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पूनम ने लक्ष्य को सिगरेट पीते हुए पहली बार देखा
वह लक्ष्य के पास आई और बोली
तुम सिगरेट भी पीते हो छी ये बहुत बुरी आदत है ये स्वस्थ के लिए हानिकारक है इसे फेक दो
लक्ष्य ने पूनम को देखा और सिगरेट फेक कर बुझा दिया
तुम्हे सिगरेट पीते पहली बार देख रही हूँ ये कब से शुरू कर दिया- पूनम ने पूछा
जब कभी दिल जलता है तो पी लेता हूँ- लक्ष्य नेउदासी से कहा
अच्छा डोसा आधा छोड़ कर क्यो चले आये? पैसे क्या फ्री में आते है क्या? बहुत मेहनत से मिलता है ऐसे फालतू का बर्बाद मत किया करो जब खाना नही था तो मंगाया ही क्यो
खामखा मुझे ही खाना पड़ा- पूनम ने कहा
क्या? मेरा जूठा तुमने खाया?- लक्ष्य ने चौक कर कहा
अरे जूठा क्या होता है तुम कोई गैर थोड़े न हो अब क्या करती तुम तो छोड़ के भाग आये थे खामखाह कूड़े में जाता तो अन्न का अपमान होता और पैसे बर्बाद होते सो अलग, अब किसी के पेट मे तो गया - पूनम ने ऐसे कहा जैसे नार्मल सी बात हो
तुम भी न कमाल ही हो समझ नही आता कि गुस्सा करू या प्यार - लक्ष्य ने मुस्कुराते हुए कहा
तुम कुछ भी करने को रहने दो बस अब चुपचाप बाइक स्टार्ट करो और घर चलो वरना मेरी वो लेडी डायना जो है ना मेरी चाची श्री मेरी बैंड बाजा देगी समझे- पूनम ने भी मुस्कुराते हु कहा
लक्ष्य भी मुस्कुराने लगा उसने बाइक स्टार्ट की और फिर दोनों घर की तरफ चल पड़े बड़े दिनों बाद आज फिर से पूनम को ऐसा लग रहा था कि मानो वह टेंसन फ्री हो वह बाइक की राइड इंजॉय कर रही थी
अचानक से एक जोर दार ब्रेकर आया और पूरी बाइक उछल गयी
पूनम ने जल्दी से लक्ष्य के कमर में हाथ डाल कर उसे पकड़ा और उससे बिल्कुल लिपट गयी और गुस्से से बोली
अरे देख के चलाओ , मुझे वन पीस में पूरा पूरा घर पहुचना है टूटा फूटा नही ,ढंग से चलना हो तो चलो वरना मैं उतर कर
ऑटो से चली जाउंगी बाइक चलाना भी नही आती अभी हो जाता मेरा काम बाइक उछलने पर पूनम डर गई थी
लक्ष्य खिलखिला कर हंस पड़ा और आराम से चलाने लगा
पूनम फिर से आराम से बैठ गयी और दोनों घर की तरफ चल पडे ।
खुशबू के साथ रजनी बैठी थी, दोनो सहेलिया बहुत दिन बाद एक दूसरे से मिली थी इसीलिए सब हंसी मजाक कर रहे थे रजनी भी उन्ही में शामिल हो गयी थी और उसकी सारी चिंता और झिझक दूर हो गयी थी ।
और उसे भी धीरे धीरे शादी का माहौल अच्छा लगने लगा था
अरे रजनी यार मम्मी को देखा है कही अचानक से खुशबू ने कुछ ढूढते हुए कहा
अभी तो आयी थी यही थोड़ी देर पहले - रजनी ने कहा
क्या हुआ कुछ बात है क्या - रजनी ने पूछा
अरे यार मेरा एक समान है ,मिल नही रहा है ये मम्मी भी न मेरी सारी चीजे जाने कहा रखती है कब से खोज रही हूँ , मेरे पैरों की सैंडिल पता नही कहा रख दिया है उन्होंने मिल ही नही रहा है अभी थोड़ी देर बाद जब स्टेज पर जाना होगा तो क्या पहनूँगी - खुशबू परेसान होकर बोली
अच्छे से देख ले यही कही रखा होगा- रजनी ने कहा
