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डॉली ने चादर के अंदर से आँखे इधर उधर करते हुए कहा, " टाइम कैसे पता , इसका मतलब आप जाग रहे थे??"
"बेशक!" राज ने आँख बंद करते हुए कहा, " प्यार के इजहार के बाद मेरे साथ मेरी पत्नी पहली बार अकेले है, मैं सो कैसे सकता था, एक एक पल कीमती था इस रात का!!"
उसकी बात सुनकर डॉली ने चादर को खुद की बॉडी के चारो ओर अच्छे से दबा लिया तो राज इस हरकत को
देखकर छत की तरफ नजर करते हुए मुस्कुरा दिया!
राज कुछ देर बाद उठकर चला गया और डॉली दवा की वजह से फिर नींद की आगोश में चली गयी!
सुबह राज ने विनाश को भेजा तो उसने डॉली को जगाया औऱ बोला, " मम्मा, पापा कह रहे हैं कि नाश्ता करके दवा ले लीजिए फिर सो जाना!"
डॉली ने उसे प्यार करते हुए कहा, " ठीक है, आप जाओ! मैं ब्रश कर लूँ!"
विनाश रूम से बाहर भाग गया तो डॉली सरक कर किनारे तक आ गयी और जमीन पर पैर रखकर जैसे ही दीवार का सहारा लेने को हाथ बढ़ाया, एक जोड़ी बाँह ने उसे ऊपर उठा लिया। डॉली की नजर न उठ सकी औऱ भोर की बात याद करते हुए हया की लाली फिर चेहरे पर बिखर गई!
राज ने उसे बाथरूम तक छोड़ दिया और वहाँ से हटते हुए बोला, " बाहर आना तो आवाज दे देना! मैं आ जाऊँगा।"
डॉली ने दरवाजा बंद कर लिया, उसकी छुअन पिघला देने को काफी थी, बिखर जाने को जी हो उठा था! जाने क्या बदल गया था, न शर्म जा रही थी , न घबराहट, और न ही राज के ख्याल!! एक बेखुदी सी छा रही थी, राज के करीब होने पर! डॉली ने अपने सीने पर हाथ रखते हुए सोचा, "उस वक़्त लबो पर लब अगर रख देता तो जान ही चली जाती!!"
सब कुछ अलग सा था लेकिन फिर भी बहुत खूबसूरत लग रहा था! ये अहसास तो उसने आज तक कभी जीये ही नही थे, जो अहसास उसे अब राज से मिले थे! उसने सोचा ही नही था कि नागफनी का एक रूप इतना नरम भी हो सकता है, इतनी परवाह, इतना प्यार और जताने का भी ऐसा अलग सा अंदाज!! सब कुछ सपने जैसा लग रहा था!! अब तक
इकरार से डरती थी, और अब इकरार के बाद भी डर ही रही थी लेकिन राज ने कोई जल्दबाजी नही दिखाई, उसे उसके कम्फर्ट जोन में रहने दिया तो उसके प्रति डॉली की दीवानगी थोड़ी और बढ़ गयी।
वह बाहर आई तो बोली, " मिस्टर शर्मा !!"
" फिर वही!!" कहते हुए राज हाथ बांध कर खड़ा हो गया।
" मतलब..?" डॉली ने असमंजस से अब उसकी तरफ देखते हुए कहा।
" राज हल्का झुककर उसकी आँखों मे देखते हुए बोला, " मतलब कहा था न मिस्टर शर्मा नही बुलाना।"
" आप ऐसी बहस लेकर बैठेंगे तो मैं खुद ही चल दूँगी हां!" डॉली ने नजर हटाकर आगे कदम बढ़ाने की कोशिश करते हुए कहा लेकिन राज ने उसकी कमर में हाथ फँसाकर उसे चौखट से ही लगाते हुए गहरी आवाज में कहा, " ऐसे कैसे चल देंगी आप मेरे होते हुए! अपनी पत्नी का ध्यान रखना मेरा कर्तव्य है और उससे पीछे मैं नही हटने वाला! लेकिन अपने पति की ख्वाहिशों का ध्यान रखना पत्नी का भी धर्म
है, आप पीछे हट रही हैं!!"
डॉली ने उसके हाथ को हटाने के लिए जोर लगाया तो राज बोला, " जोर जबरदस्ती से आप मुझे हटा ही नही सकती, सिर्फ एक शब्द कहिए और मैं जिद छोड़ दूँगा!"
डॉली ने दूसरी तरफ को मुंह कर लिया और बोली, " मतलब मेरी हालत ठीक नही है फिर भी आपको मेरी कोई परवाह नहीं है!"
