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Incest सपना-या-हकीकत

चम्पा मेरे लण्ड की जड़ को पकड हुए गुउउऊ गुउउऊ करके मेरे लण्ड को चूसे जा रही थी और दुसरे हाथ से चंदू के आड़ो से खेल रही थी

थोडी देर तक चंपा ऐसे ही हम दोनो के लण्ड चुसती रही ,,कभी एक लण्ड को तो कभी दोनो लण्ड एक साथ सामने लेके अपने जीभ को हमारे सुपाडो पर लपल्पाती जिससे हमे और भी उत्तेजन हो रही थी ।

इधर चंदू को चुत की तलब होने लगी ।

उसने चम्पा को इशारा किया जो मुझे समझ नही आया अगले ही पल चंपा हम दोनो के लण्ड छोड कर खड़ी हो गयी ,,जबकी चंदू फौरान सोफे पर बैठ कर लण्ड को सीधा उपर की ओर करते हुए सहलाने लगा ।

चम्पा मुस्कुरा कर पीछे हुइ और जान्घे खोलकर चंदू की ओर पीठ किये लण्ड पर बैठती चली गयी ।

अगले ही पल मे चंदू का लण्ड उसकी बहन की चुत मे था और मेरा लण्ड उसकी हाथो मे ।

चम्पा अब हल्का हल्का उछलते हुए मेरा लण्ड सहलाए जा रही थी ।

मगर चंदू बहुत जोशीला हुआ जा रहा था वो बार बार नीचे नीचे से झटके दिये जा रहा था

लेकिन चम्पा के मुह मे अब मेरा लण्ड भरा हुआ था वो झुक कर मेरा लण्ड चुस्ते हुए नीचे से झटके खाये जा रही थी ।

तभी मैने चंदू को इशारा किया की वो तेज झटके लगाये ,,,वो मुस्कुराया और अपनी जांघो को एड़ियो के बल उचकाते हुए तेजी से चम्पा की कमर थामते हुए पेलना शुरु कर दिया ।

चंपा गुउउऊ गुउऊ गुऊ करते हुए तेज झटके खाने लगी ,,,मेरा लण्ड उसके गले तक जाने लगा ,,,चम्पा का अब खुद पर नियन्त्रण नही था चंदू के तेज झटके से उसके दाँत भी मेरे लन्ड़ को चुबने लगे थे ,,,ऐसे मे मैने अपना लण्ड बाहर कर लिया

वही चंपा को भी थोडी राहत हुई वो अप्नी चुत सहलाते हुए खुद अपने भाई के लण्ड पर कूदने लगी ।

चम्पा - ओह्ह्ह हा भाई ऐसे ही उम्म्ंम अह्ह्ह्ह भैईई उम्म्ंम और तेज्ज़्ज़ अओह्ह्ह

चंदू भी तेज धक्के लगाते हुए - उम्म्ं मजा आ रहा है ना दीदी तुम्को और लो अह्ह्ह बहत्त चुदकककद हो तुमम उम्म्ं अह्ह्ह

जल्द ही चंदू की रफतार धीमी होने लगी तो मैने चम्पा को इशारा किया,,,वो फौरान उठ कर सोफे का किनारा पकड कर झुक गयी ,,,मै उसकी एक टांग उठा कर सोफे पे टिका दिया और लण्ड को उसकी रसाती चुत के मुहाने पर लगाते हुए एक जोर का धक्का दिया

चंपा की गीली और ढीली चुत मे मेरा लण्ड सटसटा कर एक ही बार मे जड़ तक घुस गया

चंपा- अह्ह्ह्ह्माआ माआ मर ज्ञीईई उह्ह्ह

मैने बिना रोके उसके कुल्हे थामते हुए तेज तरार धक्के उसकी चुत मे लगाने शुरु किये

चम्पा की चर्बीदार गाड मेरे हर धक्के को दुगनी गति से वापस भेज देती है और इससे मुझे चोदने का मजा और भी आ जाता है ,,,

चंपा का बदन टुट रहा होता है और मै लगातार तेजी से उसकी चुत मे धकाककमं पेल चोदे जा रहा था ।

वही चंदू फटी आन्खो से तेजी से अपना लण्ड हिलाते हुए चम्पा के साम्ने गया और लण्ड को उसके मुह पर फिराने लगा

चम्पा ने बस मुह खोला और चंदू ने उसके बाल थामते हुए लण्ड को उसके मुह मे डाल दिया ,, इधर मेरे तेज धक्को से चंपा आगे पीछे हिले जा रही थी और चंदू का लण्ड उसके मुह मे अंडर बाहर हुआ जा रहा था ।

मगर चंदू को मानो कोई नशा सा हो गया था इधर मैने अपनी गति धीमी की और वो तेजी चंपा के सर पकडते हुए मुह मे पेलना शुरु कर दिया

चम्पा की हालत खराब होने लगी ,,,लेकिन चंपा जैसी गरम चुद्वासी के लिए ये भी कम ही था

इधर मेरी नजर जब चंदू के हरकत पर गयी तो मै वाप्स दुगनी जोश से उसके कूल्हो को थामते हुए धक्के लगाने शुरु कर दिये

इधर चंदू जोश मे आकर कुछ आखिरी धक्को के साथ लण्ड को अपनी बहन के मुह मे भर कर सर को अपने लण्ड पर दबाते हुए तेजी से झडने लगा

उसका सारा माल च्मपा के लार के साथ नीचे फर्श पर टपक रहा था

इधर चंदू को इतनी बुरी तरह से झड़ता देख मै भी आखिरी धक्को के साथ आहह भरता हुआ ,- अह्ह्ह मेरा आने वाला हौ उम्म्ंम्ं

मेरी आवाज सुनते ही चंदू के चम्पा के सर पर ढील दी और मैने भी अपना लण्ड उसकी चुत से बाहर निकाला

मगर वो इतना थक चुकी थी कि सरक कर सोफे का टेक लेते हुए नीचे फरश पर बैठ गयी ।

उसके बाल आंखे मुह बुरी तरफ चंदू के माल से लभेदे हुए थे फिर भी ना जाने क्यू मुझे और जोश आ रहा था और मै अपनी एडिया उचकाते हुए तेजी से अपने लण्ड को हिलाना शुरु किया और फिर लगातर मेरा माल चम्पा के मुह और सीने पर जाने लगा

आखीरि बूंद निचोड लेने के बाद मैने अपना लण्ड वीर्य से सने च्मपा के गालो पर पटका और फिर हाफते हुए सोफे पर ढह गया ।

रात मे 2 बार और बुरी तरह से मै चंदू के साथ मिलकर चंपा को चोदा ।

अगली सुबह बहुत सामान्य रही ,,,मैने चंदू के घर ही फ्रेश होकर नासता किया और दुकान पर चला गया ।

इधर चमनपूरा मे ये सब चल रहा था तो वही जानीपुर मे रज्जो के घर मे भी कम चहल पहल नही थी ।
 
लेखक की जुबानी

रात मे धक्कमपेल चुदाई के बाद सुबह करीब साढ़े 6 बजे सबसे पहले नीद ममता की खुली ।

उसने एक नजर बगल मे सोते अपने पति पर मारी और फिर अंगड़ाई लेते हुए उठ कर बाहर निकल गयी ।

एक नजर उसने अपने भैया के बंद कमरे पर डाली तो रात मे बिताये कुछ हसिन पलो को याद करते हुए उपर छत की ओर जाने लगी ।

वही नीचे सोनल के कमरे मे पल्लवि और सोनल उठ चुके थे ,, सोनल जैसे ही बाथरूम के लिए कमरे से बाहर निकाली ,,, पल्लवि मौका देख कर कमरे से बाहर अनुज के कमरे की ओर निकल दी ।

मगर उसे अनुज का कमरा बाहर से बंद मिला और वो तुनक कर वापस अपने कमरे मे चली थी ।

इधर उपर के कमरे मे रज्जो भी थोडी देर बाद उठी और कमलनाथ को आवाज देकर उपर फ्रेश होने के लिए चली गयी ।

उपर ममता पहले से ही बाथरूम मे कब्जा जमाए हुए थी और यहा रज्जो को जोर की पेसाब लगी थी । वो वही खड़ी छटपटा रही थी ,,, उसने बाथरूम का दरवाज भी खटखटाया लेकिन ममता बस दो मिंट दो मिंट बोल के रुकी रही ।

वही नीचे कमरे कमलनाथ उठ चुका था और वो अपने कमरे से बाहर आते ही राजन को देखता है जो उपर की ओर जा रहा होता है ।

कमलनाथ - अरे राजन रुको भई हम भी चल रहे है

राजन खुश होते हुए - अरे भाईसाहब आईये ,चलिये

कमलनाथ राजन के साथ सीढ़ीओ से उपर जाता हुआ - आज लग रहा है तुम भी लेट उठे हो हाहहहा

राजन हस कर - हा वो यहा रह के थोडा बहुत बदलाव आ जा रहा है भाईसाहब

कमलनाथ और राजन उपर दरवाजे से बाहर निकलता हुआ छत पर आते हुए - और तब फिर यहा का माहौल कैसा लग रहा है

राजन - ब ब बहुउउउऊतटटत हीईई अअअ अच्चाआआआ

कमलनाथ ने गौर किया कि राजन बोलने मे अटक रहा है तो वो हसते हुए राजन की ओर पलटा, और उसने राजन को देखा जो अपनी फैली हुई आंखो से बाथरूम के दिवाल के बगल मे रज्जो पेटिकोट उठाए मुतता देख रहा था और उसकी नजरे रज्जो के फैली हुई गाड़ से हट ही नही रही थी ।

