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पडोसन को गर्भवती किया

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सभी पाठकगण को मेरा नमस्कार। मै अजय दिल्ली का रहनेवाला हूं। आज मै आपको अपने पडोसन की कहानी बताने जा रहा हूं, जिसने मुझसे चुदवाकर बच्चा पैदा किया। हमारे घर मे मै, मेरी मां, और पापा रहते है। माँ हाउसवाइफ है, और पापा सरकारी कर्मचारी है। मैने अपना कॉलेज खत्म किया और नौकरी ढूंढने में लगा हुआ था। तब तक हमारे बगल वाले घर मे कोई नही रहता था। घर के मालिक ज्यादा तर बाहर ही रहते थे, तो वो घर खाली ही पडा था। कुछ दिन पहले ही वहां एक नव-विवाहित जोडी रहने के लिए आई।

दो दिन बाद उन्हें हमारे घर मे नाश्ते के लिए आमंत्रित किया गया। भैया का नाम था विलास, और वो यहां किसी स्कूल में टीचर थे।

भाभी का नाम शालिनी था, वो हाउसवाइफ थी। तो दिनभर भाभी घर मे अकेले ही होती थी, कभी कभी दोपहर में या शाम को मेरी माँ से बात करने के लिए हमारे घर पर भी आ जाती थी।

आजकल मै भी घर पे ही रहकर अपने लिए नौकरी खोज रहा था। भाभी ने कॉलेज तक कि पढाई की हुई थी, लेकिन उसके बाद उन्होंने हाउसवाइफ बनना पसंद किया। तो इसी वजह से भाभी को नौकरी के बारे में पता था। एक दिन मै ऐसे ही अपने घर मे बैठा अपने लैपटॉप पर ऑनलाइन नौकरी खोज रहा था, और मां कहीं बाहर गई हुई थी। तभी शालिनी भाभी हमारे घर आई और मुझसे मां के बारे में पूछने लगी।

तो मैने उनसे कहा, "मां बस आती ही होगी, आप बैठिए तब तक।"

तो उसने मुझसे कहा, "क्या मै तुम्हे इतनी बडी लगती हूं, जो तुम मुझे आप बुला रहे हो? घरवालों ने मेरी शादी जल्दी करा दी वरना मै भी तुम्हारी उम्र की ही हूं।"

पडोसन भाभी की इस बात पर मैने उनसे कहा, "तो आप ही बताइए, मै आपको क्या कहकर बुलाऊं?"

इस पर उन्होंने मेरे पास आते हुए कहा, "तुम्हारी कोई गर्लफ़्रेंड है?"

तो मैंने ना में सर हिलाकर उनकी तरफ देखा। फिर भाभी बोलने लगी, "तभी तुम ऐसे हो। तुम्हे तो बहुत कुछ सिखाना पडेगा।"

मैने भी भाभी से कह दिया, "तो सीखा दो न भाभी, किसका इंतजार कर रही हो?"

तो भाभी मेरे एकदम करीब आकर बोली, "थोडा इंतजार कर लो मेरे राजकुमार, सही समय आने पर सब सीखा दुंगी।"

यह कहते हुए भाभी ने मेरे चेहरे पर से अपना हाथ फेर लिया। और फिर मेरे पास ही मुझसे सटकर बैठ गई। भाभी के इतना पास बैठते ही मेरे पैंट में हलचल होने लगी थी। पहली बार कोई स्त्री मुझसे इतना सटकर बैठी थी, और ऐसी बातें कर रही थी। मैने भी हिम्मत करते हुए अपना एक हाथ भाभी की जांघ पर रख दिया। भाभी ने इस पर सिर्फ मेरी तरफ देखा और एक हल्की सी मुस्कान दे दी। भाभी की तरफ से हरा सिग्नल मिलते ही मेरी हिम्मत थोडी बढ गई, और अब मै अपने हाथ से भाभी की जांघ को सहला रहा था।

भाभी भी कुछ कम नही थी, वो अभी बस मुझे देखे जा रही थी। थोडी देर में ही मां के आने की आवाज से भाभी मुझसे थोडा दूर हटकर बैठ गई।

