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वह बहुत परेसान थी और उसे कोई रास्ता नही सूझ रहा था ।
हे भगवान अब तुम्ही मुझे रास्ता दिखाओ एक तरफ मेरे पति और दूसरी तरफ मेरी छोटी बहन जैसी ननद की खुशियां मुझे समझ मे नही आरहा है कि मैं किसका साथ दू अगर ननद का साथ देती हूँ तो सार्थक को बुरा लगेगा और फिर अगर लक्ष्य सचमुच में वैसा हुआ जैसे सार्थक कह रहा था तो फिर मेरी मासूम पूनम जिंदगी भर के लिए रोती रहेगी और अगर सार्थक का सोचना गलत हुआ और सचमुच में लक्ष्य पूनम को दिल से चाहता है और पूनम के लिए सीरियस है तब इस तरह पूनम के ऊपर बंदिशे लगा कर हम उसके ऊपर अत्याचार करेंगे और मुझे अपनी मासूम और इतनी प्यार करने वाली ननद का दिल तोड़ना भी ठीक नही लग रहा प्लीज भगवान हेल्प मी कुछ तो ऐसा रास्ता दिखाओ जिससे मैं सही निर्णय कर पाऊ जो इस घर के लिए मेरी पूनम के लिए मेरे सार्थक के लिए सही हो प्लीज हेल्प मी ये कैसी परीक्षा ले रहा है मेरी प्रभु- लावन्या ने दिल से प्रार्थना की ।
सार्थक के जाने के बाद पूनम अपने घर के और कामो में लग गयी वह फटा फट अपना काम निपटा रही थी उसे अपनी भाभी से बाते करनी थी और इसका दिमाग उसी में उलझा था इसी लिए वह जल्दी जल्दी अपना हाथ चला रही थी जिससे जल्दी से उसका सारा काम खत्म हो जाये ।
अपना सारा काम खत्म कर के पूनम लावन्या के पास पहुची ।
पूनम को देख कर पहली बार लावन्या का दिल घबरा गया मानो उसमे पूनम का सामना करने का साहस न हो ।वह पूनम से नजर चुराने लगी ।
सारा काम खत्म हो गया छुटकी लावण्या ने प्यार से पूछा
जी भाभी सब हो गया, आप कैसी है कुछ चाहिए तो नही आपको, - पूनम ने मुस्कुरा कर पूछा
नही मुझे कुछ नही चाहिए कुछ चाहिए होगा तो बुला लूँगी ,जाओ जा कर तुम भी थोड़ा आराम कर लो थक गई होगी - लावण्या ने कहा
अब कहा जाऊँगी भाभी , आपके पास ही थोड़ी देर आराम कर लूँगी आप से बात भी करती रहूंगी जिससे आप भी बोर नही होंगी और मैं भी,- पूनम ने कहा और लावण्या के पास आकर बैठ गयी
लावण्या के सामने कोई चारा नही बचा वह सुबह से पूनम के सवालों से बच रही थी लेकिन अब उसको और बचना नामुमकिन लग रहा था इसीलिए वह बस कसमसा कर रह गयी ।
भाभी आप सुबह कुछ कह रही थी, कि भैया से कुछ बात करने को कह रही थी , क्या बाते हुई भैया से पूनम ने बैठते हुए ही पहला सवाल दागा और लावण्या से पूछा
लावण्या को जिस बात का डर था वही हुआ वह सुबह से जिस बात के लिए डर रही थी आखिर में अब उससे बचके
जाना उसे नामुमकिन से लगने लगा वह सोच में पड़ गयी और उसका चेहरा सोचने वाले अंदाज से सिकुड़ गया पूनम के बातो का वह क्या जबाब दे उसे सूझ नही रह था ।
बताइये न भाभी आप चुप क्यों हो भैया से बात हुई कि नही आपकी, और अगर हुई है तो भैया ने क्या कहा - पूनम ने बेचैनी से पूछा
पूनम तुम मेरी छोटी बहन जैसी हो , और तुम यह भी जानती हो तुम्हारे भैया तुम्हे बहुत प्यार करते है वो तुम्हे अपने जान से ज्यादा मानते है और कभी भी उदास नही देख सकते , इसीलिए तुम क्यो चिन्ता कर रही हो तुम मेरी और सार्थक की जिम्मेदारी हो हम जो भी करेंगे तुम्हारे लिए बेस्ट करेंगे , और फिर ये तो तुम्हारी जिंदगी भर का सवाल है फिर ऐसे कैसे हम अपनी प्यारी सी बहन जैसी नंद को किसी को जाचे परखे बिना ऐसे दे सकते है - लावण्या ने बात को घुमाने की कोशिश की
सो तो है भाभी आप सच कह रही है मेरे भैया मुझसे बहुत प्यार करते है - पूनम ने खुश होकर कहा
अच्छा सिर्फ तुम्हारे भैया ही तुझे प्यार करते है मैं नही करती हूँ तो ठीक है फिर जाओ मैं तुझसे बात नही कर रही -
लावण्या झूठ मूठ का रूठती हुई बोली ।
अरे ऐसा मैने कब कहा , आप तो मेरी भाभी माँ है जब से आप आयी है तब से मेरी माँ की कमी पूरी हो गयी , मैं बहुत खुश नसीब हूँ कि भैया मेरे लिए इतनी अच्छी और मुझे इतना प्यार करने वाली भाभी लेकर आये सच मे भाभी आप बहुत अच्छी है बिल्कुल वैसी जैसे मैं चाहती थी - पूनम ने लावण्या को गले लगा लिया और प्यार करती हुई बोली
अब क्या करूँ किसी एंगल से तू मेरी नन्द लगती है नही, तुझमे तो मुझे अपनी छोटी बहन दिखती है सच मे पूनम कभी कभी जब मुझसे कोई गलती हो जाती और मेरी रजनी दीदी मुझे डांटती थी, तो मैं सोचती थी कि काश मेरी एक छोटी बहन भी होती जो मेरी बातें मानती मैं उसपर रौब जमाती और डाटती और शायद भगवान ने मेरी बात सुन ली और तुझे दे दिया मेरा वो सपना भी पूरा हो गया लेकिन एक कसर रह गया कि मुझे रौब जमाने का मौका ही नही मिलता क्योकि तुम बिना कहे मेरी सारी बाते पूरी कर देती हो कभी कोई शिकायत का डाटने का मौका ही नही देती हो - लावण्या ने पूनम का गाल थपथपा कर प्यार से कहा
तो ऐसे ही डांट लिया करे जब भी आपका मन करे लेकिन आप को डाँटना भी कहा आता है आपकी डाँट में भी प्यार
छुपा होता है और आपके गुस्सा होने में भी एक अलग मजा है मानो आप गुस्सा नही प्यार कर रही है - पूनम चहक कर बोली
