते तो मैं यहाँ से बिल्कुल भी नहीं जाती लेकिन तुम्हें इस हालत में मैं और परेशान नही करना चाहती - कहते हुए नैना ने अपना बैग उठाया और केबिन से बाहर निकलने को हुई कि तभी राजेश की शांत आवाज आई- अब आ ही गई हो तो थोड़ी देर मेरे साथ बैठ जाओ ।

नैना मुस्कुराते हुए बोली - मैं तो नाटक कर रही थी जाने का । वैसे मुझे याद है , एक बार तुमने बताया था कि जब तुम्हारी तबीयत खराब होती है तो तुम्हें अकेले रहना अच्छा नहीं लगता तो फिर मैं तुम्हें अकेले कैसे छोड़ देती ?

हां वह बात अलग है कि तुम गुस्से में कभी-कभी बहुत ज्यादा बोल जाते हो पर कोई बात नहीं , मैं समझ सकती हूं। नैना ने राजेश ती ओर दवा बड़ा दी, राजेश ने उठकर वह दवा ले ली और वापस से सोफे पर लेट गया। कुछ देर तक वहाँ सन्नाटा , रहा।

नैना को यह चुप्पी अच्छी नहीं लग रही थी, उसने अब अपना फोन उठाया और धीमी आवाज मे गाना सुनने लगी -

"लग जा गले कि फिर हसीं रात हो ना हो

शायद फिर इस जनम में मुलाकात हो ना हो"

नैना ने देखा कि राजेश चुपचाप छत की ओर टकटकी लगाए देख रहा था ,जैसे किसी गहरी सोच में डूबा हुआ है ।

नैना - कहां खो गए?

राजेश कुछ नहीं , बस कुछ पुरानी यादें याद आ गईं।

नैना - गाना बंद कर दू ?

राजेश - नहीं, चलने दो इसे बार बार। एक अलग ही सुकून देता है ये मुझे।

नैना - हम्म, वैसे तुमने तो अच्छे बच्चों की तरह एक बार में ही दवा ले ली और वह भी बिना झगड़ा किए ।

, राजेश - क्योंकि अब और ताकत नहीं बची है मुझ में , बाहर की दुनिया से लड सकता हूं पर अपने ही घर वालों से कैसे लड़ू? कभी-कभी सोचता हूं कि सब छोड़कर कहीं दूर चला जाऊं जिससे कम से कम मेरे घरवाले तो खुश रहे ।

मेरी वजह से पापा और मिसेज मल्होत्रा मे अक्सर अनबन हो जाया करती है । अब तो रिया ने भी यही काम करना शुरू कर दिया . घर कर जाता हूं तो अजीब सा तनाव बना रहता है इसलिए कोशिश करता हूं कि जितना कम हो सके, उतना ही वहां जाऊं ।

नैना बस चुपचाप उसे देखे जा रही थी और गीला कपडा बार बार उसके सर पर रख रही थी।

राजेश - यह गाना मेरी माँ का सबसे पसंदीदा गाना था, अक्सर वो इसे गुनगुनाया करती थी। मैं 6 साल का था , जब मां और पापा का एक्सीडेंट हुआ । उस वक्त स्कूल में था ,मैं उसी सुबह में मां से लड़कर गया था क्योंकि उन्होंने मुझे ज्यादा चॉकलेट्स देने से मना कर दिया था। उस दिन पापा के दोस्त मुझे स्कूल से घर ले गए ।

वहां मैं अपने कमरे में बैठा बाहर हॉल से आती हुई सारी आवाजें सुन रहा था । मां को बचाया नहीं जा सका था और पापा की हालत भी नाजुक थी । मुझे लग रहा था कि शायद मैंने चॉकलेट ज्यादा मांगी तो माँ नाराज होकर मुझे हमेशा के , लिए छोड़ कर चली गई है । मैंने सारी चॉकलेट्स निकाल डस्टबिन में फेंक दी कि शायद अब तो माँ वापस आ जाएंगी पर वह नहीं आई , कभी नहीं आई ।

मेरे दिल में एक अजीब सी भावना पैदा हो गई कि काश मैं उस रोज मां से लड़कर ना गया होता, काश मैंने उनसे जिद ना की होती ।

मैं उस दिन बस एक बार माँ और पापा को देखना चाहता था पर छोटा बच्चा हूं , यह सोच कर मुझे उन दोनों से नहीं मिलने दिया। रात में बस एक ही बात मेरे दिमाग में चलती रही थी कि मां की तरह अगर पापा भी चले गए तो मेरा क्या होगा ? मेरा ख्याल कौन रखेगा ? मैं किसको पापा कहूंगा।

पता नहीं ऊपर वाले को कैसे मुझ पर दया आ गई और पापा बच गए। मां की मौत के बाद पापा बहुत रोये पर मुझे देखते ही उन्होंने अपने आँसू पोंछ डाले और मुस्कुराते हुए मुझे उठा कर अपने सीने से लगा लिया । मुझे उस वक्त लगा कि पापा को मां शायद पसंद नहीं थी, जो उनके जाने पर मुस्कुरा रहे हैं पर जब होश संभाला तो समझ आया कि उस दिन पापा खुश नहीं थे , बस दिखावा कर रहे थे जिससे मैं ना रोऊ । कुछ सालों बाद परिवार वालों के दबाव के चलते पापा ने दूसरी शादी कर ली ।

मिसेज मल्होत्रा कुछ ही दिनों में मुझसे परेशान हो गई थी , क्योंकि मैं सौतेला था। पता है नैना, यह सौतेला शब्द ऐसा ही है कि जिस रिश्ते के आगे लग जाए तो उस रिश्ते को खत्म कर देता है । हां सभी लोग ऐसे नहीं होते पर मिसेज मल्होत्रा इन्हीं लोगों की भीड़ में शामिल थी ।

मुझे अपनी चिन्ता नहीं है लेकिन रिया और पापा की है। कई बार ऐसा होता है कि मुझे मां की बहुत याद आती है पर मैं किसी से कुछ कह नहीं पाता । जानता हूं कि बच्चे के लिए उसकी मां की अहमियत कितनी होती है इसलिए चाहता हूं कि रिया अपनी मां से दूर ना हो पर अब ऐसा लगता है कि मेरी यह कोशिश नाकाम रह जाएगी ।

सब कुछ मेरे हाथों से बिखरता जा रहा है और मैं कुछ नहीं कर पा रहा क्योंकि मुझे तोड़ने वाले भी अपने ही है - मैं सब से लड़ सकता हूं पर अपनों से नहीं - कहते हुए राजेश का गला भर आया । अब वह सोफे पर उठ कर बैठ गया और चुप हो गया।

आज राजेश ने पहली बार नैना के सामने अपनी मां की मौत का जिक्र किया था। कॉलेज टाइम में नैना ने पूछा था पर तब राजेश चुप हो जाता था पर आज उसने खुद अपना दिल खोल कर उसके सामने रख दिया।

नैना अब पास जाकर घुटनों के बल उसके सामने बैठ गई और राजेश को गले से लगा लिया । राजेश कुछ देर तक ,! चुपचाप यूं ही बैठा रहा , उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी पर ज्यादा देर तक वह अपनी नैना के सामने खुद पर काबू नहीं रख पाया और उसके गले से लिपट कर उसके कंधे पर सर रखकर रोता रहा ।