हुआ दरअसल यू कि रज्जो के बार बार कहने पर जब ममता ने दरवाजा नही खोला तो रज्जो से पेसाब का प्रेसर रोका नही गया और वो वही बाथरूम के बगल मे छत मे बनी एक पानी वाली पाइप के पास अपनी पेटिकोट को कमर तक उठाए गाड फैला कर मूतने लगी और ऐन मौके राजन और कमलनाथ छत पर आ गये थे ।

कमलनाथ ने देखा कि राजन ने अब भी नजर उसकी बीवी के भारी चुतडो से नही हटाई तो वो थोडा गला मे खरास किया जिससे राजन और रज्जो दोनो चौक पड़े ।

रज्जो फौरन उठ गयी और राजन ने मुह फेर लिया ।

रज्जो और राजन दोनो अब कमलनाथ के सामने थोडी झिझक हो रही थी ।

कमलनाथ इस बात को आगे नही ले जाना चाहता था क्योकि राजन उसका जीजा था और ये सब अनजाने मे ही हुआ था ।

मगर फिर एहतियात के तौर पर राजन कमलनाथ से मुखातिब होते हुए - माफ किजीएगा भाईसाहब वो अचानक से

कमलनाथ ने जब राजन के मुह से माफी की बात सुनी तो उसे समझ आया कि शायद राजन भी इसके लिए शर्मीन्दा है तो वो इसे मजाक का रूप देते हुए उसके कन्धे पर हाथ रख कर छत की दुसरी ओर ले जाने लगा ।

कमलनाथ - क्या यार राजन तुम भी , वो बस अचानक से हुआ

राजन - हा लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि मुझे भाभी जी से माफी मांगनी चाहिये

कमलनाथ थोडा सामान्य होकर - हा उस लिहाज से मुझे भी रज्जो से माफी मांगनी चाहिये

राजन हस कर - क्या आप भी भाईसाहब मजाक करते है ,, आप तो उनके पति है , आप तो रोज उनकी.....

इतना बोल कर राजन चुप हो गया मगर कमलनाथ उसका वक्तव्य पूरा समझ गया

कमलनाथ हस्ते हुए - अरे भाई रोज देखता हू इसका मतलब ये नही किसी को दिखाने भी ले जाऊ ,,,कही उसने ये सोच लिया कि मै तुम्हे दिखाने लाया था तो हाहहहहा

राजन हसता हुआ - क्या भाई साहब आप भी हिहिहीहि ऐसा कोई करता है भला

कमलनाथ - नही करता भाई इसिलिए तो माफी मागनी पड़ेगी हिहिहीहि

इधर इन दोनो की बाते चल रही थी उधर रज्जो बाथरूम मे जा चुकी थी और ममता नहा कर निकल चुकी थी । जो इस समय एक ब्लाऊज पेटिकोट मे थी ।

कमलनाथ की नजर जैसे ही अपनी छोटी बहन पर गयी उसको रात की घटनाये याद आने लगी और उसका लण्ड पाजामे में अंगड़ाई लेने लगा ।

राजन ने भी गौर किया कमलनाथ का ध्यान उसकी बीवी के कसे कूल्हो पे ही जमी है । मगर उसने मुस्कुरा कर बात को टाल दिया ।

थोडी देर बाद सभी लोग नहा धोकर नीचे हाल मे नासते के लिए एकजुट हुए ।

रज्जो और ममता ने सबको चाय पकोड़े दिये। इस दौरान रज्जो जानबुझ कर कमलनाथ और राजन से शर्माने का दिखावा करती रही ।

रज्जो को ऐसे सामने देख कर कमलनाथ एक बार राजन की ओर देखता और वो दोनो सुबह की घटना को याद करते हुए मुस्कुरा देते है ।

खैर चाय नास्ते का काम चालू था मगर अनुज कही नजर नही आ रहा था ।

पल्लवि बार बार नजर घुमा कर बेचैन हुई जा रही थी ।

इतने मे रमन बोला - अरे मा ये अनुज अभी तक उठा नही

रज्जो का ध्यान भी अनुज के बारे मे गया तो उसने हाल मे नजर घुमाई - पता नही रुक मै उसके कमरे मे देखती हू ।

तभी ममता दरवाजे पर देखती है जहा अनुज अपनी चप्पल निकालते हुए घर मे घुस रहा था - अरे लो ये तो बाहर से आ रहा है ।

रज्जो अनुज को देख कर - कहा गया था तू अनुज सुबह सुबह

अनुज जो कि कल रात मे किये भगवान से वादे को पूरा करने और सवा किलो लड्डु का भोग लगाने मंदिर गया था तो वो ये सब बाते सबको कैसे बताता कि किन कारणो से उसे सुबह सुबह गायब होना पडा ।

अनुज हस कर - अरे मौसी वो आज सवेरे नीद खुल गयी थी बाहर टहलने चला गया था

ममता चौक कर - अकेले ही , देखा भी यहा कुछ कही खो जाता तो

रज्जो ह्स कर - अरे नही रे ,,,अनुज यहा तो आता जाता रहता है उसे घूमने के बस यही बगल का पार्क चाहिये ,,,क्यू अनुज

अनुज हस कर - हिहिहीहि हा आप तो जानती ही हो मौसी

इधर सब वापस नास्ते मे भिड़ गये वही अनुज की नजरे पल्लवि के मुस्कुराते चेहरे पर गयी और उसने वापस से तौबा करते हुए मुह फेर लिया ।

नासता खतम होने के बाद कलनाथ ने एक घन्टे बाद सबको तैयार होने के लिए बोल दिया ,,,उसके बाद सब लोग घूमने लिए जाने वाले थे ।

जारी रहेगी
 
पिछले अपडेट मे आप सभी ने पढ़ा कि एक ओर जहा चमनपूरा मे राज ने चंदू के साथ मिल कर चंपा को पूरी रात बुरी तरह से चोदा और वही जानीपुर शहर मे रज्जो के यहा से सभी लोग घुमने जाने को तैयार हो रहे है ।

अब आगे

नासता करके सोनल और पल्लवि अपने कमरे मे चले , वही अनुज रमन के साथ उसके कमरे मे चला गया क्योकि उसके कपडे वही थे ।

इधर ममता और रज्जो किचन मे काम खतम करने चली थी और वही हाल मे कमलनाथ राजन के साथ बैठा हुआ था ।

उसकी नजर राजन पर थी जो बार बार किचन मे रज्जो को घूमते देख रहा था ।

कमलनाथ को लगा कि राजन अभी भी सुबह की बात को लेके विचलित है

कमलनाथ - क्या राजन ,अरे छोडो ना उस बात को , जो हुआ सो हुआ

राजन की तन्द्रा टूटी और उसे ध्यान आया कि वो कहा खो गया तो वो कमलनाथ की बातो का जवाब देते हुए - नही भाईसाहब मेरा जी नही मान रहा है ,,,और अभी नाश्ते के समय देखा ही ना आपने कि कैसे भाभी जी को हमारे सामने आने मे शर्मींगी हो रही थी । कब तक ये चलेगा आखिर शादी ब्याह का दिन का है

कमलनाथ - हम्म्म बात तो सही है तुम्हारी , रुको मै बुलाता हू उसे

राजन - अरे नही भाईसाहब यहा नही ,, ममता भी है यही और उसकी आतुरता जानते ही है

कमलनाथ हस कर - अच्छा ठीक है तुम उपर चलो मै रज्जो को लिवा के हमारे कमरे मे आता हू।

राजन मुस्कुरा कर उपर चल दिया और वही कमलनाथ रज्जो को अपने लिये कपडे निकलवाने के बहाने उपर कमरे मे लिवा लाया ,, जहा राजन सोफे पर बैठा बेचैन हुआ जा रहा था और उन दोनो के कमरे मे प्रवेश करते ही वो खड़ा हो जाता है ।

राजन को ऐसे अचानक अपने कमरे मे पाकर रज्जो को थोडा अटपटा लगा ,, वही कमलनाथ ने जब रज्जो को उलझते देखा तो मुस्कुरा कर बोला।

कमलनाथ - अरे रज्जो परेशान ना हो ,,,राजन को मैने ही बुलाया है

रज्जो कमलनाथ को देखते हुए - आपने बुलाया लेकिन क्यू

कमलनाथ कुछ बोलता उससे पहले राजन अटकते हुए शब्दो मे - वो वो भाभी जी मै सुबह के लिये माफी चाहता हू वो अचानक से मै और भाईसाहब बाते करते हुए आ गये और वो सब .....

रज्जो पहले तो शर्माते हुए मुस्कुराई पर वो भी इस बात को लेकर अपने पति के सामने थोडी उलझन मह्सूस कर रही थी ।

कमलनाथ - हा रज्जो तुम मुझे भी माफ कर दो ।

रज्जो हस कर - अरे नही जीजाजी ,,,क्या आप भी , इसमे माफी मागने वाली क्या बात है । वो सब बस एक संयोग था ।

कमलनाथ - हम्म्म सही कह रही हो रज्जो ,,

रज्जो ह्स कर - और आप क्यू माफी माग रहे है आप तो रोज ही ....

तभी रज्जो की नजरे राजन से टकराई और वो शर्माते हुए चुप हो गयी ।

राजन - हा भाभी जी मैने भी बोला सुबह मे इनको ,कि आपको क्या जरुरत है माफी मांगने की

कमलनाथ हसता हुआ - अच्छा ठीक है बाबा नही मागता ,,,लेकिन ये तो बताओ तुम बाथरूम के बाहर क्यू ये सब ...