सब जगह देख लिया यार नही मिल रहा है , उनकी ऐसी ही आदत है जाने कहा रख देती है अब दिख भी नही रही कि पूछू ,जाने कहा है? खुशबू झल्ला कर बोली
अरे इतने सारे मेहमान आये है उन्ही की खातिरदारी में ब्यस्त होगी और कहा होंगी , शादी का घर है बीस काम होंगे अभी आ जाएंगी घबरा मत मिल जाएगा - रजनी ने खुशबू को समझाया
खुशबू फिर से सारी जगह अपनी सैंडिल तलासने लगी लेकिन सैंडिल नही मिला
यार रजनी जरा देखना मम्मी कहा है प्लीज उनको बुला दे यार- खुशबू ने परेसान होकर कहा
अच्छा ठीक है परेसान मत हो मैं देखती हूँ कि चाची जी कहा है- रजनी ने कहा
और फिर खुशबू के कमरे से निकल कर बाहर आगयी उसने खुसबू ने मम्मी को चारों तरफ देखने लगी लेकिन वो कही दिखाई नही पड़ रही थी
वह उनको ढूढते हुए आंगन में आई जहां मंडप बना था
वहां गाव की और रिश्तेदारो की बहुत सारी औरते बैठी हुई थी , उन्ही के बीच मे खुशबू की मम्मी भी बैठी हुई थी और कुछ बाते कर कर रही थी
इतनी सारी औरतो और रिस्तेदारो को देख कर रजनी को बड़ा अनकम्फर्टेबल लग रहा था लेकिन वो करे भी तो क्या करे आखिर में वह सबसे बचती बचती खुशबू के मम्मी के पास पहुची और बोली
चाची खुशबू बुला रही है आपको, उसका कोई सामान नही मिल रहा है प्लीज आप कमरे में आजाये
अच्छा ठीक है 2 मिनट में आती हूँ बोल दो उसको - खुशबू की मम्मी ने कहा
ठीक है - रजनी ने कहा और वह वापस घूमी
अभी उसने दरवाजा पार नही किया था तभी उसके पीठ पीछे किसी औरत ने कहा
अरे खुसबू की माँ ये बताओ ये लड़की बिसंभर की लड़की है ना जो भाग गई थी किसी के साथ
- रजनी के कानों में यह आवाज पड़ते ही उसका दिल धक से हो गया और चेहरा सफेद पड गया
हा दीदी ये रजनी ही है खुशबू की मम्मी ने हल्के से कहा
तो इसको क्यो बुलाया यहां पर हमारे बच्चो पर क्या असर पड़ेगा और ये भी मुह उठाकर चली आयी जैसे बड़ी पाक साफ हो इतना बड़ा कांड करके बैठी है और चेहरे पर एक सिकन तक नही है भगवान करे ऐसे बेटी किसी को न दे मेरी लड़की ने ऐसा किया होता तो मैं तो उसे जिंदा ही मार देती- उस औरत ने नफरत से कहा
रजनी को काटो तो खून नही ,वह तो जैसे पत्थर की मूर्ति बन गयी हो उसके कदम उठने भारी पड़ रहे थे उसको जिस बात का डर था वही बात हो गयी
अरे जिज्जी चुप रहो , बच्ची थी नही समझ थी अब अपने ही बच्चे है अगर उनसे कोई गलती हो जाएगा तो क्या करेगे फेक थोड़े न देगे आप भी कैसी बाते कर रही है - खुशबू की
मम्मी ने कहा
अरे खुसबू की मम्मी तुम भी उसी का साइड ले रही हो ये गलती है, ये महापाप है माँ बाप के इज्जत को उछाल कर किसी पराये बिरादरी और पराये लड़के के साथ भाग जाना और फिर महीनों उनके साथ सोकर फिर वापस आकर बोल देना की गलती हो गयी ऐसा थोड़े न होता है और बिसंभर को भी मान सम्मान की चिंता नही है उन्होंने इसको वापस से अपने घर मे रहने की इजाजत दे दी अगर मेरे बच्चों ने ऐसा कुछ किया होता तो जान से मार देती उनको- उस औरत ने फिर से जहर उगला
