दीदी बोली , " चलो मार्केट चलते हैं , मुझे कुछ शॉपिंग करनी है और खाना भी वहीँ खा लेंगे ।"
मैं : " ठीक है चलो ।"
दीदी बोली , “ मैं तैयार होकर आती हूँ ।”
मैं दीदी को एक शॉपिंग मॉल में ले गया और दीदी ने वो सब सामान खरीदा जो एक दुल्हन अपनी शादी के लिए खरीदती है । और कुछ सामान मुझसे भी खरीदवाया ।
रेस्टोरेंट में खाना खाकर जब हम घर वापस आये तो रात के 10 बज चुके थे ।
मैंने घर में घुसते ही दरवाज़ा बंद किया और दीदी का सामान उनके रूम में रखते हुए बोला , ” स्नेहा जल्दी से तैयार हो जाओ , तब तक मैं कुछ और काम निपटाता हूँ ।”
दीदी ने हँसते हुए मुझे देखा और बोली , “सुहागरात के लिये बड़े उतावले लग रहे हो । सब्र करो , सब्र का फल मीठा होता है । ”
मैं बोला , “ स्नेहा कब से सब्र ही तो कर रहा हूँ । कितनी मुद्दत के बाद तो ये दिन आया है । ”
दीदी बोली , “ ठीक है पर मुझे अभी कम से कम 1 घंटा लगेगा तैयार होने में । ”
मैं बोला . “ हम्म्म …ठीक है तैयार हो जाओ तो मुझे आवाज़ लगा लेना । ”
मैंने अपना रूम ठीक किया और बेड पर , मार्केट से लाये हुए ढेर सारे गुलाबों की पंखुड़ियों को बिछा दिया । फिर रूम फ्रेशनर छिड़का और नहाने चला गया । नहाते हुए ही मैंने रेजर से अपनी झाँटों को साफ़ किया । अपनी सुहागरात की कल्पना से ही मेरा लंड खड़ा हो गया था ।
मैं भी ठीक किसी दूल्हे की तरह ही तैयार हुआ । फिर मैं ड्राइंग रूम में गया और एक बड़ी सी परात में कुछ लकड़ियां और हवन सामग्री डाल दी ।
तभी दीदी की आवाज़ आयी , “ मैं तैयार हो गयी हूँ । बाहर आ जाऊं क्या ? ”
मैंने कहा , “ अभी एक मिनट रुको ।”
और भाग कर अपने रूम में गया और अपने सर पर सेहरा रख के दीदी के रूम की तरफ गया ।
मैंने रूम के दरवाज़े को खोला तो सामने दीदी बेड पर दुल्हन के लिबास में बैठी थी । दुल्हन के उस लिबास में कितनी सुन्दर लग रही थी वो । मैं सब कुछ भूलकर , मंत्रमुग्ध होकर उसे ही देखता रहा ।
फिर दीदी ने ही मेरा ध्यान भांग किया , “ अब वहीँ खड़े रहोगे क्या ? ”
मुझे जैसे होश आया , मैं दीदी के पास गया और बोला , “ wow…स्नेहा ! तुमसे खूबसूरत दुल्हन मैंने सपने में भी नहीं देखी ।”
दीदी हंसी और बोली , “ तुम भी कुछ कम स्मार्ट नहीं लग रहे हो ।”
मैंने अपनी जेब में हाथ डाल कर अंगूठी निकाली और दीदी के बराबर में बैठ गया । फिर दीदी का हाथ अपने हाथ में लिया और उनकी ऊँगली में अंगूठी पहना दी । दीदी ने भी अपना पर्स खोल कर अंगूठी निकाली और मेरी ऊँगली में पहना दी । मैंने उनके गाल पर चुम्बन लिया , दीदी ने भी मेरे गाल पर चुम्बन लिया ।
फिर मैंने दीदी का हाथ पकड़ा और ड्राइंग रूम में ले आया ।
मैंने उनके गले में फूलों की माला डाली और दीदी ने मेरे गले में वरमाला डाली ।
फिर मैंने लकड़ियों को जलाकर हवन की आग के ऊपर अपना हाथ रखा और दीदी की आँखों में देखते हुए कहा , “ स्नेहा !! मैं अग्नि को साक्षी मान कर तुम्हें अपनी पत्नी स्वीकार करता हूँ और ये वचन देता हूँ कि जीवन के हर सुख दुःख में तुम्हारे साथ रहूँगा ।”
