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Guest
पूनम हैरान परेशान बैठी रही ,कल सार्थक उसपर अनायास गुस्सा कर रहा था और आज लावण्या ने अपना फोन वापस ले लिया अचानक से उसके भैया और भाभी दोनों ही उसके साथ रूखा ब्यवहार करने लगे लेकिन पूनम को इस तरह रूखा ब्यवहार करने की वजह समझ मे नही आ रही थी
पूनम ने अपने पूरे माइंड को रिवाइंड करके अपनी कोई गलती ढूढने की कोशिश की जिससे इस बेरुखी की वजह का पता चल पड़े लेकिन वह नाकाम रही
सोचते सोचते पूनम का दिमाग फटने लगा लेकिन उसकी समझ मे कुछ नही आया आखिर में वह थक गई और बिस्तर से उठ कर बाहर निकल कर बाहर आ गयी ।
वह चुपचाप बाथरूम गयी और फिर फ्रेश होकर फटाफट नहाई और किचन में आकर अपने भाभी की नास्ता बनाने में मदद करने लगी ।
लावण्या ने कुछ नही कहा बस चुपचाप अपना काम कर रही थी उसने पूनम को एक बार नजर उठा कर देखा और फिर अपने काम मे ब्यस्त हो गयी ।
तीन दिन तक ऐसे ही चला इन तीन दिनों में एक बार भी पूनम और लक्ष्य की बात नही हुई ।
पूनम बेचैन हो रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका कुछ खो गया हो
ये क्या हो रहा है मुझे इतनी बेचैनी क्यो हो रही है पहले भी तो मेरे पास फोन नही था तो अब अगर नही है तो क्या हो गया पूनम ने अपने बेचैन दिल को मनाने की कोशिश की
लक्ष्य लगातार पूनम के नम्बर पर काल करने की कोशिश कररहा था लेकिन पूनम का फोन स्विच ऑफ आरहा था । लक्ष्य को पूनम से बात करने की आदत हो गयी थी इसी वजह से वह भी पूनम से बात करने के लिए मरा जा रहा था ।आखिरमें चौथे दिन उसके बर्दास्त से बाहर हो गया ।
उसने लावण्या के फोन पर कॉल किया
हेलो भाभी नमस्ते - लक्ष्य ने कहा
नमस्ते - हां लक्ष्य बोलो लावण्या ने कहा
क्या हुआ भाभी पूनम का फोन नही लग रहा है सब ठीक तो है ना- लक्ष्य ने छूटते ही पूछा
हां लक्ष्य सब ठीक है उसका फोन खराब हो गया है लेकिन
तुम फोन क्यो कर रहे थे कुछ काम था क्या - लावण्या ने पूछा
नही ऐसे कोईखास काम नही था बस ऐसे ही फोन किया था- लक्ष्य बोला .
हम्म और सब ठीक है ना लावण्या ने औपचारिकता बस पूछा
जी भाभी ठीक है सब, कहा है मैडम जी? - लक्ष्य ने पूनम के बारे में पूछा
पूनम काम कर रही है वो बात नही कर सकती लावण्या ने कहा
ओह्ह अच्छा कोई बात नही मैं बाद में काल करता हूँ - लक्ष्य ने कहा
कुछ काम है तुम्हे क्या? - लावण्या ने दुबारा से पूछा
नही बस ऐसे ही -लक्ष्य बोला
वैसे सार्थक कहा है भाभी? लक्ष्य ने पूछा
बस ऑफिस जाने को तैयारहो रहे है - लावण्या ने कहा
अच्छा ठीक है लक्ष्य ने कहा और फोन रख दिया
लक्ष्य को ऐसा महसूस हुआ मानो आज लावण्या का ब्यवहार कुछ बदला हुआ हो जिस तरह से वह बात करती थी आज उस तरह से उसने बात नही किया और यही बात लक्ष्य को बहुत जीव लग रहा था और फिर पूनम से भी उसकी बात नही हुई पूनम से बात करने का उसका बहुत मन कर रहा था लेकिन वो करे तो क्या करे उसे कुछ समझ मे नही आरहा था ।