वहीं गाना अभी भी चल रहा था -

"पास आइये कि हम नहीं आएँगे बार बार

बाँहे गले में डाल के हम रो लिए जार जार

आँखों से फिर ये प्यार की बरसात हो ना हो

शायद फिर इस जनम में मुलाकात हो ना हो"

राजेश अभी भी नैना के कंधे पर सिर टिकाए बैठा खुद को सँभालने की कोशिश कर रहा था - तुम्हें पता है नैना, आज मिसेज मल्होत्रा ने क्या कहा मुझसे ? उन्होंने कहा कि मैं किसी का भी सौतेला तो क्या सगा बेटा बनने के लायक भी नहीं हूं और शायद इसलिए मेरी मां मर गई। क्या यह सच है? क्या मैं सच में इतना बुरा हूं ? यह सुन नैना की आँखों से आँसू बहने लगे, कुछ देर तक वह यूं ही राजेश के गले से लगी हुई बैठी रही।

अब नैना ने राजेश से खुद को दूर हटाया और उसकी ओर देखा - राजेश बिल्कुल उस एक छोटे बच्चे की तरह दिख रहा था जिसकी मां उसे छोड़कर चली गई है और वह आज तक उसका इंतजार कर रहा है ।
 
नैना ने बड़े प्यार से उसके आंसुओं को पोंछा और उसके बिखरे हुए बालों को अपने हाथों से सँवारते हुए बोली - तुम्हें पता है, तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो और एक बहुत अच्छे बेटे भी जिसने अपने पिता के कंधे से कंधा मिला उनकी सारी जिम्मेदारियां हल्की कर दी और उनका सहारा बने । तुम एक बहुत ही अच्छे भाई हो जो हर वक्त अपनी बहन की खुशियों के बारे में सोचता है। तुम एक सच्चे दोस्त हो , जो हर वक्त अपने दोस्तों के साथ उनके अच्छे बुरे में उनके साथ खड़ा रहता है । अगर गुस्सा करते हो तो प्यार भी करते हो , अगर डांटते भी हो तो संभालते भी हो । तुम से बेहतर इंसान मैंने आज तक नहीं देखा । सच कहूँ तो मुझे जलन होती है उन सब से जिनके पास तुम्हारा साथ है - कहते हुए नैना चुप हो गई । दोनों एक दूसरे को बस चुपचाप देखे जा रहे थे, उनके पास लफ्ज ही नहीं थे कुछ कहने को क्योंकि प्यार लफ्जों मे बयाँ होने वाली चीज ही नहीं है।

गाना अब दोबारा बज उठा था -

" हमको मिली है आज यह घड़ियां नसीब से

जी भर के देख लीजिए हमको करीब से

फिर आप के नसीब में यह बात हो ना हो

शायद फिर इस जन्म में मुलाकात हो ना हो

लग जा गले "

, नैना ने अब राजेश के चेहरे को अपने हाथों में बडे प्यार से थाम लिया - राजेश तुम ही हो जिसने मुझे प्यार करना सिखाया। मै कभी भी इस प्यार के खूबसूरत एहसास को समझ ही नहीं पाती अगर तुम मुझे प्यार करना नही सिखाते - कहते हुए नैना अब राजेश के करीब बढने लगी।

राजेश ने जब नैना को खुद के करीब आते देखा तो एकदम से सोफे से उठ खड़ा हुआ और हडबडाते हुए बोला -म.. मैं ठीक हूं , चलो तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूं - कहते हुए वह जैसे ही चलने को हुआ कि नैना ने उसका हाथ पकड़ उसे वापस झटके से सोफे पर बैठा दिया । नैना की यह हरकत देख राजेश हैरान सा उसे देखता रह गया ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई है ।

राजेश की बोलती नैना के इस बदले रूप को देख बंद हो गई, उसने सपने में भी नैना का यह अंदाज नहीं सोचा था। आज वह बदली बदली सी नजर आ रही थी । वह अब हिम्मत कर बोला - नैना ,तुम ठीक तो हो ?

नैना - तुम्हें कैसी नजर आ रही हूं मैं ? क्या हुआ है मुझे ? मैं बिल्कुल ठीक हूं - कहते हुए नैना ने अपने दोनों हाथों को राजेश के कंधों पर रख दिया और मुस्कराते हुए बड़े प्यार से उसे देखने लगी ।

, राजेश नैना के इस बदले रूप को देख सोच मे पड गया - जब कभी मैं नैना के करीब जाने की कोशिश करता था तो वह शादी के बाद कह कर दूर हो जाती थी पर आज जब वह दूर जा रहा है तो वह खुद ही करीब आने की कोशिश कर रही है।

नैना - तुम ही वो इंसान हो जिसने मुझे समझाया कि सच्चा प्यार बहुत खुशनसीबो को ही मिलता है और मैं उनमें से एक हूं लेकिन शायद मैं तुम्हारे लायक नहीं थी पर फिर भी मेरे लिए तुम बेस्ट हो । तुम खुद को मेरी नजरों से देखोगे तो तुम्हें पता चलेगा कि मेरी नजरों में दुनिया के सबसे अच्छे इंसान हो - कहते हुए नैना ने राजेश के चेहरे को एक बार फिर अपने दोनों हाथों से थाम लिया - तुम्हें पता है , मैं आज बहुत खुश हूं क्योंकि आज आखिरकार तुमने वह बात मुझसे शेयर की जो तुम आज तक किसी से नहीं कर पाए । इस भरोसे के लिए शुक्रिया - कहते हुए नैना अब राजेश के थोड़ा और करीब आ उसकी आँखों में देखने लगी।

राजेश ने अब अपनी आंखें बंद कर ली क्योंकि वह नहीं चाहता था कि नैना के लिएउसके दिल में जो नाराजगी है , वह सब खत्म हो जाए और नैना कहीं उसकी आंखों के जरिए उसके दिल में ना झांक ले कि वह आज भी सिर्फ और सिर्फ नैना से ही प्यार करता है । वह खुद को समझाने लगा कि कमजोर नहीं पडना राजेश।

, नैना - थैंक्स मुझे समझाने के लिए कि रिश्ते चाहे कैसे भी हो पर उन्हें पूरी ईमानदारी के साथ ही जीना चाहिए । मेरी तरफ देखो राजेश ।

अब नैना के खुद के करीब होने के एहसास से ही राजेश की धड़कन तेज होने लगी , उसका दिल उसे दिमाग पर हावी होने लगा ( जो वह नहीं चाहता था) जो उसे बार-बार कह रहा था कि अपने दिल की बात कह भी दो राजेश, नैना को माफ कर दो । उस पर एक बार फिर भरोसा करो ।

नैना - आँखें खोलो ना।

राजेश अब आंखें खोल कर नैना को देखने लगा। नैना ने देखा कि उसके चेहरे पर अजीब सी कश्मकश थी - क्या बात है , लगता है तुम्हारा दिल तुम्हारा साथ नहीं दे रहा ? नैना ने अब अपने एक हाथ को उसके सीने पर रख दिया - अगर तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो तो फिर तुम्हारा दिल इतने जोरो से क्यों धड़क रहा है ?

राजेश अब अलग हटने को हुआ कि नैना ने उसे फिर वहीं रोक लिया - तुम्हें याद है , तुमने कॉलेज में कहा था कि तुम मुझसे प्यार करते हो और जब भी मेरे पास होते हो तो तुम्हारा दिल जोरो से धड़कने लगता है फिर आज ऐसा क्यों हो रहा है तुम्हारे साथ?

