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अजनबी हमसफर

वह बहुत परेसान थी और उसे कोई रास्ता नही सूझ रहा था ।

हे भगवान अब तुम्ही मुझे रास्ता दिखाओ एक तरफ मेरे पति और दूसरी तरफ मेरी छोटी बहन जैसी ननद की खुशियां मुझे समझ मे नही आरहा है कि मैं किसका साथ दू अगर ननद का साथ देती हूँ तो सार्थक को बुरा लगेगा और फिर अगर लक्ष्य सचमुच में वैसा हुआ जैसे सार्थक कह रहा था तो फिर मेरी मासूम पूनम जिंदगी भर के लिए रोती रहेगी और अगर सार्थक का सोचना गलत हुआ और सचमुच में लक्ष्य पूनम को दिल से चाहता है और पूनम के लिए सीरियस है तब इस तरह पूनम के ऊपर बंदिशे लगा कर हम उसके ऊपर अत्याचार करेंगे और मुझे अपनी मासूम और इतनी प्यार करने वाली ननद का दिल तोड़ना भी ठीक नही लग रहा प्लीज भगवान हेल्प मी कुछ तो ऐसा रास्ता दिखाओ जिससे मैं सही निर्णय कर पाऊ जो इस घर के लिए मेरी पूनम के लिए मेरे सार्थक के लिए सही हो प्लीज हेल्प मी ये कैसी परीक्षा ले रहा है मेरी प्रभु- लावन्या ने दिल से प्रार्थना की ।

सार्थक के जाने के बाद पूनम अपने घर के और कामो में लग गयी वह फटा फट अपना काम निपटा रही थी उसे अपनी भाभी से बाते करनी थी और इसका दिमाग उसी में उलझा था इसी लिए वह जल्दी जल्दी अपना हाथ चला रही थी जिससे जल्दी से उसका सारा काम खत्म हो जाये ।

अपना सारा काम खत्म कर के पूनम लावन्या के पास पहुची ।

पूनम को देख कर पहली बार लावन्या का दिल घबरा गया मानो उसमे पूनम का सामना करने का साहस न हो ।वह पूनम से नजर चुराने लगी ।

सारा काम खत्म हो गया छुटकी लावण्या ने प्यार से पूछा

जी भाभी सब हो गया, आप कैसी है कुछ चाहिए तो नही आपको, - पूनम ने मुस्कुरा कर पूछा

नही मुझे कुछ नही चाहिए कुछ चाहिए होगा तो बुला लूँगी ,जाओ जा कर तुम भी थोड़ा आराम कर लो थक गई होगी - लावण्या ने कहा

अब कहा जाऊँगी भाभी , आपके पास ही थोड़ी देर आराम कर लूँगी आप से बात भी करती रहूंगी जिससे आप भी बोर नही होंगी और मैं भी,- पूनम ने कहा और लावण्या के पास आकर बैठ गयी

लावण्या के सामने कोई चारा नही बचा वह सुबह से पूनम के सवालों से बच रही थी लेकिन अब उसको और बचना नामुमकिन लग रहा था इसीलिए वह बस कसमसा कर रह गयी ।

भाभी आप सुबह कुछ कह रही थी, कि भैया से कुछ बात करने को कह रही थी , क्या बाते हुई भैया से पूनम ने बैठते हुए ही पहला सवाल दागा और लावण्या से पूछा

लावण्या को जिस बात का डर था वही हुआ वह सुबह से जिस बात के लिए डर रही थी आखिर में अब उससे बचके

जाना उसे नामुमकिन से लगने लगा वह सोच में पड़ गयी और उसका चेहरा सोचने वाले अंदाज से सिकुड़ गया पूनम के बातो का वह क्या जबाब दे उसे सूझ नही रह था ।

बताइये न भाभी आप चुप क्यों हो भैया से बात हुई कि नही आपकी, और अगर हुई है तो भैया ने क्या कहा - पूनम ने बेचैनी से पूछा

पूनम तुम मेरी छोटी बहन जैसी हो , और तुम यह भी जानती हो तुम्हारे भैया तुम्हे बहुत प्यार करते है वो तुम्हे अपने जान से ज्यादा मानते है और कभी भी उदास नही देख सकते , इसीलिए तुम क्यो चिन्ता कर रही हो तुम मेरी और सार्थक की जिम्मेदारी हो हम जो भी करेंगे तुम्हारे लिए बेस्ट करेंगे , और फिर ये तो तुम्हारी जिंदगी भर का सवाल है फिर ऐसे कैसे हम अपनी प्यारी सी बहन जैसी नंद को किसी को जाचे परखे बिना ऐसे दे सकते है - लावण्या ने बात को घुमाने की कोशिश की

सो तो है भाभी आप सच कह रही है मेरे भैया मुझसे बहुत प्यार करते है - पूनम ने खुश होकर कहा

अच्छा सिर्फ तुम्हारे भैया ही तुझे प्यार करते है मैं नही करती हूँ तो ठीक है फिर जाओ मैं तुझसे बात नही कर रही -

लावण्या झूठ मूठ का रूठती हुई बोली ।

अरे ऐसा मैने कब कहा , आप तो मेरी भाभी माँ है जब से आप आयी है तब से मेरी माँ की कमी पूरी हो गयी , मैं बहुत खुश नसीब हूँ कि भैया मेरे लिए इतनी अच्छी और मुझे इतना प्यार करने वाली भाभी लेकर आये सच मे भाभी आप बहुत अच्छी है बिल्कुल वैसी जैसे मैं चाहती थी - पूनम ने लावण्या को गले लगा लिया और प्यार करती हुई बोली

अब क्या करूँ किसी एंगल से तू मेरी नन्द लगती है नही, तुझमे तो मुझे अपनी छोटी बहन दिखती है सच मे पूनम कभी कभी जब मुझसे कोई गलती हो जाती और मेरी रजनी दीदी मुझे डांटती थी, तो मैं सोचती थी कि काश मेरी एक छोटी बहन भी होती जो मेरी बातें मानती मैं उसपर रौब जमाती और डाटती और शायद भगवान ने मेरी बात सुन ली और तुझे दे दिया मेरा वो सपना भी पूरा हो गया लेकिन एक कसर रह गया कि मुझे रौब जमाने का मौका ही नही मिलता क्योकि तुम बिना कहे मेरी सारी बाते पूरी कर देती हो कभी कोई शिकायत का डाटने का मौका ही नही देती हो - लावण्या ने पूनम का गाल थपथपा कर प्यार से कहा

तो ऐसे ही डांट लिया करे जब भी आपका मन करे लेकिन आप को डाँटना भी कहा आता है आपकी डाँट में भी प्यार

छुपा होता है और आपके गुस्सा होने में भी एक अलग मजा है मानो आप गुस्सा नही प्यार कर रही है - पूनम चहक कर बोली

अच्छा बस बस अब बहुत हो गयी झूठ मूठ की मेरी तारीफे, अब बस करो बाते बनाना तो कोई तुझमे सीखे बाते बनाने के अलावा और तुमको आता क्या है - लावण्या ने पूनम को झिड़क दिया और ऐसा चेहरा बना लिया मानो बहुत गुस्से में हो इतना कह कर खुद ही खिलखिला कर हंस पड़ी

लावण्या का इरादा और मजाक समझ कर पूनम भी हंस पड़ी

अच्छा भाभी मजाक छोड़िये बताइये न भैया ने क्या कहा? आप कह रही थी न कि आप ऐसे किसी ऐरे गैरे को बिना जाचे परखे मुझे नही सौप देगी तो लक्ष्य को आप भी जानती है और भैया भी जानते है फिर तो कुछ प्रोबल्म नही होनी चाहिए भैया से बोलिये न कि लक्ष्य से बात करे प्लीज मेरे लिए, मुझे लक्ष्य पसंद है और मुझे लक्ष्य से ही शादी करनी है - पूनम ने मचलकर कहा मानो कोई छोटा बच्चा अपने मनपसंद खिलौने के लिए जिद कर रहा हो ।