अच्छा बस बस अब बहुत हो गयी झूठ मूठ की मेरी तारीफे, अब बस करो बाते बनाना तो कोई तुझमे सीखे बाते बनाने के अलावा और तुमको आता क्या है - लावण्या ने पूनम को झिड़क दिया और ऐसा चेहरा बना लिया मानो बहुत गुस्से में हो इतना कह कर खुद ही खिलखिला कर हंस पड़ी
लावण्या का इरादा और मजाक समझ कर पूनम भी हंस पड़ी
अच्छा भाभी मजाक छोड़िये बताइये न भैया ने क्या कहा? आप कह रही थी न कि आप ऐसे किसी ऐरे गैरे को बिना जाचे परखे मुझे नही सौप देगी तो लक्ष्य को आप भी जानती है और भैया भी जानते है फिर तो कुछ प्रोबल्म नही होनी चाहिए भैया से बोलिये न कि लक्ष्य से बात करे प्लीज मेरे लिए, मुझे लक्ष्य पसंद है और मुझे लक्ष्य से ही शादी करनी है - पूनम ने मचलकर कहा मानो कोई छोटा बच्चा अपने मनपसंद खिलौने के लिए जिद कर रहा हो ।
पूनम मैं तुम्हे एक बात बताऊ, अगर मन का हो तो अच्छा है और अगर मन का नही हो तो और भी अच्छा है क्यो की जो
अपने मन का नही होता है फिर वो भगवान की मर्जी होती है और भगवान कभी किसी का बुरा नही सोचता जो करता है अच्छा ही करता है इसीलिए जो भगवान की मर्जी होगी वही होगा तुम क्यों चिंता करती हो - लावण्या बोली
आप कहना क्या चाहती है भाभी भैया से आपकी बात नही हुई क्या पूनम का दिल जोर से धड़क उठा ललावन्या की बाते सुनकर उसे कुछ आशंका हो रही थी ।
पूनम मेरी बात ध्यान से सुनो अब मैं जो तुमसे कहने जा रही हूँ उसे बहुत ही समझदारी से और शांति से सुनना , लावण्या के सामने पूनम को सब कुछ सच सच बताने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नही नजर आ रहा था और उसने पूनम को सब कुछ सच सच बताना ही ठीक समझा ।
ऐसी क्या बात है भाभी जो आप मुझसे कहना चाहती है पूनम थोड़ी सी सावधान और चौकन्नी होकर बोली
पूनम सार्थक तुम्हारी शादी लक्ष्य से करवाने के लिए तैयार नही है ,मैने उससे सारी बाते बताई और बहुत समझाया लेकिन उसने साफ मना कर दिया उसने कहा कि कुछ भी हो जाये मैं पूनम की शादी लक्ष्य से नही करूँगा बस , आई एम सॉरी पूनम मैं कुछ नही कर पाई लावन्या यह कहते हुए
उदास हो गयी उसे पूनम के लिए बहुत बुरा लग रहा था
पूनम पर जैसे बम गिरा हो यह खबर उसके लिए किसी आघात से कम नही थी वह चौक कर उछल गयी और बहुत परेसान हो गयी एक पल को उसके मुंह से कोई शब्द नही निकला वह शॉक्ड बैठी रही फिर उसने कहा
साफ मना कर दिया? लेकिन क्यो भाभी ? ऐसी क्या बात हो गयी जो भैया मेरी यह छोटी सी डिमांड भी पूरा नही कर सकते ? पूनम को जोरदार झटका लगा था एक पल में ही उसका सारा सपना उसकी सारी खुशी और उसकी सारी मुस्कुराहट मानो उड़ सी गयी हो उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए वह बुरी तरह से परेशान हो गयी थी उसका दिल टूट सा गया था और उसे रोने का मन कर रहा था ।
पूनम इस क्यो का जाबाब नही है मेरे पास लेकिन अगर सार्थक ने ये फैसला किया है तो कुछ समझ कर ही किया होगा वह तुमसे बहुत प्यार करता है और तुम्हारे लिए कभी कुछ बुरा सोच ही नही सकता - लावण्या ने पूनम को समझाया
लेकिन भाभी क्यो नही हो सकती है लक्ष्य के साथ मेरी शादी? क्या कमी है उसमें ? आप लोग तो उसे अच्छे से जानते हो और फिर मैं लक्ष्य से प्यार करती हूँ ये आप तो
अच्छे से जानती है और लक्ष्य भी मुझे बहुत प्यार करता है भाभी प्लीज भैया से बोल दीजिये वो ऐसा न करे प्लीज भाभी, पूनम बुरी तरह से परेसान होकर बोली
पूनम तुम्हारी बात बिल्कुल सही है लक्ष्य बहुत अच्छा लड़का है और तुम उससे प्यार भी करती हो लेकिन लक्ष्य , उसका क्या, तुम तो जानती हो न लक्ष्य की आदत उसे हरेक लड़की के साथ प्यार हो जाता है अगर वह तुम्हारे साथ भी वही सब कर रहा है जो उसने और लड़कियों के साथ किया तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होगा, तुम्हारे भैया लक्ष्य के दोस्त है वो लक्ष्य के रग रग से वाकिफ है और अगर वो ऐसी बाते कर रहे है, अगर वो ऐसा सोच रहे है तो क्या गलत सोच रहे है तुम्ही बताओ सार्थक का सोचना गलत है क्या ? लक्ष्य ऐसा नही है क्या? लक्ष्य की ये आदत नही है कि वह हरेक लड़की के साथ अटैच होने की कोशिश करता है - लावण्या ने पूनम का हाथ पकड़ कर प्यार से समझाया
भाभी लक्ष्य अब बदल गया है अब वो पहले वाला लक्ष्य नही है मेरा विश्वास कीजिये अब वह हर किसी से अटैच होने की कोशिश नही करता है और वह मुझसे खुद कह रहा था कि अब वह सीरियसली लाइफ में कुछ करना चाहता है आप भैया से कहिये की एक बार उससे बात तो करले फिर उसके बाद जो भी डिसीजन लेंगे मुझे मंजूर है प्लीज़ भाभी मेरे लिए
एक बार भैया को बोल कर तो देखिए - पूनम ने ललावन्या से हाथ जोड़ कर प्रार्थना की
पूनम मैने सब कुछ ट्राई कर लिया लेकिन सार्थक टस से मस नही हुआ वह इस मामले में कोई बात ही नही करना चाहता और न ही वह लक्ष्य की शक्ल देखना पसंद कर रहा है उसे लगता है कि लक्ष्य ने ही तुमको बहकाया फुसलाया है और तुम उसकी लच्छेदार और चिकनी चुपडी बातो में फस गयी हो - लावण्या ने कहा
ऐसा कुछ नही है भाभी लक्ष्य ने मुझसे कुछ नही कहा