, राजेश अब इधर उधर देखने लगा क्योंकि नैना की और देखना नहीं चाहता था। वह जानता था कि अगर उसने अब नैना की ओर देखा तो बहुत जल्द कमजोर पड़ जाएगा ।

उसे यूँ देख नैना मुस्कुराते हुए बोली - क्या हुआ ? मेरी तरफ देखोगे भी नहीं या फिर तुम्हें डर है कि मेरे लिए जिस प्यार को तुम अपने अंदर छुपा कर बैठे हो, कहीं वह बाहर ना आ जाए।

राजेश - नैना ऐसा कुछ....

नैना - तुम रिचा से शादी करने जा रहे हो पर क्या सच में तुम्हें कभी भी उसके लिए ऐसा एहसास महसूस हुआ है जो आज और अभी तक मेरे साथ महसूस करते हो ? राजेश अब एक बार फिर खामोश हो गया ।

नैना - तुमसे एक बात कहूं - हाँ,पहले तुम हैंडसम थे लेकिन अब वक्त के साथ साथ तुम और भी हैंडसम हो गए हो और हाँ, मुझे पहले वाले राजेश से ज्यादा यह वाला अकड़ू राजेश ज्यादा पसंद है - कहते हुए नैना हँसने लगी।

राजेश को अब लगने लगा कि किसी भी वक्त उसका दिल उसके दिमाग पर हावी हो सकता है, जो वह होने नहीं देगा - सोचकर उसने नैना को एक झटके से खुद से दूर किया और , खड़ा हो जैसे ही केबिन से बाहर जाने को हुआ कि नैना ने आकर उसे पीछे से गले से लगा लिया ।

राजेश ने जब नैना को अलग करने की कोशिश की तो उसने पकड और मजबूत कर दी । राजेश चाहता तो थोड़ी ताकत लगा नैना से अलग हो सकता था पर वह नैना पर ताकत आजमाकर उसे चोट नहीं पँहुचाना चाहता था।

राजेश को अब नैना की धड़कने महसूस होने लगी। उसका दिल भी जोरों से धडक रहा था । राजेश खुद को संभालते हुए बोला - नैना, तुम शायद भूल रही हो कि जल्द ही मेरी शादी रिचा से .....

नैना ने अब पीछे हट राजेश से अलग हो उसे अपनी ओर घुमाया - पर हुई तो नहीं है ना ।

राजेश - होश मे आआे नैना, ये....

नैना - श्शश.... तुम बस मेरी बात सुनो और कहीं ध्यान मत दो राजेश । मैं जानती हूं कि तुम आज भी मुझसे ही प्यार करते हो। तुम बस एक बार हां कर दो फिर रिचा को पीछे हटने के लिए मैं मना लूंगी । पहले कॉलेज में तो तुम कहते थे कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो , मैं जिंदगी हूं तुम्हारी और अब कहते हो नफरत करते हो । आज बोल भी दो अपने दिल की बात और कुछ मत सोचो। जो भी है जैसा भी है , कह दो , बस एक बार । राज सिर्फ एक बार बता दो कि तुम मुझसे प्यार करते हो या नफरत ?

कहते हुए नैना राजेश के बहुत करीब आ गई। राजेश कुछ समझ पाता कि उसे नैना के होठों का एहसास अपने माथे पर हुआ । नैना के उस प्यार में एक अपनापन, भरोसा और सम्मान था ।

अब राजेश पिघल गया, उसके दिमाग पर उसका दिल पूरी तरह हावी हो गया । रही सही कसर नैना के उसे पुराने दिनों की तरह प्यार से राज बुलाने और उसके प्यार भरे स्पर्श से पूरी हो गई ।

राजेश अब भावनाओं में बह चला - नैना मैं ...

नैना (मुस्कुराकर ) - हां बोलो , बस एक बार बता दो कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार है या नफरत?

नैना को अब लग रहा था कि आज उसने राजेश को उसके दिल की आवाज सुनने के लिए इस तरह प्यार से मनाया है, वह बस अपने दिल की बात बोल दे जिससे सारा नाटक यहीं खत्म हो जाए । नैना को यह सब करते हुए बहुत ही अजीब लग रहा था पर वह राजेश के लिए कुछ भी कर सकती थी। उसे पूरा भरोसा था कि राजेश अपनी मर्यादा को कभी नहीं , तोड़ेगा इसलिए उसने इतना बडा कदम उठाया।

नैना (उसका दिल अब घबराहट में जोरों से धडकने लगा कि पता नहीं वह अपने काम में सफल रही या नही ) - बोलो राजेश , क्या है तुम्हारे दिल में?

राजेश - नैना मैं तुमसे बहुत....,
 
राजेश अपने दिल के आगे हार चुका था । नैना को उसकी आंखों में सिर्फ प्यार ही प्यार दिख रहा था ।

राजेश - नैना मैं तुमसे ..

नैना - हां बोलो ।

राजेश - नैना मैं तुमसे बहुत प्..

कि तभी नैना का फोन बज उठा ।

राजेश और नैना अब फोन की तरफ देखने लगे ।

राजेश - नैना तुम्हारा फोन ।

नैना - बजने दो। तुम जो कह रहे थे , वह कहो ।

राजेश - नैना , पहले फोन देखो । हो सकता है , किसी का जरूरी फोन हो ।

नैना - पर..

राजेश - जाओ।

नैना अब जल्दी से सोफे के पास रखे अपने बैग की तरफ चली। उसने फटाफट से फोन निकालकर रिसीव किया तो पता चला रांग नम्बर था। नैना ने अब झुँझलाते हुए फोन काट उसे स्विच ऑफ कर दिया - जब फोन मिलाना आता ही नही है तो क्यों मिलाते है लोग, कम से कम नम्बर तो सही मिलाया करें- कहते हुए वह राजेश की तरफ मुड़ी और फिर से उसके पास पहुंच गई।

नैना - तुम कुछ कह रहे थे ना ? कहो ।

, राजेश - कुछ नहीं,चलो घर छोड़ दूं तुम्हें - कहते हुए वह सोफे से अपना कोट उठा कर कैबिन से बाहर निकल गया। नैना उसे आवाज देती रह गई पर वह नहीं रूका।

नैना अब अपनी किस्मत को दोष देने लगी - मेरा तो नसीब ही खराब है। ये रांग नम्बर को भी अभी फोन करना था। इतनी मुश्किल से हिम्मत कर मैंने यह कदम उठाया था कि इसने सब गड़बड़ कर दिया , 2 मिनट और रुक जाते तो क्या हो जाता। क्या करूँ? एक बार और कोशिश करूँ क्या ? हां, एक बार और देखती हूँ।

इतनी मुश्किल से लड़का लाइन पर आया था कि बना बनाया खेल बिगड़ गया - सोचते हुए वह ऑफिस से बाहर निकल नीचे बिल्डिंग के बाहर चल पडी।

उसने दरवाजे के पास खड़े राजेश को देखा कि वह किसी गहरी सोच में डूबा है । अब धीरे-धीरे उस ओर चल दी।

उधर राजेश खड़ा हुआ सोच रहा था - यह क्या कर रहा था मैं ? अगर फोन नहीं आता तो मैं नैना को अपने प्यार का इजहार कर देता । मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं ? नहीं, मैं कमजोर नहीं पढ़ूंगा।

, एक बार फिर राजेश के दिमाग ने उस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली ।

नैना राजेश के पास पँहुची - राजेश वो...