पूनम मैं तुम्हे एक बात बताऊ, अगर मन का हो तो अच्छा है और अगर मन का नही हो तो और भी अच्छा है क्यो की जो

अपने मन का नही होता है फिर वो भगवान की मर्जी होती है और भगवान कभी किसी का बुरा नही सोचता जो करता है अच्छा ही करता है इसीलिए जो भगवान की मर्जी होगी वही होगा तुम क्यों चिंता करती हो - लावण्या बोली

आप कहना क्या चाहती है भाभी भैया से आपकी बात नही हुई क्या पूनम का दिल जोर से धड़क उठा ललावन्या की बाते सुनकर उसे कुछ आशंका हो रही थी ।

पूनम मेरी बात ध्यान से सुनो अब मैं जो तुमसे कहने जा रही हूँ उसे बहुत ही समझदारी से और शांति से सुनना , लावण्या के सामने पूनम को सब कुछ सच सच बताने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नही नजर आ रहा था और उसने पूनम को सब कुछ सच सच बताना ही ठीक समझा ।

ऐसी क्या बात है भाभी जो आप मुझसे कहना चाहती है पूनम थोड़ी सी सावधान और चौकन्नी होकर बोली

पूनम सार्थक तुम्हारी शादी लक्ष्य से करवाने के लिए तैयार नही है ,मैने उससे सारी बाते बताई और बहुत समझाया लेकिन उसने साफ मना कर दिया उसने कहा कि कुछ भी हो जाये मैं पूनम की शादी लक्ष्य से नही करूँगा बस , आई एम सॉरी पूनम मैं कुछ नही कर पाई लावन्या यह कहते हुए

उदास हो गयी उसे पूनम के लिए बहुत बुरा लग रहा था

पूनम पर जैसे बम गिरा हो यह खबर उसके लिए किसी आघात से कम नही थी वह चौक कर उछल गयी और बहुत परेसान हो गयी एक पल को उसके मुंह से कोई शब्द नही निकला वह शॉक्ड बैठी रही फिर उसने कहा

साफ मना कर दिया? लेकिन क्यो भाभी ? ऐसी क्या बात हो गयी जो भैया मेरी यह छोटी सी डिमांड भी पूरा नही कर सकते ? पूनम को जोरदार झटका लगा था एक पल में ही उसका सारा सपना उसकी सारी खुशी और उसकी सारी मुस्कुराहट मानो उड़ सी गयी हो उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए वह बुरी तरह से परेशान हो गयी थी उसका दिल टूट सा गया था और उसे रोने का मन कर रहा था ।

पूनम इस क्यो का जाबाब नही है मेरे पास लेकिन अगर सार्थक ने ये फैसला किया है तो कुछ समझ कर ही किया होगा वह तुमसे बहुत प्यार करता है और तुम्हारे लिए कभी कुछ बुरा सोच ही नही सकता - लावण्या ने पूनम को समझाया

लेकिन भाभी क्यो नही हो सकती है लक्ष्य के साथ मेरी शादी? क्या कमी है उसमें ? आप लोग तो उसे अच्छे से जानते हो और फिर मैं लक्ष्य से प्यार करती हूँ ये आप तो

अच्छे से जानती है और लक्ष्य भी मुझे बहुत प्यार करता है भाभी प्लीज भैया से बोल दीजिये वो ऐसा न करे प्लीज भाभी, पूनम बुरी तरह से परेसान होकर बोली

पूनम तुम्हारी बात बिल्कुल सही है लक्ष्य बहुत अच्छा लड़का है और तुम उससे प्यार भी करती हो लेकिन लक्ष्य , उसका क्या, तुम तो जानती हो न लक्ष्य की आदत उसे हरेक लड़की के साथ प्यार हो जाता है अगर वह तुम्हारे साथ भी वही सब कर रहा है जो उसने और लड़कियों के साथ किया तो फिर उसका जिम्मेदार कौन होगा, तुम्हारे भैया लक्ष्य के दोस्त है वो लक्ष्य के रग रग से वाकिफ है और अगर वो ऐसी बाते कर रहे है, अगर वो ऐसा सोच रहे है तो क्या गलत सोच रहे है तुम्ही बताओ सार्थक का सोचना गलत है क्या ? लक्ष्य ऐसा नही है क्या? लक्ष्य की ये आदत नही है कि वह हरेक लड़की के साथ अटैच होने की कोशिश करता है - लावण्या ने पूनम का हाथ पकड़ कर प्यार से समझाया

भाभी लक्ष्य अब बदल गया है अब वो पहले वाला लक्ष्य नही है मेरा विश्वास कीजिये अब वह हर किसी से अटैच होने की कोशिश नही करता है और वह मुझसे खुद कह रहा था कि अब वह सीरियसली लाइफ में कुछ करना चाहता है आप भैया से कहिये की एक बार उससे बात तो करले फिर उसके बाद जो भी डिसीजन लेंगे मुझे मंजूर है प्लीज़ भाभी मेरे लिए

एक बार भैया को बोल कर तो देखिए - पूनम ने ललावन्या से हाथ जोड़ कर प्रार्थना की

पूनम मैने सब कुछ ट्राई कर लिया लेकिन सार्थक टस से मस नही हुआ वह इस मामले में कोई बात ही नही करना चाहता और न ही वह लक्ष्य की शक्ल देखना पसंद कर रहा है उसे लगता है कि लक्ष्य ने ही तुमको बहकाया फुसलाया है और तुम उसकी लच्छेदार और चिकनी चुपडी बातो में फस गयी हो - लावण्या ने कहा

ऐसा कुछ नही है भाभी लक्ष्य ने मुझसे कुछ नही कहा

- पूनम बोली

पूनम आई एम सॉरी मैं सार्थक के डिसीजन के खिलाफ नही जा सकती , या तो तुम खुद सार्थक से बात करो या लक्ष्य से बोल दो की वो कुछ ऐसा करे जिससे सार्थक को लगे कि लक्ष्य अब बदल गया है और वो तुम्हे लेकर सीरियस है इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नही है अगर लक्ष्य सच मे तुम्हे प्यार करता है और सच मे वो तुम्हे लेकर सीरियस है तो वो जरूर अपने आप को प्रूफ कर देगा - लावण्या बोली

पूनम को कुछ नही सूझ रहा था उसे समझ नही आरहा था कि वो सार्थक को कैसे कंवेसन्स करे वह चुपचाप उठी और

जाने लगी उसका दिल बहुत ही ज्यादा बेचैन और परेसान था

कहा जा रही हो पूनम - लावण्या ने कहा

कही नही भाभी, जा रही हूँ अपने कमरे में पूनम ने उदास होकर कहा और चुपचाप कमरे से निकल गयी

लावण्या को पूनम की हालत देख कर दुख तो हो रहा था लेकिन वह कर भी क्या सकती थी वह बहुत मजबूर थी ।उसने सब कुछ भगवान के उपर छोड दिया

पूनम लावन्या के कमरे से निकली और अपने कमरे में पहुची इतनी देर से रुकी हुई उसकी आँखों ने अब और ठहरने से इनकार कर दिया और बरस पड़ी

पूनम को ऐसा लग रहा था मानो वह इस दुनिया में बिल्कुल अकेली हो उसको लावण्या के रूप में एक उम्मीद थी कि कैसे भी करके लावण्या कुछ न कुछ जरूर करेगी जिससे वो और लक्ष्य एक हो जाये लेकिन आज वह उम्मीद भी टूट गयी इसीलिए पूनम का दिल भी टूट कर चकना चूर हो गया था और उसे बहुत दर्द भी हो रहा था ।