" क्यों होनी चाहिए परवाह..?" राज सपाट लहजे में बोला।
" क्योंकि मैं आपकी पत्नी हूँ...!" डॉली झल्लाहट से फौरन बोल गयी।
राज के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और उसने पूछा, " ऐसा है क्या...!!"
डॉली अब अपनी बात पर ध्यान जाते ही उसकी तरफ देखने लगी, उसके हल्के मुस्कुराते होठो पर नजर गयी तो डॉली ने फौरन नजर फेर ली!
" आप हमेशा मुझे बात में फँसाते हैं!" डॉली नाराजगी से बोली और उसके सीने पर मुक्का मारने को हुई लेकिन राज ने उसके हाथ पकड़ लिए औऱ बोला, " जब जानती है कि आप मेरी पत्नी हैं तो फिर मुझे अपना पति कहने में शर्म क्यों आती है....?"
डॉली पलके झपकाते हुए इधर उधर देखने लगी तो राज बोला, " बोलिये तो ले चलता हूँ!"
" मैं अब कुछ नही बोलूंगी!" डॉली ने नाराजगी से कहा तो राज ने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया और बोला, " हैप्पी मॉर्निंग वाइफ!"
डॉली को ये सुनकर मन मे हलचल सी हुई और उसने राज के स्वेट शर्ट को कसकर पकड़ लिया।
राज ने उसकी पकड़ को देखा तो मुस्कुरा दिया औऱ उसे बिस्तर पर रखते हुए उसके कान से अपने होंठ लगाते हुए धीरे से बोला, " कभी इस हलचल को महसूस करने का मौका मुझे भी दीजिये!! अहसासों के समंदर की रवानी तो देख ली, जज्बातों के सैलाब की रवानी कभी महसूस तो करने दीजिए!"
राज के शब्द सुनकर डॉली का पूरा जिस्म रोमांचित हो
उठा, रोम रोम फूट पड़े, औऱ एक झुरझुरी सी बदन में दौड़ गयी! लेकिन उसने अपने अहसासों को छिपा लिया, वह राज के सीने पर हाथ रखकर उसे खुद से दूर करते हुए बोली, " मिस्टर शर्मा !! ऐसे कौन बात करता है, कान से होंठ टच करके मत बोला कीजिये!"
राज उसे गहरी निग़ाहों से एकटक देखते हुए बोला, "अब पता चला कि कैसा महसूस होता है, उस रोज आप भी मेरी गर्दन से होंठ टच करके बोले जा रही थी तो मेरा भी कुछ ऐसा ही रिएक्शन था!"
डॉली खुद को छिपाने की जगह तलाशने लगी, दरवाजे पर ही निगाह लगी हुई थी उसकी और मन ही मन बोली, " सब अकेला क्यों छोड़ देते हैं मुझे मिस्टर शर्मा के साथ, काश जस्सी ही आ जाये!"
तभी डॉक्टर मानवी की आवाज आई तो डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा, " डॉक्टर क्यों आयी हैं?"
राज बेहद हौले से बोला, " तो आपकी ख्वाहिश है कि आपके जख्म की देख रेख मैं ही करूँ..?"
कल की बात याद करके डॉली के गाल सुर्ख हो उठे और
वह झट से बोली, " नही! मैं ऐसा बिल्कुल नही चाहती, आप जाइये न, बहुत काम होंगे आपको!!"
" आपसे जरूरी मेरे लिए कुछ नही!! फिर भी जा रहा हूँ, क्योंकि ये नजरें चुराना और उठाना जब देखता हूँ तो मेरी दीवानगी बढ़ने....."
" अरे डॉक्टर मानवी..!!" डॉली ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा तो राज झट से उठ गया और उस ओर देखा , इतने में डॉली ने चादर खींच कर खुद को चेहरे समेत ढक लिया। राज ने उसकी तरफ देखा तो उसे चादर में ढका पाकर होठ पर जीभ फेरते हुए हँस दिया और बोला, " इन हरकतों से मुझे खुद के और करीब ही खींच रही हो आप!!"
वह बाहर निकल गया औऱ डॉक्टर मानवी अंदर आ गयी, " आपको ठंड लग रही है क्या?"
डॉली चेहरे से चादर हटाते हुए बोली, " हां!"
" कमाल है न डॉक्टर, इतना हॉट हसबैंड है इसका फिर भी...!!" जस्सी ने अंदर आते हुए चुटकी ली तो मानवी मुस्कुरा दी।
डॉली ने आंख दिखाई और फिर जस्सी से दरवाजा बंद करने का इशारा किया!
जब मानवी ने चेकअप कर लिया तो वह बोली, " ज्यादा वक्त नही लगेगा, आप नए साल के दिन खड़ी होने लगेंगी!"
डॉली ने राहत की सांस ली , डॉक्टर बाहर निकल गयी तो जस्सी बैठते हुए बोली, " कैसा रहा कल का दिन?"