- पूनम बोली
पूनम आई एम सॉरी मैं सार्थक के डिसीजन के खिलाफ नही जा सकती , या तो तुम खुद सार्थक से बात करो या लक्ष्य से बोल दो की वो कुछ ऐसा करे जिससे सार्थक को लगे कि लक्ष्य अब बदल गया है और वो तुम्हे लेकर सीरियस है इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नही है अगर लक्ष्य सच मे तुम्हे प्यार करता है और सच मे वो तुम्हे लेकर सीरियस है तो वो जरूर अपने आप को प्रूफ कर देगा - लावण्या बोली
पूनम को कुछ नही सूझ रहा था उसे समझ नही आरहा था कि वो सार्थक को कैसे कंवेसन्स करे वह चुपचाप उठी और
जाने लगी उसका दिल बहुत ही ज्यादा बेचैन और परेसान था
कहा जा रही हो पूनम - लावण्या ने कहा
कही नही भाभी, जा रही हूँ अपने कमरे में पूनम ने उदास होकर कहा और चुपचाप कमरे से निकल गयी
लावण्या को पूनम की हालत देख कर दुख तो हो रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकती थी वह बहुत मजबूर थी ।उसने सब कुछ भगवान के उपर छोड दिया
पूनम लावन्या के कमरे से निकली और अपने कमरे में पहुची इतनी देर से रुकी हुई उसकी आँखों ने अब और ठहरने से इनकार कर दिया और बरस पड़ी
पूनम को ऐसा लग रहा था मानो वह इस दुनिया में बिल्कुल अकेली हो उसको लावण्या के रूप में एक उम्मीद थी कि कैसे भी करके लावण्या कुछ न कुछ जरूर करेगी जिससे वो और लक्ष्य एक हो जाये लेकिन आज वह उम्मीद भी टूट गयी इसीलिए पूनम का दिल भी टूट कर चकना चूर हो गया था और उसे बहुत दर्द भी हो रहा था ।
उम्मीद में बहुत ताकत होती है उम्मीद से ही कोई जिंदा रहता है और किसी को कितनी भी बड़ी परेशानियों से लड़ने की
ताकत मिलती है लेकिन अगर उम्मीद टूट जाता है तो वह इंसान भी टूट जाता है पूनम अभी अभी लावण्या से जो सुनकर आ रही थी उससे उसकी वह उम्मीद बिल्कुल टूट गयी थी , उसे अपनी मां की बहुत याद आ रही थी और आज कही न कही उनकी कमी खल रही थी क्योंकि आज अगर वह जिंदा होते तो पूनम की बाते सुनती और कुछ न कुछ ऐसा जरूर करती जिससे पूनम की दिल का अरमान पूरा हो जाता
पूनम ने अपनी माँ का फोटो निकाला और रो रो कर उनके फ़ोटो से बाते करने लगी मानो सच मे अपनी माँ से कह रही हो पूनम को सार्थक ने कभी किसी चीज के लिए मना नही किया था लेकिन आज उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी उसका पहला प्यार लक्ष्य के लिए सार्थक ने मना कर दिया और यह बात पूनम बर्दास्त नही कर पा रही थी ।
माँ आप मुझे छोड़ कर क्यो चली गयी किसके भरोसे छोड़ कर गयी है मुझे,किसी को मेरी खुशियो की कोई परवाह नही है मेरा दिल क्या चाहता है किसी को कोई मतलब नही है मुझे आपकी जरूरत है मां प्लीज पूनम रोती हुई बोली
आज तक मैने भैया से कुछ नही मांगा आज पहली बार एक छोटी सी चीज मांगा है लेकिन भैया ने उसके लिए भी मना कर दिया मा मैं बहुत अकेली हूँ मुझे आपकी बहुत याद आ
रही है पूनम रोते हुए बोली । वह बहुत देर तक अपनी माँ के फोटो को सीने से लगा कर रोती रही अचानक से उसके आंखों में आँसूओ की जगह गुस्से और नफरत ने ले ली ।
ठीक है अगर यहा पर किसी को मेरी खुशियो से कोई मतलब नही है किसी को मेरी भावनाये मेरे जज्बात और मेरे प्यार की कदर नही है तो मैं भी यहां नही रहूंगी मैं भी यह घर छोड़ कर चली जाउंगी।
इतने बड़े सदमे से पूनम का दिमागी संतुलन मानो बिगड़ गया था । उसने अपने आंसू पोछते हुए कहा
लेकिन जाएगी कहा पूनम तुझे तो कुछ पता भी नही है पूनम के दिल से आवाज आई
कही भी चली जाउंगी ये दुनिया बहुत बड़ी है जब सबको मेरी खुशियो से ही प्रॉब्लम है तो मैं क्यो यहां रहू मैं भी चली जाति हूँ अगर मुझे लक्ष्य नही मिला तो फिर मैं भी यहां पर क्यो रहू पूनम का दुखी और परेसान मन कुछ भी सोचने समझने के काबिल नही रहा
बेवकूपी मत कर पूनम सार्थक और लावन्या का क्या होगा सार्थक और लावण्या तुझसे कितना प्यार करते है पूनम के
दिल मे कहा
कोई मुझसे प्यार नही करता अगर प्यार करते होते तो इतनी छोटी सी डिमांड पूरी नही करते सब दिखावा है जिससे मैं खुश रहूँ और घर का सारा काम कर दूं वरना ऐसा तो कुछ स्पेशल नही मांगा था मैंने जो पूरा नही कर पाए लक्ष्य से शादी ही तो करने को कह रही थी मैं लक्ष्य को प्यार करती हूँ लक्ष्य मुझसे प्यार करता है तो फिर भैया क्यो रोक रहे है क्या मैने प्यार करके कोई गुनाह किया है उन्होंने खुद लावण्या भाभी से शादी की है वो भी लब मैरिज तो फिर मुझे क्यो रोक रहे है मुझ पर इतनी पाबंदी क्यो पहले मेरा फोन ले लिए जिससे मैं लक्ष्य से बात न कर पाऊ और फिर अब ये , वो बड़े भाई है तो क्या अपनी मनमानी करेंगे ये मेरी जिंदगी है मुझे अपनी जिंदगी कैसे जीनी है ये पता है अब जब चली जाउंगी तब समझ मे आएगा कि कैसा लगता है अगर यह मेरी बात कोई सुनने वाला नही है तो फिर यह रहने से क्या फ़ायदा मैं यहां नही रहूंगी पूनम का थका हुआ और परेशान दिमाग उसे भड़का रहा था और गुस्से की वजह से उसे सही और गलत कुछ भी समझ नही आ रहा था उसके दिमाग ने सार्थक और लावण्या के खिलाफ बगावत कर दी थी उसकी आँखों मे दोनों के लिए प्यार की जगह नफरत ने ली थी और आज इन सबको मजा चखाना चाहती थी ।
