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इच्छा पूरी हो गई

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Administrator
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Antarvasna, hindi sex story: मैं बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रहा था लेकिन अभी तक बस नहीं आई थी काफी देर हो गई थी। मुझे बस स्टॉप पर करीब आधे घंटे से ऊपर हो चुका था। मैं छोटे शहर का रहने वाला हूं और कुछ समय पहले ही मैं मुंबई आया था जब मैं मुंबई आया तो मुंबई में मुझे काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन अब मैं एक अच्छी कंपनी में नौकरी कर रहा हूं और मैं काफी खुश हूं मेरे परिवार वाले भी बहुत खुश हैं। जैसे ही बस आई तो बस में सब लोग चढ़े और मैं भी बस में चढ़ा बस स्टॉप पर ज्यादा भीड़ नहीं थी मैं जैसे ही बस में चढ़ा तो बस भी खाली ही थी बस में बैठने के लिए मुझे जगह मिल चुकी थी और मैं बैठ चुका था। थोड़ी देर बाद कंडक्टर मेरे पास आया और मैंने उन्हें पैसे दिए उन्होंने मुझे टिकट दिया। मैं सोच रहा था कि कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर चला जाऊं काफी दिन हो गए थे मैं अपने घर रोहतक भी नहीं जा पाया था मुझे अपने घर की काफी याद आ रही थी और मैं अपने मम्मी पापा और अपनी छोटी बहन को काफी ज्यादा मिस कर रहा था।

अगले बस स्टॉप पर जब बस रुकी तो एक लड़की मेरे बगल में आकर बैठी मैंने काफी देर तक तो उसकी तरफ देखा नहीं। काफी ज्यादा ट्रैफिक था इसलिए बस काफी धीमी चल रही थी लेकिन जैसे ही मेरी नजर उस लड़की पर पड़ी तो मैं उसकी तरफ देखता ही रहा वह लड़की मुझे इतनी अच्छी लगी कि मैं उस लड़की के बारे में जानना चाहता था। मेरे अंदर उस लड़की के बारे में जानने की बहुत उत्सुकता थी लेकिन ऐसे ही किसी से बात कर लेना इतना आसान भी तो नहीं था। जब वह लड़की उतर गई तो मैं उस लड़की के बारे में ही सोचता रहा मैं अपने ऑफिस में गया तो मेरा दोस्त मुझे कहने लगा कि रोहित तुम काफी कोई खुश नजर आ रहे हो। मैंने अपने दोस्त को सारी बात बताई और उसे कहा कि आज मुझे बस में एक लड़की मिली उस लड़की को देखते ही मुझे उससे प्यार हो गया। वह मुझे कहने लगा कि लेकिन वह लड़की तुम्हें क्या दोबारा भी मिलेगी मैंने उसे कहा की अब यह तो मुझे नहीं पता कि वह मुझे दोबारा मिलेगी या नहीं लेकिन मैं उस लड़की को पसंद करने लगा हूं। मैं कुछ समय के लिए अपने घर रोहतक चला गया मैं जब रोहतक गया तो रोहतक में मैं पापा मम्मी से मिलकर बहुत खुश था अपनी फैमिली के साथ अच्छा समय बिताना चाहता था और मैं बहुत ही ज्यादा खुश था कि अपनी फैमिली के साथ मैं समय बिता पा रहा हूं। मेरी किस्मत में शायद उस लड़की से मिलना दोबारा लिखा था तो एक दिन हमारे पड़ोस में ही एक शादी थी मम्मी ने मुझे शादी में चलने के लिए कहा तो मैंने उन्हें कहा नहीं मम्मी मैं नहीं आ रहा हूं लेकिन उन्होंने मुझसे जिद की तो मैं शादी में चला गया।