रज्जो ह्स कर - वही आपकी लाडली बहन की वजह से

कमलनाथ चौक कर - ममता ने क्या किया

रज्जो - उसी ने दरवाजा नही खोला समय से और मुझे जोर की पेसाब लगी थी तो वही ...

रज्जों की बात पर राजन अपने होठ दबाते हुए हसे जा रहा था और उसपे कमलनाथ की नजर पडी तो वो रज्जो को राजन की ओर इशारा करके ।

कमलनाथ - हम्म्म चलो कोई बात नही

मगर रज्जो कहा ऐसे मौके पर शांत होने वाली थी - हा हा अब अपने बहन पर बात आई तो चुप कर ,, अरे आप मर्दो का ठिक है बस चैन खोलो और हो गया , लेकिन हमे पूरा खोल कर बैठना पड़ता है ।

कमलनाथ ह्सते हुए - अरे हो गया भाई ,,,माफ कर दे , मै ममता की ओर भी माफी मांगता हू ।

राजन ह्सते हुए - हा भाभी जी मै भी ,,,अच्छा मै अपने कमरे मे जा रहा हू

ये बोलकर राजन अपने कमरे मे निकल गया ।

राजन के जाते ही कमलनाथ - क्या रज्जो ये सब क्या था ,,, क्या सोचेगा वो और तुझे प्रेसर था तो यही कमरे के बाथरूम मे चली जाती , चालू तो करवा दिया है इसे भी ना अब

रज्जो ह्स कर - अरे आप भी ना , वो मेरे नंदोई है हसी मजाक चलता है हिहिहिहिही

कमलनाथ रज्जो की मोटी गाड के उभारो पर हाथ फिराते हुए - हा लेकिन आज तेरे नंदोई की नजर तेरी इस मखमली गाड पर चली गयी है ,,अब थोडा हिसाब से हसी मजाक करना ,,मेरे सामने भले ही वो नही कुछ बोला लेकिन अकेले मे परेशान कर देगा ।

रज्जो इतरा कर -

कमलनाथ से चिपकते हुए उसकी आंखो मे देखते हुए - आप तो ऐसे डर रहे है जैसे नंदोई जी आपको हटा के खुद चढ जायेंगे ।

कमलनाथ रज्जो की नशीली आंखो और उसके कामुक्ता भरे लहजो को सुन कर वो थोडा उत्तेजित मह्सूस करने लगा और रज्जो की आंखो मे देखते हुए उसकी गाड के पाटो को सहलाते हुए बोला - अगर वो मेरी बीवी चोदेगा तो मै उसकी बीवी नही चोद दूँगा ।

रज्जो थोडी मुस्कुराई और एक हाथ नीचे ले जाकर अपने पति का खड़ा होता लण्ड कूरते के उपर से जकड़ते हुए - आप भूल रहे हो ,,, उनकी बीवी आपकी बहन है उम्म्ंम्ं ,,, फिर भी चोदोगे क्या हा बोलो ना

कमलनाथ अपने लण्ड पर रज्जो के हाथो का स्पर्श पाकर और ममता को चोदने के अह्सास से एकदम से सिहर उठा और उसका लण्ड सख्त होने लगा । जिस्का आभास रज्जो मे अपनी हथेली मे होने लगा ।

रज्जो वापस से कुरते के उपर से कमलनाथ का लण्ड सहलाते हुए - बोलो ना ,चोदोगे क्या अपनी बहन को उम्म्ंम्ं ,

कमलनाथ कसमसा कर सिहरते हुए - बहन है तो क्या हुआ ,,अगर मेरी बीवी को वो चोदेगा तो मै भी उसकी बीवी को अह्ह्ह उम्म्ंम्ं अराआआम से उम्म्ंम्म्ं

इधर रज्जो कमलनाथ के पजामे मे हाथ घुसा कर लण्ड थाम चुकी थी ।

रज्जो कमलनाथ का लण्ड पकडकर उसकी चमडी खिचते हुए - तो सीधा बोलो ना कि अपनी बहन को चोदने के लिए मुझे नंदोई जी से चुदवाना चाहते हो ।

कमलनाथ रज्जो की बातो को अपनी कल्पनाओ मे जोडने लगा कि काश ऐसा हो जाये और वो खुल कर ममता को चोद पाये ।

रज्जो कमलनाथ पर अपनी बातो का असर होता देख - उम्म्ंम्ं सोचो ना इधर नंदोई जी लण्ड मेरी चुत मे गया नही उधर आपको आपकी बहन मिल जायेगी चोदने के लिए उम्म्ंम्म्ं

कमलनाथ के दिल की धडकनें तेज हुई जा रही थी और वो बस रज्जो की बाते अपनी कल्पनाओ मे जोडते जा रहा था और उसका लण्ड कड़ा हुआ जा रहा था ।

रज्जो ने इस बार अपनी हथेली को कमलनाथ के आड़ो तक सह्लाया और बोली - आप हर रात मेरे साथ बहन को चोदने के ख्वाब देखते हो ,,, फिर हम दोनो आपके लण्ड के नीचे होगे और मै खुद आपकी बहन की चुत आपके लिये तैयार करूंगी ।

इधर कमलनाथ की हालत पूरी तरह से खराब हो गयी और रज्जो के साथ अपनी बहन को चोदने का ख्याल उसे चरम पर ले आया। और रज्जो की बाते खतम होते ही कमलनाथ के लण्ड ने खडे खडे ही पिचकारी देनी शुरु कर दी ।

कमलनाथ को झड़ता देख रज्जो ने आखिरी दाव खेला और वो उसके झड़ते लण्ड के आड़ो को सहलाने जिस्से कमलनाथ को और आनन्द आने लगा झडने मे ।

मौका देखकर रज्जो ने कमलनाथ को कबुलवाना शुरु किया - तो बोलो ना चोदोगे ना अपनी बहन को मेरे हाथ बोलो ना उम्म्ंम बोलो

कमलनाथ आंखे बंद किये हुए झड़ते हुए - अह्ह्ह हा रज्जो मै चोदूंगा अपनी बहन को उन्म्म्ं अह्ह्ह ममता उह्ह्ह्ह रज्जो मुझे तुम दोनो को एक साथ चोदन है उम्म्ंम अह्ह्ह

रज्जो कमलनाथ के मुह से अपने काम लायक बाते कबूलवा ली और उसका लण्ड निचोड कर मुस्कुराने लगी ।

कमलनाथ झड़ कर हाफते हुए सोफे पर बैठ गया और रज्जो उसे एक ग्लास पानी देती है और एक खराब कपडे से उसका वीर्य साफ करके कमलनाथ के बगल मे बैठ जाती है ।

कमलनाथ का मन शांत हुआ और उसे अब थोडी शर्म आने लगी थी तो रज्जो मुस्कुरा कर - क्या हुआ जी

कमलनाथ हस कर - तुम ना एक नम्बर की चालू हो क्या क्या कबूलवा ली हमसे

रज्जो कमलनाथ चिपक कर - इसमे कबूलवाना क्या था ,, हमको बहुत पहले से ही आपकी ममता को लेके क्या राय है ये पता था ,,,बीवी हू अपने पति के दिल का हाल नही जानुन्गी हिहिहिही

कमलनाथ रज्जो के कंधे पर हाथ रखकर- तुमको अजीब नही लगा कि मै अपनी बहन को लेके ये सब ... मतलब समझ रही हो ना

रज्जो हस कर - अरे घर के माल पर किसकी नजर नही रहती जी फिर तो ममता है ही इतनी मालदार हिहिहिहिही

कमलनाथ हस कर - फिर तो तुम्हारे राजेश ने भी ट्राई किया होगा तुम पे ,,,

रज्जो हस कर - उससे क्या फायदा ,,उसकी किस्मत आपके जैसे थोडी है हिहिहिही

कमलनाथ रज्जो का व्यंग समझ गया था- लेकिन रज्जो ये सब होगा कैसे ।

रज्जो थोडा इतराइ- पहले तो मुझे मेरी नंदरानी के इरादे जानने है कि वो क्या सोचती हैं अपने भैया को सईया बनाने के बारे मे हिहिहिही

कमलनाथ - और फिर

रज्जो हस कर- फिर नंदोई जी निबटना पड़ेगा हिहिहिही

कमलनाथ के दिल की धडकनें रज्जो की बातो सुन कर तेज होने लगी ।

कमलनाथ हिचक कर - मतलब तुम मेरे लिए राजन के साथ ....

रज्जो - क्यू अपने पति लिए इतना भी नही कर सकती मै ,,हा

कमलनाथ धड़कते दिल के साथ - लेकिन मेरा दिल इसके लिए राजी नही है रज्जो ,,, मै इत्ना स्वार्थी नही बन सकता

रज्जो ने बात को भावनात्मक होते देख थोडा शर्मा कर कमलनाथ के सीने में सर रख कर - धत्त आप तो समझते ही नही
 
कमलनाथ रज्जो के इस वक्तव्य से उत्तेजना से भर गया और उस्का लण्ड फिर से ठुमक उठा और वो अपने धडकते दिल के साथ रज्जो को अपने आंखो के सामने करता हुआ हिचक कर बोला - तो इसका मतलब तुम भी राजन से ???