पूनम उठी उसने अपनी आलमारी से एक बैग निकाला और अपने कपड़े उसमे रखने लगी जरूरी जरूरी सारा सामान उसने उसमे रखा और फिर वह लावण्या के कमरे के पास आई ।उसने धीरे से लावण्या के कमरे का गेट खोला और देखा लावण्या सो रही थी ।
पूनम ने जैसे गेट खोला था वैसे ही उसे बंद कर दिया और फिर वापस से अपने कमरे में आगयी एक बार उसने फिर से अपने कमरे को देखा और फिर बैग उठाया और दबे पांव बाहर निकल गयी ।
लावण्या पास के ही ऑटो स्टेण्ड पहुची और वहां से उसने
एक ऑटो पकड़ा और बस स्टॉप की तरफ चलने के लिए कहा ।
करीब दो घंटे बाद लावण्या की आंख खुली लावण्या ने पूनम को आवाज लगाई
लेकिन पूनम हो तो न बोले पूनम तो कब की घर छोड़ कर जा चुकी थी ।
लावण्या ने दो तीन बार आवाज लगाया लेकिन जब कोई जबाब नही मिला तो वह उठी और धीरे धीरे कदमो से पूनम के कमरे की तरफ चल पड़ी
पूनम के कमरे में पहुच कर उसने दरवाजा खोला लेकिन उसे बहुत आश्चर्य हुआ पूनम कमरे में नही थी लावण्या ने बाथरूम के पास जाकर पूनम को आवाज लगाया लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।
लावण्या ने पूरे घर मे पूनम को ढूढा लेकिन पूनम का कही पर भी कोई पता नही चला
पूनम चाची के कमरे में आई की शायद पूनम चाची के पास गई हो लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।
चाची पूनम कहा है? लावण्या ने घबरा कर पूछा
पूनम कहा है मतलब वो मेरे पास नही आई चाची जी ने आश्चर्य से कहा
चाची जी पूनम पता नही कहा है मैने पूरे घर मे ढूढा लेकिन उसका कही पर भी पता नही चला मेरा दिल बहुत घबरा रहा है लावण्या ने घबराहट से कहा
कहा जाएगी वह यही कही होगी ध्यान से देखो चाची ने बात को हल्के में लिया और कहा
सब जगह देख लिया चाची लेकिन पूनम घर पर नही है लावण्या बुरी तरह से घबराई थी और रूवासी सी हो रही थी
अच्छा रुको मैं देखती हूँ चाची जी उठी और उन्होंने भी लावण्या के साथ पूनम को ढूढना शुरू कर दिया लेकिन पूनम कही नही मिली
लावन्या और चाची दोनों बुरी तरह से परेशान हो गए ।
बहू आखिरी बार पूनम को कब देखा था चाची ने पूछा
चाची जी अभी करीब दो घंटे पहले पूनम सारा काम खत्म करके मेरे पास आई थी उसके बाद चली गयी मुझे लगा कि अपने कमरे में गयी होगी लेकिन अभी जब मैं उसके कमरे में गयी तो वह अपने कमरे में नही थी लावण्या का चेहरा घबराहट और परेसानी से रूवासा हो गया था और उसका दिल किसी अनहोनी की असंका से घबरा रहा था ।
चाची जी को भी समझ मे नही आरहा था कि ऐसे पूनम कहा जा सकती है वह फिर से पूनम के कमरे में पहुची और बारीकी से हरेक सामान का निरीक्षण करने लगी ।
अचानक से लावण्या का ध्यान पूनम के कपड़ो की तरफ गया उसे जोर दर झटका लगा पूनम के कई कपड़े भी गायब थे लावण्या का दिल जोर से धड़क उठा ।
चाची पूनम घर छोड़ कर चली गयी लावण्या के आंखों से न चाहते हुए आंसू फुट पड़े ।
ऐसा कैसे हो सकता है और तुम यह कैसे कह सकती हो चाची जी ने चौक कर लावन्या से पूछा
चाची जी आलमारी में पूनम के कपड़े भी नही है मैने कई बार पूनम की आलमारी खोली है इसमें इसके अलावा भी कई कपड़े थे लावण्या रोते हुए बोली
लेकिन वो घर छोड़ कर जाएगी क्यो ? चाची जी ने पूछा
वो सब मैं आपको बाद में बताती हूँ सबसे पहले सार्थक को बताना जरूरी है लावण्या ने कहा और भागते हुए अपने कमरे में पहुची वहां से उसने अपना फोन उठाया और फिर जल्दी से सार्थक को फोन मिलाने लगी
लाइन मिलते ही लावन्या बोली
हेलो सार्थक आप कहा पर है पूनम बुरी तरह घबराई हुई और बिचलित थी
अरे लावण्या क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यो हो सब ठीक तो है ना लावण्या का घबराया हुआ स्वर सुनकर सार्थक भी
परेसान हो गया
आप जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी घर आजाये सार्थक प्लीज लावण्या ने फोन पर बताना ठीक नही समझा
लेकिन हुआ क्या ये तो बताओ इतनी कौन सी एमरजेंसी आगयी है सार्थक भी परेसान हो गया और उसने लावण्या से पूछा
वो सब मैं आप यहां पर आओगे तब बताउंगी सार्थक लेकिन प्लीज आप जितनी जल्दी हो सके घर आजाये लावण्या ने रोते हुए कहा
ठीक है ठीक है तुम बिल्कुल चिंता मत करो मैं तुरंत निकलता हूँ और अभी आता हूँ- सार्थक ने कहा
लावण्या के इस तरह रोने से सार्थक का दिल जोर जोर से घबरा रहा था और उसका दिल भी किसी अनहोनी की आसंका से धड़क रहा था क्योंकि आज के पहले लावण्या ने कभी भी इस तरह से उसे फोन नही किया था ।
क्या हुआ सार्थक को फोन कर दिया चाची जी आकर पूछा
जी चाची जी वो आ रहे है लावण्या ने कहा वह अब भी रो थी ।
चाची जी लावण्या के पास आई और उसके आंसू पोछने लगी
लावण्या रोयो मत बेटा सब ठीक हो जाएगा कहा जाएगी पूनम यही कही आस पास ही गयी होगी क्या पता अपने किसी सहेली के यहा गयी हो और अभी आजाये चाची जी ने लावण्या को सात्वना दिया हालांकि उनका खुद का दिल इस बात को माने के लिए तैयार नही था वह खुद भी बहुत ज्यादा परेसान थी