राजेश के चेहरे पर अब बेरूखी थी और उसने नैना की तरफ देखा भी नहीं - गाडी के पास पँहुचो, मै दरवाजा लाँक कर के आता हूँ ।

नैना समझ गई कि सारी मेहनत खराब हो गई थी और अब दोबारा कोशिश करने का कोई फायदा नहीं । वह मुरझाये चेहरे के साथ गाड़ी के पास जाकर खड़ी हो उसका इंतजार करने लगी । थोड़ी ही देर में राजेश वहां आया और गाड़ी स्टार्ट की - आओ बैठो ।

थोड़ी देर बाद गाडी में बैठी नैना ने उसे कई बार देखा पर वह चुपचाप गाड़ी चला रहा था । ऐसा लग रहा था कि जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

नैना - राजेश तुम कुछ कह रहे थे ना?

राजेश (हैरानी से) - मैंने तो कुछ नहीं कहा ?

, नैना - नहीं , मैं अभी नहीं थोड़ी देर पहले की बात कर रही हूं, वह तुम कुछ ऑफिस में कहने वाले थे ।

राजेश ( बेरूखी से ) - पता नहीं ,मैं भूल गया ।

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी - कितना झूठा लड़का है यह ? ऐसे कैसे याद नहीं है ।

नैना (खीझते हुए) - क्या तुम्हें सच में कुछ याद नहीं ?

राजेश - नहीं , मुझे कुछ भी याद नहीं है ।

नैना - वह मैंने पूछा था ना तुमसे कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए....

राजेश - नफरत है ।

यह सुनकर नैना अब खामोश हो गई , उसे पता था कि राजेश फिर से दिमाग की सुनने लगा है । कुछ देर तक कार में खामोशी रही ।

नैना सोच में पड गई कि करे तो क्या?

, नैना ने अब धीरे से अपना हाथ बढा राजेश के हाथ पर रखना चाहा कि राजेश का फोन बज उठा । नैना ने अब अपने हाथ को वापस खींच लिया। उसका मन कर रहा था कि दुनिया से मोबाइल का नामोनिशान ही मिटा दे, हर बार गलत वक्त पर ही बजता है।
 
राजेश ने गाड़ी साइड में लगाई और फोन उठा कर गाड़ी से बाहर निकल गया । नैना थोड़ी दूर खड़े राजेश को फोन पर बाता करते हुए देख रही थी , वह किसी से हँसते हुए बात कर रहा था ।आखिर किस से बात कर रहा है राजेश जो मेरे सामने बात नहीं कर पाया और देखो तो, कितना हंस के बात कर रहा है ? मेरे साथ तो ऐसे बैठा था कि पता नहीं किसी की तेरहवीं से आ रहे हैं ।

थोड़ी देर में राजेश वापस आया और गाड़ी चलाने लगा ।

नैना अपने गुस्से को काबू करते हुए बोली - किसका फोन था?

राजेश ने नैना की ओर देखा - तुम क्यों पूछ रही हो?

नैना - नहीं वो तुम ऐसे चले गए थे मेरे पास से और काफी , खुश भी लग रहे थे।

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - आजकल तुम अपना दिमाग कुछ ज्यादा ही चलाने लगी हो । क्या हर कॉल डिटेल मैं तुम्हें बताता रहूं कि कब किससे बात करता हूं ?

नैना झेपंकर कर चुप हो गई । राजेश ने नैना के घर जाकर गाड़ी रोक दी, नैना अब गाड़ी से उतर कर गुमसुम सी बढ चली।

राजेश अब उसके पीछे गाड़ी से उतरकर आया - नैना?

नैना (पीछे मुड़कर ) - हां ,कहो।

राजेश - थैंक्स मेरी हेल्प के लिए।

नैना यह सुनकर मुस्कुराते हुए बोली - तो तुमने थैंक्स बोल ही दिया ।

राजेश - हम्म । एक बात और , जितना जल्दी हो सके, साहिल से अलग हो जाओ वरना..

नैना - वरना क्या?

,

राजेश - वरना यह शुभ काम मुझे अपने हाथों से ही करना पडेगा।

नैना चुपचाप उसे देखती रही।

राजेश - मैं चलता हूं , कहते हुए वहां से चला गया।

नैना वहीं खड़ी खड़ी सोचती रही कि भले ही राजेश उससे अपने दिल की बात नहीं कर पाया पर आज नहीं तो कल, कह ही देगा । कुछ भी हो, आज का दिन काफी अच्छा था। आखिर राजेश ने अपने दिल की बात मेरे सामने जो रखी, जो उसन पहले किसी को नहीं बताई - यह सोच नैना मुस्कुराते हुए घर के अंदर चली गई ।

राजेश अब घर पहुंचा तो देखा कि रिया नजर नहीं आ रही थी। वह उसके कमरे की ओर बढ़ा और वहां जाकर देखा तो पाया कि रिया काम करते हुए सो चुकी थी । यह देख राजेश ने धीरे से उसका लैपटाँप और पेपर्स हटा दूर मेज पर रख दिये और कमरे की लाईट आँफ कर अपने कमरे में वापस आया ।

वह अब कुछ देर बिस्तर पर बैठा कुछ सोच ता रहा फिर , किसी को फोन मिलाया - मेरी बात ध्यान से सुनो, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए । हां, उस वक्त खुलकर बात नहीं कर पाया, पर याद रहे कि यह बात तुम्हारे और मेरे बीच में रहेगी। मैं जैसा कहूं वैसा ही करना - कहते हुए राजेश ने अब फोन वापस रखा और बिस्तर पर लेट गया।

वह सोचने लगा कि आज पूरे दिन में उसके साथ क्या-क्या हुआ , नैना की याद आते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कान तैर गई। वह खुद को आज काफी हल्का महसूस कर रहा था क्योंकि आज उसने अपने दिल के बोझ को हल्का कर लिया था अपनी माँ के बारे में नैना से बात कर ।

राजेश ने विशाल को फोन किया -सो गए थे क्या ?

विशाल - नहीं , कुछ काम कर रहा था ।

राजेश - मैंने जो डिटेल्स दी थी साहिल के बारे में, कुछ पता चला?

विशाल - हां , उसके घर का एड्रेस पता चल गया है । वह बेंगलुरु का रहने वाला है ।

, राजेश - एक काम करो , मुझे साहिल का एड्रेस भेज दो । मैं कल खुद जाऊंगा वहां।

विशाल - तुम्हें वहां जाने की क्या जरूरत है ? मैं कल भेज दूंगा किसी को ।

राजेश - नहीं , मुझे लगता है कि खुद ही काम करना होगा।

विशाल - मेरी बात ध्यान से सुनो , तुम कहीं नहीं जा सकते क्योंकि साहिल यहाँ नैना के साथ है। अगर उसे पता चला कि तुम यहाँ नहीं हो तो वह तुम्हारी गैरमौजूदगी का फायदा उठा सकता है क्योंकि हम अभी तक उसका प्लान नहीं जान पाए हैं ।

राजेश (गुस्से में) - तो क्या तमाशा देखूँ ?

विशाल ( कुछ देर सोच कर) - एक काम करते हैं । कल मैं खुद जाता हूं बेंगलुरु और साहिल के बारे में जानने की कोशिश करता हूं ।

राजेश - पक्का?