ऐसे ही तीन दिन और बीत गए लक्ष्य और पूनम से बात हुए करीब एक हफ्ता हो गया और लक्ष्य बहुत ही ज्यादा परेसान हो गया उसे पूनम से बात करने का बहुत ही ज्यादा मन कर रहा था आखिर में उसने एक फैसला किया ।
उसने अपनी बाइक उठाई और सार्थक के घर की तरफ चल पड़ा
सार्थक के घर पहुच कर उसने दरवाजा खटखटाया पूनम बाहर निकली और उसने दरवाजा खोला
लक्ष्य को देखते ही पूनम की आंखे चार सौ चालीस बोल्ट के बल्ब जैसे चमक उठी अनायास ही उसके चेहरे पर एक
मुस्कुराहट आगयी ।
अरे लक्ष्य तुम ? यहां कैसे बड़े दिन बाद आये हो सब ठीक तो है ना तुम कैसे हो- पूनम चहक कर बोली लक्ष्य को देख कर उसे बहुत ही ज्यादा खुशी महसूस हो रही थी
मैं ठीक हूँ तुम कैसी ? हो बहुत दिन हुआ तुमसे बात नही हुआ तो मैंने सोचा कि चलकर तुम्हारा हाल चाल पूछ लू - लक्ष्य भी पूनम को देखकर बहुत खुश था पूनम को देख कर उसके बेचैन मन को जैसे चैन मिला हो
कौन है पूनम लावण्या ने अंदर से चिल्ला कर कहा
लक्ष्य आया है भाभी- पूनम ने खुश होकर कहा
लक्ष्य का नाम सुनते ही लावण्या के शरीर मे जैसे बिजली सी भर गई वह मानो दौड़ती हुई आयी उसके चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी ।
अरे लक्ष्य तुम यहाँ कैसे कुछ काम था क्या ? - लावण्या ने कहा
क्यो बिना काम के मैं नही सकता क्या भाभी - इस ततः लावण्या के पूछह जाने पर लक्ष्य सकपका गया और बुरी तरह झेप गया अपनी मुस्कराहट के पीछे लक्ष्य ने अपनी झेप
छुपाते हुए कहा
नही ऐसी बात नही है आ सकते हो लेकिन सार्थक तो है नही इसी लिए मैने सोचा - लावण्या ने कहा .
मुझे सार्थक से कोई काम नही था ,मैने सोचा कि बहुत दिन हो गए इस नकचढ़ी चुहिया के हाथ की चाय नही पी है आज चल कर पी लेता हूँ और बहुत दिन हो गए तुम लोगो से मिले हुए तो चला आया - लक्ष्य बोला
लावण्या को न चाहते हुए लक्ष्य को अंदर आने के लिए कहना पड़ा
पूनम को देख कर लक्ष्य और लक्ष्य को देख कर पूनम दोनों बहुत खुश थे और लावण्या दोनों की खुशी महसूस कर रही थी ।
पूनम बिना कहे ही किचन में चली गयी और चाय बनाने लगी लावण्या वही बाहर बैठ कर लक्ष्य से बाते कर रही थी थोड़ी देर बाद पूनम लक्ष्य के लिए चाय लेकर आई और एक कप लक्ष्य को एक लावण्या को देकर एक खुद लेकर बैठ गयी ।
अरे तुम यहाँ क्यो बैठ गयी छुटकी तुम्हारे भैया के कपड़े प्रेस
करने है जाओ जाकर वो करलो - लावण्या ने कहा
जा रही हूँ भाभी बस चाय पी लू - पूनम ने कहा
अरे अंदर ही पी लेना न प्रेस लगा देना जबतक वो गरम होगा तब तक पी लेना यहां बैठने से काम नही होगा पूनम करने से होगा छोटा सा दिन होता है कब खत्म हो जाता है पता नही तो टाइम बेस्ट मत करो जाओ जाकर कर लो अभी बहुत काम है - लावण्या ने कहा
पूनम ने लावण्या को देखा लेकिन लावण्या के चेहरे पर कोई भी भाव नही था वह उठ कर अंदर चली गयी ।
