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Incest अपनों का प्यार या रिश्तों पर कलंक [ ड्रामा + सस्पेंस ] (completed)

सुहानी--तुझे कैसा लगेगा जब तेरी माँ को तेरी ही आँखो के सामने कोई चोदे.....कैसा लगेगा बता मुझे....

में--जान ले लूँगा मैं ऐसा करने वाले की....

सुहानी--बस यही.....बस यही सुनना चाहती थी में तेरे मुँह से....तेरा बाप मेरी आँखो के सामने मेरी माँ को चोदता था....हम दोनो बहने अपनी आँखो से वो नज़ारा हर रोज देखा करती थी....मेरा पापा तेरे बाप की वजह से शराब मे इतना डूब गया कि मेरे छोटे भाई के साथ आक्सिडेंट मे मर गया....भाई मर गया बाप मर गया....माँ किसी रंडी की तरह आज भी पैसो के लिए चुदवा रही है....लेकिन मैं तुझे मारूँगी नही....तुम सब का एक अनोखा इलाज हमने सोच रखा है....

रीना--वैसे नीरा को भी हम यहाँ लाना चाहते थे....लेकिन अब तक तो वो मर चुकी होगी....दीदी इतनी ज़ोर से पत्थर मारने की क्या ज़रूरत थी बिचारी बच्ची को....

सुहानी--बहन मेरी....इसके घर मे इतनी खूबसूरती भरी पड़ी है कि एक फूल के मुरझाने से कोई फरक नही पड़ेगा....

में--सुहानी मुझे नही पता मेरे पापा ने तुम लोगो के साथ ऐसा क्यो किया....लेकिन हम लोगो ने तुम्हारा कुछ नही बिगाड़ा है....मेरे परिवार को जाने दो....चाहो तो बदले मे मेरी जान ले लो....

सुहानी--चल मैं तुझे एक कहानी सुनाती हूँ...जो मेरे बाबा ने मरने से पहले मुझे सुनाई....तेरा बाप और तेरी रंडी माँ ने ऐसा जाल बिछाया कि मेरे बाबा की इज़्ज़त उतर गयी...उनके तीन दोस्तो ने तो आत्महत्या कर ली लेकिन मेरे बाबा ने हमारी तरफ़ देख कर ऐसा नही किया....प्रधान नाम था मेरे बाबा का....तेरे बाप ने उन्हे पूरी तरह बर्बाद कर दिया....यहाँ तक कि मेरी माँ को भी नही छोड़ा....

में--सुहानी मुझे अफ़सोस है कि मेरे पापा ने ऐसा किया....लेकिन इसकी सज़ा तुम मुझे दे सकती हो मेरे परिवार को जाने दो....

सुहानी--जब में तेरे घर आई थी तेरे बाप के तीसरे पर तेरे बाप की तस्वीर देख कर मैं उस हैवान को पहचान गयी थी....उसे मरना था मेरे हाथो लेकिन मारा गया किसी आतंकवादी के हाथो....मेरा बदला तो अधूरा रह गया....मैने तेरे बाप की तस्वीर के सामने ही कसम खाई थी

तेरी कसम...किशोर गुप्ता में तेरे परिवार का वो हाल करूँगी कि देखने वाले की भी रूह काँप जाएगी.....

में--ठीक है अगर तुम्हे बदला ही लेना है तो मार दो मुझे....

रीना--इतनी आसानी से नही जानेमन....अभी तो खेल खेलना बाकी है....

में--किस खेल की बात कर रही हो तुम....क्या करना चाहती हो....मैं तुम दोनो के सामने हाथ जोड़ता हूँ....जो करना है मेरे साथ करो....लेकिन इन लोगो को छोड़ दो....

सुहानी--अब हम तुझे एक इंजेक्षन देंगे उसकी वजह से तू बेहोश हो जाएगा लेकिन जब होश में आएगा तो किसी वहशी दरिंदे के रूप मे....

