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आंटी के नाम का हस्तमैथुन

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Antarvasna, hindi sex kahani: मैं अपने हॉस्टल के रूम में था और वहां से मैं बाहर की तरफ देख रहा था मेरे हॉस्टल के कमरे में एक छोटी सी खिड़की है जिससे कि बाहर दिखाई देता है। जब मैं बाहर देख रहा था तो मैंने देखा मेरा दोस्त सुरेश कॉलेज से घर लौट रहा था वह रूम में आया और मुझे कहने लगा कि रोहन अब तुम्हारी तबीयत कैसी है। मैंने उसे कहा मेरी तबीयत पहले से बेहतर है वह मुझे कहने लगा क्या तुमने खाना खा लिया था तो मैंने उसे कहा हां मैं खाना खा चुका था। सुरेश और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तभी हमारा एक और दोस्त रूम में आया और वह हमारे साथ बैठ गया। कुछ ही दिनों बाद हमारे कॉलेज की छुट्टियां पढ़ने वाली थी और सब लोग घर जाने वाले थे सुरेश ने मुझसे कहा कि रोहन क्या तुम भी घर जाने वाले हो तो मैंने उससे कहा हां मैं भी घर जाऊंगा।

हम लोगों ने काफी देर तक एक दूसरे से बात की हम अपने भविष्य को लेकर बात कर रहे थे सब लोगों ने कुछ ना कुछ सोच रखा था और रात के करीब 9:00 बज रहे थे तो सुरेश ने मुझे कहा कि चलो रोहन हम लोग खाना खा लेते हैं। मैंने सुरेश को कहा मेरा मन नहीं है लेकिन मैं तुम्हारे साथ आ जाता हूं हम लोग खाने की मैस में चले गए। सुरेश मेरा हॉस्टल में रूममेट है और हम दोनों अब खाना खाकर वापस लौट चुके थे अगले दिन से मैं भी अपने कॉलेज जाने लगा था थोड़े ही दिनों बाद कॉलेज की छुट्टियां पढ़ने वाली थी और सब लोग अपने घर जाने की तैयारी कर रहे थे। सुरेश मुझसे कहने लगा कि रोहन तुम घर से कब लौटोगे मैंने उससे कहा कि मैं घर से दस बारह दिन में लौट आऊंगा। हम लोगों की छुट्टियां कुछ पंद्रह दिन की पड़ने वाली थी और सब लोग अब घर जा चुके थे मेरे और सुरेश की ट्रेन रात की थी इसलिए हम दोनों साथ में ही रेलवे स्टेशन तक गए उसके बाद मैं अपनी ट्रेन में लखनऊ के लिए बैठ गया और सुरेश अभी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था। मेरी ट्रेन चलने लगी तभी मेरे पापा का मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगे रोहन बेटा तुम ट्रेन में तो बैठ चुके हो ना मैंने उन्हें कहा हां पापा मैं ट्रेन में बैठ चुका हूँ।

