मुझे देसी सेक्स करने का टाईम ही नही मिला और समाज सेवा करते करते एक दौर ऐसा आ गया कि रोज ही ट्रेनिंग, वर्कशाप, लेक्चर, और कार्यक्रम आयोजित करते करते महिला सहभागियो की बहुतायत में हमें इतना सूकून मिलने लगा कि हम इस माहौल के आदी हो गए। चारो तरफ़ यौवन का अहसास आपको हमेशा ही अपने अंदर एक सुलगती आग का...
कहानी के पहले भाग में मैने बताया कि कैसे मेरी देसी सेक्स की आग के चलते समाजसेवा से जुड़े हम दो समाजसेवी सेक्स की आंतरिक आग से होटल के कमरे तक खिचे आए और एक दूसरे की बांहों में ढेर हो गए। आगे की कहानी ...मैने अपना पैंट उतार दिया और बची चड्ढी उसने नीचे बैठ कर खुद ही खोल दी। अब मैं खड़ा था और वह...