रज्जो मुस्कुराते हुए शर्मा कर - हाआआ , नहीईई मतलब वो मै बस देखूँगी समझूँगी कि वो आज सुबह के बात पर क्या सोचते है मेरे बारे मे

कमलनाथ रज्जो के दिल की बात समझ गया और हस कर - मै समझ गया , तू भले ही ना बोल मेरे सामने ।

रज्जो शर्माने लगी ।

कमलनाथ - वैसे मेरे से बड़ा है या मोटा

रज्जो का दिल धक्क कर गया कमलनाथ की बात सून कर और वो आंखे बड़ी कमलनाथ को देखते हुए - क्या मतलब

कमलनाथ हस कर - वही उसका हथियार ,, तुने देख रखा है ना ,, बोल हिहिहिही

रज्जो शर्मा कर - क्या आप बस करिये ना ,,,चलिये अब तैयार हो लिजिए

फिर कमलनाथ हस्ता हुआ कपड़े बदलने के लिए खड़ा होता है ।

इतने मे ममता कमरे के दरवाजे पर खटखट होती है ।

रज्जो दरवाजा खोलती है - अरे ममता तू , आ अन्दर आ

ममता हस कर अन्दर आते हुर - हा भाभी वो कल जी जीन्स ट्राई की थी ना वो दे दीजिये ।

रज्जो एक नजर कमलनाथ को देखती है और हस कर - क्यू सिर्फ जीन्स ही पहन के जायेगी क्या हिहिहिह

ममता अपने भैया को देख कर थोडा शर्मा गयी और हस्ते हुए - हा और उसके उपर का भी चाहिये था हिहिहिही

रज्जो फिर आलमारी से कल वाली जीन्स और एक लॉन्ग टॉप दी मुश्किल से उसके आधे चुतडो तक जाती।

ममता उस टॉप को खोलकर देखते हुए - भाभी और कोई बड़ा नही है इससे

रज्जो - नही रे मै ऐसे ही शॉर्ट वाले ही पहनती हू

कमलनाथ - अरे तो क्या हुआ इसमे क्या बुराई है ,,,तुम भी ना ममता जा पहन कर तैयार हो जा जल्दी कर, दस बजने वाले है भाई

ममता कमलनाथ की बात पर चुप हो गयी और उसे ध्यान आया कि रज्जो ने उसे कोई दुप्प्ता दिया ही नही ।

ममता - हा भाभी इसका दुपट्टा

रज्जो हस कर - क्या ममता तु भी ,, जीन्स पर कोई दुपट्टा लेता है ,,, क्या जी आप ही समझाओ आपनी लाडोरानी को हिहिही

कमलनाथ हस कर - हा ममता ,, ये मॉडर्न कपडे है ना और तुम क्या जब शादी से पहले जीन्स पहनति थी तो दुपट्टा लेती थी हिहिह

ममता हस कर - हा लेकिन ,,, अच्छा ठिक है मै आती हू तैयार होकर ।

फिर ममता वो कपडे लेके अपने कमरे मे चली जाती है ।

रज्जो कमलनाथ को छेड़ते हुए -ओह्हो मतलब शादी के पहले से अपनी माल पर नजर रखे हुए थे ।

कमलनाथ रज्जो की बात पर हस देता है ।

थोडी देर बाद उपर चारो लोग तैयार होकर अपने क्मरे से बाहर निकलते है

इधर जहा कमलनाथ की आंखे ममता को देखकर चमक उठती है वही राजन की आंखे रज्जो को ।

रज्जो ममता की तारिफ करती है तो वो शर्माजाती है ।फिर वो दोनो आगे चलते हुए नीचे जाने लगति है वही राजन और कमलनाथ की नजर जीन्स मे कसे हुए उनके भारी मटकते कूल्हो पर जाती है दोनो के मुह से आह्ह्ह निकल जाती है और वो दोनो एक दूसरे को देख कर हस पड़ते है ।

फिर सारे लोग नीचे हाल मे आते है जहा सोनल और पल्लवि भी जीन्स और टॉप मे थी , वही अनुज और रमन जीन्स टीशर्ट मे थे ।

कमलनाथ खुद को और फिर राजन को देखता हुआ - भाई आप सब तो एक ग्रुप लग रहे है हमे छोड कर

पल्लवि चहक कर - नही मामा जी ,,आप और पापा दोनो बहुत अच्छे लग रहे है शर्त पैंट मे हिहिहिही

सोनल - हा मौसा ,

रमन - तो चला जाये , ई रिक्सा आ गया है ।

कमलनाथ - हा हा भाई अब काहे की देरी , चलिये सब लोग

फिर सारे लोग निकल पड़े शहर के pvr मे ।

8 टिकिट कराई गयी और एक ही लाईन मे लगभग सबको सीट मिल गयी ।

वही अन्दर घूसने पर अब जो आगे था वो वैसे ही लाईन मे घुसते हुए बैठता चला गया ।

सबसे पहले अनुज फिर पल्लवि फिर सोनल फिर रमन फिर राजन फिर रज्जो फिर ममत और फिर कमलनाथ ।

अनुज सबसे कॉर्नर पर था तो पल्लवी को काफी खुशी थी कि अनुज उसके साथ है । इधर जैसे ही लाईट ऑफ़ हुई वही पल्लवी ने अनुज के हाथ मे हाथ डाल दिया ।

अनुज की हालात खराब होने लगी वो एक नजर आगे झुक कर अपने बाई ओर झाका तो देखा कि सबकी नजरे पर्दे पर है फिर उसे भगवान से किये तौबा को याद किया और पल्लवी को मना करते हुए हाथ खिच लिया अप्ना ।

पल्लवि अनुज के इस व्यवहार से तुनक कर वापस पर्दे की ओर मुह कर ली ।

अनुज ने एक राहत की सास ली ,वही पल्लवि फिर से नोर्मल होते हुए सोचने लगी की आखिर अनुज सुबह से ही क्यू ऐसा व्यवहार कर रहा है ।

तो वो वापस अनुज की ओर लपक कर - मुझसे कोई गलती हुई क्या अनुज

अनुज पल्लवि का चेहरा अपने करीब पाकर परेशान होने लगा उसे डर लग रहा था कि कही सोनल दीदी ना देख ले उसे ।

अनुज - न न नही तो कुछ भी नही

पल्लवि - तो तुम मुझसे दुर क्यू जा रहे हो

ये बोलकर पल्लवी वापस अनुज के कलाई मे हाथ डाल दी ।

अनुज ने सोचा की अगर ये सिर्फ इतने मे ही खुश है तो ऐसे रहने देते है ,,नही तो कही इससे बात करते हुए दीदी ने सुन लिया तो गड़बड़ हो जायेगी ।

वही पल्लवी ने देखा कि अनुज ने इस बार उसे नही रोका तो वो मुस्कुरा कर पर्दे पर देखते हूए अपनी उंगलियाँ अनुज के उंगलियो मे फसा ली और जकड़ ली ।

पल्लवि की इस हरकत से अनुज गनगना गया और उसकी आंखे बन्द हो गयी । वो लम्बी सासे लेनें लगा वही पल्लवि मुह में अपनी हसी दबाने लगी ।

इधर जहा ये दो लैला मजनुओ का शो चालू था वही इसी लाईन मे दो और मजनू अपनी लैला को ताडे जा रहे थे ।

राजन और कमलनाथ ।

दोनो की नजरे रज्जो और ममता की टॉप से झाकती चुचियो की दरारो पर जमी थी ।

सही मायने मे मूवी पर ध्यान किसी का भी नही था ।

सोनल और रमन अपने अपने होने वाले जीवनसाथी से texting मे बिजी थे , बाकी 3 लैला मजनू आप से व्यस्त थे ही ।

इधर पल्लवि सोनल पर बखुबी नजर बनाये हुए थी और उसने मौका देखकर हाथ को नीचे अनुज की जांघो तक लेके चली गयी ।

अनुज की हालत अब और पतली हो गयी और डर से कापने लगा , लेकिन पल्लवि का स्पर्श उसे उत्तेजित भी कर रहा था ।

उसे समझ ही नही आ रहा था कि वो क्या करे ,, वही पल्लवि अनुज को परेशान देख कर बहुत चहक रही थी और उसने अपने हाथ उसकी जांघो पर घिसने शुरु कर दिये ,,,नतिजन अनुज का लण्ड अंगदायी लेना शुरु कर दिया ।

वो आंखे बंद करके गहरी सासे लेता रहा और इस नये उत्तेजक अनुभव को मह्सूस करता रहा ।

ये सब काफी समय तक चलता जबतक इंटरवल नही आ गया । बंद लाईट का मजा सिरफ पल्लवि ने लिया ।

हाल की लाईट जल उथी और सब के सब अलर्ट हो गये ।

सब बाहर निकल कर आये और अंगड़ाई लेते हुए एक दुसरे के चेहरे को देखा कोई मूवी के बारे में लेके उत्सुक नही था ,,,यहा तक पल्ल्वी और सोनल भी ।

कमलनाथ - क्या हुआ भाई लग रहा है यहा किसी का मन नही लग रहा है ,,, क्यू पल्लवि बेटा फिल्म अच्छी नही थी

पल्लवि चौकी मगर उसके पहले रज्जो - अरे फिल्म ही अच्छी नही है इससे अच्छा हम लोग घर पर बैठ के देख लेते

ममता - हा भाभी सही कह रही है ,,वहा थोडे पैर फैलाने की जगह तो होती ,,यहा तो बैठे बैठे कमर अकड जा रही है