विशाल - हां यार, इतना तो कर ही सकता हूं मैं ।

,

राजेश - ठीक है पर संभलकर। अच्छा सुनो रिचा कैसी है ?

विशाल - वह ठीक है ।

राजेश - चलो कल तुम बेंगलुरु निकलो लेकिन हां साहिल का एड्रेस मुझे भी सेंड कर दो - कहते हुए उसने फोन रख दिया ।
 
राजेश अभी विशाल का भेजा एड्रेस पढ़ ही रहा था कि उसे कुछ याद आया- रिया ने भी तो बेंगलुरु में पढ़ाई की है और उसने कहा भी था कि शायद उसने साहिल को कहीं देखा है। साहिल का रिया को देख कर चुपचाप चले जाना , क्या यह सब मेरा भ्रम है या कुछ और ?

अगले दिन सुबह जब रिया सो कर उठी तो वह तैयार होकर नीचे आई । उसने देखा कि डाइनिंग टेबल पर नाश्ता पहले से ही लगा रखा है - क्या यह भाई ने ? पर वह तो गुस्सा है ना?

गुस्सा हूँ नहीं , था - यह कहते हुए राजेश मुस्कुराता हुआ वहां आया और रिया को कुर्सी पर बैठाया ।

रिया - आपको क्या जरूरत थी इसकी ? मैं कर लेती ।

,

राजेश मुस्कुराते हुए रिया के पास बैठ गया - देखो रिया , मैं तुम पर गुस्सा नहीं करना चाहता पर तुमने मुझे मजबूर कर दिया कल। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से तुम्हारे और मिसेज मल्होत्रा के बीच में कोई भी परेशानी हो । वह कैसी भी है पर है तो तुम्हारी माँ ही ।

रिया - वह आपकी भी मां है ना भाई, सगी हो या सौतेली -क्या फर्क पड़ता है ?

राजेश यह सुनकर चुप हो गया ।

रिया - अब आप ही बताइए भाई कि अगर वह आपकी सगी मां होती और मेरे साथ ऐसा करती तो आप क्या करते ? चुप बैठे रहते ?

राजेश - हम्म। बात तो तुम्हारी सही है पर क्या तुम्हें अच्छा लगता कि अगर तुम्हारी वजह से हम मां-बेटे आपस में लड़ते?

रिया अब उदास होकर बोली - नहीं ।

राजेश (मुस्कुराकर ) - तो यही समझाना चाहता हूं मैं कि वह , भी हमारे घर की सदस्य हैं और अगर वह पैसे मांगती हैं तो देने में बुराई क्या है ? उनका भी बराबर हक है , तो बस एक बात याद रखो । वह जो कहती हैं या करती हैं - उन्हें करने दो पर इससे हमारे रिश्ते में कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए ।

रिया - मैं ध्यान रखूंगी इस बात का।

राजेश - तुम कह रही थी कि तुमने साहिल को कहीं देखा है, कहां देखा है ? कुछ याद आया या नहीं ?

रिया - भाई पता नहीं क्यों , मुझे लगता है कि इस लड़के से पहले मिल चुकी हूं ।

राजेश (उत्सुकता से ) - कहां दिल्ली में या बेंगलुरु में या फिर कहीं और ?

रिया - नहीं भाई , कुछ याद नहीं आ रहा ।

राजेश - अच्छा चलो , मैं ऑफिस के लिए निकलता हूं । अगर तुम्हें कुछ याद आये तो मुझे बताना - कहते हुए वह उठकर ऑफिस के लिए निकल गया ।

राजेश के चले जाने के कुछ ही देर बाद दरवाजे पर किसी ने , दस्तक दी। रिया ने दरवाजा खोला तो सामने खड़े इंसान को देखकर हैरान रह गई - आप ? आप यहां?

दूसरी ओर राजेश ऑफिस पहुंचा तो उसकी नजर नैना की टेबल पर गई - नैना वहां नहीं थी ।

राजेश ने अपनी घड़ी देखी - ऑफिस टाइम तो हो गया है लेकिन यह लड़की कहां रह गई? अभी तक आई क्यों नहीं कि तभी उसे महसूस हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है।

उसने पलट कर देखा तो मुस्कुराती हुई नैना खड़ी थी - गुड मॉर्निंग सर ।मेरे ख्याल से ये मेरा टेबल है और आपकी उधर केबिन में ।

राजेश ( झेप कर ) - हाँ तो मैं वहीं जा रहा था। वो मुझे कुछ काम था तुमसे इसलिए ...

नैना - क्या काम था ?

राजेश (हडबडाते हुए) - वो.. मैं भूल गया । जब याद आएगा तो बता दूंगा - कहते हुए वह कैबिन में चला गया ।

नैना (मुस्कुराते हुए ) - झूठा कहीं का ।

,

राजेश को एक मीटिंग में जाना था, तो वह थोड़ी देर में ही आँफिस से निकल गया ।

राजेश अपनी मीटिंग में बैठा था, रिया बार बार उसे फोन मिला रही थी। राजेश ने फोन साइलेंट मोड पर कर रखा था तो उसे पता नही चला।
 
दोपहर जब वह मीटिंग से बाहर निकला और फोन देखा तो सोच में पड गया कि रिया ने उसे इतने फोन क्यों किए? उसने अब रिया को फोन किया।

राजेश - हलो, क्या बात है। इतने सारे फोन कुछ ही समय में? सब ठीक है ना ?

रिया परेशान सी थी - भाई कहाँ हो, अब उठा रहे हो फोन? जल्दी आँफिस आओ । यहाँ सब गडबड हो रहा है ।

राजेश - हो क्या रहा है वहाँ? कुछ बताओगी भी?

रिया - भाई वो माँम....

राजेश (झल्लाकर) - क्या माँम ? खुल के बताओ।

,

रिया -भाई, माँम यहाँ है आँफिस में। सुबह आपके जाने के बाद ही वह घर आ गई थी मुझसे मिलने । वो आँफिस देखने की जिद करने लगी, मैंने मना भी किया था पर मॉम नहीं मानी । वह जबरदस्ती ऑफिस आ गईं हैं।

राजेश यह सुन हैरान रह गया कि वो यहाँ क्यों आईं है? वह अब मन ही मन सोचने लगा कि जरूर इनकेे दिमाग में कुछ चल रहा है, ऐसे कैसे ऑफिस देखना चाहती हैं ।

रिया - क्या हुआ भाई ? कुछ बोलो ना।

राजेश - मेरी बात ध्यान से सुनो रिया, यहां सबको लगता है कि रिचा मेरी मंगेतर है । यह बात मिसेज मल्होत्रा के सामने आई तो बहुत बड़ी गडबड हो जाएगी। तुम.. तुम जल्दी जाओ और उन्हें रुको लोगों से बातचीत करने के करने से।

रिया - पर भाई मैं कैसे ?