उम्मीद में बहुत ताकत होती है उम्मीद से ही कोई जिंदा रहता है और किसी को कितनी भी बड़ी परेशानियों से लड़ने की

ताकत मिलती है लेकिन अगर उम्मीद टूट जाता है तो वह इंसान भी टूट जाता है पूनम अभी अभी लावण्या से जो सुनकर आ रही थी उससे उसकी वह उम्मीद बिल्कुल टूट गयी थी , उसे अपनी मां की बहुत याद आ रही थी और आज कही न कही उनकी कमी खल रही थी क्योंकि आज अगर वह जिंदा होते तो पूनम की बाते सुनती और कुछ न कुछ ऐसा जरूर करती जिससे पूनम की दिल का अरमान पूरा हो जाता

पूनम ने अपनी माँ का फोटो निकाला और रो रो कर उनके फ़ोटो से बाते करने लगी मानो सच मे अपनी माँ से कह रही हो पूनम को सार्थक ने कभी किसी चीज के लिए मना नही किया था लेकिन आज उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी उसका पहला प्यार लक्ष्य के लिए सार्थक ने मना कर दिया और यह बात पूनम बर्दास्त नही कर पा रही थी ।

माँ आप मुझे छोड़ कर क्यो चली गयी किसके भरोसे छोड़ कर गयी है मुझे,किसी को मेरी खुशियो की कोई परवाह नही है मेरा दिल क्या चाहता है किसी को कोई मतलब नही है मुझे आपकी जरूरत है मां प्लीज पूनम रोती हुई बोली

आज तक मैने भैया से कुछ नही मांगा आज पहली बार एक छोटी सी चीज मांगा है लेकिन भैया ने उसके लिए भी मना कर दिया मा मैं बहुत अकेली हूँ मुझे आपकी बहुत याद आ

रही है पूनम रोते हुए बोली । वह बहुत देर तक अपनी माँ के फोटो को सीने से लगा कर रोती रही अचानक से उसके आंखों में आँसूओ की जगह गुस्से और नफरत ने ले ली ।

ठीक है अगर यहा पर किसी को मेरी खुशियो से कोई मतलब नही है किसी को मेरी भावनाये मेरे जज्बात और मेरे प्यार की कदर नही है तो मैं भी यहां नही रहूंगी मैं भी यह घर छोड़ कर चली जाउंगी।

इतने बड़े सदमे से पूनम का दिमागी संतुलन मानो बिगड़ गया था । उसने अपने आंसू पोछते हुए कहा

लेकिन जाएगी कहा पूनम तुझे तो कुछ पता भी नही है पूनम के दिल से आवाज आई

कही भी चली जाउंगी ये दुनिया बहुत बड़ी है जब सबको मेरी खुशियो से ही प्रॉब्लम है तो मैं क्यो यहां रहू मैं भी चली जाति हूँ अगर मुझे लक्ष्य नही मिला तो फिर मैं भी यहां पर क्यो रहू पूनम का दुखी और परेसान मन कुछ भी सोचने समझने के काबिल नही रहा

बेवकूपी मत कर पूनम सार्थक और लावन्या का क्या होगा सार्थक और लावण्या तुझसे कितना प्यार करते है पूनम के

दिल मे कहा

कोई मुझसे प्यार नही करता अगर प्यार करते होते तो इतनी छोटी सी डिमांड पूरी नही करते सब दिखावा है जिससे मैं खुश रहूँ और घर का सारा काम कर दूं वरना ऐसा तो कुछ स्पेशल नही मांगा था मैंने जो पूरा नही कर पाए लक्ष्य से शादी ही तो करने को कह रही थी मैं लक्ष्य को प्यार करती हूँ लक्ष्य मुझसे प्यार करता है तो फिर भैया क्यो रोक रहे है क्या मैने प्यार करके कोई गुनाह किया है उन्होंने खुद लावण्या भाभी से शादी की है वो भी लब मैरिज तो फिर मुझे क्यो रोक रहे है मुझ पर इतनी पाबंदी क्यो पहले मेरा फोन ले लिए जिससे मैं लक्ष्य से बात न कर पाऊ और फिर अब ये , वो बड़े भाई है तो क्या अपनी मनमानी करेंगे ये मेरी जिंदगी है मुझे अपनी जिंदगी कैसे जीनी है ये पता है अब जब चली जाउंगी तब समझ मे आएगा कि कैसा लगता है अगर यह मेरी बात कोई सुनने वाला नही है तो फिर यह रहने से क्या फ़ायदा मैं यहां नही रहूंगी पूनम का थका हुआ और परेशान दिमाग उसे भड़का रहा था और गुस्से की वजह से उसे सही और गलत कुछ भी समझ नही आ रहा था उसके दिमाग ने सार्थक और लावण्या के खिलाफ बगावत कर दी थी उसकी आँखों मे दोनों के लिए प्यार की जगह नफरत ने ली थी और आज इन सबको मजा चखाना चाहती थी ।

पूनम उठी उसने अपनी आलमारी से एक बैग निकाला और अपने कपड़े उसमे रखने लगी जरूरी जरूरी सारा सामान उसने उसमे रखा और फिर वह लावण्या के कमरे के पास आई ।उसने धीरे से लावण्या के कमरे का गेट खोला और देखा लावण्या सो रही थी ।

पूनम ने जैसे गेट खोला था वैसे ही उसे बंद कर दिया और फिर वापस से अपने कमरे में आगयी एक बार उसने फिर से अपने कमरे को देखा और फिर बैग उठाया और दबे पांव बाहर निकल गयी ।

लावण्या पास के ही ऑटो स्टेण्ड पहुची और वहां से उसने

एक ऑटो पकड़ा और बस स्टॉप की तरफ चलने के लिए कहा ।

करीब दो घंटे बाद लावण्या की आंख खुली लावण्या ने पूनम को आवाज लगाई

लेकिन पूनम हो तो न बोले पूनम तो कब की घर छोड़ कर जा चुकी थी ।

लावण्या ने दो तीन बार आवाज लगाया लेकिन जब कोई जबाब नही मिला तो वह उठी और धीरे धीरे कदमो से पूनम के कमरे की तरफ चल पड़ी

पूनम के कमरे में पहुच कर उसने दरवाजा खोला लेकिन उसे बहुत आश्चर्य हुआ पूनम कमरे में नही थी लावण्या ने बाथरूम के पास जाकर पूनम को आवाज लगाया लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।

लावण्या ने पूरे घर मे पूनम को ढूढा लेकिन पूनम का कही पर भी कोई पता नही चला

पूनम चाची के कमरे में आई की शायद पूनम चाची के पास गई हो लेकिन पूनम वहां पर भी नही थी ।

चाची पूनम कहा है? लावण्या ने घबरा कर पूछा

पूनम कहा है मतलब वो मेरे पास नही आई चाची जी ने आश्चर्य से कहा

चाची जी पूनम पता नही कहा है मैने पूरे घर मे ढूढा लेकिन उसका कही पर भी पता नही चला मेरा दिल बहुत घबरा रहा है लावण्या ने घबराहट से कहा

कहा जाएगी वह यही कही होगी ध्यान से देखो चाची ने बात को हल्के में लिया और कहा

सब जगह देख लिया चाची लेकिन पूनम घर पर नही है लावण्या बुरी तरह से घबराई थी और रूवासी सी हो रही थी

अच्छा रुको मैं देखती हूँ चाची जी उठी और उन्होंने भी लावण्या के साथ पूनम को ढूढना शुरू कर दिया लेकिन पूनम कही नही मिली

