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Guest
अबकी बोतल सनी पर रुकी और मुझे बताना था, मैं तो खार खाए बैठी थी, मैंने कहा- सनी मेरी सुबह वाली ब्रा पैंटी सेट पहन कर आएगा…
अब बावली खेलने की बारी सनी की थी।
नीता हंसते हंसते लोटपोट हो रही थी… सनी को ब्रा पेंटी पहन कर आना पड़ा… उसे देख कर हम दोनों हंसते हंसते बेड पर ही उछलने लगे।
अब मस्ती के आलम में गेम आगे बढ़ा।
अबकी बोतल नीता पर आई और सनी को बताना था… नीता सनी से रिक्वेस्ट करने लगी- प्लीज मेरी इज्जत बचा लो..
पर अब सनी भी मार खाया था… उसने भी फरमान जारी कर दिया कि नीता भी नाईट ड्रेस में आये वो भी बिना ब्रा पैंटी के…
नीता के सामने अब नाटक का कोई चारा नहीं था, उसे ड्रेस पहननी पड़ी… नीता नाईट ड्रेस में हूर की परी लग रही थी… गोरी चिट्टी वो.. ऊपर से जालीदार ड्रेस जिसमे से झांकते उसके गोल गोल मम्मे… उसकी बिना बालों की चूत भी झलक दिखला रही थी।
सनी का तो लंड पैंटी में तम्बू बन चुका था… मैंने हंसते हुए नीता को सनी का लंड दिखाया।
हम दोनों हंसने लगी, सनी शर्मा गया।
गेम फिर चल पड़ा… अबकी बार बोतल सनी की ओर रुकी और मुझे बताना था, तो मैंने कहा- सनी खड़ा होकर एक झटके में अपनी पैंटी उतरेगा और फिर पहन लेगा।
सनी ने पहले तो नखरे दिखाए और फिर खड़ा हो गया… उसने पहले तो ब्रा उतार फेंकी और फिर उसने अपनी पैंटी भी उतार फेंकी … अब वो बिल्कुल नंगा खड़ा था।
हम हंस रहे थे उसे देखकर… वो अचानक मुझपर झपटा और अगले एक मिनट में उसने जबरदस्ती मेरा टॉप उतार दिया।
अब गेम वासनामय हो गया था।
मुझे भी पागलपन सूझा.. मैंने नीता का टॉप और पैंटी दोनों उतार दी… इसी बीच सनी ने मेरी भी पैंटी नीचे खींच दी… अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।
एक मिनट तो हम तीनों की गर्म सांसें ही कमरे में सुनाई दे रही थीं।
अब बारी मेरी थी शर्म उतारकर गेम आगे बढ़ाने की… मैंने नीता की चूत में अपना मुंह कर दिया और चूसने लगी।
सनी भी पुरानी याद ताज़ा करता हुआ नीता के मम्मों को चूसने लगा।
नीता हांफ रही थी, मैंने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी थी और नीता ने अपने मुंह में सनी का लंड ले लिया था।
मुझे लगा की अब मुझे बीच से हट जाना चाहिए और सनी को नीता को भरपूर चोद सके।
मैं हटी और नीता के होंठों से अपने होंठ मिला दिये, उधर सनी नीचे खिसक कर अपना लंड नीता की चूत में घुसा चुका था।
अब उन दोनों का घमासान चालू था… नीता भी पुराने दिन ताज़ा कर रही थी और सनी भी बिना किसी डर के उसे चोद रहा था।
अचानक नीता ने सनी को नीचे किया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई… पर वो जल्दी ही हांफ गई… सनी का निकल ही नहीं रहा था।
अबके सनी ने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में घुस गया। उसने अपने हाथों से उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिये।
वो बड़ी बेदर्दी से अब नीता को चोद रहा था, एक बार तो उसने नीता के बाल भी खींचे… पर नीता तो मस्त होकर चुदवा रही थी।
सनी ने सारा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया और नीता निढाल होकर पेट के बल लेट गई और सनी भी उसके ऊपर चढ़ा चढ़ा ही लेट गया…
मेरी चूत अभी प्यासी थी, पर मैंने यह सोचा कि चलो आज मैंने नीता पर एक एहसान कर दिया… मुझे क्या मालूम था कि वो दोनों तो इस खेल के पुराने खिलाड़ी थे… आज तो उन्होंने अपने खेल को मेरी मंजूरी का जमा पहनाया।
हम तीनों बहुत खुश थे।
अब बावली खेलने की बारी सनी की थी।
नीता हंसते हंसते लोटपोट हो रही थी… सनी को ब्रा पेंटी पहन कर आना पड़ा… उसे देख कर हम दोनों हंसते हंसते बेड पर ही उछलने लगे।
अब मस्ती के आलम में गेम आगे बढ़ा।
अबकी बोतल नीता पर आई और सनी को बताना था… नीता सनी से रिक्वेस्ट करने लगी- प्लीज मेरी इज्जत बचा लो..