अरे जिज्जी उस बेचारी लड़की पर तो वैसे ही दुखो का पहाड़ टूट गया है हरवक्त घर मे ही कैद रहती है सरम के मारे वो तो खुशबू की सबसे अच्छी सहेली थी दोनो एक दूसरे के साथ ही रहते थे और खुसबू ने मुझे भेज कर उसे बुलवाया वरना वो तो आ ही नही रही थी जो हो गया सो हो गया अब आप ऐसी बाते मत करे प्लीज खुशबू की मम्मी ने कहा
रजनी के बर्दास्त की सीमा समाप्त हो गयी उसे जोर की रुलाई फूटी और वह भागती हुई खुसबू के कमरे में जाने लगी उसकी आंखें भरी हुई थी इसी वजह से उसे साफ साफ कुछ भी दिखाई नही दे रहा था और दिमाग भी काम नही कर रहा था ।
वह भागते भागते जा रही थी तभी किसी चीज से टकराई
और गिरने लगी
उसने अपने आंसूओ से भरे हुए आंखों से देखने की भरपूर कोशिश की लेकिन साफ साफ कुछ नही दिखा इसके पहले की वह गिरती , किसी के मजबूत हाथो ने उसे थाम लिया और वापस से ऊपर खींच लिया
ऊपर आकर वह सीधा उस शख्स के सीने से चिपट सी गयी
रजनी ने जल्दी से अपने आंसू साफ किया और देखा एक लगभग 25 साल का लड़का जिसकी हाइट लगभग 6 फुट के करीब रही होगी और रंग गेहुआ था उसके हाथों को पकड़ कर खड़ा था और मुस्कुरा रहा था ।
रजनी उस लड़के को देख कर बुरी तरह डर गई और चिहुँक कर दूर हट गई
अरे आपको गिरने से बचाया कम से कम थैंक्यू तो बोल दो की उसमे भी पैसे खर्च हो रहे है उस लड़के ने कहा
रजनी मानो डर से थर थर कॉप रही थी उसने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया और फिर वापस से खुशबू के कमरे की तरफ भागी
उसे पीछे से अपने पीठ पर उस लड़के की निगाहें महसूस हो रही थी और वो लड़का भी जाती हुई रजनी को देख ही रहा
था ।
रजनी सीधा खुशबू के पास गयी और फिर उसने अपना सामान उठाया और खुसबू से बोली ।
खुसबू मुझे माफ़ कर देना अब मैं और नही रुक सकती मैं जा रही हूँ रजनी के आंखों में आंसू भरे हुए थे जो अनायास ही बह कर रजनी के गालों को गीला कर रहे थे
अरे क्या हुआ रजनी यु अचानक से और तुम रो क्यो रही हो? रजनी को रोता हुआ देख कर खुशबू बुरी तरह परेसान हो गयी
रजनी ने कुछ नही कहा बस नजर झुकाये चुचाप अपने आसुओ को दबाने की कोशिश कर रही थी .
बोल ना क्या हुआ ? किसी ने कुछ कहा क्या ? वहा हुआ क्या मुझे बता ना - खुशबू ने पूछा
किसी ने कुछ नही कहा खुसबू ,सब मेरा दोष है मैने काम ही ऐसा किया है कि सुनना पड़े लेकिन प्लीज अब मैं यहां रुक नही पाउंगी मुझे माफ़ कर देना खुशबू आई एम सोरी मैं जा रही हूँ तुमने मुझे बुलाया मैं आगयी लेकिन अब जाने दो रोको मत - रजनी रोती हुई बोली
ऐसे कैसे चली जायेगी रुक तू मैं आती हूँ जाना नही तुझे मेरी कसम है , खुशबू लपक कर बाहर निकली और बाहर चली
गयी रजनी अकेले कमरे में सुबक रही थी
खुसबू गुस्से से भरी हुई सीधा आगन में पहुची और अपनी मम्मी को देखकर बोली मम्मी जल्दी से मेरे पास आओ
खुशबू के मम्मी ने खुशबू को देखा तो उन औरतो के बीच से उठकर खुसबू के पीछे पीछे चलने लगी
खुसबू सीधा अपने कमरे में पहुची और रजनी को रोते देख कर कोहली भर के चुप करवाने लगी और उसके आँसू पोछने लगी
खुसबू की मम्मी आई और बोली क्या हुआ ?