राजेश - कुछ भी करो पर जल्दी जाओ । मै बस यहाँ से निकल रहा हूँ ।

रिया - ठीक है, मैं कोशिश करती हूँ।

,

राजेश - रिया सुनो ।

रिया - जल्दी बोलो ना।

राजेश - वो नैना को मिसेज मल्होत्रा से दूर रखना।

रिया - मैं कोशिश करूँगी- कहते हुए उसने फोन रख दिया।

राजेश अब जल्दी से बिल्डिंग से निकल कर अपनी कार की तरफ भागा । उसका दिल अब जोरों से धडक रहा था कि अगर मिसेज मल्होत्रा को नैना का पता चल गया कि वह इसी ऑफिस में काम करती है तो वो उसे कुछ सुनाये बिना नहीं छोड़ेंगी । मिसेज मल्होत्रा को मुझसे और मुझ से जुड़ी हर चीज से परेशानी है । वह नैना को कुछ कहे या सबके सामने कुछ तमाशा बनाए बिना नहीं रह पाएंगी । मुझे उन्हें रोकना होगा ।

राजेश अब फटाफट से कार स्टार्ट कर अपने आँफिस की ओर तेजी से बढ चला ।

तकरीबन एक घंटे में अाँफिस पँहुच गया। राजेश जल्दी से , अंदर की ओर भागा और सामने का नजारा देख उसकी साँस ही अटक गई - जिस बात का डर था, वही हुआ।

नैना और मिसेज मल्होत्रा आमने सामने खड़ी थी। सारा नैना के पास ही खडी थी और सारा स्टाफ उन्हें घेर कर खडा था। वहीं खड़ी रिया की नजर जब राजेश पर पडी तो वह उसे कातर नजरों से देखने लगी । राजेश ने अब खुद को संभाला और बोला - क्या हो रहा है यहाँ.....,
 
राजेश - क्या हो रहा है यहां ?

राजेश की आवाज सुनकर सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे । मिसेज मल्होत्रा ने राजेश को नफरत की निगाहों से देखा, कुछ वैसा ही हाल राजेश का भी था।

राजेश अब आगे बढ़ सभी लोगों के पास पहुंचा - क्या मैं जान सकता हूं कि आप सभी लोग यहां पर काम छोड़कर कर यहाँ क्या कर रहे है - कहते हुए राजेश ने नैना की ओर देखा । उसे नैना की नजरों में एक उम्मीद नजर आई जो उसे राजेश को देख बँधी थी।

रिया - भाई वो...

मिसेज मल्होत्रा - मै बताती हूं सब। राजेश कैसे लोग रखें है तुमने नौकरी पर ? इनसे अच्छे तो सर्कस के जानवर भी होते हैं । इन लोगों को ना तो कोई स्टैंडर्ड है और ना ही कोई तमीज ।

यह देखो तुम्हारी दो कौड़ी की एमप्लाई ने मेरी कितनी महँगी सैंडिल्स खराब कर दी , इसने जानबूझकर काँफी गिरा दी इन पर । मेरा नुकसान हो गया राजेश।

राजेश ने अब नैना की ओर देखा तो नैना बस चुपचाप शांत भाव से उसे देखे जा रही थी कि सारा की आवाज ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचा - सॉरी मैम, मेरा पैर फिसल गया था और आप अचानक से सामने आ गये। मैंने जानबूझकर.....

मिसेज मल्होत्रा (गुस्से से ) - चुप करो तुम ,अपनी नौटंकी किसी और को दिखाना।

राजेश को अपने स्टाफ के सामने मिसेज मल्होत्रा का यह , व्यवहार बिल्कुल अच्छा नहीं लगा पर वह वहाँ सबके सामने कोई तमाशा नहीं बनाना चाहता था इसलिए चुपचाप खड़ा रहा ।

मिसेज मल्होत्रा - और यह इसकी दोस्त ( नैना ) इसे समझाने की जगह मुझसे बहस कर रही है अब तुम बताओ राजेश कि जिसने गंदा किया है, वहीं साफ करेगा ना । मैंने इस लड़की को कहा कि मेरे सैंडल साफ करें जल्दी तो इसकी दोस्त कहती है कि वह एम्पलाई है कोई नौकर नहीं । इसकी इतनी हिम्मत कि मुझसे बदतमीजी कर रही है , शायद भूल गई है यह कि मैं यहां की मालकिन हूँ और सैलरी देते हैं हम इन्हें ।

नैना ( गुस्से से) - साँरी मैम, हमारी बाँस आप नहीं राजेश सर है और रही बात सैलरी की तो बदले में हम लोग काम भी तो करते हैं । आप जबसे यहां आईं है, सबको अपनी खातिरदारी में लगा रखा है , ऐसा कौन सा ऑफिस है जहाँ अकाउंटेंट को कॉफी बनाने के लिए कहा जाता है , किसी को पानी , किसी को कुर्सी लाने के लिए तो किसी को सैंडल साफ करने के लिए कहा जाता है। आपकी सैंडिल्स कीमती होंगे पर किसी की इज्जत से ज्यादा नहीं - कहते हुए उसने राजेश को देखा ।शायद वह उसे बताना चाहती थी कि उसकी पीठ पीछे मिसेज मल्होत्रा ने क्या बवाल मचाया है ।

, राजेश का गुस्सा अब बढ़ने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा - तमीज से बात करो वरना अभी तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगी ।

नैना (मुस्कुराते हुए) - सॉरी मैम पर आप बॉस नहीं है हमारी। अगर वो चाहेंगे तो मैं नौकरी छोड़ दूंगी ।

मिसेज मल्होत्रा - देखा राजेश, तुम्हारे सामने यह किस तरह की बात कर रही है ? इसे अभी निकालो नाैकरी से बल्कि मैं तो कहती हूं इन सब को निकालों, यहाँ तमाशा देख रहे है सब। कुछ दिन तक तो अफोर्ड कर ही सकते हैं हम, जब तक नए एमप्लाईज आने तक ।

सभी लोगों के चेहरे पर चिंता साफ दिखने लगी। नैना राजेश को खामोश देख हैरान पड़ गई कि क्या उसे समझ नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है यहाँ।

रिया - रहने दीजिए ना माँम, बात को मत बडाइए । वह गलती से ...

मिसेज मल्होत्रा - मैं बात को बडा रही हूं ? मेरी बेइज्जती हुई है यहाँ..

,

रिया - प्लीज आपको मेरी कसम।

मिसेज मल्होत्रा ( थोड़ा शांत होते हुए ) - ठीक है । अगर तुम कहती हो तो ..- कहते हुए पास ही रखी चेयर पर बैठ गई और अपने पैर लिए बाहर की तरफ कर दिए । मेरी सैंडिल्स को साफ कर दिया जाए तो मैं बात यहीं खत्म कर दूंगी। अगर यह लडकी (नैना) मुझसे बहस नहीं करती तो शायद बात यहाँ तक नहीं पँहुचती।

स्टाफ को घबराया सा देख नैना आगे बढ़ते हुए बोली - ठीक है , मैंने आपसे बहस की है तो मैं साफ करती हूं क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से सभी को सजा मिले ।

नैना नाराजगी से राजेश को देखते हुए आगे बढी कि सारा ने उसका हाथ पकड़ लिया - नहीं गलती मेरी थी । कॉफी मुझसे गिरी थी इसलिए साफ भी मै ही करूंगी ।

सारा जैसे ही मिसेज मल्होत्रा के पैरों में बैठने को हुई कि राजेश आगे बढ़ा - सारा तुम पीछे हटो ।

सारा - पर सर यह ...

, राजेश - जानता हूं लेकिन सबसे बड़ी गलती है तो वह मेरी है क्योंकि मुझे आप लोगों को पहले ही मिसेज मल्होत्रा के बारे में बता देना चाहिए था जिससे आप सब उनकी खातिरदारी में तैयार रहते जो कि मैं नहीं कर पाया ।

मिसेज मल्होत्रा राजेश को माफी मांगते देख बहुत खुश हुई - लेकिन मेरी सैंडिल्स कौन..