मैं जब शादी में गया तो मैंने वहां पर उस लड़की को देखा मैं उस लड़की को देखकर खुश हो गया मैंने तो कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि वह लड़की मुझे दोबारा मिल पाएगी। जब मैंने उस लड़की को देखा तो मैंने पूरी तरह से सोच लिया था कि मैं उससे बात करूंगा और उसके बारे में जानूँगा। मैं उस लड़की के बारे में जानना चाहता था लेकिन उससे बात करने की हिम्मत मेरी अभी भी नहीं थी फिर मैंने सोचा कि अगर मैं उस लड़की से बात नहीं कर पाया तो शायद मैं जिंदगी भर उससे बात नहीं कर पाऊंगा यह बहुत ही अच्छा मौका है और इस मौके को मुझे ऐसे ही बर्बाद नहीं होने देना चाहिए। मैंने अब पूरा मन बना लिया था कि मैं उस लड़की से बात करूंगा और मैंने जब उससे बात की तो पहले तो वह मेरी तरफ देखती रही। मैंने उससे अपना हाथ मिलाया तो उसने भी मुझसे अपना हाथ मिलाया, मैंने उससे पूछा क्या आप मुंबई में रहती है तो वह मुझे कहने लगी की हां मैं मुंबई में रहती हूं। उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा कि लेकिन आपको कैसे पता कि मैं मुंबई में रहती हूं तो मैंने उसे बताया कि मैं भी मुंबई में ही रहता हूं मैंने एक दिन आपको बस में देखा था वह मुझे कहने लगी इतने बड़े शहर में तो कोई किसी पर ध्यान नहीं देता लेकिन तुमने मुझे पहचान लिया। उसने मुझे अपना परिचय दिया उसने मुझे बताया कि उसका नाम सुहानी है मैं सुहानी से बात कर के काफी खुश था और सुहानी से मैंने काफी बातें की। सुहानी भी अपने आप को अकेला महसूस कर रही थी तो उसे भी मेरी कंपनी मिल चुकी थी। मैंने सुहानी को अपने घर पर आने के लिए कहा तो वह मेरे घर पर आ गई।

जब वह मेरे घर पर आई तो मैंने सुहानी को अपनी फैमिली से मिलवाया सुहानी को मेरी फैमिली से मिलकर अच्छा लगा। सुहानी हमारे पड़ोस में जिस शादी में आई थी वह उनके रिश्तेदार थे और सुहानी दो दिनों बाद मुंबई चली गई। मुझे भी मुंबई जाना था और मैं जब मुंबई गया तो मैं अपने मन में यही सोचने लगा कि मैं सुहानी से कैसे बात करूं क्योंकि उसका नंबर मेरे पास नहीं था। एक दिन वह मुझे बस में मिली जब सुहानी मुझे बस में मिली तो उसने मुझसे बात की और हम दोनों ने एक दूसरे का नंबर ले लिया। मैंने सुहानी का नंबर ले लिया था तो मुझे उससे बात करने का जब भी मौका मिलता तो मैं उससे बात कर लिया करता। सुहानी को भी अच्छा लगता जब मैं उसे फोन किया करता मेरे दिल में तो सुहानी के लिए पहले से ही काफी जगह थी और मैं चाहता था कि मैं सुहानी को अपने दिल की बात बता दूँ लेकिन यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था। मुझे इसमें काफी समय लगा और मैंने एक समय बाद सुहानी को अपने दिल की बात कह दी। जब मैंने सुहानी को अपने दिल की बात कही तो उसने भी मेरे प्रपोज को तुरंत स्वीकार कर लिया और मैं काफी खुश था कि अब सुहानी और मैं एक दूसरे के साथ रिलेशन में है। हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते। सुहानी मुझसे जब भी मिलने के लिए मेरे फ्लैट में आती तो हम दोनों साथ मे अच्छा टाइम स्पेंड करते और सुहानी को भी बहुत अच्छा लगता था जब भी हम दोनों साथ में होते। एक दिन सुहानी मुझसे मिलने के लिए आई उस दिन सुहानी और मेरे ऑफिस की छुट्टी थी। हम दोनों ने साथ में समय बिताने का मन बनाया। हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय बिता रहे थे मुझे काफी अच्छा लग रहा था जब मैं और सुहानी साथ बैठा हुए थे मै उसके साथ में बातें कर रहा था। सुहानी को बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था।