मम्मी पहले आप बताओ अभी अभी रजनी आपको बुलाने गयी थी वहां क्या हुआ? खुशबू का दिमाग फिरा हुआ था उसकी सबसे प्यारी सहेली रजनी को ऐसे रोते देख कर वह गुस्से से भरी हुई थी
खुशबू की मम्मी को तुरंत समझ मे आगया की रजनी ने सारी बाते सुनली
वह रजनी के पास आई और बोली
रजनी बेटा जाने दो बोलने दो किसी के बात को अपने दिल मे मत लो और वैसे भी उनका काम ही यही है उनकी आदत तो तुम जानती हो उसे तो बस किसी के दिल को चोट पहुचाना आता है तुम शांत रहो
नही कौन था मम्मी ? और क्या कहा रजनी को? - मुझे बताओ खुशबू का पारा चढ़ा हुआ था
अरे वही अपने गाँव की है जो तिवराइन है वही अनाप सनाप बक रही थी - खुशबू की मम्मी ने कहा
उन्हें बुलाया ही क्यों? उनकी हिम्मत कैसे हुई रजनी को कुछ बोलने की अपना घर तो सम्हलता नही है दुसरो को ताना मरना आता है , क्या बोली वो मुझे बताओ ? - रजनी ने पूछा
अरे कुछ नही, वही कह रही थी कि रजनी ने अच्छा नही किया भाग कर चली गयी मेरी बेटी होती तो मैं आने नही देती घर मे , तू छोड़ न तू बता क्यो बुला रही थी मम्मी जी ने बात बदलने की कोशिश की
यार मम्मी ऐसे लोगो को बुलाने की जरूरत ही क्या है और पहले अपना घर सम्हाले न तीन तीन बेटियां है तीनो कैसे कैसे गुल खिला रही है पूरा गांव जानता है खुद के घर का देखने को फुरसत नही है दुसरो के ऊपर कीचड़ उछलने में बड़ा मजा आता है जा कर समझा दो वरना मैं एक मिनट में अभी सारी उज्जत उतार कर रख दूंगी , उनको ज्यादा मजा आता है पंचायत करने में न अभी उनको अच्छे से सुना दूंगी तो मुह फूल जाएगा मैने बुलाया है मेरी सहेली है रजनी, तो उनकी क्यो छाती फटी जा रही है वो नही बुलाएगी अपने घर मे - खुशबू ने गुस्से से कहा
रजनी चुप हो जा बेटा कुछ लोग होते ही ऐसे है उनकी आदत
होती है फालतू की बकवास करने को अब क्या करेगी उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान मत दे - खुशबू की मम्मी ने रजनी के कंधे पर हाथ रख कर उसे चुप करवाया और रजनी के आँसू पोछे
और फिर खुशबू की तरफ घूमी
अच्छा बता क्यो बुला रही थी मुझे बहुत काम है खुशबू की मम्मी बोली
अरे मेरा सेंडल कहा है? मिल नही रह है कहा रख दिया आपने- खुशबू ने पूछा
तूने वैसे फेक दिया था मैंने आलमारी में रखा है सम्हाल कर अपना सामान भी ढंग से नही रखती है जाने तेरा ससुराल में क्या होगा? नाक ही कटवायेगी मेरा तू इतनी लापरवाह है की पूछो मत , देती हूँ लाकर रुक तू मम्मी जी ने कहा
और बाहर निकल कर चली गयी
वह लक्ष्य के पास आई और बोली
तुम सिगरेट भी पीते हो छी ये बहुत बुरी आदत है ये स्वस्थ के लिए हानिकारक है इसे फेक दो
लक्ष्य ने पूनम को देखा और सिगरेट फेक कर बुझा दिया
तुम्हे सिगरेट पीते पहली बार देख रही हूँ ये कब से शुरू कर दिया- पूनम ने पूछा
जब कभी दिल जलता है तो पी लेता हूँ- लक्ष्य नेउदासी से कहा