पूनम के फोन को क्या हुआ भाभी लक्ष्य ने चाय पीते हुए पूछा
खराब हो गया है लावण्या ने टका सा जबाब दिया ।
हम्म भाभी मेरे पास एक एक्सट्रा फोन पड़ा है अगर आप कहो तो मैं दे दू - लक्ष्य ने कहा
नही लक्ष्य उसकी कोई जरूरत नही है वैसे भी पूनम को फोन की क्या जरूरत है वो तो घर मे ही रहती है कही आना
जाना ही नही है और कुछ जरूरी बात करनी हो तो मेरा फोन तो है ही न - लावण्या ने कहा
लक्ष्य का चेहरा उतर गया ।
लक्ष्य थोड़ी देर इधर उधर की बाते करता रहा उसे यह बात महसूस हुआ कि लावण्या का ब्यवहार उसके लिए बदला हुआ है और यही बात सोच सोच कर वह परेसान था ।
भाभी मुझसे कोई गलती हो गयी क्या आखिर में लक्ष्य ने पूछ ही लिया
नही ऐसी तो कोइ बात नही है- लावण्या बोली
मुझे लग् रहा है कि आज मैं किसी गैर के घर आया हूँ आज आपका ब्यवहार कुछ बदला हुआ लग रहा है ऐसा लग रहा है जैसे आपको मेरा यहाँ आना पसनद नही आया हो - लक्ष्य बोला
नही लक्ष्य ऐसा कुछ नही है तुम्हे बहम है और रही बात आने न आने की तो तुम तो चाची जी को जानते ही हो उन्हें किसी बाहरी का अपने घर मे इस तरह बार बार आना बिल्कुल अच्छा नही लगता और इसी बात पर उन्होंने उस दिन सार्थक को बहुत सुनाया - लावान्या बोली
ठीक है अगर ऐसी बात है तो मैं आगे से ध्यान रखूंगा -लक्ष्य ने कहा
लक्ष्य तुम्हे कुछ काम था क्या असल मे मुझे बहुत काम करना है तो जाना है - अचानक से लावण्या ने लक्ष्य से कहा
न भाभी ने बस मैं निकल रहा हूँ लक्ष्य लावण्या के बातो का मतलब समझ गया और उठता हुआ बोला
जाते हुए लक्ष्य की नजर पूनम को एक और बार देखने के लिए तलास रही थी लेकिन पूनम बाहर नही आई और आज लक्ष्य की भी हिम्मत नही हुई कि वह पूनम से मिलने चला जाय इसी वजह से वह बहुत ही बेझिल कदमो से बाहर की तरफ जाने लगा वो जिस मकसद से यह आया था उसका कोई भी मकसद पूरा नही हुआ ।
अगले दिन का सुबह रजनी के जिंदगी का मानो सबसे खूबसूरत सबेरे की तरह आया हो ।
रजनी का चेहरा खुशी से दमक रहा था राजीव की बाते राजीव का व्यवहार और राजीव की सादगी और सरलता रजनी के दिल मे सीधा उतर चुकी थी ।
कल रात की बाते सोच कर रजनी के ओठो पर एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत सी मुस्कुराहट सी आ गयी और उसका दिल खुशी से जोर जोर धड़कने लगा
कल रात में राजीव ने अपने इरादों से रजनी को खुशहाल कर दिया था ।
रजनी ने उठ कर अंगड़ाई ली और भाग कर बाथरूम पहुची वहां पर फ्रेश होकर जल्दी से उसने हाथ मुह धोया और फिर राजीव के कमरे में भागी ।
राजीव उठ चुका था और वह रजनी के आने की राह देख रहा
था ।
गुड मॉर्निंग, - राजीव ने रजनी को देख कर मुस्कुरा कर कहा
गुड मॉर्निंग, आप जाग गए ?- रजनी ने भी मुस्कुरा कर जबाब दिया
हा कब का मेरी आदत है सुबह सुबह उठने की रजनी इसीलिए मैं कब का जाग चुका हूँ और तैयार होकर आपके जागने का ही इन्तेजार कर रहा था - राजीव ने कहा