ममता कमर तोड़ते हुए अंगड़ाई लेते हुए बोली ।

राजन - भाईसाहब चलिये यहा से ,,,कही और कोई जगह चलते है यहा तो मुझे भी नही जम रहा है ,,,ये पर्दे की रोशनी भी आंखो मे चुभ रही थी ।

कमलनाथ - चलो ऐसी बात है फिर चल्ते है ।

फिर सारे लोग हाल से बाहर निकल आये ।

कमलनाथ- भाई अब कहा जाना है ,,,बोल ममता तू ही

ममता की नजर सामने एक कुल्फी वाली स्टाल पर गयी तो वो खिखीयाते हुए रज्जो से धीमी आवाज मे बोली - भाभी चलो ना कुल्फ़ी खाई जाये

रज्जो हस कर - अरे तुझे कुल्फ़ी खानी है तो अपने भैया से बोल ना ,,,वो खिला देंगे तुझे हिहिहिही

रज्जो की दोहरी बाते कमलनाथ और ममता दोनो समझ गये थे ।

कमलनाथ - अरे तू इतना शर्मा क्या रही है ,,हम यहा घुमने खाने हि आये है ,चलो सब लोग कुल्फ़ी खाते है ।

फिर सब ने कुल्फ़ी खाई , इसी दौरान सोनल ने मोबाईल मे सर्च करके पास मे ही एक पार्क को खोज लिया ।

सोनल - मौसा यही बगल मे एक नेशनल पार्क , वहा चला जाये काफी ब्डा दिख रहा है, यहा झूला भी है

इतने मे पल्लवि चहकी - सच मे दिदी , दिखाओ

पल्लवि सोनल के मोबाईल मे देखते हुए - अरे वाअह्ह्ज सच मे ,, चलो ना मामाजी वही चलते हैं मजा आयेगा ।

कमलनाथ - अच्छा ठिक है भाई चलो चलते है पहले ये कुल्फी तो खतम कर लो ।

फिर सबने कुल्फी खतम कर औटो से निकल गये नेशनल पार्क की ओर

गर्मियो का दिन था तो पार्क मे सभी को बहुत आनन्द मिल रहा था, सारे लोग घास पर ही एक बडे पेड़ के नीचे बैठ गये और बाते करने लगे ।

इधर महिलाओ मे सबको बडी दिक्कत हो रही थी कारण था उनकी जीन्स और ऐसे में ममता को जोर की पेसाब लग रही थी ,,क्योकि कुल्फ़ी असर था ।

उसमे धीरे से रज्जो के कान मे बोला तो वो मुस्कुराइ

फिर उसने इधर उधर नजर दौडाई और फिर ममता को लेके तरफ जाने लगी ।

रज्जो - आप लोग बैठो हम अभी आते है ।

सारे लोग समझ गये कि वो सब बाथरूम के लिए ही जा रही है ।

फिर वो रज्जो ममता को लिवा कर बाथरूम खोजते हुए एक ओर निकल गयी ।

इधर बाकी के लोग सब आपस मे बाते करने लगे तो सोनल अपने मोबाईल मे सबकी तस्वीरे निकालने लगी ।
 
धीरे धीरे 15 मिंट का समय बिता तो राजन को फ़िकर हुइ ।

राजन कमलनाथ के पास होते हुए - भाईसाहब ये ममता और भाभी जी को आ जाना चाहिए था,

कमलनाथ ने भी घड़ी देखी और उसे भी ताज्जुब हुआ ।

कमलनाथ - कही वो लोग आगे तो नही निकल गयी

राजन - चल के देखे भाईसाहब,,मुझे ना जाने क्यू फ़िकर हो रही थी ।

राजन को विचलित होता देख कमलनाथ ने हामी भरी और उठ कर खड़ा हुआ - बच्चो तुम लोग यही रहना हम अभी जरा देख कर आते हैं।

अनुज - क्या हुआ मौसा

कमलनाथ- अरे कुछ नही बेटा, बस हम लोग जरा फ्रेश होकर आते है ,,यही रहो तुम लोग

फिर कमलनाथ राजन को लेके उसी दिशा मे आगे बढ गया जिधर रज्जो और ममता गयी थी ।

धीरे धीरे आगे बढने पर जगह सुनसान होती चली जा रही थी और इधर कोई बाथरूम भी नजर नही आ रहा था ।

आगे की ओर चलने पर रास्ता सकरा था और झाडिया घानी थी ,,लग रहा था जैसे पार्क के उस हिस्से पर कोई रख रखाव नही किया गया हो काफी समय से ।

राजन - भाईसाहब कहा गयी होगी सब आखिर ,,यहा तो कोई नजर ही नही आ रहा है

कमलनाथ उम्मीद भरे लहजे मे - शायद बाथरूम ना मिल्ने की वजह से आगे गयी हो सब,,चलो थोडा बढ के देख लेते है

फिर वो दोनो आगे चल रहे होते हैं कि सामने से दो कालेज के बच्चे हस्ते हुए आप्स मे बात करते हुए जा रहे थे ।

जैसे ही उनहोने राजन और कमलनाथ को क्रॉस किया उनमे से एक ने हस के बोला - याररर उस सावली वाली गाड देखी हिहिहिहो कितना फैला कर बैठी हुई थी यारर

दुसरा लड़का भी उसकी बातो मे सहमती देखे हसता और वो आगे निकलजाते ।

इधर राजन और कमलनाथ के कान खड़े हो जाते हैं उन लड़को की बाते सुनकर,,,वो दोनो एक दूसरे को फैली हुई आन्खो से देखते हैं ।

राजन हिचक कर - मुझे लग रहा है भाईसाहब वो लड़के शायद भाभी जी के बारे मे ही बोल रहे थे ।

कमलनाथ राजन से नजर फेरते हुए - हम्म्म्म सही कह रहे हो राजन ,,चलो आगे चलकर देखते हैं , मुझे बहुत चिंता हो रही है ।

ये बोलकर कमलनाथ तेज कदमो से उसी तरफ आगे बढता है जहा एक तरफ झाडियो के पास उसे कुछ हलचल सुनाई देती है ।

वो अपनी चाल धीमी कर रास्ते से झाडियो के बिच बने मिट्टी के सकरे रास्ते पर चलने लगता है ।

तभी वो अचानक से रुक जाता है और इतने मे राजन उसके पीछे आकर खड़ा होता है ।

राजन - क्याआ हुआआ भाईसाहब मीईइलीईई की नही

राजन के शब्द पुरे होने से पहले उसकी नजर सामने के दृश्य पर गयी । जहा ममता रज्जो की गाड़ पर उसका जीन्स चढवाने मे मदद कर रही थी ,,,मगर वो बहूत टाइट थी और जांघो मे ही कसी थी ।

ममता हाफते हुए - उह्ह्ह भाभीईई ये न्हीई हो रहा है

रज्जो थोडा उछल कर अपनी जीन्स मे गाड़ को घुसाना चाह रही थी मगर उसके फुटबाल जैसी गाड के निचले हिस्से में जीन्स अटक गई थी और उछलने से उसकी गाड़ के पाट बहुत ही कामुकता से हिल रहे थे

कमलनाथ और राजन बडे ही आवाक होकर रज्जो की उछलती गाड़ को निहारे जा रहे थे ।

राजन थोडा गले को खराशा - अह्हूउम्हुहुह्ंमम्म ,

फिर मुह दुसरी ओर करके बोला - मेरे ख्याल से भाईसाहब आपको जाना चाहिए और मदद करनी चाहिए ।

राजन की बात सुन कर कमलनाथ चौका और राजन की ओर घुमा तो राजन उसकी ओर पीठ करके खड़ा था ।

कमलनाथ - अ ब ब हा सही कह रहे हो रुको मै आता हू

ये बोलकर कमलनाथ रज्जो के पास चला गया और कमलनाथ को देख कर रज्जो चौकी - अरे आप उम्म्ंम अच्छा किये आ गये । चलिये थोडी मदद किजीए

कमलनाथ - अरे तुम लोग काफी समय से अये नही तो मुझे चिन्ता हुई मै और राजन खोजते हुए इधर तक आ गये ।

रज्जो राजन का नाम सुन कर चिहुकी - क्याआआ नंदोई जी आये है ,,कही उन्होने देखा तो

कमलनाथ - वो सब छोडो वो बाहर है ,,,ये तुम कैसे अटका ली ।

रज्जो परेशान होते हुए - वो क्या है जी हम लोग पेसाब कर रहे थे कि कुछ आवारा लडके हमे देख लिये और आवाज करने लगे तो जल्दी जल्दी इसको उपर करने के चक्कर मे ये जांघो मे फस गयी ।

कमलनाथ रज्जो के नीचे बैठ कर उसकी गाड़ के चर्बीदार पाटो से जीन्स की उल्टी हुई पेति को सीधा करने लगता है जिसे ममता बडे ध्यान से देखती है ।

वही राजन भी झाडियों के पास से अन्दर झाक रहा होता है और रज्जो की मोती गाड़ उसे उत्तेजित किये जा रही थी । तभी ममता की नजर राजन पर गयी और उसने रज्जो का मजा लेने के लिए राजन को आवाज दी ।

ममता - क्या जी छिप छिप कर देख रहे है ,,,यहा आ जाईये

रज्जो - क्याआ नहीईईईई,,,, ममता तू पागल है क्या

रज्जो को परेशान देख ममता हसने लगी

कमलनाथ हस कर - ममता तू भी ना ,,, सुधरेगी नही हाहह्हहा

इधर कमलनाथ ने जीन्स को सही करके वापस से उपर चढा दिया और फिर अपनी उंगलियाँ चटकाई ।