अच्छा डोसा आधा छोड़ कर क्यो चले आये? पैसे क्या फ्री में आते है क्या? बहुत मेहनत से मिलता है ऐसे फालतू का बर्बाद मत किया करो जब खाना नही था तो मंगाया ही क्यो
खामखा मुझे ही खाना पड़ा- पूनम ने कहा
क्या? मेरा जूठा तुमने खाया?- लक्ष्य ने चौक कर कहा
अरे जूठा क्या होता है तुम कोई गैर थोड़े न हो अब क्या करती तुम तो छोड़ के भाग आये थे खामखाह कूड़े में जाता तो अन्न का अपमान होता और पैसे बर्बाद होते सो अलग, अब किसी के पेट मे तो गया - पूनम ने ऐसे कहा जैसे नार्मल सी बात हो
तुम भी न कमाल ही हो समझ नही आता कि गुस्सा करू या प्यार - लक्ष्य ने मुस्कुराते हुए कहा
तुम कुछ भी करने को रहने दो बस अब चुपचाप बाइक स्टार्ट करो और घर चलो वरना मेरी वो लेडी डायना जो है ना मेरी चाची श्री मेरी बैंड बाजा देगी समझे- पूनम ने भी मुस्कुराते हु कहा
लक्ष्य भी मुस्कुराने लगा उसने बाइक स्टार्ट की और फिर दोनों घर की तरफ चल पड़े बड़े दिनों बाद आज फिर से पूनम को ऐसा लग रहा था कि मानो वह टेंसन फ्री हो वह बाइक की राइड इंजॉय कर रही थी
अचानक से एक जोर दार ब्रेकर आया और पूरी बाइक उछल गयी
पूनम ने जल्दी से लक्ष्य के कमर में हाथ डाल कर उसे पकड़ा और उससे बिल्कुल लिपट गयी और गुस्से से बोली
अरे देख के चलाओ , मुझे वन पीस में पूरा पूरा घर पहुचना है टूटा फूटा नही ,ढंग से चलना हो तो चलो वरना मैं उतर कर
ऑटो से चली जाउंगी बाइक चलाना भी नही आती अभी हो जाता मेरा काम बाइक उछलने पर पूनम डर गई थी
लक्ष्य खिलखिला कर हंस पड़ा और आराम से चलाने लगा
पूनम फिर से आराम से बैठ गयी और दोनों घर की तरफ चल पडे ।
खुशबू के साथ रजनी बैठी थी, दोनो सहेलिया बहुत दिन बाद एक दूसरे से मिली थी इसीलिए सब हंसी मजाक कर रहे थे रजनी भी उन्ही में शामिल हो गयी थी और उसकी सारी चिंता और झिझक दूर हो गयी थी ।
और उसे भी धीरे धीरे शादी का माहौल अच्छा लगने लगा था
अरे रजनी यार मम्मी को देखा है कही अचानक से खुशबू ने कुछ ढूढते हुए कहा
अभी तो आयी थी यही थोड़ी देर पहले - रजनी ने कहा
क्या हुआ कुछ बात है क्या - रजनी ने पूछा
अरे यार मेरा एक समान है ,मिल नही रहा है ये मम्मी भी न मेरी सारी चीजे जाने कहा रखती है कब से खोज रही हूँ , मेरे पैरों की सैंडिल पता नही कहा रख दिया है उन्होंने मिल ही नही रहा है अभी थोड़ी देर बाद जब स्टेज पर जाना होगा तो क्या पहनूँगी - खुशबू परेसान होकर बोली
अच्छे से देख ले यही कही रखा होगा- रजनी ने कहा
सब जगह देख लिया यार नही मिल रहा है , उनकी ऐसी ही आदत है जाने कहा रख देती है अब दिख भी नही रही कि पूछू ,जाने कहा है? खुशबू झल्ला कर बोली
अरे इतने सारे मेहमान आये है उन्ही की खातिरदारी में ब्यस्त होगी और कहा होंगी , शादी का घर है बीस काम होंगे अभी आ जाएंगी घबरा मत मिल जाएगा - रजनी ने खुशबू को समझाया