रीना--उसके बाद शुरू होगा असली खेल....जो हमने झेला वो तू भी झेलेगा लेकिन अलग तरीके से.....काश हमारा भाई आज ज़िंदा होता....लेकिन अब तुझ से ही काम चलाना पड़ेगा....

में--क्या करने वाली हो तुम दोनो....कौनसा इंजेक्षन लगा रही हो मुझे....

सुहानी--ये एक ऐसा ड्रग है जो दो दिन तक तुझे एक हैवान बना कर रखेगा.....पूरा का पूरा चूत का भूत बन जाएगा.....अगर तू लगातार दो दिन तक चुदाई करता रहेगा तब तो तू बच जाएगा लेकिन ऐसा नही हुआ तो तेरा मरना तैय है.....हो सकता है तेरा परिवार तेरा साथ दे दे और तू बच भी जाए....लेकिन ऐसा होते ही हम तुम सब को मार देंगे.....ये जो रिमोट तू मेरे हाथ मे देख रहा है ना ये इस जगह को उड़ाने के लिए है बॉम्ब के धमाके से....अगर ज़रा भी होशियारी करी तूने तो ये पूरी जगह मैं उड़ा दूँगी....हम तो मरेंगे लेकिन ना तू बचेगा ना तेरा परिवार.....

उसके बाद सुहानी वहाँ पास ही पड़ी टेबल पर कुछ शिशियो मे से एक उठाकर इंजेक्षन मे वो ड्रग भरने लगती है....

सुहानी--वैसे तो इसका ज़्यादा असर 2 दिन तक रहेगा....लेकिन दो दिन तू ज़िंदा रहेगा ही नही तो आगे का जानकर तू क्या करेगा.....

उसके बाद सुहानी मेरी गर्दन मे वो इंजेक्षन गढ़ा देती है....

मेरी आँखो के आगे अंधेरा सा छाने लगता है....ऐसा लग रहा था जैसे किसी रंग बिरंगी किरणों के जाल मे में फँसता जा रहा हूँ.....
 
नीरा अभी भी बेसूध झरने के यहाँ पड़ी थी....नेहा की दी हुई दवा ने उसे फिर से सुला दिया था....जाने वो कब तक वही सोती रही....

डे....1

में कब से बेहोश था इसका तो मुझे अंदाज़ा नही था लेकिन खिड़की से आती सूरज की मध्यम किरणें बता रही थी या तो अभी शाम है या फिर सुबह....

मैने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली अब भी वहाँ वैसा ही हाल था सभी वहाँ बुरी तरह से बँधे हुए थे....मेरी नज़रें भाभी को ढूँढने लगी वो भी मुझे एक कौने मे नेहा बँधी हुई नज़र आ गयी....

मैने उठने की कोशिश करी लेकिन उठ नही पाया....में इस समय एक कुर्सी पर रस्सी से बँधा हुआ बैठा था....और अपनी पूरी ताक़त लगाकर भी उस से निकल नही पा रहा था....

तभी किसी के हँसने की आवाज़ मेरे रोंगटे खड़े करती चली गयी.....मेरे सामने ही एक साया अंधेरे मे खड़ा था.....

तभी वो साया हँसते हुए अंधेरे से बाहर निकल कर आ गया.....

उसे देखते ही मेरी आँखे फटी की फटी रह गयी.....अगर कोई मुझ से कहता कि इस शक्श ने मेरे परिवार का ऐसा हाल किया है तो मैं मान ही नही सकता था.....

में--रीएंन्न्ना तूमम्म्म....

रीना--हाँ में स्वीटहार्ट....क्यो झटका लगा मुझे यहाँ देख कर....अब फिर से बेहोश मत हो जाना क्योकि एक झटका और लगने वाला है तुझे....

में--क्यो कर रही हो तुम ऐसा क्या बिगाड़ा है मैने तुम्हारा.....इन लोगो को जाने दो....तुम्हे जितना पैसा चाहिए मैं ला कर दूँगा....