रज्जो ने अपनी कमर बन्द करके कप्डे सही किये और बोली -सच मे नंदोई जी ने देखा क्या

ममता हस कर - हा पूरा खजाना देख लिया भाभी आपका हिहिहिहिही

कमलनाथ ममता के सर पर हल्की चपट लगाते हुए - तू बडी मजे ले रही है हमम्म

ममता तुनक कर - क्या भैया आप क्यू बिच मे आ रहे ,,,ये हम ननद भौजाई की आपस की बात है हिहिहिही

फिर सब लोग वाप्स झाडियो से बाहर आये जहा राजन बाहर खड़ा था और रज्जो उसको देख कर मुस्कुराते हुए ममता के साथ आगे चली गई ।

राजन - माफ कीजिएगा भाईसाहब ये ममता बडी चंचल है हाहह्हा ,,, लग रहा है अब फिर से भाभी जी माफी मांगनी पड़ेगी

कमलनाथ हस कर - तुम भी राजन खुददार आदमी हो भाई हाहह्हह ,,, माग लेना भाई माफी घर चलकर

फिर थोडी देर बाद सारे लोग इक्कठा हुए और सबको भूख लगी थी तो सब पार्क से निकल कर एक रेस्तरां मे गये और खाना खाने के बाद घर के लिए निकल गये ।
 
एक तरफ जहा जानिपुर मे ये सब घटित हो रहा था ,वही चमनपूरा मे राज भी अपना तिगडम सेट करने की फिराक मे था ।

राज की जुबानी

सुबह उठ कर वही राज नहा धोकर दुकान पर चला गया और काम मे लग गया ।

थोडी देर बाद चंदू नासता लेके दुकान पर आता है ।

मै - अबे साले इनसब की क्या जरुरत थी बे ,,,मम्मी अभी नासता लाती ही होगी

चंदू - साले नाटक मत कर ,,दीदी ने खुश होकर तेरे लिए प्याज़ के पकोड़े बनाये है

मै ह्स कर - लग रहा है तेरी दीदी को मेरा अंदाज पसंद आ गया क्यू ह्हिहिहिहिही

चंदू - अबे जब मुझे तेरे चोदने का तरीका पसंद आया तो उसे क्यू नही आयेगा ,,,क्या हिला हिला के पेल रहा था भाई ,,मजा आ गया तेरे साथ हिहिहिही

मै - तो आज रात भो रेडी रहना

चंदू उखड़े मन से - नही यार शाम को ही मेरा बाप आने वाला है ।

चंदू की बाते सुन कर मेरा भी मन थोडा डाउन हुआ

मै - लेकिन वो लोग तो कल आने वाले थे न

चंदू खीझ कर - हा यार लेकिन मेरे बाप को मै बहुत खटकता हू ,,,हर बात के लिये टोकता है और सूनाता रहता है

मै कुछ सोच कर - देख भाई जहा तक मै समझता हू इस समय तेरी कोई पढाई नही चल रही है और धीरे धीरे तू ब्डा ही हो रहा है उनकी नजर मे ,,,एक तो वो अपने काम से खुद परेशान होते है उपर से तुझे खाली देख के उनका गुस्सा फाल्तू मे तुझ पर ही निकल पडता है ।

चंदू मेरि बात को समझने की कोशिस करता हुआ -हा तो तू ही बता क्या करू मै

मै हस कर - तू अपने पापा के साथ काम पर ही चला जाया कर ,,घर बैठने से अच्छा होगा और फिर तेरी मालती भी तो वही रहती है ना हिहिहिही

चंदू मेरा सुझाव सुन कर चहक उठा - अरे हा भाई ,,,इसके बारे मे तो मैने सोचा ही नही ।

चंदू - लेकिन पापा से ऐसे कैसे कहू काम पर जाने के लिए,,, मुझे तो अजीब सी घबडाहट हो रही है । ये साला अच्छा काम करने मे इतनी दिक्कत क्यू होनी शुरु होती है ।

मै हस कर - तु चिन्ता ना कर मै रजनी दीदी से बात करता हू कल

चंदू खुश हुआ , फिर हमने आगे कैसे चम्पा के साथ मस्ती करनी है उसकी प्लानिंग की और फिर वो घर चला गया ।

मै वापस दुकान के कामो मे लग गया और थोडा ग्राहको से डील करने के बाद करीब 11 बजे तक जब मै फ्री हुआ तो मोबाईल खोलते ही मुझे काजल भाभी का ख्याल आया ।

मै एक से नयी ऊर्जा से भर गया ,,फौरन मैने whatsaap ओपेन किया और काजल भाभी का last seen चेक किया जो अभी कुछ मिंट पहले का ही था ।

फिर मैने वापस से अपनी status setting को only for पर सेट करते हुए काजल भाभी का नम्बर सेलेक्ट किया और वापस से कुछ नये मॉडल के ब्रा और पैंटी की तस्वीरे पोस्ट कर दी ।

फिर मैने उन्ही चारो फ़ोटो को काजल भाभी पर सेंड कर दिया और तुरंत delete for everyone पर क्लिक करके सारी फ़ोटो डिलीट कर दी ।

फिर मैने अपना फोन वापस रख दिया और दुकान के कामो मे लग गया ।

अभी मुस्किल से 10 मिंट ही बीते थे कि मोबाईल पर notification बिप हुआ और मैने चेक किया तो मेरी प्लानिंग तहत काजल भाभी का मैसेज था । मै जानता था कि मेरे मैसेज डिलीट करने पर उन्की जिज्ञासा बढेगी और वो इस बारे मे जरुर पूछेगी ।

हुआ भी वही ।

एक तरफ जहा जानिपुर मे ये सब घटित हो रहा था ,वही चमनपूरा मे राज भी अपना तिगडम सेट करने की फिराक मे था ।

राज की जुबानी

सुबह उठ कर वही राज नहा धोकर दुकान पर चला गया और काम मे लग गया ।

थोडी देर बाद चंदू नाश्ता लेके दुकान पर आता है ।

मै - अबे साले इनसब की क्या जरुरत थी बे ,,,मम्मी अभी नाश्ता लाती ही होगी

चंदू - साले नाटक मत कर ,,दीदी ने खुश होकर तेरे लिए प्याज़ के पकोड़े बनाये है

मै ह्स कर - लग रहा है तेरी दीदी को मेरा अंदाज पसंद आ गया क्यू ह्हिहिहिहिही

चंदू - अबे जब मुझे तेरे चोदने का तरीका पसंद आया तो उसे क्यू नही आयेगा ,,,क्या हिला हिला के पेल रहा था भाई ,,मजा आ गया तेरे साथ हिहिहिही

मै - तो आज रात भो रेडी रहना

चंदू उखड़े मन से - नही यार शाम को ही मेरा बाप आने वाला है ।

चंदू की बाते सुन कर मेरा भी मन थोडा डाउन हुआ

मै - लेकिन वो लोग तो कल आने वाले थे न

चंदू खीझ कर - हा यार लेकिन मेरे बाप को मै बहुत खटकता हू ,,,हर बात के लिये टोकता है और सूनाता रहता है

मै कुछ सोच कर - देख भाई जहा तक मै समझता हू इस समय तेरी कोई पढाई नही चल रही है और धीरे धीरे तू बड़ा ही हो रहा है उनकी नजर मे ,,,एक तो वो अपने काम से खुद परेशान होते है उपर से तुझे खाली देख के उनका गुस्सा फाल्तू मे तुझ पर ही निकल पडता है ।

चंदू मेरि बात को समझने की कोशिस करता हुआ -हां तो तू ही बता क्या करू मै

मै हस कर - तू अपने पापा के साथ काम पर ही चला जाया कर ,,घर बैठने से अच्छा होगा और फिर तेरी मालती भी तो वही रहती है ना हिहिहिही

चंदू मेरा सुझाव सुन कर चहक उठा - अरे हा भाई ,,,इसके बारे मे तो मैने सोचा ही नही ।

चंदू - लेकिन पापा से ऐसे कैसे कहू काम पर जाने के लिए,,, मुझे तो अजीब सी घबडाहट हो रही है । ये साला अच्छा काम करने मे इतनी दिक्कत क्यू होनी शुरु होती है ।

मै हस कर - तु चिन्ता ना कर मै रजनी दीदी से बात करता हू कल

चंदू खुश हुआ , फिर हमने आगे कैसे चम्पा के साथ मस्ती करनी है उसकी प्लानिंग की और फिर वो घर चला गया ।

मै वापस दुकान के कामो मे लग गया और थोडा ग्राहको से डील करने के बाद करीब 11 बजे तक जब मै फ्री हुआ तो मोबाईल खोलते ही मुझे काजल भाभी का ख्याल आया ।

मै एक से नयी ऊर्जा से भर गया ,,फौरन मैने व्हाट्सअप ओपेन किया और काजल भाभी का लास्ट सीन चेक किया जो अभी कुछ मिंट पहले का ही था ।

फिर मैने वापस से अपनी स्टेटस सेट्टिंग को ओन्ली फॉर पर सेट करते हुए काजल भाभी का नम्बर सेलेक्ट किया और वापस से कुछ नये मॉडल के ब्रा और पैंटी की तस्वीरे पोस्ट कर दी ।

फिर मैने उन्ही चारो फ़ोटो को काजल भाभी पर सेंड कर दिया और तुरंत डेलीट फॉर एवेरिवन पर क्लिक करके सारी फ़ोटो डिलीट कर दी ।