मैंने जब सुहानी की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो सुहानी मुझे कहने लगी यह सब ठीक नहीं है लेकिन जैसे ही मैंने उसकी जांघ को सहलाना शुरु किया तो सुहानी को मजा आने लगा। वह कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा महसूस हो रहा है सुहानी को बहुत ज्यादा मजा आने लगा था इसलिए वह अपनी उत्तेजना को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी और मेरे अंदर की गर्मी भी अब बहुत ही ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने सुहानी के होंठो को चूमना शुरू किया। मैंने जब सुहानी के होंठो को चूमना शुरू किया तो उसके गुलाबी होठ मुझे महसूस करने मे मजा आ रहा था। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा महसूस हो रहा था और सुहानी को भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। वह मेरे लिए तड़पने लगी थी मुझे उसके बदन को महसूस करना अच्छा लग रहा था। मैंने सुहानी के कपड़े उतारने शुरू किए। मैंने जब सुहानी के कपड़ों को उतारकर उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से मजे में आ गई और उसकी उत्तेजना इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। अब मेरे अंदर की गर्मी भी काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी मैंने सुहानी के निप्पल को बहुत देर तक चूसा। मैने सुहाने की चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो सुहानी मचलने लगी। वह अपने पैरों के बीच मे मुझे जकडने की कोशिश करती। जब वह ऐसा करती तो मुझे अच्छा लगता और मैं सुहानी की चूत के अंदर अब लंड डालने के लिए तैयार था। सुहानी की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी इसलिए हम दोनो एक पल के लिए भी रह नहीं पा रहे थे। मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया और कुछ देर तक उसकी योनि पर अपने लंड को रगडा तो उसकी चूत गीली हो चुकी थी और वह मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी। मैंने सुहानी की योनि पर अपने लंड को लगाया और अंदर की तरफ डालना शुरू किया। जब मैं उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाता तो वह बहुत जोर से चिल्लाती और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक जा चुका था। मेरा लंड सुहानी की योनि को फाडता हुआ अंदर की तरफ जा चुका था जिससे कि मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा था। सुहानी की चूत से खून की पिचकारी निकल रही थी जो मेरे लंड पर लग चुकी थी।

सुहानी की चूत बहुत ही ज्यादा टाइट थी। उसे बहुत ही ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था वह अपने सिसकारियो से मेरे अंदर की गर्मी को बढाती और मुझे कहती मुझसे रहा नहीं जा रहा है। मैं सुहानी को तेजी से चोद रहा था कुछ देर बाद मेरा लंड सुहानी की चूत पर पूरी तरीके से फिट हो चुका था और मुझे ऐसा लग रहा था उसे भी मजा आने लगा है। वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी मेरा मोटा लंड बड़ी आसानी से सुहानी की योनि के अंदर बाहर हो रहा था और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा था। मेरे अंदर से गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी और सुहानी के अंदर से भी गर्मी काफी ज्यादा बढ़ने लगी थी इसलिए हम दोनों ही एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी देर तक सेक्स के मज़े लिए जब मैं गरम हो चुका था तो उस सुहानी मुझे कहने लगी तुम अपने माल को मेरी चूत मे गिरा दो। मैंने सुहानी की चूत में अपने वीर्य की पिचकारी मारी सुहानी की चूत को मैं अपने वीर्य से नहला चुका था। मुझे बहुत अच्छा लगा और वह मुझसे लिपट कर कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने सुहानी को कहा अच्छा तो मुझे भी बहुत ज्यादा लग रहा है और वह काफी ज्यादा खुश हो गई थी।
 
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