हे भगवान अब तुम्ही मुझे रास्ता दिखाओ एक तरफ मेरे पति और दूसरी तरफ मेरी छोटी बहन जैसी ननद की खुशियां मुझे समझ मे नही आरहा है कि मैं किसका साथ दू अगर ननद का साथ देती हूँ तो सार्थक को बुरा लगेगा और फिर अगर लक्ष्य सचमुच में वैसा हुआ जैसे सार्थक कह रहा था तो फिर मेरी मासूम पूनम जिंदगी भर के लिए रोती रहेगी और अगर सार्थक का सोचना गलत हुआ और सचमुच में लक्ष्य पूनम को दिल से चाहता है और पूनम के लिए सीरियस है तब इस तरह पूनम के ऊपर बंदिशे लगा कर हम उसके ऊपर अत्याचार करेंगे और मुझे अपनी मासूम और इतनी प्यार करने वाली ननद का दिल तोड़ना भी ठीक नही लग रहा प्लीज भगवान हेल्प मी कुछ तो ऐसा रास्ता दिखाओ जिससे मैं सही निर्णय कर पाऊ जो इस घर के लिए मेरी पूनम के लिए मेरे सार्थक के लिए सही हो प्लीज हेल्प मी ये कैसी परीक्षा ले रहा है मेरी प्रभु- लावन्या ने दिल से प्रार्थना की ।
सार्थक के जाने के बाद पूनम अपने घर के और कामो में लग गयी वह फटा फट अपना काम निपटा रही थी उसे अपनी भाभी से बाते करनी थी और इसका दिमाग उसी में उलझा था इसी लिए वह जल्दी जल्दी अपना हाथ चला रही थी जिससे जल्दी से उसका सारा काम खत्म हो जाये ।
अपना सारा काम खत्म कर के पूनम लावन्या के पास पहुची ।
पूनम को देख कर पहली बार लावन्या का दिल घबरा गया मानो उसमे पूनम का सामना करने का साहस न हो ।वह पूनम से नजर चुराने लगी ।
सारा काम खत्म हो गया छुटकी लावण्या ने प्यार से पूछा
जी भाभी सब हो गया, आप कैसी है कुछ चाहिए तो नही आपको, - पूनम ने मुस्कुरा कर पूछा
नही मुझे कुछ नही चाहिए कुछ चाहिए होगा तो बुला लूँगी ,जाओ जा कर तुम भी थोड़ा आराम कर लो थक गई होगी - लावण्या ने कहा
अब कहा जाऊँगी भाभी , आपके पास ही थोड़ी देर आराम कर लूँगी आप से बात भी करती रहूंगी जिससे आप भी बोर नही होंगी और मैं भी,- पूनम ने कहा और लावण्या के पास आकर बैठ गयी
लावण्या के सामने कोई चारा नही बचा वह सुबह से पूनम के सवालों से बच रही थी लेकिन अब उसको और बचना नामुमकिन लग रहा था इसीलिए वह बस कसमसा कर रह गयी ।
भाभी आप सुबह कुछ कह रही थी, कि भैया से कुछ बात करने को कह रही थी , क्या बाते हुई भैया से पूनम ने बैठते हुए ही पहला सवाल दागा और लावण्या से पूछा
लावण्या को जिस बात का डर था वही हुआ वह सुबह से जिस बात के लिए डर रही थी आखिर में अब उससे बचके
जाना उसे नामुमकिन से लगने लगा वह सोच में पड़ गयी और उसका चेहरा सोचने वाले अंदाज से सिकुड़ गया पूनम के बातो का वह क्या जबाब दे उसे सूझ नही रह था ।
बताइये न भाभी आप चुप क्यों हो भैया से बात हुई कि नही आपकी, और अगर हुई है तो भैया ने क्या कहा - पूनम ने बेचैनी से पूछा
पूनम तुम मेरी छोटी बहन जैसी हो , और तुम यह भी जानती हो तुम्हारे भैया तुम्हे बहुत प्यार करते है वो तुम्हे अपने जान से ज्यादा मानते है और कभी भी उदास नही देख सकते , इसीलिए तुम क्यो चिन्ता कर रही हो तुम मेरी और सार्थक की जिम्मेदारी हो हम जो भी करेंगे तुम्हारे लिए बेस्ट करेंगे , और फिर ये तो तुम्हारी जिंदगी भर का सवाल है फिर ऐसे कैसे हम अपनी प्यारी सी बहन जैसी नंद को किसी को जाचे परखे बिना ऐसे दे सकते है - लावण्या ने बात को घुमाने की कोशिश की
सो तो है भाभी आप सच कह रही है मेरे भैया मुझसे बहुत प्यार करते है - पूनम ने खुश होकर कहा
अच्छा सिर्फ तुम्हारे भैया ही तुझे प्यार करते है मैं नही करती हूँ तो ठीक है फिर जाओ मैं तुझसे बात नही कर रही -
लावण्या झूठ मूठ का रूठती हुई बोली ।
अरे ऐसा मैने कब कहा , आप तो मेरी भाभी माँ है जब से आप आयी है तब से मेरी माँ की कमी पूरी हो गयी , मैं बहुत खुश नसीब हूँ कि भैया मेरे लिए इतनी अच्छी और मुझे इतना प्यार करने वाली भाभी लेकर आये सच मे भाभी आप बहुत अच्छी है बिल्कुल वैसी जैसे मैं चाहती थी - पूनम ने लावण्या को गले लगा लिया और प्यार करती हुई बोली
अब क्या करूँ किसी एंगल से तू मेरी नन्द लगती है नही, तुझमे तो मुझे अपनी छोटी बहन दिखती है सच मे पूनम कभी कभी जब मुझसे कोई गलती हो जाती और मेरी रजनी दीदी मुझे डांटती थी, तो मैं सोचती थी कि काश मेरी एक छोटी बहन भी होती जो मेरी बातें मानती मैं उसपर रौब जमाती और डाटती और शायद भगवान ने मेरी बात सुन ली और तुझे दे दिया मेरा वो सपना भी पूरा हो गया लेकिन एक कसर रह गया कि मुझे रौब जमाने का मौका ही नही मिलता क्योकि तुम बिना कहे मेरी सारी बाते पूरी कर देती हो कभी कोई शिकायत का डाटने का मौका ही नही देती हो - लावण्या ने पूनम का गाल थपथपा कर प्यार से कहा
तो ऐसे ही डांट लिया करे जब भी आपका मन करे लेकिन आप को डाँटना भी कहा आता है आपकी डाँट में भी प्यार
छुपा होता है और आपके गुस्सा होने में भी एक अलग मजा है मानो आप गुस्सा नही प्यार कर रही है - पूनम चहक कर बोली