फिर मैने अपना फोन वापस रख दिया और दुकान के कामो मे लग गया ।
 
अभी मुस्किल से 10 मिंट ही बीते थे कि मोबाईल पर नोटिफिकेशन बिप हुआ और मैने चेक किया तो मेरी प्लानिंग तहत काजल भाभी का मैसेज था । मै जानता था कि मेरे मैसेज डिलीट करने पर उन्की जिज्ञासा बढेगी और वो इस बारे मे जरुर पूछेगी ।

हुआ भी वही ।

काजल - हाई सुनो

मै - हाई भाभी ...गुड मॉर्निंग //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f604.svg कहिए

काजल - वो क्या डेलीट किए हो भेज के

मै - कुछ नहीं भाभी वो ग़लती से गया था...सॉरी

काजल - अरे ऐसा क्या था की सॉरी बोल रहे हो

मै - //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg नहीं बताउन्गा मैं

काजल - ये क्या बात हुई ...जल्दी बताओ क्या भेजे थे

मै - वो कुछ फोटोस थे

काजल - दिखाओ मुझे

मै - रहने दो भाभी प्ल्ज़्ज़

काजल - अब तो बिना फोटो लिए मैं नहीं मानूँगी , जल्दी भेजो //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f928.svg

मै - //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg ओक देता हूँ

फिर मैने वापस से वही तस्वीरे भेज दी जो अपने स्टेटस पर लगाई थी ।

काजल - अरे तो वही है ना , जो तुम स्टेटस पर लगाए हो

मै - हा //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg वो मैं स्टेटस लगा रहा था तो ग़लती से आपके नंबर पर भी क्लिक हो गया था

काजल - //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f604.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f604.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f604.svg कोई बात नही हो जाता है....लेकिन तुम ये सब स्टेटस पर क्यू लगाते हो , शरम नहीं आती

मै - //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f601.svg दुकानदार हूँ भाभी , जब इन्ही चीज़ो का बिज़्नेस है तो शरम काहे की

काजल - तो क्या कोई पुछ्ता भी है इन सब के बारे मे जो स्टेटस पर लगाए हो //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg

मै - अरे भाभी मेरे काफ़ी सारे ऑर्डर फोन से ही हो जाते . ,

काफ़ी सारी लॅडीस है जो अपना समान व्हाट्सअप पर ऑर्डर कर देती है जो मार्केट मे चार लोगो के सामने ऐसे चीज़े खरीदने मे झिझक महसूस करती है

काजल - फिर तो अच्छा है जी ,

मै - आप भी चाहो तो ऑर्डर कर सकते हो //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg

काजल - बदमाश कही के , मुझे चाहिए होगा तो मम्मी जी से बोल नहीं दूँगी

मै - हा लेकिन ऐसे मॉडेल के लिए थोड़ी ना कह पाएगी बड़ी मम्मी से //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg//cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg

काजल - चुप पागल कही के ... बडो से ऐसे बात करते है //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg

मै - देखिए मुझे अपना देवर नहीं दुकानदार समझिए ... मेरे पास और भी मॉडेल है मैं उनको भेजता हूँ . आपको चाहिए होगा तो बता दीजिएगा

काजल - हे भगवान तुम भी ना .. ठीक है भेज देना .. ओके अभी मुझे काम है .. बाइ

मै - ओक बाइ //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f605.svg

मै काफी खुश हुआ कि चलो योजना कामयाब रही बस एक बार इन टॉपिकस पर बात शुरु होने की देरी है ,,,फिर काजल भाभी को कैसे लपेटना है ये मै अच्छे से जानता हू ।

मै वापस खुशी खुशी काम पर लग गया ।

थोडी देर बाद मा खाना लेके आई ।

मा - ले जल्दी से खाना खा ले और पापा को खाना देने चला जा

दुकान मे कोई ग्राहक थे नही और मा खाना रखने पीछे कमरे गयी थी तो मै भी उन्के पीछे जाकर उनको पीछे से पकडते हुए - ओह्ह मा आई मिस्स यू

मा - ऊहह हुउउऊ छोड भाई ,,, बड़ा आया मुझे याद करने वाला

मै मा के गालो को चुमता हुआ - क्या हुआ गुस्सा हो गयी क्या आप

मा - मै क्यू गुस्सा राहु भला ,,तू अकेले ही खुश है अपने दोस्तो मे , मेरी क्या फिक्र है तुझे

मै हस कर पीछे से उसको पकडकर - ओह्ह लग रहा है कल अकेले पापा के साथ मजा नही आया क्या हिहिहिही

मा मुस्कुरा कर - हट बदमश कही का ,,तुझे क्या उससे जब तू था नही हुउउह्ह

मै - आज तो रहूंगा ना तो कल की कमी भी पूरी कर दूँगा ,,,आप नही जानती कितना तडपा हू मै

मा इतरा कर - ओह्हो बड़ा आया तडपने वाला ,, इतनी फिक्र होती तो सुबह ही आ जाता मेरे पास

मै - अब तो आ गया हू ना ,,तो हो जाये एक राउंड हिहिही

मा के चुचो पर हाथ रखते हुए बोला

मा चौकी - नही नही पागल ,, दुकान का समय है ,,जल्दी से खा और पापा भी भूखे है जल्दी उनको भी देके आ ।

फिर मा मुझसे अलग होकर दुकान मे चली गयी और मै खाना खाके पापा के टिफ़िन लेके चल गया दुकान की ओर ।

जारी रहेगी

................................
 
पिछ्ले अपडेट मे आपने पढा जहा एक ओर जानिपुर मे रज्जो और कमलनाथ अपनी योजनाये बना रहे है वही ,, चमनपूरा मे राज काजल भाभी को लपेटे मे ले रहा है ।देखते है उसकी ये कोशिस क्या रंग लाती है ।

अब आगे

राज की जुबानी

मै खाना खाने के बाद पापा को टिफ़िन देके वापस आ गया और वापस दुकान के कामो मे लग गया ।

शाम को 5 बजे तक मा चौराहे वाले घर के लिए निकल गयी ।

इधर मै भी ग्राहको मे व्यस्त था तो काफी समय से मोबाईल चेक नही किया था ।

इसी दौरान काजल भाभी का मुझे फोन आने लगा ।

मुझे खुशी तो बहुत हुई लेकिन ग्राहको की भीड़ की वजह से मै थोडा परेशान भी था ।

इसिलिए मैने उनका कॉल रिसीव करके बोला कि मै दुकान मे व्यस्त हू अभी बात करता हू । उन्होने भी ओके कहा ।

करीब आधे घण्टे बाद मै दुकान से फ्री हुआ और हिसाब किताब मे लगा था कि एक ग्राहक का फोन आया तो मुझे काजल भाभी का काल जहन मे आया ।

उस ग्राहक से बात करके मै फौरन काजल भाभी को फोन घुमा दी ।

फोन पर

मै - हा भाभी जी कहिये

काजल - अरे हा वो तुम अपना whatsaap चेक किये

मै अचरज से - क्यू क्या हुआ ???

काजल मुस्कुरा कर - अरे पहले देखो तो

मै - अच्छा आप लाईन पर रहिये मै देख लेता हू ।

फिर मै फटाफट डाटा ऑन करते हुए whatsaap खोलता हू तो काफी सारे मैसेज मे काजल भाभी का मैसेज सबसे उपर था ।

नीचे सोनल के मिस्स यू वाले मैसेज देख कर मै मुस्कुराया और फिर काजलभाभी का चैट ओपन किया ।

उन्होने दो न्यू लेस्स वाली ब्रा पैंटी सेट मे कलर और दाम के बारे मे पुछा था । मै खुशी से मुस्कराया और वापस मोबाइल को कान के पास लगाते हुए

मै - हा भाभी देख लिया

मेरी बातो मे हसी की एक खनक सी थी जिसे पकड़ते हुए काजल भाभी इतरा के बोली - ज्यादा हसो मत दुकानदार हो ना ,,,दाम और कलर बताओ हिहिहिही

मै हस कर - ये दोनो सेम रेंज की है और दोनो मॉडल मे 6 कलर का सेट है ,,रुकिये मै भेजता है तस्वीर उसकी , जो पसंद हो बताओ ,,,ऐसे ही रहिये लाईन पर

काजल - ओके

मै वापस उन्ही ब्रा-पैंटी सेट्स के सभी कलर की दो तसवीर ली और उनको whatsaap कर दिया ।

मै वापस मोबाइल कान पर लगाते हुए - हा भाभी देखो और बताओ

थोडी देर बाद काजल -

हा वो मैने कलर बता दिया है तुम कल दोपहर मे लेके आना , मै पैसे दे दूँगी ।

मै अचरज से - कल दोपहर मे क्यू?? अभी थोडी देर मे आ ही रहा हू चौराहे पर ना ।

काजल हस कर- ज्यादा तहकीकात नही समझे हिहिही ,,, कल दोपहर को ही

मै समझ गया कि शायद कल दोपहर मे शकुन्तला ताई घर पर नही हो और इसिलिए उनसे छिप कर काजल भाभी मे ऑर्डर दिया है ।

खैर मुझे क्या ,,मुझे तो ऐसा ही मौका चाहिये अकेले मे मिलने का , ताकि मुझे अपना काम करने मे कोई दिक्कत न हो ।

मै फोन रख कर वापस दुकान के कामो मे लग गया , मुझे आगे की प्लानिंग करनी थी कि कैसे क्या करना है ।