दीदी ने भी ऐसे ही प्रण लिया , “ मैं अग्नि को साक्षी मान कर तुम्हें अपना पति स्वीकार करती हूँ और वचन देती हूँ कि तुम्हारी सेवा ही मेरा परम धर्म रहेगा ।”
उसके बाद हमने फेरे लिये । फिर मैं दीदी को अपनी गोद में उठा कर अपने कमरे में ले गया ।
दीदी के जिस्म से भीनी भीनी खुश्बू आ रही थी और उसका मखमली बदन मुझे उत्तेजित कर रहा था । मैंने उन्हें नीचे उतारा और कस कर आलिंगन में भर लिया । और उनके चेहरे को चूमने लगा , दीदी भी मुझे चूमने लगी । कुछ देर तक ऐसे ही चूमने के बाद दीदी मुझसे अलग हुई और बेड के बीचोंबीच जाकर घूँघट डालकर बैठ गयी ।
मैं दीदी के सामने जाकर घुटनों के बल बैठ गया । फिर मैंने दोनों हाथों से दीदी का घूँघट उठाया और बोला, “ हाय ! स्वीटी ! कहीं नज़र न लग जाए मेरी ।”
दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा , “ लाओ मेरा गिफ्ट निकालो ।”
मेरी कुछ समझ नहीं आया कि मैं दीदी को क्या दूँ । तो मैंने अपने गले से सोने की चेन निकाल कर दीदी के गले में पहना दी और बोला, “ सॉरी डियर , अभी इस से काम चला लो । कल मैं तुम्हें मंगलसूत्र बनवा दूंगा । ”
दीदी ने हँसते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और अपनी आँखें बंद कर ली ।
मैंने होंठों को होंठों से छुआते हुए , बड़े हलके हलके से दीदी के होंठों की पंखुड़ियां को अपने होंठों के बीच फंसाया और बड़े ही प्यार से दीदी के नरम नरम नाजुक होंठ को चूम लिया । दीदी के शरीर में झुरझुरी सी महसूस होने लगी ।
फिर मैंने दीदी को बेड के पास खड़ा कर दिया । अब मैं दीदी के होंठों को चूस भी रहा था और अपने हाथों से दीदी की साड़ी भी खोलता जा रहा था । कुछ ही मिनटों में दीदी की साड़ी फर्श पर पड़ी थी और दीदी सिर्फ एक ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी ।
फिर मैंने अपने भी कपड़े उतार फेंके और मेरे शरीर पर मात्र एक अंडरवियर रह गया था । जिसमें मेरा लंड अपने पूरे शबाब पर था और झटके मार रहा था । दीदी की नज़र मेरे झटके मारते लंड पर पड़ी तो दीदी ने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को अंडरवियर से मुक्त करा दिया । लंड फनफनाता हुआ बाहर आया और झटके मारने लगा । फिर दीदी ने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को अपने हाथ की मुट्ठी में भर लिया और बड़े ही प्यार से आगे पीछे करने लगी ।
मैं आँखें बंद कर के दीदी के स्पर्श का आनंद लेने लगा । तभी दीदी ने लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में भर लिया । दीदी के नाज़ुक होंठ और जीभ का स्पर्श जैसे ही सुपाड़े पर हुआ लंड ने एक ज़ोरदार झटका खाया।
और मेरे मुंह से आनंद भरी सिसकारी फूट पड़ी … “aaaaaaaahhhhhhhhhhhh …ooohhh …”.