राजेश - घबराए नहीं , गलती मेरी है तो सजा भी मैं ही भुगतूंगा - कहते हुए वह मिसेज मल्होत्रा के सामने जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया और अपना रुमाल निकाल मिसेज मल्होत्रा को देखने लगा । उनकी आंखों में एक चमक थी कि जो राजेश को उनके सामने कभी नहीं झुका था , आज आसानी से झुक गया। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था इस पर।

नैना (आगे बढ़कर ) - सर वो..

राजेश ने उसे चुप रहने का इशारा किया तो वह मन मसोस कर रह गई ।

रिया (उदास होकर) - भाई आप ....

, मिसेज मल्होत्रा - बेटा है वह मेरा ,इतना कर सकता है - कहते हुए राजेश को मुस्कुरा कर देखने लगी ।

राजेश बेटा शब्द सुन खून के घूंट पीकर रह गया और उनकी सैंडिल्स साफ करने लगा ।

मिसेज मल्होत्रा - सो स्वीट ऑफ यू राजेश । ये लोग कितने लकी है कि तुम्हारे जैसा बॉस मिला इन्हें। है ना रिया ?

यह सुन रिया ने उनकी तरफ से नजरें फेर ली ।

नैना बस एकटक राजेश को देख रही थी, वह जानती थी कि राजेश को इस वक्त कितना बुरा लग रहा होगा ।

राजेश अब जैसे ही उठने को हुआ कि मिसेज मल्होत्रा बोल उठी -1 मिनट, यह थोड़ा साइड में भी है निशान। प्लीज इसे भी कर दो ना ।

राजेश अब चुपचाप वापस बैठ उसको साफ करने लगा।

रिया (गुस्से में ) - मॉम आप...

मिसेज मल्होत्रा -चुप रहो।

,

राजेश अब खड़ा हो गया ।

मिसेज मल्होत्रा - अच्छा किया तुमने , पहले मैं सोच रही थी कि आज लौट जाऊं पर अब सोच रही हूं कि कुछ दिन रुक कर जाऊं । देखूं तो सही , मेरा बेटा यहां कैसे काम हैंडल करता है - कहते हुए वह मुस्कुरा कर वहां से चली गई ।

राजेश ने स्टाफ की ओर देखा तो सब ने शर्म से नजरें नीचे कर ली ।

राजेश - आप लोग अपना काम कीजिए , उनकी तरफ से मैं आपसे माफी मांगता हूं - कहते हुए राजेश अपने केबिन की ओर बढ़ा कि सारा ने आगे बढ़ उसके हाथ से रुमाल ले लिया - थैंक यू सर , इसे मै साफ कर दूंगी । आप सच में बहुत अच्छे हो पर मैं सच कह रही हूं कि मैंने जानबूझकर ...

राजेश - मैं जानता हूं ।

राजेश ने नैना की ओर देखा तो उसकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर शर्मिन्दगी । शायद वह दुखी थी कि उसकी वजह से मिसेज मल्होत्रा को आज सबके सामने राजेश को नीचा दिखाने का मौका मिल गया ।

,

राजेश अब कुछ कहने ही वाला था कि मिसेज मल्होत्रा वापस आई और रिया से बात करते हुए गुस्से में नैना को देखने लगी । नैना चुपचाप नजरें नीचे किए खड़ी थी।

राजेश ( मिसेज मल्होत्रा को देख ) - मिस शर्मा , अभी इसी वक्त नीचे जाओ इनवेंटरी में, वहां मैने टेबल पर कुछ फाईल्स निकलवाई है , उन्हें जाकर चेक करो कि सब ठीक है या नहीं । शाम तक वहीं बैठ कर काम करो , यही तुम्हारी सजा है ।

नैना अब हैरानी से राजेश को देखने लगी कि इसे क्या हो गया?

राजेश - जाओ इसी वक्त ।

नैना चुपचाप नीचे इनवेंटरी में चली गई । नैना वहाँ पहुंची तो उसने देखा कि टेबल पर कुछ भी नहीं था । वह समझ गई कि राजेश ने उसे मिसेज मल्होत्रा से दूर रखने के लिए यहाँ भेजा है।

नैना सोच में पड़ गई - राजेश मुझसे कितना नाराज है पर फिर भी मेरा कितना ख्याल रखता है । मिसेज मल्होत्रा के , गुस्से का सामना करने से बचाने के लिए उसने मुझे यहां भेज दिया और वहां खुद ने उनकी सैंडिल्स साफ की। कैसी माँ है यह मिसेज मल्होत्रा कि राजेश इनकी बेटी को पलकों पर बिठा कर रखता है लेकिन उसके बदले इनके मुंह से 2 ढंग की बातें तक नहीं निकलती।

उधर राजेश कैबिन में परेशान सा बैठा था -क्या करूं इन दोनों का? कैसे दूर रखूँ इनको एक दूसरे से । मिसेज मल्होत्रा कुछ किए बिना नहीं मानेगी और नैना कुछ जवाब दिए बिना।

अभी तो मैंने नैना को इनवेंटरी में भेज दिया है पर रोज तो नहीं भेज सकता वरना मिसेज मल्होत्रा को शक हो जाएगा।
 
राजेश की नजरों के सामने अब नैना का उदास चेहरा घूमने लगा , उसने नैना को फोन किया पर उसने नहीं उठाया ।राजेश ने अब एक्सटेंशन पर भी फोन मिलाया पर नैना ने वह फोन भी नहीं उठाया । राजेश का दिल जोरो से धड़कने लगा कि ये मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही है ?

वह अब खुद ही उठकर इन्वेंटरी की ओर बढ़ चला राजेश इन्वेंटरी में अंदर आया कि तभी उसे सामने चुपचाप खड़ी नैना दिखाई दी।

,

राजेश गुस्से में नैना की ओर बढ़ा - पागल हो क्या ? कब से फोन पर फोन मिला रहा हूं तुम्हें और एक्सटेंशन पर भी मिलाया, उठाया क्यों नहीं तुमने ?

नैना अब राजेश को देखने लगी ।

राजेश - और क्या ज़रूरत थी तुम्हें मिसेज मल्होत्रा से बहस करने की ? तुम अच्छी तरह से जानती हो कि वह किस तरह की इंसान है ।

नैना अभी भी खामोश थी और चुपचाप राजेश को देख रही थी।

राजेश अब थोड़ा परेशान हो गया कि यह कुछ बोल क्यों नहीं रही है - क्या बात है ,ठीक हो ?

नैना (उदास होकर) - आई एम सॉरी कहते हुए रोने लगी।

राजेश - तुम रो क्यों रही हो?

नैना - वह मिसेज मल्होत्रा को मेरी वजह से तुम्हें नीचा दिखाने का मौका मिल गया ।अगर मुझे पता होता तो मैं सच , में कभी भी उनसे नहीं लड़ती पर सब गड़बड़ हो गया । आई एम सो सॉरी , हर बार कोशिश करती हूं तुम्हें तकलीफ ना पहुंचाऊं पर देखो हर बार वही हो जाता है और आज तो सैंडिल्स भी... कहते हुए नैना रोने लगी ।

राजेश - अच्छा ठीक है, आगे थोड़ा ध्यान रखना और यह कोशिश करना कि उन्हें यह बात ना पता चले कि तुम ही वो नैना हो जो कॉलेज में मेरे साथ थी ।

नैना हैरानी से राजेश को देखने लगी ।

राजेश - इसलिए कह रहा हूं कि वो तंग करेंगी तुम्हें । ध्यान रखना इस बात का - कहते हुए राजेश अब वापस जाने को मुडा कि नैना ने हाथ पकड लिया ।

राजेश ( पलटकर) - क्या है ?