लावन्या और चाची दोनों बुरी तरह से परेशान हो गए ।

बहू आखिरी बार पूनम को कब देखा था चाची ने पूछा

चाची जी अभी करीब दो घंटे पहले पूनम सारा काम खत्म करके मेरे पास आई थी उसके बाद चली गयी मुझे लगा कि अपने कमरे में गयी होगी लेकिन अभी जब मैं उसके कमरे में गयी तो वह अपने कमरे में नही थी लावण्या का चेहरा घबराहट और परेसानी से रूवासा हो गया था और उसका दिल किसी अनहोनी की असंका से घबरा रहा था ।

चाची जी को भी समझ मे नही आरहा था कि ऐसे पूनम कहा जा सकती है वह फिर से पूनम के कमरे में पहुची और बारीकी से हरेक सामान का निरीक्षण करने लगी ।

अचानक से लावण्या का ध्यान पूनम के कपड़ो की तरफ गया उसे जोर दर झटका लगा पूनम के कई कपड़े भी गायब थे लावण्या का दिल जोर से धड़क उठा ।

चाची पूनम घर छोड़ कर चली गयी लावण्या के आंखों से न चाहते हुए आंसू फुट पड़े ।

ऐसा कैसे हो सकता है और तुम यह कैसे कह सकती हो चाची जी ने चौक कर लावन्या से पूछा

चाची जी आलमारी में पूनम के कपड़े भी नही है मैने कई बार पूनम की आलमारी खोली है इसमें इसके अलावा भी कई कपड़े थे लावण्या रोते हुए बोली

लेकिन वो घर छोड़ कर जाएगी क्यो ? चाची जी ने पूछा

वो सब मैं आपको बाद में बताती हूँ सबसे पहले सार्थक को बताना जरूरी है लावण्या ने कहा और भागते हुए अपने कमरे में पहुची वहां से उसने अपना फोन उठाया और फिर जल्दी से सार्थक को फोन मिलाने लगी

लाइन मिलते ही लावन्या बोली

हेलो सार्थक आप कहा पर है पूनम बुरी तरह घबराई हुई और बिचलित थी

अरे लावण्या क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यो हो सब ठीक तो है ना लावण्या का घबराया हुआ स्वर सुनकर सार्थक भी

परेसान हो गया

आप जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी घर आजाये सार्थक प्लीज लावण्या ने फोन पर बताना ठीक नही समझा

लेकिन हुआ क्या ये तो बताओ इतनी कौन सी एमरजेंसी आगयी है सार्थक भी परेसान हो गया और उसने लावण्या से पूछा

वो सब मैं आप यहां पर आओगे तब बताउंगी सार्थक लेकिन प्लीज आप जितनी जल्दी हो सके घर आजाये लावण्या ने रोते हुए कहा

ठीक है ठीक है तुम बिल्कुल चिंता मत करो मैं तुरंत निकलता हूँ और अभी आता हूँ- सार्थक ने कहा

लावण्या के इस तरह रोने से सार्थक का दिल जोर जोर से घबरा रहा था और उसका दिल भी किसी अनहोनी की आसंका से धड़क रहा था क्योंकि आज के पहले लावण्या ने कभी भी इस तरह से उसे फोन नही किया था ।

क्या हुआ सार्थक को फोन कर दिया चाची जी आकर पूछा

जी चाची जी वो आ रहे है लावण्या ने कहा वह अब भी रो थी ।

चाची जी लावण्या के पास आई और उसके आंसू पोछने लगी

लावण्या रोयो मत बेटा सब ठीक हो जाएगा कहा जाएगी पूनम यही कही आस पास ही गयी होगी क्या पता अपने किसी सहेली के यहा गयी हो और अभी आजाये चाची जी ने लावण्या को सात्वना दिया हालांकि उनका खुद का दिल इस बात को माने के लिए तैयार नही था वह खुद भी बहुत ज्यादा परेसान थी
 
चाची आज तक पूनम मुझसे बताये बिना कही नही जाती थी लेकिन आज न जाने कैसे वो इतनी बड़ी लापरवाही कर दी आने दो फिर मैं उसे बताती हूँ ऐसे कोई बिना बताये जाता है क्या सब कितना परेसान है यहां पर लावण्या ने गुस्से से कहा

चाची जी भी लावण्या के पास बैठ गयी और सार्थक के आने का इंतजार करने लगी ।

लावन्या और चाची जी बेसब्री से सार्थक के आने की राह देख रहे थे करीब एक घंटे के बाद सार्थक आया ।

वह बुरी तरह से घबराया और बौखलाया हुआ था ।

सार्थक को देखते ही लावन्या फुट फुट कर रोने लगी ।

क्या हुआ लावन्या तुम रो क्यो रही हो सब ठीक तो है ना इस तरह अचानक तुमने क्यो बुलाया इस तरह से बुलाये जाने से सार्थक बहुत ही घबराया हुआ था और ललावन्या को रोते हुए देख कर और भी बेचैन हो गया उसने जल्दी से लावन्या को सम्हालते हुए कहा ।

सार्थक कुछ ठीक नही है पूनम जाने कहा चली गयी - लावन्या ने रोते हुए कहा

चली गयी , कहा चली गयी ? , सार्थक को कुछ भी समझ मे नही आया

पता नही सार्थक कुछ बता कर नही गयी है - लावन्या

सिसकते हुए बोली

ऐसे कैसे चली गयी, तुमने या चाची जी ने कुछ कहा क्यो नही ? वो ऐसे कैसे बिना बताए कही जा सकती है क्या चाची जी से फिर से लड़ाई हुई है? या तुमने कुछ कहा है उसे ? - सार्थक ने आस्चर्य से कहा

नही सार्थक किसी ने कुछ नही कहा और न ही चाची जी से कोई बात हुई है - लावन्या बोली

तो फिर , कुछ तो बात हुई होगी ऐसे कैसे वो कही जा सकती है कुछ तो हुआ होगा - सार्थक भी बुरी तरह परेसान होकर कहा

सार्थक वो बार बार उसी बात को पूछ रही थी जो कल रात में मेरी आपसे हुई थी , जब मैंने उसको आपका डिसीजन बताया तो जैसे उसे बहुत बड़ा सदमा पहुचा हो और वह परेसान होकर अपने कमरे में जाने के लिए आई और फिर थोड़ी देर बाद जब मैंने उसे बुलाया तो वो घर मे कही भी नही थी जाने कहा चली गयी - लावन्या ने रोते हुए कहा

अच्छा पहले तुम बिल्कुल चुप हो जाओ और मुझे शुरू से पूरी बात बताओ क्या हुआ - सार्थक ने लावन्या को चुप

कराया

लावन्या ने शुरू से लेकर अंत तक सारी बात सार्थक को बताई पूरी बात जान कर सार्थक के माथे पर चिंता और परेसानी की लकीरें साफ साफ दिखाई पड़ रही थी उसकी आँखों मे पूनम के लिए ढेर सारी चिंता और गुस्सा था ।

तुम घबराओ मत लावन्या मैं देखता हूँ , यही कही होगी अभी मैं उसे ढूढ कर ले आऊंगा - सार्थक ने लावन्या से कहा और फिर जल्दी से घरसे बाहर निकल गया

वह पूनम की तलाश में वहां वहां फोन करने लगा जहां जहां उसके होने की संभावना थी , लेकिन पूनम का कुछ भी पता नही चला । वह पागलो की तरह पूनम की तलाश कर रहा था ।

सार्थक ने चारों तरफ पूनम को ढूढा उसकी सारी सहेलियां उसके सारे दोस्तो को उसने फोन लगाया कर पता कर लिया लेकिन पूनम का कुछ भी पता नही चल पाया ।