शाम को 7 बजे मै दुकान बन्द किया और निकल गया चंदू के घर की ओर ,,,

उसके घर पर उसके मम्मी पापा आ गये थे ।

मैने दोनो को नमस्ते किया ,,हाल मे सारे समान और बैग खुले हुए थे। रजनी दीदी और चंदू समान निकाल कर इधर उधर कर रहे थे ।

मै रजनी से - दीदी ,, इस चंदू को आप काम पर क्यू नही भेजती ,दिन भर बैठा रहता है और पढाई भी बंद है इस समय

रामवीर - अरे बाबू किसी काम लायाक नही है ये ,,बस मुफ्त का रोटी तोड रहा है ।

मै इसी मौके की तालाश मे था और तुरंत रामबीर से मुखातिब होकर - अरे जीजा जी फिर आप इसको अपने साथ ही काम पर ले जाया करो ना ,,बोरिया गिनेगा हिहिहिही

रजनी मेरी बातो से प्रभावित हुई -हा जी सही तो कह रहा है राज ,,, जब तक इसकी पढाई नही शुरु होती अपने साथ ही रखिये कुछ काम सिख ही लेगा ।

रामवीर - ठिक है फिर मै कल ठाकुर साहब से बात करता हू ,

मैने चंदू को आंख मारी और वो भी स्माइल किया ।

थोडी देर बाद चाय नासता करके मै निकल गया चौराहे वाले घर के लिए,,

लेखक की जुबानी

एक तरफ जहा चमनपूरा मे राज और अपने दोस्त चंदू की गोटियाँ सेट करने मे लगा था वही जानिपुर मे भी कुछ लोग अपनी अपनी गोटिया सेट करने मे लगे थे।

शाम 4 बजे तक सारे लोग वापस घर आ गये थे ।

सब हाल मे बैठे हुए थे ,,पल्लवि और सोनल सबको ठंडा पानी दे रही थी ।

इधर रज्जो और राजन की आंख मिचौली चालू थी जिसपर कमलनाथ की नजरे बखूबी बनी हुई थी ।

वही अनुज जो कि पल्लवि से जितना दुर जाने की सोचता पल्ल्वी उसके उतने की नजदीक आने के बारे सोच रही थी ।

लगभग सारे लोग थक गये थे । मगन रमन जो की काफी समय से किसी सोच मे था ।

रमन - मम्मी मै दुकान पर जा रहा हू अभी समय बहुत है तो देख लू थोडा

रज्जो - बेटा वहा काम करने वाले है ना फिर तू क्यू

रमन - हा मा लेकिन शादियो का सीजन है और ऐसे खाली बैठना भी सही नही लग रहा

कमलनाथ - अरे जाने दो रज्जो उसको ,, भाई दुकान भी तो जरुरी है ना

अनुज मानो इसी मौके की तालाश मे था - रमन भैया मै भी चलूंगा

अनुज की बात सुनते ही पल्लवि का मुह लटक गया और वही अनुज बेरहम होकर रमन के साथ उसके दुकान की ओर निकल गया ।

सोनल - चल पल्लवी ,,मै सोने जा रही हू ,,तुझे आना है

पल्लवि अकेले क्या ही करती वो भो सोनल के साथ चली गयी ।

राजन भी अंगड़ाई लेते हुए - उम्म्ंम्ं भाईसाहब मै सोच रहा हू थोडा आराम कर लू , और ये तंग कपडे बदल लू

कमलनाथ - हा राजन ठिक कह रहे हो ,,चलो चलते है ।

फिर सारे लोग उपर जाने लगे और अपने कमरे मे पहुच कर कपडे निकाल कर बेड पर लेट गये ।

रज्जो सिर्फ ब्लाउज पेटिकोट मे कमलनाथ के बगल मे लेटते हुए चिपककर - आजकल बहुत अपने नंदोई के साथ मिलकर मेरा पिछवाड़ा निहार रहे ह्म्म्ं

कमलनाथ रज्जो को अपनी ओर खिचकर - अरे मेरी रज्जो जान तेरा पिछवाडा है ही ऐसा की मै चाहू या ना चाहू ,,,सबकी नजरे अटक ही जाती है ।

रज्जो कमलनाथ की बातो से थोडा शरमाने लगती है ।

कमलनाथ - तो आगे के लिए क्या सोचा है तुने

रज्जो आंखे उपर करके कमलनाथ को देखते हुए हस पडी - अभी बुला दू ममता को क्या हिहिहिही

कमलनाथ - क्यू तू नही रहेगी साथ मे

रज्जो इतरा कर - अरे नंदोई जी को भी तो कोई सम्भालने वाला होना चाहिए ना हिहिहिही

कमलनाथ ह्स कर - धत्त बता ना ,,आगे का क्या सोचा है । मुझे पता है तेरी कुछ योजना जरुर होगी ।

रज्जो मुस्कुरा कर - आप आम खाओ ना , गुठलियों के पीछे क्यू हो हिहिहिही । मुझे जो करना है मै कर लूंगी ।

कमलनाथ - मतलब मुझसे चोरी छिपे ही सब करेगी क्या,, हम्म्म बोल

रज्जो धीरे से हाथ बढा कर कमलनाथ के खडे लंड को उपर से जकड़ लिया और इतरा कर बोली - क्यू आप भी ममता को अपने नंदोई के सामने चोदोगे क्या?? हम्म्म्म

कमलनाथ रज्जो की इस हरकत से सिहर गया और उसने फौरान रज्जो के होठ को मुह मे भर लिया ।

इधर इनकी उत्तेजक भरी काम कीड़ा की शुरुवात हुई थी ,,वही बगल के कमरे मे राजन रज्जो की सुबह से दो बार गाड़ देख कर बहुत उत्तेजित था ,, उसने कपडे निकालने के बाद ममता को मौका ही नही दिया की वो कुछ पहने और ध्क्कम पेल चुदाई चल रही थी ।

वही नीचे सोनल के कमरे मे पल्लवि भी एक टीशर्ट लोवर मे उदास बेड पर बैठी हुई थी । कारण था कि अनुज उससे दुर था ,,उसने क्या क्या सपने सजाये थे वो सब दुर होता नजर आ रहा था ।

बगल मे सोनल खर्राटे भर रही थी । तुनक कर पल्लवि उठी और कमरे से बाहर निकल गयी ।

उसे लण्ड की बहुत तलब मच रही थी और जब से वो घर से आई थी उसे एक बार भी मौका नही मिला कि वो अपने पापा के साथ भी समय बिता सके । हर समय सोनल उसके साथ ही होती थी ।

उसने तय किया और उपर छत पर चल दी ।

उसने जैसे ही अपने पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया उपर के दोनो कमरो मे अचानक शान्ति छा गयी ।

एक ओर जहा राजन ममता की गाड़ मे आधा लण्ड रोक दिया वही रज्जो के मुह में कमलनाथ का लण्ड रुक गया ।

तभी पल्लवि ने राजन को आवाज लगाई - पापा खोलो मै हू

पल्लवि की आवाज सुनकर कमलनाथ का धडकता दिल थमा और वो मुस्कुरा कर रज्जो के बालो मे हाथ फेरता है जिसको रज्जो एक इशारा समझ कर वापस के लण्ड को गले मे उतारने लगती है ।

वही राजन और ममता के भी तेज धडकते दिल शान्त होते है ।

राजन ममता की गाड़ से लण्ड निकाल अपना गम्छा लपेटे दरवाजे की ओर जाता है ।

वही ममता फौरन एक चादर अपने उपर ले लेती है ।

राजन दरवाजे की कुंडी खोल्कर हल्का सा बाहर झाकता है और पल्लवि को अकेला पाकर पूरा दरवाजा खोल देता है ।

पल्लवी अन्दर आते ही चहक उठती है - ओह्ह मतलब आप लोग अकेले अकेले मजे ले रहे ,,मुझे तो भूल ही गये पापा आप हुउउउह्ह

राजन दरवाजा बंद करके प्लल्वी के कंधे पर हाथ रख कर - ऐसी बात नही है रे पल्ली ,,, ये चोदमपुर थोडी ना है कि हम सब ....

पल्लवि - हा तो क्या हुआ बंद कमरे मे कौन आ रहा है हिहिहिहिही

ममता फटी हुई आंखो से राजन को देखती है और फिर पल्लवी से - अगर सोनल तुझे खोजती हुई आ गई तो

पल्लवि चहक के अपनी मा के चादर के घुसते हुए -वो तो सो गयी है हिहिहिही

ममता हस कर - तू बडी बदमाश है ह्म्म्ं

पल्लवी अपनी मा के मुलायम चुचो को छुते हुए - और आप लोग ये लोग बदमाशी कर रहे हो उसका क्या हिहिहिही

ममता पल्लवी के मुलायम हाथो का स्पर्श अपने चुची पर पाते ही सिहर उठी ।

इधर राजन ने अपना गम्छा हटा दिया और वो भी पल्लवि के बगल मे आकर चादर मे घुस गया ।

पल्लवि - हिहिहिही मा देखो मै अब पापा के साथ बदमाशी करने जा रही हू ।

ये बोलकर पल्लवि ने अपने पापा का खड़ा मोटा लण्ड चादर के नीचे से ही थाम लिया ।

राजन पल्लवि के मुलायम हाथो का स्पर्श पाकर बहुत उत्तेज्जीत हो गया ,,,उसे घर पर बिताये वो पल याद आ गये जब आखिरी बार उसने अपने बडे भाई साहब के साथ मिल कर पल्लवि और ममता को चोदा था ।
 
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