मैं भी रेडी हूँ - रजनी बोली
गुड तो देर किस बात की चलिए चलते है वापस अपने घर राजीव ने कहा
जी रजनी ने कहा और फिर राजीव के पीछे पीछे चल पड़ी
पूनम ने अपने पूरे माइंड को रिवाइंड करके अपनी कोई गलती ढूढने की कोशिश की जिससे इस बेरुखी की वजह का पता चल पड़े लेकिन वह नाकाम रही
सोचते सोचते पूनम का दिमाग फटने लगा लेकिन उसकी समझ मे कुछ नही आया आखिर में वह थक गई और बिस्तर से उठ कर बाहर निकल कर बाहर आ गयी ।
वह चुपचाप बाथरूम गयी और फिर फ्रेश होकर फटाफट नहाई और किचन में आकर अपने भाभी की नास्ता बनाने में मदद करने लगी ।
लावण्या ने कुछ नही कहा बस चुपचाप अपना काम कर रही थी उसने पूनम को एक बार नजर उठा कर देखा और फिर अपने काम मे ब्यस्त हो गयी ।
तीन दिन तक ऐसे ही चला इन तीन दिनों में एक बार भी पूनम और लक्ष्य की बात नही हुई ।
पूनम बेचैन हो रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका कुछ खो गया हो
ये क्या हो रहा है मुझे इतनी बेचैनी क्यो हो रही है पहले भी तो मेरे पास फोन नही था तो अब अगर नही है तो क्या हो गया पूनम ने अपने बेचैन दिल को मनाने की कोशिश की
लक्ष्य लगातार पूनम के नम्बर पर काल करने की कोशिश कररहा था लेकिन पूनम का फोन स्विच ऑफ आरहा था । लक्ष्य को पूनम से बात करने की आदत हो गयी थी इसी वजह से वह भी पूनम से बात करने के लिए मरा जा रहा था ।आखिरमें चौथे दिन उसके बर्दास्त से बाहर हो गया ।
उसने लावण्या के फोन पर कॉल किया
हेलो भाभी नमस्ते - लक्ष्य ने कहा
नमस्ते - हां लक्ष्य बोलो लावण्या ने कहा
क्या हुआ भाभी पूनम का फोन नही लग रहा है सब ठीक तो है ना- लक्ष्य ने छूटते ही पूछा
हां लक्ष्य सब ठीक है उसका फोन खराब हो गया है लेकिन
तुम फोन क्यो कर रहे थे कुछ काम था क्या - लावण्या ने पूछा
नही ऐसे कोईखास काम नही था बस ऐसे ही फोन किया था- लक्ष्य बोला .
हम्म और सब ठीक है ना लावण्या ने औपचारिकता बस पूछा
जी भाभी ठीक है सब, कहा है मैडम जी? - लक्ष्य ने पूनम के बारे में पूछा
पूनम काम कर रही है वो बात नही कर सकती लावण्या ने कहा
ओह्ह अच्छा कोई बात नही मैं बाद में काल करता हूँ - लक्ष्य ने कहा
कुछ काम है तुम्हे क्या? - लावण्या ने दुबारा से पूछा
नही बस ऐसे ही -लक्ष्य बोला
वैसे सार्थक कहा है भाभी? लक्ष्य ने पूछा
बस ऑफिस जाने को तैयारहो रहे है - लावण्या ने कहा
अच्छा ठीक है लक्ष्य ने कहा और फोन रख दिया
लक्ष्य को ऐसा महसूस हुआ मानो आज लावण्या का ब्यवहार कुछ बदला हुआ हो जिस तरह से वह बात करती थी आज उस तरह से उसने बात नही किया और यही बात लक्ष्य को बहुत जीव लग रहा था और फिर पूनम से भी उसकी बात नही हुई पूनम से बात करने का उसका बहुत मन कर रहा था लेकिन वो करे तो क्या करे उसे कुछ समझ मे नही आरहा था ।