कुछ ही देर बाद ट्रेन ने अपनी गति पकड़ ली, रात का समय था तो मैं सो चुका था मुझे काफी गहरी नींद आ गई और उसके बाद मैं जब उठा तो थोड़ी ही देर बाद लखनऊ आने वाला था। जब लखनऊ रेलवे स्टेशन पर मैं पहुंचा तो वहां से मैंने ऑटो रिक्शा लिया और मैं अपने घर चला गया करीब आधे घंटे के सफर के बाद मैं अपने घर पहुंच चुका था। जब मैं घर पहुंचा तो पापा ने मुझे अपने गले लगा लिया पापा कहने लगे रोहन बेटा तुम कैसे हो तो मैंने उन्हें कहा पापा मैं तो ठीक हूं लेकिन आप काफी पतले हो गए हैं। मैं अब घर के अंदर गया तो मां मुझे कहने लगी आजकल तुम्हारे पापा डाइटिंग कर रहे हैं। पापा को डॉक्टर ने वजन कम करने के लिए कहा था जिस वजह से पापा को थोड़ी बहुत डाइटिंग भी करनी पड़ रही थी और पापा का वजन भी काफी कम हो चुका था। मैंने मां से कहा मां सुरभि दीदी कहीं दिखाई नहीं दे रही है मां कहने लगी आज वह अपने दोस्तों के साथ गयी हुई है और वह शाम को ही लौटेगी। मैंने मां से कहा मां इतनी सुबह सुबह दीदी चली गई तो मां कहने लगी आज उसके ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए वह अपने दोस्तों के साथ चली गई। मैं अपने रूम में गया और मां मेरे लिए चाय बना कर ले आई मां ने मुझे कहा बेटा तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ मैं तुम्हारे लिए नाश्ता लगा देती हूं। मैंने मां से कहा अभी मेरा मन नाश्ता करने का बिल्कुल भी नहीं है फिर मैं नहाने के लिए चला गया और थोड़ी देर बाद मैं नहा कर बाथरूम से बाहर निकला उसके बाद मैं पापा और मम्मी के साथ बैठकर बात कर रहा था। पापा अखबार पढ़ रहे थे और वह मुझसे पूछने लगे कि रोहन बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है। मैंने उन्हें कहा पापा मैंने आपको यह बात तो बता ही दी थी कि पढ़ाई तो ठीक ही चल रही है अब थोड़े दिनों बाद मेंरे एग्जाम भी नजदीक आने वाले हैं उसके बाद कॉलेज में ही केंपस प्लेसमेंट आ जाएगा। पापा कहने लगे बेटा तुम अपने एग्जाम अच्छे से देना मैंने उन्हें कहा हां पापा आप चिंता ना करें। मेरे लिए मां ने नाश्ता लगा दिया था और हम सब लोगों ने साथ में ही नाश्ता किया नाश्ता करने के बाद मैं अपने मोबाइल में गेम खेलने लगा। मैं हॉल में ही बैठा हुआ था कि हमारे पड़ोस में रहने वाले मोहन अंकल आ गए मोहन अंकल ने मुझसे पूछा रोहन बेटा तुम घर कब आए।

मैंने उन्हें कहा अंकल मैं आज ही घर आया हूं वह पापा से मिलने के लिए आए हुए थे पापा और मोहन अंकल आपस में बैठकर बात कर रहे थे मोहन अंकल ने उन्हें बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपनी बहन के यहां जा रहे हैं उनकी बहन की तबीयत ठीक नहीं है। मोहन अंकल के दो बेटे हैं वह पापा से कहने लगे कि मैं कुछ दिनों बाद लौट आऊंगा पापा और मोहन अंकल की अच्छी दोस्ती है और इसी वजह से वह अक्सर पापा से मिलने के लिए आते रहते हैं। वह काफी देर तक पापा के साथ बात करते रहे मम्मी ने भी उनके लिए चाय बनाई और जब मम्मी ने चाय बनाई तो उन लोगों ने चाय पी और उसके बाद वह भी अपने घर चले गए। मेरी बहन भी घर लौट चुकी थी जब वह घर लौटी तो मैंने उसे कहां दीदी आप आज अपने दोस्तों के साथ चली गई थी तो वह कहने लगी एक दिन तो मुझे छुट्टी मिलती है तो सोचा क्यों ना आज अपने दोस्तों के साथ चली जाऊं। दीदी ने मुझसे काफी देर तक बात की अब अगले दिन से पापा अपने ऑफिस जाने लगे और दीदी भी अपना ऑफिस चली जाया करती थी घर में सिर्फ मां और मैं ही रह जाते थे मैं घर में अकेला बोर हो जाया करता था। एक दिन मैं शाम के वक्त अपने मोहल्ले की दुकान में खड़ा था कुछ देर वहां रुकने के बाद मैं वापस घर लौट आया।