खुशबू फिर से सारी जगह अपनी सैंडिल तलासने लगी लेकिन सैंडिल नही मिला
यार रजनी जरा देखना मम्मी कहा है प्लीज उनको बुला दे यार- खुशबू ने परेसान होकर कहा
अच्छा ठीक है परेसान मत हो मैं देखती हूँ कि चाची जी कहा है- रजनी ने कहा
और फिर खुशबू के कमरे से निकल कर बाहर आगयी उसने खुसबू ने मम्मी को चारों तरफ देखने लगी लेकिन वो कही दिखाई नही पड़ रही थी
वह उनको ढूढते हुए आंगन में आई जहां मंडप बना था
वहां गाव की और रिश्तेदारो की बहुत सारी औरते बैठी हुई थी , उन्ही के बीच मे खुशबू की मम्मी भी बैठी हुई थी और कुछ बाते कर कर रही थी
इतनी सारी औरतो और रिस्तेदारो को देख कर रजनी को बड़ा अनकम्फर्टेबल लग रहा था लेकिन वो करे भी तो क्या करे आखिर में वह सबसे बचती बचती खुशबू के मम्मी के पास पहुची और बोली
चाची खुशबू बुला रही है आपको, उसका कोई सामान नही मिल रहा है प्लीज आप कमरे में आजाये
अच्छा ठीक है 2 मिनट में आती हूँ बोल दो उसको - खुशबू की मम्मी ने कहा
ठीक है - रजनी ने कहा और वह वापस घूमी
अभी उसने दरवाजा पार नही किया था तभी उसके पीठ पीछे किसी औरत ने कहा
अरे खुसबू की माँ ये बताओ ये लड़की बिसंभर की लड़की है ना जो भाग गई थी किसी के साथ
- रजनी के कानों में यह आवाज पड़ते ही उसका दिल धक से हो गया और चेहरा सफेद पड गया
हा दीदी ये रजनी ही है खुशबू की मम्मी ने हल्के से कहा
तो इसको क्यो बुलाया यहां पर हमारे बच्चो पर क्या असर पड़ेगा और ये भी मुह उठाकर चली आयी जैसे बड़ी पाक साफ हो इतना बड़ा कांड करके बैठी है और चेहरे पर एक सिकन तक नही है भगवान करे ऐसे बेटी किसी को न दे मेरी लड़की ने ऐसा किया होता तो मैं तो उसे जिंदा ही मार देती- उस औरत ने नफरत से कहा
रजनी को काटो तो खून नही ,वह तो जैसे पत्थर की मूर्ति बन गयी हो उसके कदम उठने भारी पड़ रहे थे उसको जिस बात का डर था वही बात हो गयी
अरे जिज्जी चुप रहो , बच्ची थी नही समझ थी अब अपने ही बच्चे है अगर उनसे कोई गलती हो जाएगा तो क्या करेगे फेक थोड़े न देगे आप भी कैसी बाते कर रही है - खुशबू की
मम्मी ने कहा
अरे खुसबू की मम्मी तुम भी उसी का साइड ले रही हो ये गलती है, ये महापाप है माँ बाप के इज्जत को उछाल कर किसी पराये बिरादरी और पराये लड़के के साथ भाग जाना और फिर महीनों उनके साथ सोकर फिर वापस आकर बोल देना की गलती हो गयी ऐसा थोड़े न होता है और बिसंभर को भी मान सम्मान की चिंता नही है उन्होंने इसको वापस से अपने घर मे रहने की इजाजत दे दी अगर मेरे बच्चों ने ऐसा कुछ किया होता तो जान से मार देती उनको- उस औरत ने फिर से जहर उगला
अरे जिज्जी उस बेचारी लड़की पर तो वैसे ही दुखो का पहाड़ टूट गया है हरवक्त घर मे ही कैद रहती है सरम के मारे वो तो खुशबू की सबसे अच्छी सहेली थी दोनो एक दूसरे के साथ ही रहते थे और खुसबू ने मुझे भेज कर उसे बुलवाया वरना वो तो आ ही नही रही थी जो हो गया सो हो गया अब आप ऐसी बाते मत करे प्लीज खुशबू की मम्मी ने कहा