अच्छा बस बस अब बहुत हो गयी झूठ मूठ की मेरी तारीफे, अब बस करो बाते बनाना तो कोई तुझमे सीखे बाते बनाने के अलावा और तुमको आता क्या है - लावण्या ने पूनम को झिड़क दिया और ऐसा चेहरा बना लिया मानो बहुत गुस्से में हो इतना कह कर खुद ही खिलखिला कर हंस पड़ी
लावण्या का इरादा और मजाक समझ कर पूनम भी हंस पड़ी
अच्छा भाभी मजाक छोड़िये बताइये न भैया ने क्या कहा? आप कह रही थी न कि आप ऐसे किसी ऐरे गैरे को बिना जाचे परखे मुझे नही सौप देगी तो लक्ष्य को आप भी जानती है और भैया भी जानते है फिर तो कुछ प्रोबल्म नही होनी चाहिए भैया से बोलिये न कि लक्ष्य से बात करे प्लीज मेरे लिए, मुझे लक्ष्य पसंद है और मुझे लक्ष्य से ही शादी करनी है - पूनम ने मचलकर कहा मानो कोई छोटा बच्चा अपने मनपसंद खिलौने के लिए जिद कर रहा हो ।
पूनम मैं तुम्हे एक बात बताऊ, अगर मन का हो तो अच्छा है और अगर मन का नही हो तो और भी अच्छा है क्यो की जो
अपने मन का नही होता है फिर वो भगवान की मर्जी होती है और भगवान कभी किसी का बुरा नही सोचता जो करता है अच्छा ही करता है इसीलिए जो भगवान की मर्जी होगी वही होगा तुम क्यों चिंता करती हो - लावण्या बोली
आप कहना क्या चाहती है भाभी भैया से आपकी बात नही हुई क्या पूनम का दिल जोर से धड़क उठा ललावन्या की बाते सुनकर उसे कुछ आशंका हो रही थी ।
पूनम मेरी बात ध्यान से सुनो अब मैं जो तुमसे कहने जा रही हूँ उसे बहुत ही समझदारी से और शांति से सुनना , लावण्या के सामने पूनम को सब कुछ सच सच बताने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नही नजर आ रहा था और उसने पूनम को सब कुछ सच सच बताना ही ठीक समझा ।
ऐसी क्या बात है भाभी जो आप मुझसे कहना चाहती है पूनम थोड़ी सी सावधान और चौकन्नी होकर बोली
पूनम सार्थक तुम्हारी शादी लक्ष्य से करवाने के लिए तैयार नही है ,मैने उससे सारी बाते बताई और बहुत समझाया लेकिन उसने साफ मना कर दिया उसने कहा कि कुछ भी हो जाये मैं पूनम की शादी लक्ष्य से नही करूँगा बस , आई एम सॉरी पूनम मैं कुछ नही कर पाई लावन्या यह कहते हुए
उदास हो गयी उसे पूनम के लिए बहुत बुरा लग रहा था
पूनम पर जैसे बम गिरा हो यह खबर उसके लिए किसी आघात से कम नही थी वह चौक कर उछल गयी और बहुत परेसान हो गयी एक पल को उसके मुंह से कोई शब्द नही निकला वह शॉक्ड बैठी रही फिर उसने कहा
साफ मना कर दिया? लेकिन क्यो भाभी ? ऐसी क्या बात हो गयी जो भैया मेरी यह छोटी सी डिमांड भी पूरा नही कर सकते ? पूनम को जोरदार झटका लगा था एक पल में ही उसका सारा सपना उसकी सारी खुशी और उसकी सारी मुस्कुराहट मानो उड़ सी गयी हो उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए वह बुरी तरह से परेशान हो गयी थी उसका दिल टूट सा गया था और उसे रोने का मन कर रहा था ।
पूनम इस क्यो का जाबाब नही है मेरे पास लेकिन अगर सार्थक ने ये फैसला किया है तो कुछ समझ कर ही किया होगा वह तुमसे बहुत प्यार करता है और तुम्हारे लिए कभी कुछ बुरा सोच ही नही सकता - लावण्या ने पूनम को समझाया
लेकिन भाभी क्यो नही हो सकती है लक्ष्य के साथ मेरी शादी? क्या कमी है उसमें ? आप लोग तो उसे अच्छे से जानते हो और फिर मैं लक्ष्य से प्यार करती हूँ ये आप तो
अच्छे से जानती है और लक्ष्य भी मुझे बहुत प्यार करता है भाभी प्लीज भैया से बोल दीजिये वो ऐसा न करे प्लीज भाभी, पूनम बुरी तरह से परेसान होकर बोली
पूनम तुम्हारी बात बिल्कुल सही है लक्ष्य बहुत अच्छा लड़का है और तुम उससे प्यार भी करती हो लेकिन लक्ष्य , उसका क्या, तुम तो जानती हो न लक्ष्य की आदत उसे हरेक लड़की के साथ प्यार हो जाता है अगर वह तुम्हारे साथ भी वही सब कर रहा है जो उसने और लड़कियों के साथ किया तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होगा, तुम्हारे भैया लक्ष्य के दोस्त है वो लक्ष्य के रग रग से वाकिफ है और अगर वो ऐसी बाते कर रहे है, अगर वो ऐसा सोच रहे है तो क्या गलत सोच रहे है तुम्ही बताओ सार्थक का सोचना गलत है क्या ? लक्ष्य ऐसा नही है क्या? लक्ष्य की ये आदत नही है कि वह हरेक लड़की के साथ अटैच होने की कोशिश करता है - लावण्या ने पूनम का हाथ पकड़ कर प्यार से समझाया
भाभी लक्ष्य अब बदल गया है अब वो पहले वाला लक्ष्य नही है मेरा विश्वास कीजिये अब वह हर किसी से अटैच होने की कोशिश नही करता है और वह मुझसे खुद कह रहा था कि अब वह सीरियसली लाइफ में कुछ करना चाहता है आप भैया से कहिये की एक बार उससे बात तो करले फिर उसके बाद जो भी डिसीजन लेंगे मुझे मंजूर है प्लीज़ भाभी मेरे लिए
एक बार भैया को बोल कर तो देखिए - पूनम ने ललावन्या से हाथ जोड़ कर प्रार्थना की
पूनम मैने सब कुछ ट्राई कर लिया लेकिन सार्थक टस से मस नही हुआ वह इस मामले में कोई बात ही नही करना चाहता और न ही वह लक्ष्य की शक्ल देखना पसंद कर रहा है उसे लगता है कि लक्ष्य ने ही तुमको बहकाया फुसलाया है और तुम उसकी लच्छेदार और चिकनी चुपडी बातो में फस गयी हो - लावण्या ने कहा
ऐसा कुछ नही है भाभी लक्ष्य ने मुझसे कुछ नही कहा
- पूनम बोली