"बेशक!" राज ने आँख बंद करते हुए कहा, " प्यार के इजहार के बाद मेरे साथ मेरी पत्नी पहली बार अकेले है, मैं सो कैसे सकता था, एक एक पल कीमती था इस रात का!!"
उसकी बात सुनकर डॉली ने चादर को खुद की बॉडी के चारो ओर अच्छे से दबा लिया तो राज इस हरकत को
देखकर छत की तरफ नजर करते हुए मुस्कुरा दिया!
राज कुछ देर बाद उठकर चला गया और डॉली दवा की वजह से फिर नींद की आगोश में चली गयी!
सुबह राज ने विनाश को भेजा तो उसने डॉली को जगाया औऱ बोला, " मम्मा, पापा कह रहे हैं कि नाश्ता करके दवा ले लीजिए फिर सो जाना!"
डॉली ने उसे प्यार करते हुए कहा, " ठीक है, आप जाओ! मैं ब्रश कर लूँ!"
विनाश रूम से बाहर भाग गया तो डॉली सरक कर किनारे तक आ गयी और जमीन पर पैर रखकर जैसे ही दीवार का सहारा लेने को हाथ बढ़ाया, एक जोड़ी बाँह ने उसे ऊपर उठा लिया। डॉली की नजर न उठ सकी औऱ भोर की बात याद करते हुए हया की लाली फिर चेहरे पर बिखर गई!
राज ने उसे बाथरूम तक छोड़ दिया और वहाँ से हटते हुए बोला, " बाहर आना तो आवाज दे देना! मैं आ जाऊँगा।"
डॉली ने दरवाजा बंद कर लिया, उसकी छुअन पिघला देने को काफी थी, बिखर जाने को जी हो उठा था! जाने क्या बदल गया था, न शर्म जा रही थी , न घबराहट, और न ही राज के ख्याल!! एक बेखुदी सी छा रही थी, राज के करीब होने पर! डॉली ने अपने सीने पर हाथ रखते हुए सोचा, "उस वक़्त लबो पर लब अगर रख देता तो जान ही चली जाती!!"
सब कुछ अलग सा था लेकिन फिर भी बहुत खूबसूरत लग रहा था! ये अहसास तो उसने आज तक कभी जीये ही नही थे, जो अहसास उसे अब राज से मिले थे! उसने सोचा ही नही था कि नागफनी का एक रूप इतना नरम भी हो सकता है, इतनी परवाह, इतना प्यार और जताने का भी ऐसा अलग सा अंदाज!! सब कुछ सपने जैसा लग रहा था!! अब तक
इकरार से डरती थी, और अब इकरार के बाद भी डर ही रही थी लेकिन राज ने कोई जल्दबाजी नही दिखाई, उसे उसके कम्फर्ट जोन में रहने दिया तो उसके प्रति डॉली की दीवानगी थोड़ी और बढ़ गयी।
वह बाहर आई तो बोली, " मिस्टर शर्मा !!"
" फिर वही!!" कहते हुए राज हाथ बांध कर खड़ा हो गया।
" मतलब..?" डॉली ने असमंजस से अब उसकी तरफ देखते हुए कहा।
" राज हल्का झुककर उसकी आँखों मे देखते हुए बोला, " मतलब कहा था न मिस्टर शर्मा नही बुलाना।"
" आप ऐसी बहस लेकर बैठेंगे तो मैं खुद ही चल दूँगी हां!" डॉली ने नजर हटाकर आगे कदम बढ़ाने की कोशिश करते हुए कहा लेकिन राज ने उसकी कमर में हाथ फँसाकर उसे चौखट से ही लगाते हुए गहरी आवाज में कहा, " ऐसे कैसे चल देंगी आप मेरे होते हुए! अपनी पत्नी का ध्यान रखना मेरा कर्तव्य है और उससे पीछे मैं नही हटने वाला! लेकिन अपने पति की ख्वाहिशों का ध्यान रखना पत्नी का भी धर्म
है, आप पीछे हट रही हैं!!"
डॉली ने उसके हाथ को हटाने के लिए जोर लगाया तो राज बोला, " जोर जबरदस्ती से आप मुझे हटा ही नही सकती, सिर्फ एक शब्द कहिए और मैं जिद छोड़ दूँगा!"
डॉली ने दूसरी तरफ को मुंह कर लिया और बोली, " मतलब मेरी हालत ठीक नही है फिर भी आपको मेरी कोई परवाह नहीं है!"
" क्यों होनी चाहिए परवाह..?" राज सपाट लहजे में बोला।
" क्योंकि मैं आपकी पत्नी हूँ...!" डॉली झल्लाहट से फौरन बोल गयी।
राज के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और उसने पूछा, " ऐसा है क्या...!!"