रजनी के बर्दास्त की सीमा समाप्त हो गयी उसे जोर की रुलाई फूटी और वह भागती हुई खुसबू के कमरे में जाने लगी उसकी आंखें भरी हुई थी इसी वजह से उसे साफ साफ कुछ भी दिखाई नही दे रहा था और दिमाग भी काम नही कर रहा था ।
वह भागते भागते जा रही थी तभी किसी चीज से टकराई
और गिरने लगी
उसने अपने आंसूओ से भरे हुए आंखों से देखने की भरपूर कोशिश की लेकिन साफ साफ कुछ नही दिखा इसके पहले की वह गिरती , किसी के मजबूत हाथो ने उसे थाम लिया और वापस से ऊपर खींच लिया
ऊपर आकर वह सीधा उस शख्स के सीने से चिपट सी गयी
रजनी ने जल्दी से अपने आंसू साफ किया और देखा एक लगभग 25 साल का लड़का जिसकी हाइट लगभग 6 फुट के करीब रही होगी और रंग गेहुआ था उसके हाथों को पकड़ कर खड़ा था और मुस्कुरा रहा था ।
रजनी उस लड़के को देख कर बुरी तरह डर गई और चिहुँक कर दूर हट गई
अरे आपको गिरने से बचाया कम से कम थैंक्यू तो बोल दो की उसमे भी पैसे खर्च हो रहे है उस लड़के ने कहा
रजनी मानो डर से थर थर कॉप रही थी उसने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया और फिर वापस से खुशबू के कमरे की तरफ भागी
उसे पीछे से अपने पीठ पर उस लड़के की निगाहें महसूस हो रही थी और वो लड़का भी जाती हुई रजनी को देख ही रहा
था ।
रजनी सीधा खुशबू के पास गयी और फिर उसने अपना सामान उठाया और खुसबू से बोली ।
खुसबू मुझे माफ़ कर देना अब मैं और नही रुक सकती मैं जा रही हूँ रजनी के आंखों में आंसू भरे हुए थे जो अनायास ही बह कर रजनी के गालों को गीला कर रहे थे
अरे क्या हुआ रजनी यु अचानक से और तुम रो क्यो रही हो? रजनी को रोता हुआ देख कर खुशबू बुरी तरह परेसान हो गयी
रजनी ने कुछ नही कहा बस नजर झुकाये चुचाप अपने आसुओ को दबाने की कोशिश कर रही थी .
बोल ना क्या हुआ ? किसी ने कुछ कहा क्या ? वहा हुआ क्या मुझे बता ना - खुशबू ने पूछा
किसी ने कुछ नही कहा खुसबू ,सब मेरा दोष है मैने काम ही ऐसा किया है कि सुनना पड़े लेकिन प्लीज अब मैं यहां रुक नही पाउंगी मुझे माफ़ कर देना खुशबू आई एम सोरी मैं जा रही हूँ तुमने मुझे बुलाया मैं आगयी लेकिन अब जाने दो रोको मत - रजनी रोती हुई बोली
ऐसे कैसे चली जायेगी रुक तू मैं आती हूँ जाना नही तुझे मेरी कसम है , खुशबू लपक कर बाहर निकली और बाहर चली
गयी रजनी अकेले कमरे में सुबक रही थी
खुसबू गुस्से से भरी हुई सीधा आगन में पहुची और अपनी मम्मी को देखकर बोली मम्मी जल्दी से मेरे पास आओ
खुशबू के मम्मी ने खुशबू को देखा तो उन औरतो के बीच से उठकर खुसबू के पीछे पीछे चलने लगी
खुसबू सीधा अपने कमरे में पहुची और रजनी को रोते देख कर कोहली भर के चुप करवाने लगी और उसके आँसू पोछने लगी
खुसबू की मम्मी आई और बोली क्या हुआ ?