पूनम आई एम सॉरी मैं सार्थक के डिसीजन के खिलाफ नही जा सकती , या तो तुम खुद सार्थक से बात करो या लक्ष्य से बोल दो की वो कुछ ऐसा करे जिससे सार्थक को लगे कि लक्ष्य अब बदल गया है और वो तुम्हे लेकर सीरियस है इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नही है अगर लक्ष्य सच मे तुम्हे प्यार करता है और सच मे वो तुम्हे लेकर सीरियस है तो वो जरूर अपने आप को प्रूफ कर देगा - लावण्या बोली
पूनम को कुछ नही सूझ रहा था उसे समझ नही आरहा था कि वो सार्थक को कैसे कंवेसन्स करे वह चुपचाप उठी और
जाने लगी उसका दिल बहुत ही ज्यादा बेचैन और परेसान था
कहा जा रही हो पूनम - लावण्या ने कहा
कही नही भाभी, जा रही हूँ अपने कमरे में पूनम ने उदास होकर कहा और चुपचाप कमरे से निकल गयी
लावण्या को पूनम की हालत देख कर दुख तो हो रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकती थी वह बहुत मजबूर थी ।उसने सब कुछ भगवान के उपर छोड दिया
पूनम लावन्या के कमरे से निकली और अपने कमरे में पहुची इतनी देर से रुकी हुई उसकी आँखों ने अब और ठहरने से इनकार कर दिया और बरस पड़ी
पूनम को ऐसा लग रहा था मानो वह इस दुनिया में बिल्कुल अकेली हो उसको लावण्या के रूप में एक उम्मीद थी कि कैसे भी करके लावण्या कुछ न कुछ जरूर करेगी जिससे वो और लक्ष्य एक हो जाये लेकिन आज वह उम्मीद भी टूट गयी इसीलिए पूनम का दिल भी टूट कर चकना चूर हो गया था और उसे बहुत दर्द भी हो रहा था ।
उम्मीद में बहुत ताकत होती है उम्मीद से ही कोई जिंदा रहता है और किसी को कितनी भी बड़ी परेशानियों से लड़ने की
ताकत मिलती है लेकिन अगर उम्मीद टूट जाता है तो वह इंसान भी टूट जाता है पूनम अभी अभी लावण्या से जो सुनकर आ रही थी उससे उसकी वह उम्मीद बिल्कुल टूट गयी थी , उसे अपनी मां की बहुत याद आ रही थी और आज कही न कही उनकी कमी खल रही थी क्योंकि आज अगर वह जिंदा होते तो पूनम की बाते सुनती और कुछ न कुछ ऐसा जरूर करती जिससे पूनम की दिल का अरमान पूरा हो जाता
पूनम ने अपनी माँ का फोटो निकाला और रो रो कर उनके फ़ोटो से बाते करने लगी मानो सच मे अपनी माँ से कह रही हो पूनम को सार्थक ने कभी किसी चीज के लिए मना नही किया था लेकिन आज उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी उसका पहला प्यार लक्ष्य के लिए सार्थक ने मना कर दिया और यह बात पूनम बर्दास्त नही कर पा रही थी ।
माँ आप मुझे छोड़ कर क्यो चली गयी किसके भरोसे छोड़ कर गयी है मुझे,किसी को मेरी खुशियो की कोई परवाह नही है मेरा दिल क्या चाहता है किसी को कोई मतलब नही है मुझे आपकी जरूरत है मां प्लीज पूनम रोती हुई बोली
आज तक मैने भैया से कुछ नही मांगा आज पहली बार एक छोटी सी चीज मांगा है लेकिन भैया ने उसके लिए भी मना कर दिया मा मैं बहुत अकेली हूँ मुझे आपकी बहुत याद आ
रही है पूनम रोते हुए बोली । वह बहुत देर तक अपनी माँ के फोटो को सीने से लगा कर रोती रही अचानक से उसके आंखों में आँसूओ की जगह गुस्से और नफरत ने ले ली ।
ठीक है अगर यहा पर किसी को मेरी खुशियो से कोई मतलब नही है किसी को मेरी भावनाये मेरे जज्बात और मेरे प्यार की कदर नही है तो मैं भी यहां नही रहूंगी मैं भी यह घर छोड़ कर चली जाउंगी।
इतने बड़े सदमे से पूनम का दिमागी संतुलन मानो बिगड़ गया था । उसने अपने आंसू पोछते हुए कहा
लेकिन जाएगी कहा पूनम तुझे तो कुछ पता भी नही है पूनम के दिल से आवाज आई
कही भी चली जाउंगी ये दुनिया बहुत बड़ी है जब सबको मेरी खुशियो से ही प्रॉब्लम है तो मैं क्यो यहां रहू मैं भी चली जाति हूँ अगर मुझे लक्ष्य नही मिला तो फिर मैं भी यहां पर क्यो रहू पूनम का दुखी और परेसान मन कुछ भी सोचने समझने के काबिल नही रहा
बेवकूपी मत कर पूनम सार्थक और लावन्या का क्या होगा सार्थक और लावण्या तुझसे कितना प्यार करते है पूनम के
दिल मे कहा
कोई मुझसे प्यार नही करता अगर प्यार करते होते तो इतनी छोटी सी डिमांड पूरी नही करते सब दिखावा है जिससे मैं खुश रहूँ और घर का सारा काम कर दूं वरना ऐसा तो कुछ स्पेशल नही मांगा था मैंने जो पूरा नही कर पाए लक्ष्य से शादी ही तो करने को कह रही थी मैं लक्ष्य को प्यार करती हूँ लक्ष्य मुझसे प्यार करता है तो फिर भैया क्यो रोक रहे है क्या मैने प्यार करके कोई गुनाह किया है उन्होंने खुद लावण्या भाभी से शादी की है वो भी लब मैरिज तो फिर मुझे क्यो रोक रहे है मुझ पर इतनी पाबंदी क्यो पहले मेरा फोन ले लिए जिससे मैं लक्ष्य से बात न कर पाऊ और फिर अब ये , वो बड़े भाई है तो क्या अपनी मनमानी करेंगे ये मेरी जिंदगी है मुझे अपनी जिंदगी कैसे जीनी है ये पता है अब जब चली जाउंगी तब समझ मे आएगा कि कैसा लगता है अगर यह मेरी बात कोई सुनने वाला नही है तो फिर यह रहने से क्या फ़ायदा मैं यहां नही रहूंगी पूनम का थका हुआ और परेशान दिमाग उसे भड़का रहा था और गुस्से की वजह से उसे सही और गलत कुछ भी समझ नही आ रहा था उसके दिमाग ने सार्थक और लावण्या के खिलाफ बगावत कर दी थी उसकी आँखों मे दोनों के लिए प्यार की जगह नफरत ने ली थी और आज इन सबको मजा चखाना चाहती थी ।