पर अब सनी भी मार खाया था… उसने भी फरमान जारी कर दिया कि नीता भी नाईट ड्रेस में आये वो भी बिना ब्रा पैंटी के…
नीता के सामने अब नाटक का कोई चारा नहीं था, उसे ड्रेस पहननी पड़ी… नीता नाईट ड्रेस में हूर की परी लग रही थी… गोरी चिट्टी वो.. ऊपर से जालीदार ड्रेस जिसमे से झांकते उसके गोल गोल मम्मे… उसकी बिना बालों की चूत भी झलक दिखला रही थी।
सनी का तो लंड पैंटी में तम्बू बन चुका था… मैंने हंसते हुए नीता को सनी का लंड दिखाया।
हम दोनों हंसने लगी, सनी शर्मा गया।
गेम फिर चल पड़ा… अबकी बार बोतल सनी की ओर रुकी और मुझे बताना था, तो मैंने कहा- सनी खड़ा होकर एक झटके में अपनी पैंटी उतरेगा और फिर पहन लेगा।
सनी ने पहले तो नखरे दिखाए और फिर खड़ा हो गया… उसने पहले तो ब्रा उतार फेंकी और फिर उसने अपनी पैंटी भी उतार फेंकी … अब वो बिल्कुल नंगा खड़ा था।
हम हंस रहे थे उसे देखकर… वो अचानक मुझपर झपटा और अगले एक मिनट में उसने जबरदस्ती मेरा टॉप उतार दिया।
अब गेम वासनामय हो गया था।
मुझे भी पागलपन सूझा.. मैंने नीता का टॉप और पैंटी दोनों उतार दी… इसी बीच सनी ने मेरी भी पैंटी नीचे खींच दी… अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।
एक मिनट तो हम तीनों की गर्म सांसें ही कमरे में सुनाई दे रही थीं।
अब बारी मेरी थी शर्म उतारकर गेम आगे बढ़ाने की… मैंने नीता की चूत में अपना मुंह कर दिया और चूसने लगी।
सनी भी पुरानी याद ताज़ा करता हुआ नीता के मम्मों को चूसने लगा।
नीता हांफ रही थी, मैंने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी थी और नीता ने अपने मुंह में सनी का लंड ले लिया था।
मुझे लगा की अब मुझे बीच से हट जाना चाहिए और सनी को नीता को भरपूर चोद सके।
मैं हटी और नीता के होंठों से अपने होंठ मिला दिये, उधर सनी नीचे खिसक कर अपना लंड नीता की चूत में घुसा चुका था।
अब उन दोनों का घमासान चालू था… नीता भी पुराने दिन ताज़ा कर रही थी और सनी भी बिना किसी डर के उसे चोद रहा था।
अचानक नीता ने सनी को नीचे किया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई… पर वो जल्दी ही हांफ गई… सनी का निकल ही नहीं रहा था।
अबके सनी ने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में घुस गया। उसने अपने हाथों से उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिये।
वो बड़ी बेदर्दी से अब नीता को चोद रहा था, एक बार तो उसने नीता के बाल भी खींचे… पर नीता तो मस्त होकर चुदवा रही थी।
सनी ने सारा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया और नीता निढाल होकर पेट के बल लेट गई और सनी भी उसके ऊपर चढ़ा चढ़ा ही लेट गया…
मेरी चूत अभी प्यासी थी, पर मैंने यह सोचा कि चलो आज मैंने नीता पर एक एहसान कर दिया… मुझे क्या मालूम था कि वो दोनों तो इस खेल के पुराने खिलाड़ी थे… आज तो उन्होंने अपने खेल को मेरी मंजूरी का जमा पहनाया।
हम तीनों बहुत खुश थे।