डॉली अब अपनी बात पर ध्यान जाते ही उसकी तरफ देखने लगी, उसके हल्के मुस्कुराते होठो पर नजर गयी तो डॉली ने फौरन नजर फेर ली!
" आप हमेशा मुझे बात में फँसाते हैं!" डॉली नाराजगी से बोली और उसके सीने पर मुक्का मारने को हुई लेकिन राज ने उसके हाथ पकड़ लिए औऱ बोला, " जब जानती है कि आप मेरी पत्नी हैं तो फिर मुझे अपना पति कहने में शर्म क्यों आती है....?"
डॉली पलके झपकाते हुए इधर उधर देखने लगी तो राज बोला, " बोलिये तो ले चलता हूँ!"
" मैं अब कुछ नही बोलूंगी!" डॉली ने नाराजगी से कहा तो राज ने उसे अपनी बाँहों में उठा लिया और बोला, " हैप्पी मॉर्निंग वाइफ!"
डॉली को ये सुनकर मन मे हलचल सी हुई और उसने राज के स्वेट शर्ट को कसकर पकड़ लिया।
राज ने उसकी पकड़ को देखा तो मुस्कुरा दिया औऱ उसे बिस्तर पर रखते हुए उसके कान से अपने होंठ लगाते हुए धीरे से बोला, " कभी इस हलचल को महसूस करने का मौका मुझे भी दीजिये!! अहसासों के समंदर की रवानी तो देख ली, जज्बातों के सैलाब की रवानी कभी महसूस तो करने दीजिए!"
राज के शब्द सुनकर डॉली का पूरा जिस्म रोमांचित हो
उठा, रोम रोम फूट पड़े, औऱ एक झुरझुरी सी बदन में दौड़ गयी! लेकिन उसने अपने अहसासों को छिपा लिया, वह राज के सीने पर हाथ रखकर उसे खुद से दूर करते हुए बोली, " मिस्टर शर्मा !! ऐसे कौन बात करता है, कान से होंठ टच करके मत बोला कीजिये!"
राज उसे गहरी निग़ाहों से एकटक देखते हुए बोला, "अब पता चला कि कैसा महसूस होता है, उस रोज आप भी मेरी गर्दन से होंठ टच करके बोले जा रही थी तो मेरा भी कुछ ऐसा ही रिएक्शन था!"
डॉली खुद को छिपाने की जगह तलाशने लगी, दरवाजे पर ही निगाह लगी हुई थी उसकी और मन ही मन बोली, " सब अकेला क्यों छोड़ देते हैं मुझे मिस्टर शर्मा के साथ, काश जस्सी ही आ जाये!"
तभी डॉक्टर मानवी की आवाज आई तो डॉली ने राज की तरफ देखते हुए कहा, " डॉक्टर क्यों आयी हैं?"
राज बेहद हौले से बोला, " तो आपकी ख्वाहिश है कि आपके जख्म की देख रेख मैं ही करूँ..?"
कल की बात याद करके डॉली के गाल सुर्ख हो उठे और
वह झट से बोली, " नही! मैं ऐसा बिल्कुल नही चाहती, आप जाइये न, बहुत काम होंगे आपको!!"
" आपसे जरूरी मेरे लिए कुछ नही!! फिर भी जा रहा हूँ, क्योंकि ये नजरें चुराना और उठाना जब देखता हूँ तो मेरी दीवानगी बढ़ने....."
" अरे डॉक्टर मानवी..!!" डॉली ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा तो राज झट से उठ गया और उस ओर देखा , इतने में डॉली ने चादर खींच कर खुद को चेहरे समेत ढक लिया। राज ने उसकी तरफ देखा तो उसे चादर में ढका पाकर होठ पर जीभ फेरते हुए हँस दिया और बोला, " इन हरकतों से मुझे खुद के और करीब ही खींच रही हो आप!!"
वह बाहर निकल गया औऱ डॉक्टर मानवी अंदर आ गयी, " आपको ठंड लग रही है क्या?"
डॉली चेहरे से चादर हटाते हुए बोली, " हां!"
" कमाल है न डॉक्टर, इतना हॉट हसबैंड है इसका फिर भी...!!" जस्सी ने अंदर आते हुए चुटकी ली तो मानवी मुस्कुरा दी।
डॉली ने आंख दिखाई और फिर जस्सी से दरवाजा बंद करने का इशारा किया!
जब मानवी ने चेकअप कर लिया तो वह बोली, " ज्यादा वक्त नही लगेगा, आप नए साल के दिन खड़ी होने लगेंगी!"
डॉली ने राहत की सांस ली , डॉक्टर बाहर निकल गयी तो जस्सी बैठते हुए बोली, " कैसा रहा कल का दिन?"