सार्थक बुरी तरह से परेशान हो गया था उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था की वह पूनम को कहा ढूढे वो कहां जा सकती है सब जगह ढूंढ कर तो वह थक गया था।वह थके हुए कदमो से घर मे घुसा उसका चेहरा लटका हुआ था और

चेरे पर बेचैनी और परेशानी साफ दिख रहा था ।

सार्थक पूनम का कुछ पता चला क्या ? वह कहां चली गई ? वह ऐसे कैसे बिना बताए कहीं जा सकती है आज के पहले वह बिना बताए कहीं नहीं जाती थी लावण्या भी बहुत ज्यादा परेसान थी

समझ में नहीं आ रहा है लावन्या कि छुटकी गई तो गई कहां ? यहां पर उसका ऐसा कोई दोस्त भी नहीं है जिसके यहां वो जाती हो , अब तो रात भी होने लगी है न जाने कहां किस हाल में होगी मेरी छुटकी तुमने उसे बताया ही क्यों- सार्थक गम और गुस्से से लावन्या के ऊपर फट पड़ा

मुझे क्या मालूम था कि वह ऐसी हरकत करेगी वरना मैं उसे कभी भी नहीं बताती ,आई एम सॉरी सार्थक लावण्या आत्मग्लानि से भर गई पूनम की जाने के लिए वह कहीं ना कहीं खुद को जिम्मेदार मान रही थी ना वह पूनम से सारी बातें बताती और ना ही पूनम इस तरह घर से जाती - लावन्या ने नजर झुका कर किसी अपराधी की तरह कहा अनायास ही उसके आंखों से आँसू छलक पड़े ।

सार्थक के सब्र का बांध भी टूटने लगा था उसने लावन्या को खींच कर खुद से चिपका लिया और बोला

तुम्हारी क्या गलती है लावण्या ये चीज छुटकी को सोचनी चाहिए थी कि हम सब कितना परेसान होंगे और मैं खामखा तुम पर गुस्सा कर रहा हूँ लेकिन क्या करूँ न जाने मेरी छुटकी कहा होगी किस हाल में होगी मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है मौसम भी ठीक नही हे भगवान मेरी छुटकी की रक्षा करना उसे सही सलामत रखना भगवान - सार्थक पूनम को याद करके भावुक हो गया दुख से उसकी आंखें छलक पड़ी ।

लावन्या ने सार्थक को समझाया और पानी लाकर दिया और ढाढस बढ़ाया

सार्थक कहीं ऐसा तो नहीं गुस्से में पूनम पापा जी के पास चढ़ी गई हो एक बार पापा जी को फोन कर लो - अचानक से लावण्या ने कहा

नहीं लावण्या अगर पूनम वहां पर नहीं गई होगी , तो फिर सारी बात पापा को बताना पड़ेगा पापा जी खामखा परेशान हो जाएंगे वैसे भी इतनी दूर कहा जाएगी वो भी अकेले, मैं ही कुछ करता हूं तुम चिंता मत करो , मैं चाहे जैसे भी पूनम को लेकर वापस आऊंगा- सार्थक ने कहा

लेकिन आप करोगे क्या ? सब जगह तो देख लिया लेकिन

पूनम का कुछ भी पता नहीं चला - लावण्या ने मायूसी से कहा

पूनम अगर कहीं बाहर गई होगी तो जरूर से जरूर ऑटो या बस से गई होगी मैं अभी पास के ऑटो स्टैंड और बस स्टैंड पर जा कर देखता हूं , क्या पता वहां पर किसी को पूनम के बारे कुछ पता हो - सार्थक ने कहा

गुड आइडिया आप तुरंत जाकर पता कीजिए और ये लीजिए ये पूनम का फोटो अपने पास रख लीजिए इसकी जरूरत पड़ेगी अगर कुछ भी मालूम होता है तो मुझे आप फोन कर दीजियेगा प्लीज मुझे भी पूनम की बहुत फिक्र हो रही है - लावन्या ने कहा

ठीक है तुम चिंता मत करो मैं देखता हूं तुम बिल्कुल भी मत घबराओ सार्थक ने कहा और पूनम की फोटो लेकर के निकल पड़ा

सार्थक सीधा ऑटो स्टैंड पहुंचा, और पूनम की फोटो दिखा दिखा कर के सारे ड्राइवरों से पूछने लगा लेकिन किसी को भी पूनम के बारे में कुछ भी पता नहीं था सार्थक ने स्टेण्ड पर खड़े सारे ड्राइवरों और दुकानदारों से पूछ लिया लेकिन कही से पूनम की कोई भी खबर नही लगी

सार्थक मायूस होकर वहां से लौटने ही वाला था तभी सामने से एक ऑटो आता हुआ दिखाई पड़ा उसने अपना आटो ला करके जैसे ही खड़ा किया सार्थक दौड़कर उस ऑटो के ड्राइवर के पास पहुंचा।

माफ करना साहब अब मैं कहीं नहीं जाऊंगा पूरे दिन थक गया हूं आप किसी दूसरे ऑटो वाले से बात कर लीजिए, सार्थक को देखते ही उस ऑटो ड्राइवर ने कहा

नहीं भैया मुझे कहीं नहीं जाना है बस मुझे आपसे एक चीज पूछनी है, क्या आप इस लड़की को जानते हैं? - सार्थक ने पूनम की फोटो उसे आटो वाले को दिखाया

ऑटो वाले ने गौर से पूनम की फोटो देखा और फिर अचानक से उसकी आंखें चमक पड़ी

अरे यह लड़की, इसको तो मैं जानता हूं मैं ही तो इसे बस स्टैंड पर छोड़ कर आया हूं - ऑटो वाले ने कहा

कब ? कहां ? कैसे ? सार्थक मानो खुशी से उछल पड़ा उसे हल्की सी उम्मीद जगी और उसने एक साथ सवालों की बौछार कर दी

यही कोई करीब 3:00 बजे के आसपास यह लड़की मेरी ही आंटो में बैठ कर के बस स्टॉप तक गई थी , उसके हाथ में एक बैग था लेकिन साहब यह कौन है और आप इसकी फोटो लेकर के क्यों ढूढ रहे हैं - ऑटो वाले ने उत्सुकता से पूछा

यह मेरी बहन है और गुस्से से घर छोड़ कर के चली गई है थैंक्यू भैया थैंक यू सो मच मेरी मदद करने के लिए सार्थक ने उस ऑटो वाले को शुक्रिया कहा

अरे साहब इसमें शुक्रिया वाली कौन सी बात है यह तो मेरा फर्ज था उस आटो वाले ने कहा

भैया एक काम और कर सकते हैं प्लीज मुझे बस स्टैंड तक छोड़ दीजिए आप ही उसे लेकर के गए हैं तो आपको यह मालूम होगा कि आपने उसे कहा उतारा है प्लीज भैया मैं आपके आगे हाथ जोड़ता हूं मैं आपको डबल किराया दूंगा लेकिन आप प्लीज मुझे उस बस स्टॉप पर छोड़ दीजिए जहां पर आप ने मेरी बहन को छोड़ा था - सार्थक ने हाथ जोड़कर उस ऑटो वाले से प्रार्थना की

ऑटो वाला हिचकिचाया और थोड़ी देर सोचने लगा

प्लीज भैया मेरी हेल्प कर दीजिए आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होगी - सार्थक ने हाथ जोड़कर के कातर भाव से ऑटो वाले से रिकवेस्ट किया

ठीक है साहब ,आइए बैठिए मैं आपको छोड़ देता हूं उस ऑटो वाले को शायद सार्थक पर दया आ गई और वह वापस अपनी ऑटो में बैठा