मां के घर मे आते ही भाभी उनसे बातें करने लगी। अब मेरा मन बावरा बनाकर भाभी मेरी मां के साथ अपनी अपनी बातों में लगी हुई थी। अब मेरा ध्यान भाभी की तरफ ही था, मै बस भाभी के मेरी तरफ देखने का इंतजार करने लगा। तभी भाभी अचानक मेरी तरफ मूड गई, और मुझे देखने लगी। तो मैने भी मौका देखते ही भाभी की तरफ देखकर आंख मार दी। भाभी को शायद मेरी तरफ से यह उम्मीद नही थी, तो वो थोडा चौंक गई। फिर थोडी देर बाद भाभी अपने घर चली गई। मै बस भाभी को याद किए जा रहा था, और अब अपने मन मे ही उनको चोदने के सपने सजाने लगा था।

उस रात मैने भाभी को याद करके दो बार मुठ भी मारी, लेकिन यह लंड था कि, मानने को तैयार ही नही था। मै अब भाभी के पास जाने के बहाने ढूंढने लगा था। अगले ही दिन दोपहर में मुझे एक अनजान नंबर से कॉल आया, मैने जैसे ही फोन उठाया, उधर से भाभी की कोमल सी आवाज मेरे कानों में पडी। मुझे तो अपने आप पर भरोसा ही नही हो रहा था, कि भाभी ने मुझे फोन किया है। तब से भाभी और मेरे बीच अब फोन पर बातें होने लगी थी।

जब भी भाभी घर पर अकेली होती तो मुझे फोन कर लेती थी। अब धीरे धीरे हमारी बातें नॉर्मल से मुडकर सेक्स की तरफ बढती जा रही थी। लेकिन जब भी सेक्स करने की कोई भी बात हो तो भाभी फोन काट देती थी।

कुछ दिन सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, दिन में हमारी फोन पर मस्ती भरी बातें होती रहती। रात में भाभी अपने पती से मस्त होकर चुदवाती, और अगले दिन मुझे अपनी चुदाई की कहानी सुनाती। तो मै भी भाभी से कह देता, एक मौका हमे भी देकर देखो, फिर भूल नही पाओगी। भाभी मेरी बातें मजाक में ले लेती, और उनको लगता था कि, मै इतनी हिम्मत नही करूंगा, कि उनके साथ कुछ उल्टा पुल्टा कर दूं। इसी वजह से भाभी भी पूरी तरह से मस्त होकर फोन पर मुझसे बातें करती थी, और खुद के साथ साथ मुझे भी मजे दे देती थी।

एक दिन मेरी मां के मायके में किसीका देहांत हो गया, और सुबह सुबह हमारे घर मे फोन आया। तो मां को उधर जाना पडा, और मां के साथ पापा भी चल दिए। अब दिन भर पूरे घर मे मै अकेला ही था, तो अब मबस भाभी के फोन का इंतजार करने लगा था।

मैने सोच लिया था कि, भाभी को पता नही होगा, मां आज घर पर नही है। तो मै उनको आज अपने घर पर बुलाकर बात थोडा आगे बढाने की सोच रहा था। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद ग्यारह बजे के आसपास भाभी का फोन आ ही गया। तो मैने भाभी को बोला, तुम्हें मेरी मां बुला रही थी। जरा जल्दी आइए, कुछ अर्जेंट काम था।

मां और पापा सुबह घर से बहुत जल्दबाजी में निकले थे, तो मां को समय ही नही मिला किसी से बात करने का। थोडी ही देर में भाभी मेरे घर मे थी। घर मे घुसाते ही भाभी सीधे किचन की ओर जाने लगी और मैने आगे होकर अपने घर का दरवाजा बंद कर दिया। जब किचन में भाभी को मां नही दिखी, तो उन्होंने मुझसे पूछा। मैने उनको बोल दिया, कि मां तो आज सुबह ही अपने मायके चली गई है। तो वो मेरी तरफ बढते हुए मुझसे पूछने लगी कि, "मां नही है, तो मुझे क्यों बुलाया, क्या इरादा है?"

मैने भी उनसे सीधे कह दिया, "मेरे इरादे तो बिलकुल साफ है, और मुझे बस आपके हां की जरूरत है।"

तो भाभी बिना कुछ कहे मेरे पास आकर बैठ गई, और मेरे हाथ को अपने हाथ मे लेकर मुझसे पूछने लगी। हां बोलूंगी तो क्या करोगे। तो मैने उनसे कहा, "मै भला क्या कर सकता हुं। आप ही मुझे कुछ सिखाने की बात कर रही थी,तो सोचा कि आज सिख लूं।"