ऐसे ही तीन दिन और बीत गए लक्ष्य और पूनम से बात हुए करीब एक हफ्ता हो गया और लक्ष्य बहुत ही ज्यादा परेसान हो गया उसे पूनम से बात करने का बहुत ही ज्यादा मन कर रहा था आखिर में उसने एक फैसला किया ।
उसने अपनी बाइक उठाई और सार्थक के घर की तरफ चल पड़ा
सार्थक के घर पहुच कर उसने दरवाजा खटखटाया पूनम बाहर निकली और उसने दरवाजा खोला
लक्ष्य को देखते ही पूनम की आंखे चार सौ चालीस बोल्ट के बल्ब जैसे चमक उठी अनायास ही उसके चेहरे पर एक
मुस्कुराहट आगयी ।
अरे लक्ष्य तुम ? यहां कैसे बड़े दिन बाद आये हो सब ठीक तो है ना तुम कैसे हो- पूनम चहक कर बोली लक्ष्य को देख कर उसे बहुत ही ज्यादा खुशी महसूस हो रही थी
मैं ठीक हूँ तुम कैसी ? हो बहुत दिन हुआ तुमसे बात नही हुआ तो मैंने सोचा कि चलकर तुम्हारा हाल चाल पूछ लू - लक्ष्य भी पूनम को देखकर बहुत खुश था पूनम को देख कर उसके बेचैन मन को जैसे चैन मिला हो
कौन है पूनम लावण्या ने अंदर से चिल्ला कर कहा
लक्ष्य आया है भाभी- पूनम ने खुश होकर कहा
लक्ष्य का नाम सुनते ही लावण्या के शरीर मे जैसे बिजली सी भर गई वह मानो दौड़ती हुई आयी उसके चेहरे की रंगत उड़ी हुई थी ।
अरे लक्ष्य तुम यहाँ कैसे कुछ काम था क्या ? - लावण्या ने कहा
क्यो बिना काम के मैं नही सकता क्या भाभी - इस ततः लावण्या के पूछह जाने पर लक्ष्य सकपका गया और बुरी तरह झेप गया अपनी मुस्कराहट के पीछे लक्ष्य ने अपनी झेप
छुपाते हुए कहा
नही ऐसी बात नही है आ सकते हो लेकिन सार्थक तो है नही इसी लिए मैने सोचा - लावण्या ने कहा .
मुझे सार्थक से कोई काम नही था ,मैने सोचा कि बहुत दिन हो गए इस नकचढ़ी चुहिया के हाथ की चाय नही पी है आज चल कर पी लेता हूँ और बहुत दिन हो गए तुम लोगो से मिले हुए तो चला आया - लक्ष्य बोला
लावण्या को न चाहते हुए लक्ष्य को अंदर आने के लिए कहना पड़ा
पूनम को देख कर लक्ष्य और लक्ष्य को देख कर पूनम दोनों बहुत खुश थे और लावण्या दोनों की खुशी महसूस कर रही थी ।
पूनम बिना कहे ही किचन में चली गयी और चाय बनाने लगी लावण्या वही बाहर बैठ कर लक्ष्य से बाते कर रही थी थोड़ी देर बाद पूनम लक्ष्य के लिए चाय लेकर आई और एक कप लक्ष्य को एक लावण्या को देकर एक खुद लेकर बैठ गयी ।
अरे तुम यहाँ क्यो बैठ गयी छुटकी तुम्हारे भैया के कपड़े प्रेस
करने है जाओ जाकर वो करलो - लावण्या ने कहा
जा रही हूँ भाभी बस चाय पी लू - पूनम ने कहा
अरे अंदर ही पी लेना न प्रेस लगा देना जबतक वो गरम होगा तब तक पी लेना यहां बैठने से काम नही होगा पूनम करने से होगा छोटा सा दिन होता है कब खत्म हो जाता है पता नही तो टाइम बेस्ट मत करो जाओ जाकर कर लो अभी बहुत काम है - लावण्या ने कहा
पूनम ने लावण्या को देखा लेकिन लावण्या के चेहरे पर कोई भी भाव नही था वह उठ कर अंदर चली गयी ।
पूनम के फोन को क्या हुआ भाभी लक्ष्य ने चाय पीते हुए पूछा
खराब हो गया है लावण्या ने टका सा जबाब दिया ।
हम्म भाभी मेरे पास एक एक्सट्रा फोन पड़ा है अगर आप कहो तो मैं दे दू - लक्ष्य ने कहा