सार्थक भी जल्दी से घूमकर आया और उस आटो में समा गया, ड्राइवर ने तुरंत ही अपना ऑटो स्टार्ट किया और गाड़ी सरपट भागती हुई चल पड़ी।

पूनम बस पकड़ कर दिल्ली पहुची कई घंटों तक वह इधर से उधर सड़को पर घूमती रही थी ,उसे कुछ भी नही मालूम था , न तो उसको अपनी मंजिल का पता था और न ही उसे अपने किसी ठिकाने का वो तो बस बिना सोचे समझे घर से निकल आयी थी जल्दी जल्दी में उसने खाना भी नही खाया था, उसे भूख भी लगी थी

उसके पास ज्यादा पैसे भी नही थे थोड़े बहुत पैसे थे जो वह लेकर घर से निकल पड़ी थी ।

पूनम ने एक जगह रुक कर खाना खाया और फिर सड़क पर

यू ही चलने लगी उसको घर से निकले हुए कई घंटे बीत गए थे और शाम होने लगी ।

पूनम को थोड़ी सी चिंता हुई उसने पब्लिक टेलीफोन से अपने पापा को फोन मिलाने की सोची जो यही दिल्ली में रहते थे क्योंकि रात होने वाली थी और पूनम को डर भी लगने लगा था ।

उसने एक पब्लिक टेलीफोन बूथ देखा और उसमे घुस गई वह अपने पापा का फोन मिलाने लगी लेकिन अफसोस पूनम के पापा का फोन कनेक्ट नही हो रहा था अब पूनम को और भी चिंता हो रही थी क्योंकि इस अनजान शहर में पूनम कहा जाती, उसने सोचा था कि वह दिल्ली में जाकर अपने पापा के पास चली जायेगी लेकिन उनका फोन नही लग रहा था ।

पूनम टेलीफोन बूथ से बाहर निकल आयी ।

मैं भी कितनी बेवकूप हूँ जल्दी जल्दी में पापा का एड्रेस लाना ही भूल गयी अब पापा के पास कैसे पहुचू - पूनम ने मन ही मन सोचा।

घर पर फोन कर लेती हूँ और भाभी से ले लेती हूँ एक बार को पूनम ने सोचा लेकिन अगले ही पल उसने खुद से ही खुद

को मना कर दिया ।

नही मैं ऐसा नही कर सकती , फिर फायदा क्या होगा मेरे घर से आने का सबको पता ही चल जाएगा कि मैं दिल्ली में हूँ - पूनम ने मन ही मन सोचा

मैं फोन नही करूँगी, अभी थोड़ी देर बाद पापा को फिर से ट्राई करूँगी अब तो दिल्ली पहुच ही गयी हूँ - पूनम ने कहा

पूनम वही पास के ही बस स्टॉप पर जाकर बैठ गयी

अचानक से मौसम चेंज हुआ और आसमान पर घने काले बादल छाने लगे और देखते ही देखते जोरदार आंधी और तूफान के साथ बहुत ही तेज बारिश भी होने लगी ।

पूनम को बहुत डर लग रहा था एक तो अनजान शहर और फिर वह कभी दिल्ली नही आई थी और उसपर आंधी पानी पूनम का डर से कलेजा सिकुड़ गया ।

वह भाग कर फिर से उसी टेलीफोन बूथ पर पहुची और फिर से उसने अपने पापा को फोन मिलाया लेकिन शायद उसकी किस्मत ही खराब थी इस बार भी उसके पापा का नंम्बर नही लग रहा था ।

पूनम को समझ मे नही आरहा था कि वो क्या करे कहा जाए ।

वह बार -बार अपने पापा का नंबर मिला रही थी लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात जब बहुत देर हो गयी तो दुकान दार ने कहा

मैडम , क्या हुआ? आपका फोन नही लग रहा है क्या?

नही भैया पता नही क्या हुआ मेरे पापा का फोन नही लग रहा है ये फोन सही तो है ना पूनम ने मायूस होकर पूछा

जी हां बिल्कुल सही है , हो सकता है कि मौसम खराब होने की वजह से आपके घर के एरिये में कुछ प्रॉब्लम आ गयी हो , इसी वजहसे फोन नही लग रहा हो आप टैक्सी करके अपने घर चले जाइये , कब तक खड़ी रहेंगी , देखो कितनी तेजी से तूफान आया है और बारिश को देख कर लग नही रहा है कि वो जल्दी से खत्म होने वाला है मैं भी आज जल्दी से दुकान बंद करके अपने घर जा रहा हूँ उस दुकान दार ने कहा

उस दुकान दार की बाते सुनकर पूनम घबरा गई लेकिन करे भी तो क्या करे उसके पापा का फोन नही लग रहा था और

दुकानदार भी अपनी दुकान बंद करने जा रहा था ।

पूनम वापस से उसी बस स्टॉप पर आ गयी जहां पर अभी थोड़ी देर पहले खड़ी थी उसके पास दो- तीन लोग और खड़े थे जो शायद इस बारिश से बचने के लिए उन लोगो ने पूनम की तरह बस स्टॉप के नीचे शरण ली थी ।

बाहर जोरदार बारिश हो रही थी रह रह कर तेज बिजली भी कड़क रही थी , जब अचानक बहुत तेज से बिजली कड़कती तो पूरा इलाका रोशनी से नहा उठता और फिर तुरन्त ही अंधेरे में डूब जाता ,हर बार बिजली कड़कने पर पूनम चौक कर डर जाती लेकिन किसी तरह उसने खुद को सम्हाल रखा था ।

धीरे धीरे चारो तरफ अंधेरा और गहरा होता जा रहा था और बरसात रुकने का नाम नही ले रही थी, धीरे धीरे बस स्टॉप पर खड़ी सवारियां भी एक एक करके ऑटो या टैक्सी या बस जो भी मिलता उससे निकल रहे थे ।

पूनम को बहुत तेज डर लगने लगा था घबराहट में उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था और कलेजा मुह को आ रहा था पहली बार उसे घर से भाग जाने का पछतावा हो रहा था लेकिन अब वो कर भी क्या सकती थी अब तो तीर कमान से

निकल चुका था ।

तभी एक बस आकर रुकी और बस स्टॉप पर उसके अलावा खड़ी आखिरी सवारी भी उसमे चढ़ गयी अब पूनम उस बस स्टॉप पर बिल्कुल अकेले खड़ी थी उसने बाहर निकल कर देखा लेकिन बारिश के रुकने का दूर दूर तक कोई लक्षण नही दिख रहा था ।

तभी न जाने कहा से एक आदमी दौड़ता हुआ आया और बस स्टॉप में आकर खड़ा हो गया ।

वह भीग गया था उसने अपने कपड़े झाड़े और फिर बोला आज तो भगवान ने भी आफत मचा रखा है । पूनम को थोड़ा सा हौसला मिला उसने राहत की सास ली ।उसके जान में जान आयी वरना जितनी देर तक वह अकेले थी उसे बहुत तेज डर लग रहा था ।

मैडम आप जो भी सवारी मिले पकड़ कर घर चली जाओ ये बारिश रुकने वाली नही है उस आदमी ने पूनम को परेसान और चिंतित देख कर कहा

पूनम ने नजर उठा कर आसमान की तरफ देखा और बोली

हम्म लग रहा है मुझे भी ऐसा ही करना पड़ेगा , अच्छा मुझे ये बताइये आस पास कोई रात में रुकने के लिए गेस्ट हाउस है क्या? - पूनम ने पूछा

उस आदमी ने चौक कर अपनी गर्दन उठाई और बोला

मतलब आप कही बाहर से आई है क्या ?