भाभी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। तो मैने भी अपना एक हाथ भाभी की जांघो पर रख दिया और उन्हें धीरे धीरे सहलाने लगा। तो भाभी मुझसे बोलने लगी, अब पूरा दिन यही करते रहोगे या आगे बढकर कुछ और भी करोगे। भाभी की तरफ से इतना खुलकर न्यौता मिलने से मेरी हिम्मत तो आसमान की बुलंदियों को छूने लगी थी। मैने भाभी को खडी करके अपने पीछे आने को कहा,और उन्हें लेकर अपने बेडरूम में आ गया।

बेडरूम में आते ही मैने भाभी के कपडे उतारने शुरू कर दिए। तो भाभी ने कहा, "इतनी जल्दी में यह सब क्यों कर रहे हो? मै कहीं भागे नही जा रही।"

लेकिन तब तक मैने भाभी की साड़ी उतार दी थी, और अब भाभी ब्लाउज में थी। भाभी का नंगा पेट देखते ही मैने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनके पेट को चूमने लगा। धीरे धीरे मै उनके पेट को चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहा था, और तभी मेरा एक हाथ भाभी के चेहरे पर घूम रहा था, तो दूसरा हाथ भाभी की चूचियों पर घूम रहा था। भाभी ने भी अब आगे बढकर मेरी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया।

तो मैने खुद ही उठकर अपने सारे कपडे निकाल दिए, और पूरा नंगा हो गया। यह मेरा पहली बार था, जब मै किसी को चोदने जा रहा हूँ। अपने जीवन मे पहली बार किसी लड़की के सामने मै नंगा हुआ था।

पहली बार होने की वजह से मै कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था, तो मैने जल्दी ही भाभी को भी पूरी नंगी कर दिया। भाभी का ब्लाउज उतारते ही भाभी के आम जो ब्रा में कैद थे, जो उपर से उछलकर निकलने को तैयार लग रहे थे। उनको मैने अपने हथेलियों में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा। भाभी के मुंह से अब सिसकारियां निकलने लगी थी, और भाभी की चुत भी अब गीली होने लगी थी।थोडी ही देर में मैने भाभी की ब्रा कप को स्तनों से ऊपर उठाकर उनके आमों को अपने मुंह मे भर लिया।

मेरे ऐसा करते ही भाभी ने अपना हाथ पीछे ले जाकर उनका ब्रा का हुक खोल दिया। और फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरा लंड अपने हाथों में थाम लिया।
मैने थोडी देर भाभी के दोनों स्तनों को चूसने और मसलने के बाद, भाभी के शरीर को चूमते हुए नीचे उनकी पैंटी पर आ गया। फिर मैंने एक ही झटके में खींचकर भाभी की पैंटी को भाभी के पैरों से अलग कर दिया। अब मेरे बिस्तर पर भाभी और मै दोनों ही मादरजात नंगे थे।

भाभी की पैंटी निकालते ही उनकी गुलाबी चुत मेरे सामने उभरकर आ गई। भाभी की चुत पर मैने हाथ लगाकर देखा, तो उनकी चुत थोडी गीली थी। भाभी की चुत देखने के बाद, मै अपने आप को उसे चूमने से रोक नही पाया। और एक बार चूमने के बाद, मै उसे चूसने लग गया।

थोडी ही देर में हम 69 की पोजिशन में आ गए, और मै भाभी को चुत चाटकर सन्तुष्ट करने लगा तो भाभी मेरा लंड चूसते हुए मुझे। थोडी देर बाद मै, उठा और भाभी को बिस्तर पर सीधा उठाकर रख दिया। अब मैने भाभी के दोनों पैर फैला दिए और खुद उनके बीच मे आ गया। भाभी की चुत के मुहाने पर मैने लंड रखा और धक्का मारते ही लंड फिसलकर बाहर निकल गया। तो भाभी ने मेरा लंड अपने हाथ मे लेकर उन्होंने खुद उसे अपनी चुत पर रख लिया, और अब मुझसे धक्का लगाने को कहा। अब की बार लंड सटाक से अंदर चला गया।

उस दिन मैंने भाभी को कुल तीन बार चोदा, और हर बार भाभी ने मेरा वीर्य अपनी चुत में भर लिया। उनके पती उन्हें चोदकर संतुष्ट तो करते है, लेकिन वो कभी बाप नही बन पाएंगे। तो भाभी के पास कोई और चारा नही था, तो उन्होंने इस काम के लिए मुझे चुना। उस दिन के बाद भी मै भाभी को कई दिनों तक चोदता रहा, और तब जाकर भाभी ने गर्भधारण कर लिया और नौ महीनों के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दे दिया।

आपको यह कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताइए। धन्यवाद।
 
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