दीदी ने लंड को अपने मुंह में आगे पीछे करना शुरू किया तो मैंने अपने हाथों में दीदी के बालों को पकड़ लिया । दीदी बड़े प्यार से मेरे लंड को चूस रही थी और मैं दीदी के ब्लाउज कट में से झांकती उनकी नंगी पीठ को सहलाने लग गया और सहलाते सहलाते मैंने ब्लाउज और ब्रा दोनों के हुक खोल दिये ।दीदी ने एक पल के लिए लंड को मुंह से बाहर निकला और अपना ब्लाउज और ब्रा को कंधे से अलग करने के बाद फिर से लंड को मुंह में भर लिया । दीदी मेरा आधे से ज़्यादा लंड अपने मुंह में ले चुकी थी और बड़ी तत्परता और मज़े लेकर चूस रही थी ।
कुछ देर लंड को और चूसने के बाद मैंने ही दीदी को खुद से अलग किया नहीं तो मैं शायद दीदी के मुंह में ही झड़ जाता जबकि मुझे तो अपना सारा पानी दीदी की चूत के लिए बचा के रखना था ।
फिर मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल कर पेटीकोट उनकी टांगों से निकाल कर फर्श पर फेंक दिया । दीदी ने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी तो जैसे ही मेरी नज़र दीदी की चूत पर पड़ी मेरे मुंह से जैसे लार सी टपक पड़ी । दीदी की चूत पर बालों का नामो निशान तक न था और कमरे की रोशनी में दीदी की चूत शाइन कर रही थी जैसे उसपर कोई चिकना पदार्थ लगाया गया हो ।
मैंने पहले अपनी नाक दीदी की चूत पर रगड़ कर उसकी महक का जायज़ा लिया । दीदी की चूत सी वैसलीन और चूत की मिली जुली महक आ रही थी जो मुझे और भी पागल कर रही थी ।
अब हम दोनों के शरीर पर कोई भी कपडा नहीं था । मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और मैं दीदी की बगल में जाकर लेट गया । दीदी आँखें बंद किये पड़ी थी । मैंने दीदी का चेहरा अपनी और घुमाया और दीदी के होंठों पर अपने होंठ रख दिये । मैंने अपने हाथों को दीदी की चिकनी पीठ पर घूमना शुरू कर दिया । हमारी साँसें तेज होने लगी । एक दूसरे के होंठों का रसपान शुरू हो गया था । दीदी के चूचियां मेरे सीने में गड़ी हुई थी । हम दोनों की टाँगें एक दूसरे की टांगों में उलझी हुई थी और लंड चूत के आस पास पूरी तरह से अकड़ा हुआ झटके मार रहा था ।
हम दोनों होंठों की चुसाई करने के बाद अब एक दूसरे की जीभ चाटने लगे थे । बारी बारी एक दूसरे के मुँह के अंदर अपनी जीभ डाल कर मुँह के अंदर के हर भाग को चूम रहे थे । रह रह कर हम दोनों एक दूसरे को भींच रहे थे और कोशिश कर रहे थे कि जिस्म जो एक दूसरे से पूरी तरह से सटे हुए थे उनको और ज्यादा आपस में सटा दें ।
दीदी की पीठ का हल्का मखमली एहसास जो कभी कभी नितम्बों तक पहुँच जाता था वह मुझे मदहोशी की चरम सीमा तक ले जा रहा था । फिर मैंने दीदी के गले पर और कान के नीचे चूमना और चाटना चालू कर दिया । दीदी सिसकारियां भरने लगी और उसका शरीर एक नागिन की तरह अकड़ने और लोट पोट होने लगा जैसे ही कान का निचला हिस्सा मेरे मुँह में कैद हुआ तो दीदी के मुँह से एक हलकी सी आह्हः निकल गयी ।
फिर चूचियों को चूसते हुए और कुछ देर तक चूची की दोनों पहाड़ियों का रसपान करते हुए मैं नाभि तक पहुँच गया । नाभि पर पप्पियाँ ले कर मैंने जीभ को नाभि में घुमाना शुरू किया तो दीदी की सिसकारियों से कमरा गूंज उठा , ” aaaaaahhhh……..aaaaaaaaa…..aaaaaasssssssshhhh”।
फिर कमर के दोनों और जैसे ही चूमना चालू किया तो दीदी लेटे लेटे ही किसी नागिन की तरह रेंगने लगी । जैसे ही जीभ का स्पर्श नाभि के नीचे साइड में कमर के पास हुआ तो दीदी उसे बर्दाश्त नहीं कर पायी और मेरे सर के बालों को जोर से पकड़ कर भींच लिया जैसे मानों न चाहते हुए भी सर को हटाना चाहती हो ।
लेकिन दीदी को जो मजा मिल रहा था उसे महरूम होना उसके बस के बाहर था इसीलिए दीदी ने खुद ही फिर मेरे सर को वापस वही रख दिया । फिर मैंने नीचे सरक कर दीदी की चूत को अपने मुंह में भर लिया और दीदी ने अपनी दोनों टांगें उठा कर मेरी कमर के ऊपर एक फंदा बना दिया और अपने दोनों पावों को जोड़ लिया ।
अब दीदी की चूत इतनी गीली हो चुकी थी की रस की कुछ बूंदें बाहर चूत के लबों पर दिखाई देने लगी थी । मेरे होंठ जैसे ही फूली हुई दोनों गुलाबी पंखुड़ियों पर पड़े कि दीदी के मुँह से “aaaaaaouuuuuchhhhhh…” निकल गयी ।
दीदी की चूत के दाने पर जैसे ही जीभ टकरायी , ” aaahhh……..मैं मर जाऊँगी …..ishhhhhhhhhhhhhh….ahhhhhhhhhhh…प्लीज ….”.