मम्मी पहले आप बताओ अभी अभी रजनी आपको बुलाने गयी थी वहां क्या हुआ? खुशबू का दिमाग फिरा हुआ था उसकी सबसे प्यारी सहेली रजनी को ऐसे रोते देख कर वह गुस्से से भरी हुई थी
खुशबू की मम्मी को तुरंत समझ मे आगया की रजनी ने सारी बाते सुनली
वह रजनी के पास आई और बोली
रजनी बेटा जाने दो बोलने दो किसी के बात को अपने दिल मे मत लो और वैसे भी उनका काम ही यही है उनकी आदत तो तुम जानती हो उसे तो बस किसी के दिल को चोट पहुचाना आता है तुम शांत रहो
नही कौन था मम्मी ? और क्या कहा रजनी को? - मुझे बताओ खुशबू का पारा चढ़ा हुआ था
अरे वही अपने गाँव की है जो तिवराइन है वही अनाप सनाप बक रही थी - खुशबू की मम्मी ने कहा
उन्हें बुलाया ही क्यों? उनकी हिम्मत कैसे हुई रजनी को कुछ बोलने की अपना घर तो सम्हलता नही है दुसरो को ताना मरना आता है , क्या बोली वो मुझे बताओ ? - रजनी ने पूछा
अरे कुछ नही, वही कह रही थी कि रजनी ने अच्छा नही किया भाग कर चली गयी मेरी बेटी होती तो मैं आने नही देती घर मे , तू छोड़ न तू बता क्यो बुला रही थी मम्मी जी ने बात बदलने की कोशिश की
यार मम्मी ऐसे लोगो को बुलाने की जरूरत ही क्या है और पहले अपना घर सम्हाले न तीन तीन बेटियां है तीनो कैसे कैसे गुल खिला रही है पूरा गांव जानता है खुद के घर का देखने को फुरसत नही है दुसरो के ऊपर कीचड़ उछलने में बड़ा मजा आता है जा कर समझा दो वरना मैं एक मिनट में अभी सारी उज्जत उतार कर रख दूंगी , उनको ज्यादा मजा आता है पंचायत करने में न अभी उनको अच्छे से सुना दूंगी तो मुह फूल जाएगा मैने बुलाया है मेरी सहेली है रजनी, तो उनकी क्यो छाती फटी जा रही है वो नही बुलाएगी अपने घर मे - खुशबू ने गुस्से से कहा
रजनी चुप हो जा बेटा कुछ लोग होते ही ऐसे है उनकी आदत
होती है फालतू की बकवास करने को अब क्या करेगी उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान मत दे - खुशबू की मम्मी ने रजनी के कंधे पर हाथ रख कर उसे चुप करवाया और रजनी के आँसू पोछे
और फिर खुशबू की तरफ घूमी
अच्छा बता क्यो बुला रही थी मुझे बहुत काम है खुशबू की मम्मी बोली
अरे मेरा सेंडल कहा है? मिल नही रह है कहा रख दिया आपने- खुशबू ने पूछा
तूने वैसे फेक दिया था मैंने आलमारी में रखा है सम्हाल कर अपना सामान भी ढंग से नही रखती है जाने तेरा ससुराल में क्या होगा? नाक ही कटवायेगी मेरा तू इतनी लापरवाह है की पूछो मत , देती हूँ लाकर रुक तू मम्मी जी ने कहा
और बाहर निकल कर चली गयी