पैसा नही चाहिए....बदला चाहिए हमे....

मेरे पीछे से आई उस सर्द आवाज़ को मैं लाखो की भीड़ मे भी पहचान सकता था....ये आवाज़ तो सुहानी की थी....

सुहानी--क्यो क्या हुआ....सिर घूम गया मुझे देख कर....मेरा रुद्लु बच्चा जो हर समय बस रोता ही रहता था....आज अपनी ख़ास दोस्त के सामने बेबस बैठा है.....कोई सलाह चाहिए.....कुछ काम आ सकती हूँ मैं सर आपके.....ऊऊऊ सर नही सर नही....जय...

में--ये क्या तमाशा है सुहानी....तुम्हे दिल से मैने अपना एक सच्चा दोस्त माना था....लेकिन तुम एक डायन निकलोगी ऐसा मैने कभी सोचा नही था....

सुहानी--हा हा हा....दोस्त तो मैं भी तुन्हे मानने लगी थी और तब तक मनती थी जब तक तेरे बाप के मरने के बाद तेरे घर नही आई थी.....तेरे बाप की वजह से ही तेरा पूरा परिवार तेरे सामने नंगा लटका हुआ है....

सुहानी के मुँह से कहा गया हर एक शब्द मेरे कानो मे बॉम्ब के धमाको से कम नही था...

में--क्या बिगाड़ा है मेरे पापा ने तुम्हारा किस बात का बदला ले रही हो तुम....क्यो ख़तम करना चाहती हो मेरे परिवार को....

सुहानी--तुझे कैसा लगेगा जब तेरी माँ को तेरी ही आँखो के सामने कोई चोदे.....कैसा लगेगा बता मुझे....

में--जान ले लूँगा मैं ऐसा करने वाले की....

सुहानी--बस यही.....बस यही सुनना चाहती थी में तेरे मुँह से....तेरा बाप मेरी आँखो के सामने मेरी माँ को चोदता था....हम दोनो बहने अपनी आँखो से वो नज़ारा हर रोज देखा करती थी....मेरा पापा तेरे बाप की वजह से शराब मे इतना डूब गया कि मेरे छोटे भाई के साथ आक्सिडेंट मे मर गया....भाई मर गया बाप मर गया....माँ किसी रंडी की तरह आज भी पैसो के लिए चुदवा रही है....लेकिन मैं तुझे मारूँगी नही....तुम सब का एक अनोखा इलाज हमने सोच रखा है....
 
नेहा--इस ज़हर का कोई इलाज नही है जब तक जय सेक्स करेगा वो ठीक रहेगा....अगर ज़्यादा देर तक उसने सेक्स नही किया तो उसके दिल की धड़कन इतनी बढ़ जाएगी कि हार्ट फैल भी हो सकता है....

मम्मी--फिर तू ही बता हमे क्या करना चाहिए....

नेहा--दो दिन तक लगातार सेक्स करना किसी एक लड़की या औरत के बस की बात नही है....जय का पानी छूटेगा लेकिन वो लगातार फिर भी करता रहेगा....

शमा--मम्मी भैया ने हम सब के लिए क्या क्या नही किया....क्या हम उन्हे बचाने के लिए अपना जिस्म भी नही दे सकते उन्हे....

शमा की इस बात पर सभी ने सहमति जताई और सभी बारी बारी लगातार दो दिन तक मेरा साथ देती रही.....

3र्ड डे

सवेरे सवेरे....

एक खुशनुमा सुबह छाई थी सुबह की ठंडी ठंडी हवा मेरे बदन को ठंडक पहुचा रही थी....में बड़ी मुश्किल से अपनी आँखे खोल पाया....पूरे बदन मे दर्द हो रहा था मैं खुद को हिला भी नही पा रहा था.....और जब मैने अपने चारो तरफ देखा तो वहाँ मेरे साथ साथ सभी नंगे सो रहे थे.....ये देखते ही एक बार फिर से मैं बेहोशी के आलम मे समाने लगा......