पूनम उठी उसने अपनी आलमारी से एक बैग निकाला और अपने कपड़े उसमे रखने लगी जरूरी जरूरी सारा सामान उसने उसमे रखा और फिर वह लावण्या के कमरे के पास आई ।उसने धीरे से लावण्या के कमरे का गेट खोला और देखा लावण्या सो रही थी ।
पूनम ने जैसे गेट खोला था वैसे ही उसे बंद कर दिया और फिर वापस से अपने कमरे में आगयी एक बार उसने फिर से अपने कमरे को देखा और फिर बैग उठाया और दबे पांव बाहर निकल गयी ।
लावण्या पास के ही ऑटो स्टेण्ड पहुची और वहां से उसने
एक ऑटो पकड़ा और बस स्टॉप की तरफ चलने के लिए कहा ।
करीब दो घंटे बाद लावण्या की आंख खुली लावण्या ने पूनम को आवाज लगाई
लेकिन पूनम हो तो न बोले पूनम तो कब की घर छोड़ कर जा चुकी थी ।
लावण्या ने दो तीन बार आवाज लगाया लेकिन जब कोई जबाब नही मिला तो वह उठी और धीरे धीरे कदमो से पूनम के कमरे की तरफ चल पड़ी
पूनम के कमरे में पहुच कर उसने दरवाजा खोला लेकिन उसे बहुत आश्चर्य हुआ पूनम कमरे में नही थी लावण्या ने बाथरूम के पास जाकर पूनम को आवाज लगाया लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।
लावण्या ने पूरे घर मे पूनम को ढूढा लेकिन पूनम का कही पर भी कोई पता नही चला
पूनम चाची के कमरे में आई की शायद पूनम चाची के पास गई हो लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।
चाची पूनम कहा है? लावण्या ने घबरा कर पूछा
पूनम कहा है मतलब वो मेरे पास नही आई चाची जी ने आश्चर्य से कहा
चाची जी पूनम पता नही कहा है मैने पूरे घर मे ढूढा लेकिन उसका कही पर भी पता नही चला मेरा दिल बहुत घबरा रहा है लावण्या ने घबराहट से कहा
कहा जाएगी वह यही कही होगी ध्यान से देखो चाची ने बात को हल्के में लिया और कहा
सब जगह देख लिया चाची लेकिन पूनम घर पर नही है लावण्या बुरी तरह से घबराई थी और रूवासी सी हो रही थी
अच्छा रुको मैं देखती हूँ चाची जी उठी और उन्होंने भी लावण्या के साथ पूनम को ढूढना शुरू कर दिया लेकिन पूनम कही नही मिली
लावन्या और चाची दोनों बुरी तरह से परेशान हो गए ।
बहू आखिरी बार पूनम को कब देखा था चाची ने पूछा
चाची जी अभी करीब दो घंटे पहले पूनम सारा काम खत्म करके मेरे पास आई थी उसके बाद चली गयी मुझे लगा कि अपने कमरे में गयी होगी लेकिन अभी जब मैं उसके कमरे में गयी तो वह अपने कमरे में नही थी लावण्या का चेहरा घबराहट और परेसानी से रूवासा हो गया था और उसका दिल किसी अनहोनी की असंका से घबरा रहा था ।
चाची जी को भी समझ मे नही आरहा था कि ऐसे पूनम कहा जा सकती है वह फिर से पूनम के कमरे में पहुची और बारीकी से हरेक सामान का निरीक्षण करने लगी ।
अचानक से लावण्या का ध्यान पूनम के कपड़ो की तरफ गया उसे जोर दर झटका लगा पूनम के कई कपड़े भी गायब थे लावण्या का दिल जोर से धड़क उठा ।
चाची पूनम घर छोड़ कर चली गयी लावण्या के आंखों से न चाहते हुए आंसू फुट पड़े ।
ऐसा कैसे हो सकता है और तुम यह कैसे कह सकती हो चाची जी ने चौक कर लावन्या से पूछा
चाची जी आलमारी में पूनम के कपड़े भी नही है मैने कई बार पूनम की आलमारी खोली है इसमें इसके अलावा भी कई कपड़े थे लावण्या रोते हुए बोली
लेकिन वो घर छोड़ कर जाएगी क्यो ? चाची जी ने पूछा
वो सब मैं आपको बाद में बताती हूँ सबसे पहले सार्थक को बताना जरूरी है लावण्या ने कहा और भागते हुए अपने कमरे में पहुची वहां से उसने अपना फोन उठाया और फिर जल्दी से सार्थक को फोन मिलाने लगी
लाइन मिलते ही लावन्या बोली
हेलो सार्थक आप कहा पर है पूनम बुरी तरह घबराई हुई और बिचलित थी
अरे लावण्या क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यो हो सब ठीक तो है ना लावण्या का घबराया हुआ स्वर सुनकर सार्थक भी
परेसान हो गया
आप जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी घर आजाये सार्थक प्लीज लावण्या ने फोन पर बताना ठीक नही समझा
लेकिन हुआ क्या ये तो बताओ इतनी कौन सी एमरजेंसी आगयी है सार्थक भी परेसान हो गया और उसने लावण्या से पूछा
वो सब मैं आप यहां पर आओगे तब बताउंगी सार्थक लेकिन प्लीज आप जितनी जल्दी हो सके घर आजाये लावण्या ने रोते हुए कहा
ठीक है ठीक है तुम बिल्कुल चिंता मत करो मैं तुरंत निकलता हूँ और अभी आता हूँ- सार्थक ने कहा
लावण्या के इस तरह रोने से सार्थक का दिल जोर जोर से घबरा रहा था और उसका दिल भी किसी अनहोनी की आसंका से धड़क रहा था क्योंकि आज के पहले लावण्या ने कभी भी इस तरह से उसे फोन नही किया था ।
क्या हुआ सार्थक को फोन कर दिया चाची जी आकर पूछा
जी चाची जी वो आ रहे है लावण्या ने कहा वह अब भी रो थी ।
चाची जी लावण्या के पास आई और उसके आंसू पोछने लगी
लावण्या रोयो मत बेटा सब ठीक हो जाएगा कहा जाएगी पूनम यही कही आस पास ही गयी होगी क्या पता अपने किसी सहेली के यहा गयी हो और अभी आजाये चाची जी ने लावण्या को सात्वना दिया हालांकि उनका खुद का दिल इस बात को माने के लिए तैयार नही था वह खुद भी बहुत ज्यादा परेसान थी