नैना (सुबकते हुए ) - वह मैं रुमाल नहीं लाई आज तो आँसू कैसे पोंछू?

राजेश - सॉरी मेरा रुमाल सैंडल्स में ही...

नैना - तो मैं आंसू कैसे ...?

,

राजेश - अपने हाथों से और किससे ?

नैना - पर मेरे हाथों गंदे है ना , इन पर धूल लगी है - कहते उसने अपने हाथ राजेश की ओर कर दिए।

राजेश - तो ?

नैना ने राजेश के हाथों की तरफ इशारा किया और मुस्कुराने लगी ।

राजेश - तुम लोगों को आज मैं सफाई वाला नजर आ रहा हूं क्या कि कभी किसी की सैंडल तो कभी किसी के आंसू ?

नैना - प्लीज ।

राजेश - बिल्कुल नहीं , ये तो तुम्हें रोने से पहले देखना चाहिए कि रूमाल है या नहीं।

नैना - फिर ठीक है - कहते हुए उसने एक फाइल उठाई और उसमें से पेज फाडने को हुई कि राजेश ने जल्दी से फाइल उसके हाथ से खींच ली - यह क्या कर रही हो ?

, नैना - आंसू ...

राजेश - दिमाग से पैदल हो गई हो आज?

नैना ( मुस्कराते हुए ) - हाँ।

राजेश ने अब नैना के आँसू पोंछे और फिर जाने लगा कि नैना ने फिर हाथ पकड लिया ।

राजेश - अब क्या सेवा करूँ तुम्हारी?

नैना - तुम्हारी तबियत कैसी है अब।

राजेश - पहले से ठीक हूँ।

नैना - ओके। जाओ।

राजेश अब बोला - एक बार और याद कर लो।

नैना - नहीं, हो गया।

राजेश फिर मुडकर आगे बढा कि एक बार फिर नैना ने उसका हाथ पकड लिया ।

,

राजेश ने अब झुँझलाते हुए नैना को देखा और जाकर एक चेयर पर बैठ गया - एक काम करो, तुम्हें जो कहना है कह दो। मै यहीं बैठा हूँ आराम से।

नैना हँसी को छुपाते हुए बोली - वो तुम्हारी शादी है बारह दिन बाद और मिसेज मल्होत्रा यहाँ है ।

राजेश - तो?

नैना - तो मै जाकर पूछती हूँ उनसे कि किसी हेल्प की जरूरत तो नहीं है, इससे हमारे बीच आज जो झडप हुई है, वो संभल जाएगी - कहते हुए नैना अब दरवाजे की ओर चली कि राजेश अब खडा हो गया - रूको।

नैना - क्या हुआ और एक बात बताओ कि रिचा से मिसेज मल्होत्रा को कोई परेशानी नहीं है क्या?

राजेश अब सोच में पड गया - वो... मै..

नैना - ओह, समझ गई। तुमसे या तुम्हारी जिंदगी के किसी भी फैसले ले उन्हें कोई मतलब नहीं है। है ना?

, राजेश ( राहत की साँस लेते हुए ) - हाँ , ऐसा ही समझ लो। उनसे मेरी शादी या रिचा के बारे में कोई बात नहीं करना। मै नहीं चाहता ऐसा।

नैना - ठीक है।

राजेश - तो मै जाँऊ?

नैना - हाँ।

राजेश - पक्का?

नैना - पक्का।
 
राजेश अब जैसे ही दो चार कदम आगे बढा कि रूक गया, उसने पीछे पलटकर देखा तो नैना दूर खड़ी हँस रही थी - अगर जाने का मन नहीं है तो रूक सकते हो। ये तुम्हारा ही आँफिस है।

राजेश (झेंपकर) - नहीं वो मुझे लगा कि तुम फिर रोकोगी तो...

नैना - रोकना था क्या? कह कर हँसने लगी।

,

राजेश - तुम्हारा दिमाग सच में ही कुछ ज्यादा चलने लगा है - कहकर वो मुस्कराते हुए इनवेंटरी से बाहर निकल गया।

राजेश जैसे ही अपने कैबिन में आया तो मिसेज मल्होत्रा को अपनी सीट पर बैठे हुए पाया ।

मिसेज मल्होत्रा (मुस्कुराते हुए) - आओ बेटा ।

मिसेज मल्होत्रा के मुंह से अपने लिए बेटा शब्द राजेश को गाली समान चुभता था।

राजेश ( गुस्से में ) - यह नाटक करने की जरूरत नहीं है अब। आप को क्या जरूरत थी बाहर इतना तमाशा करने की? क्या मैं नहीं समझता कि आप यह सब सिर्फ मुझे परेशान करने के लिए कर रही हैं । बंद कीजिए ये बेटा कहना।

मिसेज मल्होत्रा ( गुस्से में ) - तो मैं कौन सी तुम्हारी मां कहलाने के लिए मरी जा रही हूं ? तुम्हें क्या लगा कि मेरी बेटी को मेरे खिलाफ भड़का कर तुम खुश रहोगे ? कैसी लगी तुम्हें अपनी बेइज्जती ? चेहरा देखने लायक था तुम्हारा। मानना पड़ेगा तुम्हें , एक एम्पलाई के लिए तुम मेरे सामने , झुक गए?

राजेश - अगली बार ध्यान रखना ऐसा कुछ भी करने से क्योंकि अब मैं चुप नहीं बैठूंगा फिर ना तो आपकी इज्जत का ख्याल करूंगा और ना ही रिया का लिहाज - कहते हुए वह अपनी चेयर के पास आकर खड़ा हो गया - और एक बात याद रखिएगा, ये ऑफिस मेरा है ।यहां का बॉस मैंं हूं और यहां वही होगा ,जो मैं चाहूंगा ।

अगर आपको अपनी खातिरदारी का इतना ही शौक है तो अपने पीछे 4-5 नौकर लेकर घुमा कीजिए। मेरा स्टाफ यहां काम करने आता हैं , आप की खातिरदारी करने नहीं ?

मिसेज मल्होत्रा - तुम भूल रहे हो कि तुम किस से बात कर रहे हो ?

राजेश (मुस्कुराते हुए ) - जी नहीं , मुझे अच्छे से याद है कि आप मेरे पापा की दूसरी बीवी है । अगर आप का तमाशा हो गया हो तो प्लीज मेरी सीट से उठिए ,मुझे काम करना है। आपकी तरह बातें बनाने और चालें चलने से तो काम नहीं चलने वाला ना।

,

सेज मल्होत्रा झल्लाकर सीट पर से उठ गई - बैठ लो ।मुझे भी कोई शौक नहीं है तुम्हारी किसी भी चीज को हाथ लगाने का या इस्तेमाल करने का क्योंकि मुझे उन चीजों से भी उतनी ही नफरत होगी जितनी तुमसे है - कहते हुए वह कैबिन से बाहर निकल गई और मन में सोचने लगी कि देखती हूँ , कब तक इस कुर्सी पर बैठे रहते हो ?

मिसेज मल्होत्रा अब बिल्डिंग से बाहर निकली तो सामने से साहिल आता हुआ दिखाई दिया...,
 
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