नही लक्ष्य उसकी कोई जरूरत नही है वैसे भी पूनम को फोन की क्या जरूरत है वो तो घर मे ही रहती है कही आना
जाना ही नही है और कुछ जरूरी बात करनी हो तो मेरा फोन तो है ही न - लावण्या ने कहा
लक्ष्य का चेहरा उतर गया ।
लक्ष्य थोड़ी देर इधर उधर की बाते करता रहा उसे यह बात महसूस हुआ कि लावण्या का ब्यवहार उसके लिए बदला हुआ है और यही बात सोच सोच कर वह परेसान था ।
भाभी मुझसे कोई गलती हो गयी क्या आखिर में लक्ष्य ने पूछ ही लिया
नही ऐसी तो कोइ बात नही है- लावण्या बोली
मुझे लग् रहा है कि आज मैं किसी गैर के घर आया हूँ आज आपका ब्यवहार कुछ बदला हुआ लग रहा है ऐसा लग रहा है जैसे आपको मेरा यहाँ आना पसनद नही आया हो - लक्ष्य बोला
नही लक्ष्य ऐसा कुछ नही है तुम्हे बहम है और रही बात आने न आने की तो तुम तो चाची जी को जानते ही हो उन्हें किसी बाहरी का अपने घर मे इस तरह बार बार आना बिल्कुल अच्छा नही लगता और इसी बात पर उन्होंने उस दिन सार्थक को बहुत सुनाया - लावान्या बोली
ठीक है अगर ऐसी बात है तो मैं आगे से ध्यान रखूंगा -लक्ष्य ने कहा
लक्ष्य तुम्हे कुछ काम था क्या असल मे मुझे बहुत काम करना है तो जाना है - अचानक से लावण्या ने लक्ष्य से कहा
न भाभी ने बस मैं निकल रहा हूँ लक्ष्य लावण्या के बातो का मतलब समझ गया और उठता हुआ बोला
जाते हुए लक्ष्य की नजर पूनम को एक और बार देखने के लिए तलास रही थी लेकिन पूनम बाहर नही आई और आज लक्ष्य की भी हिम्मत नही हुई कि वह पूनम से मिलने चला जाय इसी वजह से वह बहुत ही बेझिल कदमो से बाहर की तरफ जाने लगा वो जिस मकसद से यह आया था उसका कोई भी मकसद पूरा नही हुआ ।
अगले दिन का सुबह रजनी के जिंदगी का मानो सबसे खूबसूरत सबेरे की तरह आया हो ।
रजनी का चेहरा खुशी से दमक रहा था राजीव की बाते राजीव का व्यवहार और राजीव की सादगी और सरलता रजनी के दिल मे सीधा उतर चुकी थी ।
कल रात की बाते सोच कर रजनी के ओठो पर एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत सी मुस्कुराहट सी आ गयी और उसका दिल खुशी से जोर जोर धड़कने लगा
कल रात में राजीव ने अपने इरादों से रजनी को खुशहाल कर दिया था ।
रजनी ने उठ कर अंगड़ाई ली और भाग कर बाथरूम पहुची वहां पर फ्रेश होकर जल्दी से उसने हाथ मुह धोया और फिर राजीव के कमरे में भागी ।
राजीव उठ चुका था और वह रजनी के आने की राह देख रहा
था ।
गुड मॉर्निंग, - राजीव ने रजनी को देख कर मुस्कुरा कर कहा
गुड मॉर्निंग, आप जाग गए ?- रजनी ने भी मुस्कुरा कर जबाब दिया
हा कब का मेरी आदत है सुबह सुबह उठने की रजनी इसीलिए मैं कब का जाग चुका हूँ और तैयार होकर आपके जागने का ही इन्तेजार कर रहा था - राजीव ने कहा
मैं भी रेडी हूँ - रजनी बोली
गुड तो देर किस बात की चलिए चलते है वापस अपने घर राजीव ने कहा
जी रजनी ने कहा और फिर राजीव के पीछे पीछे चल पड़ी