पूनम बताने में हिचकिचा रही थी लेकिन बताना तो पड़ता है उसने कहा

नही बाहर से तो नही लेकिन मेरा घर ग़ज़ियाबाद है अब वहां कोई ऑटो वाला जाएगा नही इसी लिए सोच रही हूँ कि अब इतनी बारिश में कौन जाएगा यही आसपास किसी गेस्ट हाउस में रुक जाती हूँ एक रात की ही बात है क्योंकि दिल्ली में मुझे बहुत जरूरी काम है अगर आज गयी तो कल फिर वापस आना पड़ेगा इसीलिए कल वो काम करके ही घर जाउंगी - पूनम ने साफ साफ झूठ बोला ।

उस ब्यक्ति के आंखों में एक अजीब सी चमक आगयी मानो कोई भूखा भेड़िया अपने शिकार को देख कर खुश हो रहा हो , उसने अपने चेहरे पर भरपूर मासूमियत लाने की कोशिश की लेकिन चाह कर भी अपनी मक्कारी वाली नजरो को नही छुपा पाया ।

और शायद पूनम ने भी उसके नजरो को परख लिया था, इसी वजह से वह अंदर से और डर गई और उस आदमी से थोड़ी दूर खड़ी हो गई ।

नही मैडम यहां तो कोई होटल या गेस्ट हाउस नही है यहां से थोड़ी दूर पर है आप कहे तो मैं आपको ले चल कर छोड़ दू उसने अपने शब्दों को मक्कारी की चाशनी से लपेटते हुए कहा

नही थैंक्स आप रहने दीजिए मैं खुद मैनेज कर लूँगी पूनम को शायद उसके इरादों और उसपर सन्देह हो गया इसीलिए वह अपने आप मे सिमट गई और इतना कहकर फिर चुप हो गयी ।
 
पूनम को अब ज्यादा देर इस बस स्टॉप के नीचे रुकना ठीक नही लग रहा था ,क्योंकि उसकी छठी इंद्री कुछ गड़बड़ का इशारा कर रही थी और इसी लिए पूनम का मन न होते हुए भी वह उसी बारिश में ही निकल पड़ी क्योकि जितनी जल्दी से जल्दी हो सकता था वह उस शख्स से दूर हो जाना चाहती थी फिर बारिश के रुकने का भी कही कोई लक्षण नजर नही आरहा था ।वह बारिश में ही निकल पड़ी ।

अरे मैडम भीग जाओगी अभी बारिश बंद हो जाएगी फिर चली जाना वह आदमी पूनम के इस तरह से निकलने पर चिल्ला कर बोला ।

लेकिन पूनम जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाती जा रही थी मानो उसने उस आदमी की बात ही न सुनी हो ।

थोड़े आगे जाकर पूनम ने पलट कर देखा वह आदमी अब भी उसी स्टाप के नीचे खड़ा था ।

पूनम ने राहत की सांस ली न जाने क्यों उसे उस आदमी से डर लगने लगा था लेकिन उसे अपने पीछे न आता देख पूनम बिल्कुल रिलेक्स हो गयी ।

उसने अपने दिल को बहलाया और कहा

तू भी न पूनम खामखा उससे डर रही थी , वो बेचारा तो अभी भी वही खड़ा है अगर उसको तेरे साथ कुछ बुरा करना होता तो वह तेरे पीछे आता न , ये तेरा भ्रम था ।

पूनम जल्दी जल्दी चल रही थी उसे जल्द से जल्द किसी गेस्ट हाउस को ढूढ कर उसमें रात बितानी थी जिससे वह सुबह कैसे न कैसे करके अपने पापा के पास जा पाए ।वह

अपने एक हाथ मे बैग ले रखी थी उसका पूरा बदन बारिश के पानी से तरबतर था क्योंकि लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी ।

वह तेज तेज कदमो से चल रही थी, अभी वह थोड़ी दूर ही पहुची थी कि उसे लगा कि कोई उसके पीछे दौड़ता हुआ आरहा है उसने जल्दी से पलटने की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी वो जो भी था उसने पूनम के हाथ मे पकड़े हुए बैग को पकड़ा और दूसरे हाथ से पूनम को जोरदार धक्का दिया ।

धक्के की वजह से पूनम गिरने लगी और उसके हाथ से वह बैग छूट गया और वह छपाक से उसी बारिश के पानी मे गिर पड़ी ।

जब तक कुछ समझती और उठ पाती तब तक उस शख्स ने पूनम के हाथ से उसका बैग छीन और फिर एक तरफ बेतहासा दौड़ लगा दिया ।

पूनम ने देखा उसने तुरंत ही उस आदमी को पहचान लिया वो और कोई नही वही था जो उसके साथ स्टाप पर खड़ा था ।

पूनम को एक पल भी यह समझने में नही लगा कि वह चोर है और उसका बैग छीन कर भाग रहा है उसने आव देखा न ताव जल्दी से उठी और चोर- चोर चिल्लाते हुए उस आदमी के पीछे दौड़ पड़ी ।

वह आदमी पूनम का बैग लेकर सरपट भाग रहा था और पूनम उसके पीछे पीछे दौड़ रही थी और साथ ही साथ चिल्ला भी रही थी लेकिन तेज बारिश और फिर रात का समय और बिजली की कड़कड़ाहट के बीच शायद पूनम की आवाज उन लोगो तक नही पहुच पा रही थी जो उसे देख रहे थे या फिर जानबूझकर कोई भी पूनम की हेल्प करना नही चाह रहा था ।

भागते भागते पूनम वहां से बहुत दूर निकल आयी अब तो बस्ती भी खत्म हो गयी थी और पूनम का हौसला भी धीरे धीरे जबाब दे रहा था वह उस चोर के पीछे भागते भागते बुरी तरह थक गई थी और भीगने की वजह से ठंड से कॉप रही थी लेकिन अब भी वह उस चोर के पीछे दौड़ ही रही थी क्यो की उसे सामने ही एक घर मे रोशनी नजर आ रही थी वह उस रास्ते पर एकलौती कोठी थी जो सफेद कलर से रंगा हुआ था पूनम की आखिरी उम्मीद वह कोठी थी वह जी जान लगाकर चिल्लाने लगी कि इस उम्मीद से की कोई उसकी आवाज सुनले और उस कोठी से निकल कर इस चोर को

पकड़ ले लेकिन वहां से न किसी को निकालना था और न ही कोई नही निकला ।

पूनम उस कोठी के पास पहुची तो वह चोर उस कोठी को कब का क्रास कर चुका था और उससे बहुत दूर निकल चुका था ।

पूनम की आखिरी उम्मीद भी टूट गयी और वह दौड़ते दौड़ते बुरी तरह थक गयी थी और हाफ रही थी अब उस चोर के पीछे और भागने की उसमे ताकत नही बची थी वह उसी कोठी के सामने घुटनो पर बैठ गयी और दोनों हाथों से चेहरा छुपा कर रोने लगी क्योकि उस बैग में ही उसके सारे कपड़े पैसे और जरूरी सामान था ।

अब वह क्या करेगी और कहा जाएगी इस एक जोड़ी कपड़े जो उसने इस वक्त पहन रखा था इसके अलावा उसके पास कुछ भी नही बचा था सब कुछ वह चोर ले जा चुका था ।

श्रोती ने अपने मम्मी को फोन करके बात किया । बातो ही बातो में उसने राजीव की शादी का प्रपोजल रखा ।

अरे श्रोती मैं तो कब से कह रही हूँ लेकिन वो मेरी सुनता कब है ,हर बार कोई ना कोई बहाना करके मना कर देता है वरना उसके लिए तो कई रिस्ते आ चुके है, अब जबरदस्ती तो शादी भी नही कर सकती न, तू ही समझा उसको वैसे भी राजीव तेरी बात ज्यादा सुनता है - मम्मी जी ने श्रोती से कहा