मैं अगले दिन भी दुकान पर गया था और जब मैं दुकान पर गया तो वहां पर मैं खड़ा होकर कोल्ड ड्रिंक पी रहा था कि तभी वहां से मोहन अंकल की पत्नी गुजर रही थी। उन्हें देखते ही दुकानदार बोल उठा भाभी कितनी माल हैं। उनके ना जाने कितने ही लोगों से रिश्ते थे मुझे यह बात पता ही नहीं थी लेकिन मेरे अंदर की जवानी फूट रही थी और मैं चाहता था कि मैं किसी के साथ तो सेक्स करू। मोहन अंकल की पत्नी राधिका आंटी बड़ी ही सेक्सी हैं और उन्हें देखकर मैं भी कई बार हस्तमैथुन कर चुका था। मैं चाहता था कि मै उनकी चूत के मजे लू इसलिए मैं उनके घर पर एक दिन चला गया। जब मैं उनके घर पर गया तो मैंने देखा वह घर की साफ सफाई कर रही थी मैंने उनसे कहा अंकल कब आएंगे? वह मुझे कहने लगी वह कुछ दिनों बाद ही लौटेंगे। मैं उनके बड़े स्तनों की तरफ देख रहा था उन्हें भी शायद मुझ पर शक हो चुका था। वह मुझे कहने लगी लगता है तुम्हारे अंदर की जवानी भी फूटने लगी है? मैंने उनसे कुछ नहीं कहा और उस दिन मैं घर चला आया घर आकर मैंने हस्तमैथुन किया लेकिन मैं चाहता था कि मैं किसी भी तरीके से उनकी चूत के मजे ले सकू। आंटी ने मुझे कहा तुम घर पर आना। मैंने सोचा आज बहुत ही अच्छा मौका है और मैं उस दिन उनके घर पर चला गया। मैं जब उनके घर गया तो उन्होंने मुझसे कहा तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहते हो मुझे इस बारे में पता है और आज मैं बहुत ज्यादा तड़प रही हूं। वह मेरी गोद में बैठ गई उनकी भारी-भरकम गांड मेरे लंड से टकराने लगी मैं चाहता था कि उनकी चूत के मे मजे ले सकूं। मै उन्हें चोदने की पूरी तैयारी में था उन्होंने मुझे कहा चलो मेरे बेडरूम में चलते हैं। हम लोग उनके बेडरूम में चले आए जब हम लोग उनके बेडरूम में आए तो उन्होंने मेरे सामने अपने कपड़े उतारे और वह मेरे साथ लेट गई।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए थे उन्होंने मेरे अंडरवियर को नीचे की तरफ खींचा। जब उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया तो मैंने उन्हें कहा क्या आप मेरे लंड को अपने मुंह में लोगी मैंने आज तक किसी के मुंह में अपने लंड को नहीं डाला है उन्होंने मेरी इच्छा पूरी कर दी और मेरे लंड को उन्होंने अपने मुंह के अंदर समा लिया। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया था वह बड़े ही अच्छे से मेरे मोटे लंड को सकिंग कर रही थी मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था। मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ती जा रही थी मैंने उन्हें कहा मैं भी आपके बदन की गर्मी को और बढ़ाना चाहता हूं। मैंने उनके सुडौल और भारी-भरकम स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें चूसने लगा। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी थी कि मेरे लंड से पानी बाहर निकलने लगा था। मैने उनकी चूत पर अपने लंड को लगाया जब मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर लगाया तो मुझे काफी गर्मी का एहसास होने लगा उनकी चूत से निकलती हुई गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि उनकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था और उनकी चूत से निकलता हुआ पानी इस कदर बढ़ चुका था कि मुझे उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना पड़ा।

मैंने अपने लंड को उनकी चूत में घुसा दिया पहली बार मैंने किसी की चूत के अंदर अपने लंड को डाला था इसलिए मैं उन्हें पूरी तरीके से मसलना चाहता था। उन्होंने अपने दोनों पैरों को खोल लिया अब हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को पूरी तरीके से बढाने लगे थे। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया और उनकी गर्मी बढ़ती चली जाती। उनकी गर्मी इस कदर बढ़ती जा रही थी कि वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही धक्के देते रहो उन्होंने मेरे अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढा दिया था मेरा वीर्य अभी तक गिरा नहीं था। मैं उनकी चूत बडे ही अच्छे से मार रहा था और मुझे उनकी चूत मारने में जो आनंद आ रहा था उससे मेरे अंदर बहुत ही ज्यादा हलचल पैदा हो चुकी थी। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरे अंडकोष से मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला है मेरा वीर्य बाहर की तरफ को गिर गया। मैं बहुत ज्यादा खुश था मुझे आंटी के साथ सेक्स करने मै बड़ा मजा आया जितने दिनों तक मैं घर पर रहा उन्होंने मुझे अपने घर पर बुलाया और मुझसे अपनी बदन की गर्मी को शांत करवाया।
 
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