डे 4

जय.....जय....आँखे खोलो....जय....

मैने अपनी आँखे खोली मेरे सामने सभी खड़े थे एक प्यारी सी मुस्कान के साथ....इन सब की मेहनत रंग ले आई थी....मैने कुछ पूछना चाहा तो मम्मी ने मेरे मुँह पर उंगली रख दी.....

मम्मी--कुछ मत बोलना जय.....कुछ भी नही जो हुआ वो हम मे से कोई भूल तो नही सकता लेकिन अपना ज़रूर सकते है अपनी लाइफ को आगे बढ़ाने के लिए.....हम सभी एक दूसरे से प्यार करते है एक परिवार के रूप में....और ये पूरा परिवार हमेशा ऐसे ही प्यार करता रहे इसके लिए खामोशी बहुत ज़रूरी है.....

मम्मी की कही ये बात मुझे उस दिन समझ मे नही आई थी लेकिन आज मैं समझता हूँ.....

दुबई से ऑफीसर का फोन आया था उसने बताया कि पापा और भाई की हत्या एक आतंकवादी आक्सिडेंट थी....

पैसे की कोई कमी नही थी फिर भी पापा के और भाई के लाइफ इन्षुरेन्स से अरबो रुपये मम्मी को और भाभी को मिले....हर महीने बिज़्नेस से भी काफ़ी पैसे आजाते है.....

मुझे बॉस की सीट पर बैठने के लिए काफ़ी बोला गया लेकिन मैने ये शहर छोड़ दिया सुना है आज कल नंदू सब काम संभाल रहा है....अच्छा काम कर रहा है वो पूरी ईमानदारी से....

मैने सुहानी और रीना की माँ के पास भी काफ़ी पैसा भिजवा दिया था एक अच्छी लाइफ जी सके ताकि वो...,

सुहानी और रीना को नेहा ने वही ड्रग दे दिया था उस दिन... जब उन्हे सेक्स नही मिला तो उन्होने खुद को उस शिकारगाह के साथ ब्लास्ट में उड़ा दिया....

मुझ में अभी भी वो ड्रग बाकी था और उसका इलाज मुझे अभी भी मेरा परिवार अपना दूध पिलाकर कर रहा है.....

कुछ बाते इंसान के बस में नही रहती सेक्स भी उनमें से एक है....ड्रग्स या दूसरा नशा जीवन को बर्बाद कर देते है....कहने को मुझे मेरा परिवार का प्यार मिला लेकिन उस ड्रग की वजह से मेरी माँ मेरी बहन अब मुझे दुबारा नही मिल सकती....

ये कहानी समाप्त हो गयी है लेकिन समाप्त होने के साथ साथ मेरे मन में काफ़ी सवाल भी छोड़ गयी है.....

क्या इंसानियत का इतना पतन होना वाजिब है.....क्या सिर्फ़ जिस्म की भूख मिटाने के लिए एक बेटा एक भाई एक बाप एक माँ कैसे अपने रिश्तो पर कालिख पोत सकते है....आए दिन अख़भार मे खबर आती है एक बाप ने अपनी मासूम बेटी का रेप किया....पड़ोसी ने एक माऊं बच्ची का रेप किया एक भाई ने अपनी बहन का रेप किया....घृणा आने लगी है ऐसे समाज से मुझे.....लेकिन में भी इसी समाज का हिस्सा हूँ इसलिए आज के बाद में परिवारिक रिश्तो पर ऐसी कोई कहानी नही लिखूंगा जिसमें इंक्स्ट दुर्भावना या पारिवारिक शोषण हो....

आप सभी का शुक्रिया मैने इस कहानी से काफ़ी कुछ सीखा है उम्मीद है आप सब ने भी कुछ सीखा होगा....सही या ग़लत वो आपको ही चुनना है....

दा एंड
 
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