मैंने जैसे ही दाने को दांतों के बीच भींचते हुए बड़े प्रेम से हल्का सा काटा तो दीदी के सब्र का बांध टूट गया ।
उसने बड़े कामुक अंदाज़ में कहा , " समू ! अब और सहन नहीं होता ।"
अब मैं दीदी के बदन के ऊपर आ गया । दीदी ने हाथ बढ़ा कर मेरे लंड को ऊपर से लेकर नीचे जड़ तक सहलाया और अपनी टांगें फैला कर अपनी आँखें बंद कर ली । मैंने बिना कोई देरी किये लंड को दीदी की पानी छोड़ती चूत के छेद पर भिड़ा दिया । दीदी ने आँखें बंद किये हुए ही अपने सीधे हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के ऊपर 3-4 बार मसला । फिर खुद ही चूत के छेद पर टिका कर अपना हाथ मेरे हिप्स पर रखते हुए मुझे धक्का मारने का इशारा किया ।
और मैंने धीरे से लंड को अंदर पेल दिया । दीदी ने सिसकारी भरी , “ aaaaaaaaahh…..”
मैंने थोड़ा और लंड पर ज़ोर लगाया तो आधे से ज़्यादा लंड दीदी की चूत में समां गया ।
दीदी ने मेरे हिप्स को कस कर अपनी मुट्ठी में भींच लिया और आहें भरने लगी । “aaaaaaaaaaaa…….aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh…aaassshh”
दीदी की चूत इतनी गीली थी कि लंड अपने आप ही अंदर फिसलता चला जा रहा था । थोड़ी ही देर में पूरा लंड दीदी की चूत में समां गया । दीदी मदहोशी में सीत्कार रही थी ।
फिर मैंने धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और दीदी ने अपने पैर मेरे हिप्स के इर्द गिर्द लपेट दिए । मैंने धक्के लगाने की स्पीड बढ़ाई तो दीदी ने अपने दोनों हाथों के नाख़ून मेरी पीठ में गाड़ दिये , मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी ।
दीदी भी मेरे हर धक्के पर अपने नितम्बों को उछाल कर मेरा साथ देने लगी और कामुकता भरी आवाज़ें मुंह से निकालने लगी , “ आआआह्ह्ह्ह
aaaaasssssssshhhh…..aaaaayysssshhh….aaaa……..aaaa…aaaaahhh”
मैंने लंड को अपने सुपाड़े तक बाहर खींचा और एक ज़ोरदार धक्का लगाया तो दीदी के मुंह से चीख सी निकल गयी , “ aaaaiiiiiiii……”
और दीदी मेरे कान में बुदबुदाई , “क क क्या …करताआआ ….है …स्स्स्समूउऊउउउउ ….आराम से ”
मैंने धक्के लगते हुए दीदी के कान में पूछा , “कक्कैसा …लगगगग रहा है आआ ….….”
दीदी ने सिसकारते हुए जवाब दिया , “आह हहहहह ..बब बहहुत … अच्छाआ आ …स्वीटू …”
फिर मैं जोश में आ गया और धक्के पर धक्के लगाने लगा और हर धक्के पर दीदी की चूत से फच फच की आवाज़ें आने लगी ।
मैंने एक नज़र अपने लंड पर डाली तो देखा कि लंड दीदी के चूतरस से पूरी तरह से सना हुआ था । मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और लंड दीदी की चूत में किसी पिस्टन की तरह अंदर बाहर होने लगा । कुछ देर तक धक्के लगाने के बाद मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिये । दीदी ने भी मुझे कस के अपनी बाँहों में जकड़ लिया और अपने पैरों की ग्रिप को मेरे हिप्स पर और टाइट कर दिया । मैं समझ गया कि दीदी झड़ने के कगार पर हैं । तभी मेरे लंड ने ढेर सारा पानी दीदी की चूत में छोड़ा तो दीदी की साँसें और सिसकारियाँ एक साथ मिल कर कमरे में गूंजने लगी .. “aaaaaahhhhhh….huuuuuuun…..aaaaassssssssshhhhh…huuuuuunnnn…….aaaaaaa….huuuu”
दीदी भी मेरे साथ ही झड़ चुकी थी और मैं दीदी के ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा और तेज़ तेज़ साँसें लेने लगा । दीदी भी आँखें बंद किये पड़ी थी और अपनी साँसों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी ।
कुछ पल बाद मैं उठ कर दीदी के बगल में लेट गया । फिर मैंने दीदी को अपनी तरफ घुमाकर दीदी के होंठों और गालों पर चुम्बन लिया और धीरे से कहा , " स्नेहा , शादी की बहुत बहुत बधाई ।"
दीदी ने मेरे होंठों पर अपने नाजुक होंठ रखते हुए कहा , " तुम्हें भी शादी की बधाई , समीर ।"
THE END