ऐसे कैसे नही करेगा , मम्मी आप घबराओ मत मैं उसे मना लूँगी और हा मैने उसके लिए एक लड़की भी पसंद कर रखी है वो हमारे घर मे बहुत अच्छे से एडजस्ट हो जाएगी मैंने उससे बात की है उसका नाम रजनी है - श्रोती ने अपना अगला दाव खेला

अच्छा अगर ऐसा है तो मैं तो भगवान को 56 भोग का भोग लगाउंगी , बस तू किसी तरह राजीव को शादी के लिए राजी कर ले श्रोती , अब मुझसे काम नही होता मम्मी जी की

आंखों में उम्मीद की एक किरण नजर आई

ठीक है मम्मी जी आप बिल्कुल मत घबराइए अब बहुत जल्दी ही मैं राजीव से बात करूंगी वह ऐसे कैसे मना कर सकता है श्रोती ने कहा

मैं शाम तक राजीव से बात करके आपको फोन करूंगी और जैसा भी होगा आप को बताऊंगी

मम्मी से बात करने के बाद श्रोती ने फोन काटा और तुरंत ही राजीव को फोन मिलाया

हेलो राजीव फोन मिलते ही श्रोती ने कहा

जी दीदी बोलिए अपनी दीदी की आवाज सुनकर के राजीव खुश होगया ।

मैंने अपना काम कर दिया है , मम्मी पापा को तुम्हारी उस रजनी को देखने के लिए राजी कर लिया है अब जल्दी से उससे डेट और टाइम पूछ कर मुझे बता दो जिससे मैं मम्मी और पापा को उसके घर भेज पाउ- श्रोती ने कहा

सच ? आप सच बोल रही है ना दीदी ? राजीव को मानो बिश्वास ही नही हुआ वह खुशी से चहकते हुए बोला

और क्या ? मैं बिल्कुल सच कह रही हूं तुम्हें पता है ना तुम मेरे प्यारे भाई हो और बचपन से ही तुम्हारी हर बात को मैं सुनती हूं तो फिर इस बार कैसे ना सुनती - श्रोती मुस्कुराते हुए बोली

थैंक्यू सो मच दीदी आई लव यू सो सो मच , सच में आप बहुत ही स्वीट है मैं बहुत खुश नसीब हुई जो आप मेरी बहन है भगवान करे दुनिया के सारे भाइयों को आप जैसी बहन मिले - राजीव खुशी से झूमते हुए बोला

अच्छा अब तारीफ बाद में कर लेना पहले रजनी के घर वालों से पूछ करके मुझे दिन और तारीख बता दो जिससे मैं मम्मी पापा को बता पाऊं और हां उनसे यह भी बोल देना कि थोड़ा ढंग से खातिरदारी कर देंगे जिससे मम्मी और पापा इंप्रेस हो जाए - श्रोती ने कहा

जी दीदी मैं अभी फोन करता हूँ , मुझे बस 10 मिनट दीजिये मैं अभी तुरंत बात करके आपसे बताता हूं राजीव ने खुशी से चहकते हुए कहा

राजीव ने फोन काट कर के तुरंत ही रजनी को फोन मिलाया और उसे सारी बात बताई ।

राजीव की बातें सुनकर के रजनी के दिल में एक अजीब सी हलचल और घबराहट सी मच गई।

राजीव इतनी जल्दी आपने ये भी कर लिया,लेकिन मैंने अभी तक मम्मी पापा को आपके बारे में बताया भी नही , मुझे मम्मी और पापा से बात करने का टाइम ही नहीं मिला- रजनी ने घबरा कर कहा

अरे अभी तक तुमने कुछ बताया ही नहीं , क्या करती हो रजनी तुम्हें बहुत पहले बता देना चाहिए था , राजीव खीझते हुए बोला

अच्छा चलो कोई बात नहीं आप अब बता दो और जल्दी से जल्दी मुझे पूछ कर बताओ दीदी मेरे फोन का इंतजार कर रही हैं रजनी सच मे मुझे बहुत जल्दी है मैं चाहता हूँ कि जल्द से जल्द तुम मेरे घर में आ जाओ मुझसे तुम्हारी जुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही है जब से तुमसे मिला हूँ ऐसा लग रहा है कि तुम हरवक्त मेरी आँखों के सामने आजाती हो इसीलिए प्लीज रजनी जितनी जल्दी से जल्दी हो सके बस मेरे पास आजाओ मैं तुम्हारे कदमो में दुनिया भर की सारी खुशियां ला कर रख देना चाहता हूँ - राजीव ने प्यार से कहा

राजीव की बातें सुनकर के रजनी शर्मा गई और उसने शर्म से अपनी नजरें झुका ली

तुम सुन रही हो ना रजनी ,रजनी की आवाज ना सुन कर के राजीव ने पूछा

हां - रजनी ने बहुत ही आहिस्ते से कहा

तो अब देर मत करो और जल्दी से मम्मी पापा को बताओ और फिर मुझे फोन करो ठीक है राजीव मानो उतावला हो रहा था

ठीक है मैं फोन करती हूं आपको रजनी ने कहा और फोन रख दिया

फोन रखने के बाद रजनी सोच में पड़ गई वह इधर से उधर कमरे में चक्कर लगा रही थी और सोच रही थी उसको समझ मे नही आरहा था कि वह अपने घरवालों को राजीव के बारे में कैसे बताये ।

रजनी कमरे में बेचैनी से इधर उधर टहल रही थी तभी उसकी मां कमरे में आई और रजनी को इस तरह से परेशान देखकर के चौक गई।

क्या हुआ बेटा बहुत परेशान और बेचैन हो कोई बात है

क्या ,रजनी की मम्मी जी ने रजनी से पूछा

रजनी ने सिर को झुका लिया और एक जगह खड़ी हो गयी ।

रजनी की मम्मी रजनी के पास आ गयी और उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली

रजनी बेटा मेरे लिए तुम आज भी वही रजनी हो जो पहले थी , मेरे प्यार में रत्ती भर भी बदलाव नही आया है इसीलिए जो भी तुम्हारे दिल मे हो निसंकोच कहो

तुम बिल्कुल भी मत घबराओ बताओ क्या बात है क्यो इतनी बेचैन हो । और इस तरह इधर उधर क्यो भटक रही हो - रजनी की मम्मी ने प्यार और अपने पन से कहा

मम्मी जी हमने आप से एक बात नही बताई है क्योंकि हमें डर था कही आप हम पर नाराज न हो जाये, लेकिन इस बार नही, एक बार मैं गलती कर चुकी हूँ इस बार कोई गलती नही करूँगी बिना आप लोगो के सहमति के मैं कुछ भी ऐसा नही करूँगी जिससे बाद में हमे या आपको कोई कष्ट हो- रजनी ने दृढ़ता से कहा

ऐसी क्या बात है रजनी, साफ साफ बताओ मुझे कुछ भी समझ मे नही आरहा है क्या कहना चाहती हो - मम्मी जी को सच मे कुछ पल्ले नही पड़ा

बात दरअसल यह है मम्मी जी की ....रजनी बोलने में हिचकिचा रही थी

हा हा बोलो क्या बात है - मम्मी जी ने रजनी को बोलने के लिए प्रेरित किया

मैं आपको शुरू से बताती हूँ मम्मी आप बैठिये रजनी को कुछ नही सूझा तो उसने अपनी मम्मी का हाथ पकड़ कर बैठा लिया

मम्मी जी ने भी कुछ नही कहा और चुपचाप बैठ गयी और उत्सुकता से रजनी के मुह की तरफ देखने लगी मानो रजनी के बोलने का इंतजार कर रही हो
 
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